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अस्पताल में हड़कंप: सिजेरियन के बाद आठ महिलाओं की तबीयत बिगड़ी, दो गंभीर

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जोधपुर। राजस्थान में सिजेरियन ऑपरेशन (प्रसव) के बाद माताओं की सेहत बिगड़ने के लगातार सामने आ रहे मामलों ने चिकित्सा महकमे की नींद उड़ा दी है। कोटा और बीकानेर में हुए हादसों के बाद अब जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में भी ऐसा ही गंभीर वाकया प्रकाश में आया है। यहाँ शनिवार को सिजेरियन डिलीवरी कराने वाली आठ महिलाओं की तबीयत ऑपरेशन के कुछ ही समय बाद एकाएक खराब हो गई, जिससे अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग में अफरा-तफरी मच गई। मरीजों में अत्यधिक कमजोरी, ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) की गंभीर कमी और अन्य शारीरिक जटिलताएं दिखने के बाद डॉक्टरों ने आपातकालीन उपचार शुरू किया। मामले की भयावहता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए ऑपरेशन थिएटर (ओटी) को तुरंत प्रभाव से सील कर दिया है और संक्रमण के संभावित कारणों की तकनीकी पड़ताल शुरू कर दी है।

दो प्रसूताओं की हालत नाजुक, उच्च स्तरीय अस्पताल में किया गया स्थानांतरित

मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित हुई आठ महिलाओं में से दो की शारीरिक स्थिति ज्यादा बिगड़ने के कारण उन्हें तत्काल प्रभाव से मथुरादास माथुर (एमडीएम) अस्पताल स्थानांतरित (रेफर) किया गया है। बाकी बची छह प्रसूताओं की स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है और उनका इलाज पावटा अस्पताल में ही जारी है। गंभीर रूप से बीमार महिलाओं में से एक को प्रसव के बाद अत्यधिक ब्लीडिंग (रक्तस्राव) की शिकायत हुई है, जबकि दूसरी महिला पहले से ही डायबिटीज (मधुमेह) से पीड़ित थी और उसका ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक नीचे गिर गया था। फिलहाल, विशेषज्ञ डॉक्टरों का एक विशेष दल दोनों की सघन निगरानी कर रहा है।

दवाइयों की गुणवत्ता और सर्जरी के उपकरणों की जांच के आदेश

इस घटनाक्रम के बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं। अस्पताल के बंद किए गए ऑपरेशन थिएटर से लेकर सर्जरी के दौरान इस्तेमाल की गई जीवन रक्षक दवाइयों और चिकित्सा सामग्रियों के सैंपल (नमूने) एकत्र कर उन्हें फॉरेंसिक और लैबोरेट्री टेस्टिंग के लिए भेजा गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि वे इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रहे हैं कि यह किसी बैक्टीरियल संक्रमण का नतीजा है, दवाइयों की खराब गुणवत्ता का असर है या फिर कोई अन्य तकनीकी खामी इसके पीछे जिम्मेदार है। वास्तविक कारणों का खुलासा जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।

बीकानेर और कोटा में भी पूर्व में हो चुकी हैं बड़ी अनहोनियां

गौरतलब है कि प्रदेश में प्रसूताओं की जान पर बनने का यह कोई पहला मामला नहीं है। बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में भी सिजेरियन प्रसव के बाद छह महिलाओं की किडनी फेल होने की दर्दनाक बात सामने आई थी, जिनमें से वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रही शारदा नामक महिला ने रविवार को दम तोड़ दिया। वहीं, कुछ समय पहले कोटा के जेके लोन और न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भी एक के बाद एक पांच प्रसूताओं की जान चली गई थी। कोटा मामले की सरकारी रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि महिलाओं को दिए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन में केवल पानी भरा हुआ था, जिसके चलते संक्रमण फैला और मरीजों के मल्टी ऑर्गन फेल्योर (कई अंगों का काम बंद करना) व सेप्टीसीमिया के कारण मौतें हुईं।

‘बेकार हो…’ टिप्पणी से गरमाई सियासत, खड़गे हुए नाराज

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बेंगलुरु: कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। यह मामला उस समय का है जब वे पार्टी के एक विशेष कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे थे। वहां मौजूद कार्यकर्ताओं द्वारा बार-बार की जा रही नारेबाजी से खड़गे इस कदर नाराज हो गए कि उन्होंने मंच से ही उन्हें 'बेकार लोग' (Useless Fellows) तक कह डाला। अनुशासन को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष का यह कड़ा रुख अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

