नई दिल्ली (दिल्ली)। देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय नौसेना के शीर्ष कमांडरों को संबोधित करते हुए देश की रणनीतिक और सामरिक तैयारियों को एक बिल्कुल नए और उच्च स्तर पर ले जाने का जोरदार आह्वान किया है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि वर्तमान समय में तेजी से बदलती हुई तकनीक, वैश्विक अनिश्चितताओं और हमारे पड़ोसी देशों से मिल रही सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए अब पुराने ढर्रे पर काम करने का समय पूरी तरह लटक चुका है। हमारी सैन्य और नौसैनिक तैयारी ऐसी अडिग होनी चाहिए कि कोई भी संभावित संकट हमारे देश की समुद्री सीमाओं तक पहुँचे, उससे पहले ही हम उससे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहें।
एक वर्ष में नौसेना में शामिल होंगे रिकॉर्ड 18 युद्धपोत
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में एक बेहद महत्वपूर्ण और गर्व का विषय साझा करते हुए बताया कि मौजूदा वर्ष के दौरान भारतीय नौसेना में कुल 18 अत्याधुनिक युद्धपोतों को कमीशन (बेड़े में शामिल) किए जाने की भव्य योजना है। यह भारतीय नौसेना के संपूर्ण इतिहास में एक ही वर्ष के भीतर शामिल किए जाने वाले युद्धपोतों का अब तक का सबसे बड़ा और अभूतपूर्व आंकड़ा होगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि हाल के दिनों में जितने भी नए युद्धपोत नौसेना को सौंपे गए हैं, उनमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री (मेक इन इंडिया) का उपयोग किया गया है। भारत को अब अपनी घरेलू रक्षा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ मित्र देशों को उन्नत युद्धपोतों का निर्यात करने की दिशा में भी आक्रामक रूप से आगे बढ़ना चाहिए।
समुद्री सुरक्षा की जटिलताएं और निगरानी बढ़ाने पर जोर
तीन दिवसीय नौसेना कमांडर सम्मेलन के दौरान अपने विचार साझा करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि हमें अपनी सैन्य तैयारियों में व्यापक भू-रणनीतिक सोच और किसी भी आकस्मिक परिस्थिति से निपटने के लिए ठोस योजनाओं को प्राथमिकता से शामिल करना होगा। उन्होंने वर्तमान समुद्री सुरक्षा परिवेश पर चिंता जताते हुए कहा कि समुद्री क्षेत्रों में बढ़ती आवाजाही की भीड़भाड़, कूटनीतिक छल और तथाकथित 'ग्रे-जोन' गतिविधियों ने आज की समुद्री सुरक्षा को अतीत की तुलना में कहीं अधिक जटिल बना दिया है।
'नौसेना केवल समुद्री सीमाओं की रखवाली नहीं करती, बल्कि यह विकसित भारत का आधार है'
रक्षा मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि समुद्री क्षेत्र में लगातार बढ़ रही इन जटिलताओं के मद्देनजर अब यह अत्यंत आवश्यक हो गया है कि हमारी निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया (क्विक रिस्पांस) क्षमताओं को और अधिक अत्याधुनिक तथा मजबूत बनाया जाए। सिंह ने गर्व के साथ कहा कि भारतीय नौसेना केवल हमारी तटीय सीमाओं की रक्षा करने वाला बल मात्र नहीं है, बल्कि वह हमारे 'विकसित भारत' की परिकल्पना का एक मजबूत आधार स्तंभ है। आज के इस दौर में नौसेना हमारी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ समुद्री शक्ति के प्रभावी प्रक्षेपण (पावर प्रोजेक्शन) में भी अपनी अहम भूमिका निभा रही है।









