स्वदेशी हथियारों पर खाड़ी देशों का भरोसा बढ़ा, UAE ने दिखाई दिलचस्पी

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नई दिल्ली। भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक घटनाक्रम सामने आ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यूएई ने भारत की बेहद अचूक ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और आधुनिक 'आकाशतीर' (Akashteer) एयर डिफेंस नेटवर्क को खरीदने में गहरी रुचि दिखाई है। दोनों देशों के बीच इस रक्षा सौदे को लेकर बातचीत जारी है, जो यदि सफल होती है तो वैश्विक स्तर पर भारत की सैन्य साख को एक नई ऊंचाई मिलेगी।

ब्रह्मोस और आकाशतीर प्रणालियों की मांग

यूएई ने भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' को अपनी सेना में शामिल करने की इच्छा जताई है। यदि यह डील फाइनल होती है, तो फिलीपींस, आर्मेनिया और मिस्र के बाद यूएई ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला चौथा विदेशी देश बन जाएगा। इसके साथ ही, यूएई ने भारतीय सेना और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित 'आकाशतीर' एयर डिफेंस कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम में भी रुचि दिखाई है। यह प्रणाली हवाई खतरों की निगरानी और जवाबी कार्रवाई को पूरी तरह ऑटोमैटिक तरीके से संचालित करने में सक्षम है। चूँकि ब्रह्मोस एक संयुक्त परियोजना है, इसलिए इसके निर्यात के लिए रूस की मंजूरी जरूरी होगी, लेकिन रूस और यूएई के मधुर संबंधों को देखते हुए इसमें किसी बाधा की आशंका नहीं है।

खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और यूएई की रणनीति

भू-राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, हालिया मध्य-पूर्वी तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए यूएई अपनी सैन्य क्षमताओं को अभेद्य बनाना चाहता है। यूएई का विशेष ध्यान रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) की सुरक्षा को पुख्ता करने पर है, जो वैश्विक ऊर्जा और तेल आपूर्ति का एक मुख्य समुद्री मार्ग है। रक्षा मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि यूएई अब किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय अपने रक्षा आपूर्तिकर्ताओं का दायरा बढ़ाना चाहता है ताकि उसे अधिक रणनीतिक स्वतंत्रता मिल सके। भारत के साथ इस साझेदारी से यूएई को खाड़ी क्षेत्र में अपना शक्ति संतुलन बनाए रखने में बड़ी मदद मिलेगी।

भारतीय रक्षा निर्यात में ऐतिहासिक उछाल

यह संभावित रक्षा सौदा भारत के वैश्विक डिफेंस हब बनने की दिशा में एक और बड़ा कदम है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में भारत का रक्षा निर्यात 4 अरब डॉलर (लगभग 33,000 करोड़ रुपये) के सर्वकालिक रिकॉर्ड आंकड़े को पार कर गया है, जो कि वर्ष 2013-14 में महज 7.26 मिलियन डॉलर था। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के साथ पिछले वर्ष हुए सीमा संघर्ष के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल के सफल व सटीक उपयोग ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर इसकी धाक और बढ़ा दी है। यही वजह है कि यूएई के अलावा वियतनाम, इंडोनेशिया, थाईलैंड, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और चिली जैसे कई अन्य देश भी इस मिसाइल को खरीदने की कतार में शामिल हैं।