लगातार नारेबाजी से मंच पर ही भड़के कांग्रेस अध्यक्ष

बेंगलुरु में आयोजित 'संकल्प समावेश' कार्यक्रम के दौरान जब मल्लिकार्जुन खड़गे मंच से अपना संबोधन दे रहे थे, तब सामने मौजूद कार्यकर्ताओं की तरफ से लगातार नारेबाजी की जा रही थी। काफी समझाने के बाद भी जब शोर शांत नहीं हुआ, तो खड़गे का पारा चढ़ गया। उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में कार्यकर्ताओं को फटकार लगाते हुए कहा, "तुम लोग बेकार हो। क्या यहाँ इस तरह चिल्लाने से पूरा देश प्रभावित हो जाएगा? शांत होकर बैठो।"

व्यक्ति पूजा के खिलाफ सख्त संदेश और नसीहत

अपने संबोधन के दौरान खड़गे ने कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि कांग्रेस संगठन में 'व्यक्ति पूजा' के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने मंच से नसीहत देते हुए कहा कि यह किसी एक व्यक्ति या व्यक्तिगत नेता पर केंद्रित कार्यक्रम नहीं है, बल्कि पूरी कांग्रेस पार्टी का आयोजन है। उन्होंने साफ किया कि सभी लोग यहाँ किसी नेता विशेष की आराधना के लिए नहीं, बल्कि संगठन और पार्टी को मजबूत करने के उद्देश्य से एकत्रित हुए हैं, इसलिए इस तरह का आचरण बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री के समर्थन में नारे और अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी

दरअसल, यह पूरा विवाद पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद के पदभार ग्रहण समारोह के दौरान हुआ। जब खड़गे भाषण दे रहे थे, तभी कुछ अति-उत्साही कार्यकर्ताओं ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के पक्ष में 'DK-DK' के नारे लगाने शुरू कर दिए। विवाद बढ़ता देख खड़गे ने कार्यकर्ताओं को चेतावनी दी कि कार्यक्रम की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग की जा रही है और फुटेज की जांच करने के बाद अनुशासनहीनता करने वालों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, माहौल बिगड़ता देख स्वयं मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला ने तुरंत हस्तक्षेप किया और कार्यकर्ताओं को शांत कराया।

आदित्य ठाकरे का बड़ा हमला: बागी नेता बिकाऊ, वफादारी पर सवाल

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मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने अपनी पार्टी के बागी सांसदों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन पर तीखा हमला बोला है। सोमवार (22 जून) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट साझा करते हुए उन्होंने बागी सांसदों पर विचारधारा के बजाय निजी लालच को प्राथमिकता देने और मतदाताओं के साथ गद्दारी करने का आरोप लगाया। आदित्य ठाकरे ने इन नेताओं को 'बिकाऊ' करार देते हुए कहा कि इन्होंने उन वोटरों के भरोसे का कत्ल किया है, जिन्होंने इन्हें महाविकास अघाड़ी (MVA) और 'इंडिया' गठबंधन के समर्थन से जिताया था।

आदित्य ठाकरे का आरोप— रातों-रात बेची वफादारी

आदित्य ठाकरे ने बागी सांसदों पर जनता के साथ विश्वासघात का आरोप लगाते हुए कहा कि ये सभी नेता कांग्रेस और महाविकास अघाड़ी के कार्यकर्ताओं की मेहनत और वोटों के दम पर संसद पहुंचे थे। जनता ने एनडीए (NDA) के उम्मीदवारों और उनकी नीतियों के खिलाफ जनादेश दिया था, लेकिन इन सांसदों ने अपने निजी स्वार्थ के लिए वफादारी और प्रतिष्ठा को शर्मनाक तरीके से बेच दिया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि चुनाव के वक्त यही नेता गठबंधन के बड़े नेताओं के सामने अपने क्षेत्रों में रैलियां करवाने के लिए हाथ जोड़ रहे थे और आज रातों-रात पाला बदलकर सत्ताधारी खेमे के पाले में जा खड़े हुए हैं।

शिवसेना (यूबीटी) का एक्शन: 24 घंटे का 'कारण बताओ नोटिस'

इस बड़े राजनीतिक संकट के बीच शिवसेना (यूबीटी) ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) अनिल देसाई ने दिल्ली में आयोजित संसदीय दल की बैठक से नदारद रहने वाले सांसदों को 'कारण बताओ नोटिस' जारी कर दिया है। सांसदों को सख्त लहजे में चेतावनी दी गई है कि उन्हें दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराया जा सकता है। सभी अनुपस्थित सांसदों को 24 घंटे के भीतर लिखित में अपना स्पष्टीकरण देने का अल्टीमेटम दिया गया है। पार्टी ने साफ किया है कि यदि निर्धारित समय में जवाब नहीं मिला, तो यह मान लिया जाएगा कि उन्होंने स्वेच्छा से पार्टी छोड़ दी है, जिसके बाद संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत उनकी सदस्यता रद्द करने की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।

