TRE 4 को लेकर पटना में प्रदर्शन उग्र, पुलिस ने छात्रों पर बरसाए डंडे

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पटना: बिहार की राजधानी में टीआरई-4 विज्ञापन की मांग और बीपीएससी नियमावली में सुधार को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों पर पुलिसिया कार्रवाई का मामला गरमा गया है। पटना कॉलेज से शुरू हुआ यह विरोध मार्च जैसे ही जेपी गोलंबर के समीप पहुंचा, वहां पहले से तैनात भारी पुलिस बल और हजारों की संख्या में मौजूद छात्रों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग करना शुरू कर दिया।

जेपी गोलंबर पर प्रदर्शनकारियों पर पुलिसिया प्रहार

छात्र नेता दिलीप कुमार के नेतृत्व में बीपीएससी कार्यालय की ओर बढ़ रहे अभ्यर्थियों को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज का सहारा लिया, जिसमें कई छात्र-छात्राओं को गंभीर चोटें आई हैं। आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए थे और प्रशासन द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को पार करने की कोशिश कर रहे थे, जिसके बाद पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए लाठियां चटकाईं। इस अफरा-तफरी के बीच पुलिस ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कुछ प्रमुख छात्र नेताओं को हिरासत में ले लिया है, जिससे अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

विज्ञापन में देरी और उम्र सीमा का गहराता संकट

प्रदर्शनकारियों का मुख्य आरोप है कि शिक्षा विभाग और बीपीएससी पिछले एक साल से विज्ञापन जारी करने के नाम पर केवल आश्वासन दे रहे हैं। छात्र नेता ने स्पष्ट किया कि लाखों अभ्यर्थी पिछले दो वर्षों से रिक्तियों का इंतजार कर रहे हैं और सरकार की वादाखिलाफी की वजह से हजारों युवाओं की सरकारी नौकरी के लिए निर्धारित उम्र सीमा समाप्त होती जा रही है। अभ्यर्थियों का कहना है कि शिक्षा मंत्री और विभाग द्वारा बार-बार दस-पंद्रह दिनों में वैकेंसी निकालने की बात कही गई, लेकिन चुनाव बीत जाने के बाद भी अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

आयोग की अधियाचना और भविष्य के आंदोलन की चेतावनी

बीपीएससी द्वारा फरवरी माह में जारी किए गए उस नोटिस का भी हवाला दिया गया जिसमें अधियाचना मिलने और शीघ्र विज्ञापन निकालने का दावा किया गया था, जो अब तक धरातल पर नहीं उतरा है। प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि यदि आयोग और शिक्षा विभाग ने जल्द ही टीआरई-4 का आधिकारिक विज्ञापन जारी नहीं किया, तो आने वाले दिनों में राजधानी की सड़कों पर इससे भी बड़ा और उग्र आंदोलन किया जाएगा। छात्रों ने प्रशासन की इस कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताते हुए मांग की है कि उनकी भविष्य की चिंताओं को समझते हुए भर्ती प्रक्रिया को अविलंब शुरू किया जाए।