नई दिल्ली। खुफिया एजेंसियों के हवाले से एक बेहद सनसनीखेज खबर सामने आई है। हिजबुल मुजाहिदीन के मारे गए आतंकी बुरहान वानी की 10वीं बरसी के मौके पर पाकिस्तान के कराची शहर में आतंकियों के बड़े आकाओं की एक बेहद गोपनीय और बड़ी मीटिंग हुई है। यह खुफिया बैठक बीती 5 जुलाई को लश्कर-ए-तैयबा के राजनीतिक चेहरे 'पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग' (पीएमएमएल) के हेडक्वार्टर में आयोजित की गई। इस उच्च स्तरीय आतंकी बैठक में जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर और हिजबुल मुजाहिदीन के 14 कुख्यात कमांडरों के साथ-साथ पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के नुमाइंदे भी शामिल हुए। कश्मीरी युवाओं को बरगलाकर उनके हाथों में फिर से असलहे थमाने और घाटी में अशांति फैलाने के मकसद से इस पूरी साजिश को रचा गया है।
हाफिज सईद की चिट्ठी से तैयार हुआ नया ब्लूप्रिंट
खुफिया सूत्रों के मुताबिक, 5 जुलाई की दोपहर करीब 12 बजे ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के संयोजक गुलाम मोहम्मद सैफी और लश्कर के आतंकी व पीएमएमएल के उपाध्यक्ष मेहंदी इशहाक की मौजूदगी में यह बैठक शुरू हुई। इस दौरान करीब दो घंटे तक लश्कर से जुड़े आतंकी मोहम्मद तलहा सईद, सैफुल्ला कसूरी और हाफिज अब्दुल रहीम समेत तमाम बड़े चेहरों ने 8 जुलाई को लेकर अपनी खतरनाक योजनाओं का खाका सामने रखा। बैठक की शुरुआत में मेहंदी इशहाक ने जेल में बंद लश्कर सरगना हाफिज सईद का करीब डेढ़ पन्ने का एक गुप्त संदेश पढ़कर सुनाया, जिसमें बुरहान वानी के नाम का सहारा लेकर कश्मीर के नौजवानों को भड़काने और वहां सक्रिय स्लीपर सेल्स को दोबारा जिंदा करने का पूरा टास्क दिया गया है।
घाटी में हाई अलर्ट, सुरक्षा तंत्र बेहद चौकस
पाकिस्तान की इस नापाक साजिश का भंडाफोड़ होते ही भारतीय खुफिया एजेंसियों ने तुरंत केंद्र सरकार को एक विस्तृत इनपुट भेजा है। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर में तैनात सभी सुरक्षा बलों और स्थानीय पुलिस को अलर्ट मोड पर डाल दिया गया है। समूची कश्मीर घाटी में सुरक्षा के बंदोबस्त कड़े कर दिए गए हैं और चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखी जा रही है। सुरक्षा तंत्र से जुड़े आला अधिकारियों का साफ कहना है कि सरहद पार से होने वाली किसी भी अप्रिय या संदिग्ध गतिविधि को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा और सेना हर चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।
मुजफ्फराबाद बनेगा इस साजिश का नया कंट्रोल रूम
कराची में हुई इस गुप्त चर्चा में तय किया गया है कि बुरहान वानी की मौत के दिन यानी 8 जुलाई से ही घाटी में हथियारों की नई खेप पहुंचाने का काम तेजी से शुरू किया जाए। इस पूरी साजिश को अंजाम देने के लिए पाकिस्तानी सेना और आईएसआई ने आतंकियों को हर संभव बैकअप, फंडिंग और हथियारों की सप्लाई का भरोसा दिया है। रणनीतिक तौर पर इस पूरे भारत विरोधी ऑपरेशन को मुजफ्फराबाद से संचालित करने का फैसला हुआ है, जिसकी कमान ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के संयोजक गुलाम मोहम्मद सैफी को सौंपी गई है।