'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चा और शिंदे गुट में जाने की अटकलें

यह विवाद तब खुलकर सामने आया जब दिल्ली में बुलाई गई संसदीय दल की महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से केवल 3 सांसद (अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे) ही पहुंचे। जबकि संजय दीना पाटिल, नागेश आष्टीकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, ओमप्रकाश राजेनिंबाल्कर और भाऊसाहेब वाकचौरे समेत 6 सांसद गायब रहे। राज्यसभा सांसद संजय राउत ने भी साफ कर दिया है कि इन बागी सांसदों को अयोग्य घोषित करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।

राजनीतिक गलियारों में इस पूरे घटनाक्रम को 'ऑपरेशन टाइगर' का नाम दिया जा रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि ये सभी 6 सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की तैयारी कर चुके हैं, जिसकी पुष्टि सत्ताधारी खेमे के कुछ नेताओं के बयानों से भी हो रही है।

मेलोनी की सख्त राजनीति ने दिलाई वैश्विक मंच पर पहचान

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रोम: इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी वर्तमान में यूरोपीय राजनीति के उन प्रमुख चेहरों में शामिल हैं, जो अपनी बेबाक बयानबाजी और कड़े फैसलों के कारण लगातार चर्चा का केंद्र बनी रहती हैं। वैश्विक मंच पर राष्ट्रवाद, सुरक्षा, यूरोपीय पहचान और प्रवासन (इमिग्रेशन) जैसे संवेदनशील विषयों पर उनके बयानों ने एक नई अंतरराष्ट्रीय बहस को जन्म दे दिया है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई जुबानी जंग के बाद उनकी आक्रामक राजनीतिक कार्यशैली एक बार फिर दुनिया भर के विश्लेषकों की नजरों में आ गई है।

वैचारिक हिंसा और अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व से टकराव

मेलोनी ने यूरोप के भीतर पनप रही वैचारिक हिंसा और सुरक्षा खतरों पर हमेशा खुलकर अपनी बात रखी है। फ्रांस में एक दक्षिणपंथी कार्यकर्ता की हत्या का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने इसे किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरे महाद्वीप की सुरक्षा के लिए एक गंभीर चेतावनी बताया था। हालांकि इस टिप्पणी पर फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने परोक्ष रूप से आपत्ति जताई थी, लेकिन मेलोनी ने अपने कदम पीछे खींचने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार किसी एक देश की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता।

अवैध प्रवासन और सांस्कृतिक पहचान पर अडिग रुख

सांस्कृतिक ताने-बाने की सुरक्षा और अवैध प्रवासन का मुद्दा मेलोनी के एजेंडे में सबसे ऊपर रहा है। यूरोप में अनियंत्रित रूप से बढ़ रहे अवैध आव्रजन और उसके कारण सांस्कृतिक एकीकरण में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों पर उन्होंने हमेशा चिंता व्यक्त की है। उनके इस कड़े रुख के कारण सोशल मीडिया पर उनके पुराने बयानों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी तीखी प्रतिक्रियाएं भी हुईं, लेकिन मेलोनी वैश्विक दबाव के आगे नहीं झुकीं। उन्होंने घुसपैठ को रोकने के लिए अपनी सख्त नीतियों और कड़े प्रशासनिक उपायों का समर्थन जारी रखा है।

घरेलू राजनीति में सख्त कानून व्यवस्था और छवि

इटली के आंतरिक मामलों में भी मेलोनी न्यायपालिका और प्रशासनिक निर्णयों पर अपनी बेबाक राय रखने के लिए जानी जाती हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ उन्होंने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने पर जोर दिया है। इसके साथ ही महिलाओं के सम्मान की रक्षा और इंटरनेट पर फैलने वाले भ्रामक प्रचार (ऑनलाइन दुष्प्रचार) के खिलाफ भी उन्होंने बेहद सख्त दंडात्मक कार्रवाई की वकालत की है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आलोचक भले ही उनकी विचारधारा को विवादित मानें, लेकिन आम जनता के बीच उनकी बढ़ती लोकप्रियता की मुख्य वजह उनका यही निर्भीक और मजबूत नेतृत्व है, जो उन्हें यूरोप की सबसे ताकतवर नेताओं की कतार में खड़ा करता है।

द. अफ्रीका से मिली हार ने बढ़ाई टेंशन, जानें भारत का क्वालिफिकेशन समीकरण

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महिला टी20 विश्व कप 2026 में लगातार दो शानदार जीत दर्ज करने के बाद भारतीय महिला क्रिकेट टीम की विजयी रफ्तार पर दक्षिण अफ्रीका ने ब्रेक लगा दिया है। ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर खेले गए ग्रुप-ए के बेहद अहम मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका ने भारत को छह विकेट से शिकस्त देकर सेमीफाइनल की रेस को पूरी तरह से रोमांचक और त्रिकोणीय बना दिया है। इस करारी हार के बाद भी भारतीय टीम बेहतर नेट रन रेट के आधार पर अंक तालिका में दूसरे पायदान पर बरकरार है, लेकिन नॉकआउट चरण में पहुंचने की उसकी राह अब पहले से कहीं ज्यादा कठिन और चुनौतीपूर्ण हो गई है।

