19 देशों के साथ भारत का शौर्य प्रदर्शन, पिच ब्लैक अभ्यास में जुटे 100+ फाइटर जेट

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नई दिल्ली। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी सामरिक क्षमता और सैन्य ताकत का प्रदर्शन करने के लिए भारतीय वायुसेना एक बार फिर पूरी तरह तैयार है। ऑस्ट्रेलिया के डार्विन में आगामी 20 जुलाई से 7 अगस्त तक आयोजित होने वाले बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास 'पिच ब्लैक-2026' में भारतीय वायुसेना के जांबाज पायलट अपने अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों के साथ हुंकार भरेंगे। इस बड़े सैन्य मंच पर भारत दुनिया के 18 अन्य मित्र देशों के साथ मिलकर अपनी युद्धक क्षमताओं का प्रदर्शन करेगा।

वैश्विक तालमेल और 19 देशों की महाजुगलबंदी

इस अंतरराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास में दुनिया भर के 19 देशों के 100 से अधिक लड़ाकू व परिवहन विमान और हजारों सैन्य कर्मी हिस्सा ले रहे हैं। इसका प्राथमिक उद्देश्य बेहद जटिल और वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में मित्र देशों की वायुसेनाओं के बीच आपसी तालमेल, साझा रणनीति और परिचालन क्षमता को सुदृढ़ करना है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिहाज से इस अभ्यास को बेहद अहम माना जा रहा है। भारत के अलावा इस महाअभ्यास में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, स्पेन और स्वीडन जैसे प्रमुख देश शामिल हो रहे हैं।

विमानन प्रेमियों के लिए खास हवाई करतब और प्रदर्शन

युद्ध कौशल को निखारने के साथ-साथ यह आयोजन आम जनता और विमानन प्रेमियों के लिए भी बेहद खास होने वाला है। इसके तहत 23 जुलाई को डार्विन के 'मिडिल बीच' पर एक भव्य फ्लाइंग डिस्प्ले का आयोजन किया जाएगा, जहाँ लोग शाम 5:00 से 6:30 बजे तक आसमान में लड़ाकू विमानों के हैरतअंगेज करतब देख सकेंगे। इसके अलावा, 1 अगस्त को आम नागरिकों को इन अत्याधुनिक सैन्य विमानों और उपकरणों को बेहद करीब से देखने तथा विभिन्न देशों के जांबाज पायलटों से सीधा संवाद करने का एक सुनहरा अवसर भी मिलेगा।

आखिर क्यों दिया गया इसे 'पिच ब्लैक' नाम?

इस हवाई अभ्यास का नाम 'पिच ब्लैक' (घने अंधेरे) के पीछे एक विशेष रणनीतिक कारण है। दरअसल, इस युद्धाभ्यास का एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा रात के घने अंधेरे में अंजाम दिया जाता है। इसका मकसद पायलटों को शून्य दृश्यता या बेहद कठिन परिस्थितियों में भी अचूक निशाना लगाने और दुश्मन के दांत खट्टे करने में माहिर बनाना है। इस दौरान आसमान में रणनीतिक छद्म युद्ध (मॉक वॉर) के साथ-साथ आक्रामक और रक्षात्मक दोनों ही प्रकार के आधुनिक एयर कॉम्बैट ऑपरेशंस का कड़ा अभ्यास किया जाता है।