कोलकाता। प्रसिद्ध बांग्लादेशी लेखिका और विचारिका तस्लीमा नसरीन शुक्रवार को करीब 19 साल के लंबे अंतराल के बाद आखिरकार कोलकाता वापस लौट आईं। जैसे ही वह कोलकाता की धरती पर उतरीं, उनके चेहरे पर एक अलग ही खुशी और सुकून साफ तौर पर दिखाई दे रहा था। इस वापसी को लेकर अपनी भावनाओं को साझा करते हुए तस्लीमा नसरीन ने कहा कि उनके लिए यह अनुभव किसी दूसरे देश में आने जैसा नहीं, बल्कि अपने ही घर और देश लौटने के समान है, जहां वे एक साथ खुशी और पुराने दर्द के मिले-जुले अहसास के साथ लौटी हैं।
अपनी इस वापसी को लेखिका ने बताया अपने घर लौटने जैसा भावुक पल
कोलकाता आगमन पर मीडिया से बातचीत करते हुए लेखिका ने इस पल को अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण और भावुक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि भले ही उन्हें वर्षों पहले परिस्थितियों के कारण इस शहर को छोड़ना पड़ा था, लेकिन कोलकाता के साथ उनका गहरा भावनात्मक जुड़ाव हमेशा से बना रहा है। इतने वर्षों के बाद शहर की आबोहवा में सांस लेना और अपने पुराने परिचित माहौल के करीब पहुंचना उनके लिए बेहद संतोषजनक रहा, हालांकि उनके मन में अतीत के कुछ कड़वे अनुभव भी तरोताजा हो गए।
वर्ष 2003 में उनकी चर्चित किताब द्विखंडित पर लगा था प्रतिबंध
गौरतलब है कि तस्लीमा नसरीन के जीवन में कोलकाता छोड़ने की पृष्ठभूमि बहुत पहले यानी साल 2003 में बननी शुरू हुई थी, जब उनकी बेहद चर्चित और विवादित आत्मकथात्मक पुस्तक 'द्विखंडित' पर तत्कालीन पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा आधिकारिक रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया था। सरकार और आलोचकों का तर्क था कि इस किताब की कुछ पंक्तियों से एक विशेष समुदाय यानी मुस्लिम समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेس पहुंची है, जिसके बाद से ही साहित्यिक और राजनीतिक हलकों में तीखा विरोध शुरू हो गया था।
साल 2007 के उग्र विरोध प्रदर्शनों के बाद छोड़ना पड़ा था शहर
पुस्तक पर उपजे विवाद ने धीरे-धीरे विकराल रूप ले लिया और आखिरकार वर्ष 2007 में कोलकाता में उनकी उपस्थिति के खिलाफ भारी और उग्र विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। बढ़ते सामाजिक तनाव और सुरक्षा के कड़े खतरों के बीच तस्लीमा नसरीन को मजबूरन कोलकाता छोड़कर जाना पड़ा था। हालांकि, अब इतने लंबे अरसे बाद उनकी इस शहर में वापसी ने एक बार फिर से साहित्यिक और राजनीतिक गलियारों में पुरानी चर्चाओं को जिंदा कर दिया है।









