कानपुर: उत्तर प्रदेश के औद्योगिक नगर कानपुर के हनुमंत विहार थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बसंत विहार इलाके में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब एक प्रतिष्ठित परिवार के मुखिया और पीपीएन कॉलेज के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष का शव उनके अपने ही घर के कमरे में खून से लथपथ पाया गया। इस दुखद और हैरान कर देने वाली घटना से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है। मृतक की पहचान 50 वर्षीय आलोक सिंह के रूप में की गई है। पुलिस की प्रारंभिक और फॉरेंसिक जांच में यह बात सामने आई है कि उन्होंने अपनी ही लाइसेंसी डबल बैरल बंदूक से सिर में गोली मारकर आत्महत्या की है।
कमरे का नजारा देख दहल गए परिजन, पुलिस को मौके से नहीं मिला कोई सुसाइड नोट
घटना की जानकारी मिलते ही हनुमंत विहार थाने की पुलिस टीम वरिष्ठ अधिकारियों और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स के साथ तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया और साक्ष्य जुटाए। पुलिस के मुताबिक, कमरे के भीतर हर तरफ खून बिखरा हुआ था और पास ही उनकी लाइसेंसी बंदूक पड़ी थी। गहन तलाशी के बाद भी मौके से कोई सुसाइड नोट या पत्र बरामद नहीं हुआ है, जिससे आत्मघाती कदम उठाने की सटीक वजह का तुरंत पता नहीं चल सका है। पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शव को पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है।
पारिवारिक पृष्ठभूमि: मौरंग मंडी के बड़े कारोबारी थे आलोक, पीपीएन कॉलेज की राजनीति में रहा था बड़ा रसूख
बसंत विहार के रहने वाले मृतक के पिता केशव नाथ सिंह ने रुंधे गले से बताया कि उनका परिवार व्यापारिक क्षेत्र में काफी प्रतिष्ठित है और नौबस्ता मौरंग मंडी में उनका एक बड़ा और सफल ट्रांसपोर्ट का कारोबार है। आलोक सिंह अपने छात्र जीवन में पीपीएन कॉलेज के बेहद लोकप्रिय छात्रसंघ अध्यक्ष रहे थे और क्षेत्र की राजनीति में उनका अच्छा-खासा प्रभाव था। छात्र राजनीति से निकलने के बाद वे पूरी तरह से अपने पारिवारिक व्यवसाय में हाथ बंटा रहे थे और मौरंग मंडी के ट्रांसपोर्ट कामकाज को संभाल रहे थे।
कोरोना काल में बड़े बेटे की मौत का लगा था गहरा सदमा, मानसिक तनाव में था परिवार
स्थानीय लोगों और परिजनों से पूछताछ में यह बात भी निकलकर सामने आई है कि साल 2021 में देशव्यापी कोरोना महामारी (कोविड काल) के दौरान इस हंसते-खेलते परिवार को एक बहुत बड़ा झटका लगा था। उस वक्त आलोक सिंह के बड़े बेटे अजीत सिंह की कोरोना संक्रमण की वजह से असमय मौत हो गई थी। जवान बेटे को खोने का गम आलोक सिंह बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे और तब से वह अक्सर गुमसुम और मानसिक तनाव में रहने लगे थे।
पुलिस अब इस एंगल से भी मामले की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि क्या इसी पुराने पारिवारिक सदमे और अवसाद के चलते उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया, या फिर इसके पीछे कोई और व्यावसायिक या व्यक्तिगत वजह थी। थाना प्रभारी का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और परिजनों के विस्तृत बयानों के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।









