तिरुवनंतपुरम। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) से जुड़े कथित डेटा लीक और साइबर हमले के दावों को रक्षा मंत्रालय ने सिरे से खारिज कर दिया है। मंगलवार को जारी एक आधिकारिक बयान में मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की गई गहन जांच में किसी भी सक्रिय साइबर हमले या वर्तमान में डेटा की चोरी के साक्ष्य नहीं मिले हैं।
जांच में साइबर हमले या डेटा चोरी के सबूत नहीं
रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, मीडिया में सामने आई रिपोर्टों के बाद संबंधित एजेंसियों द्वारा पूरे मामले की विस्तृत समीक्षा की गई। जांच के बाद यह निष्कर्ष निकला कि किसी भी अनधिकृत घुसपैठ या नेटवर्क में सेंधमारी की बात निराधार है। मंत्रालय ने आश्वासन दिया कि देश की रक्षा एजेंसियों के डिजिटल नेटवर्क पूरी तरह सुरक्षित हैं।
लीक बताए जा रहे दस्तावेज पुराने और अप्रासंगिक
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जिस डेटा के लीक होने की बात कही जा रही है, उसमें से अधिकांश सामग्री गोपनीय श्रेणी में नहीं आती। इसके अलावा, जिन कुछ दस्तावेजों को महत्वपूर्ण बताकर प्रस्तुत किया जा रहा है, वे वास्तव में वर्ष 2020 से 2022 के बीच की एक पुरानी घटना से संबंधित हैं। इन दस्तावेजों में समय-समय पर कई संशोधन किए जा चुके हैं, इसलिए वर्तमान संदर्भ में इनका कोई औचित्य या प्रासंगिकता नहीं बची है।
आर्थिक लाभ और सनसनी फैलाने की साजिश
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, कई साइबर हमलावर वित्तीय लाभ कमाने और भ्रम की स्थिति उत्पन्न करने के उद्देश्य से इस डेटा को नया और अति-संवेदनशील बताकर बेचने का प्रयास कर रहे हैं। मंत्रालय ने आरोप लगाया कि पुराने आंकड़ों में जानबूझकर हेरफेर किया गया है ताकि सामग्री वास्तविक प्रतीत हो सके और अधिक कीमत वसूली जा सके, जबकि इस डेटा का विभाग के वर्तमान कामकाज से कोई लेना-देना नहीं है।