मारिजाने कैप ने अकेले पलटा मैच, मिले दो जीवनदान पड़े भारी

दक्षिण अफ्रीका की अनुभवी और स्टार ऑलराउंडर मारिजाने कैप इस मुकाबले में भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बनकर उभरीं। उन्होंने खेल के दोनों विभागों में अद्वितीय प्रदर्शन करते हुए मैच का रुख पूरी तरह अपनी टीम की ओर मोड़ दिया। गेंदबाजी के दौरान घातक प्रदर्शन करते हुए 27 रन देकर 2 महत्वपूर्ण विकेट चटकाने वाली कैप ने बाद में बल्लेबाजी में भी तहलका मचा दिया। उन्होंने भारतीय गेंदबाजों की रिमांड पर लेते हुए महज 45 गेंदों में सात चौकों और चार गगनचुंबी छक्कों की मदद से 81 रनों की नाबाद विस्फोटक पारी खेली।

भारतीय टीम के लिए इस मैच का सबसे टर्निंग पॉइंट मारिजाने कैप को मिले दो जीवनदान रहे। फील्डिंग के दौरान भारतीय स्थानापन्न (सबस्टीट्यूट) खिलाड़ी राधा यादव ने कैप के दो बेहद आसान कैच टपका दिए। टीम इंडिया को यह गलतियां इतनी भारी पड़ीं कि कैप ने मैच को भारत की पकड़ से पूरी तरह दूर कर दिया और दक्षिण अफ्रीका ने 19.1 ओवर में 161 रन बनाकर लक्ष्य हासिल कर लिया।

धीमी बल्लेबाजी के कारण बड़ा स्कोर बनाने में नाकाम रही टीम इंडिया

इससे पहले, टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम निर्धारित 20 ओवरों में 7 विकेट के नुकसान पर 158 रनों का ही स्कोर खड़ा कर सकी। टीम के शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों को अच्छी शुरुआत तो मिली, लेकिन वे उसे एक बड़े और मैच जिताऊ स्कोर में तब्दील करने में पूरी तरह नाकाम रहे। मध्यक्रम की बल्लेबाजी में वह आक्रामकता और धार बिल्कुल गायब दिखी, जिसकी दरकार विश्व कप जैसे बड़े मंच पर होती है। दक्षिण अफ्रीकी स्पिनरों और तेज गेंदबाजों ने बीच के ओवरों में भारतीय रनगति पर पूरी तरह अंकुश लगाए रखा, जिसका सीधा असर भारत के अंतिम टोटल पर साफ देखने को मिला।

महिला टी20 विश्व कप 2026: ताजा अंक तालिका

इस मैच के परिणाम के बाद दोनों ग्रुपों की अंक तालिका का समीकरण बेहद दिलचस्प हो गया है:

ग्रुप-ए

टीममैचजीतहारबेनतीजाकुल अंकनेट रन रेट (NRR)
ऑस्ट्रेलिया33006+4.391
भारत32104+2.511
दक्षिण अफ्रीका32104-0.546
बांग्लादेश32104-0.641
पाकिस्तान (बाहर)30300-1.857
नीदरलैंड (बाहर)30300-3.384

 

ग्रुप-बी

टीममैचजीतहारबेनतीजाकुल अंकनेट रन रेट (NRR)
इंग्लैंड33006+2.490
वेस्टइंडीज33006+0.644
न्यूजीलैंड31202-0.063
स्कॉटलैंड31202-0.083
श्रीलंका31202-1.913
आयरलैंड (बाहर)30300-1.054

 

क्या है भारत के लिए सेमीफाइनल का गणित?

अफ्रीकी टीम से मिली इस पराजय के बाद भी भारतीय महिला टीम की किस्मत अभी भी पूरी तरह उसके अपने हाथों में है, लेकिन आगे का सफर किसी कांटेदार राह से कम नहीं है:

  • दोनों मैच जीतने पर सीधी एंट्री: अगर कप्तान हरमनप्रीत कौर की सेना अपने आगामी दोनों ग्रुप मैच जीत लेती है, तो वह बिना किसी तकनीकी अड़चन के सीधे सेमीफाइनल का टिकट कटा लेगी।

  • एक मैच हारने पर समीकरणों का फेर: यदि भारत अपने अगले दो मैचों में से एक मुकाबला गंवा देता है, तो उसकी उम्मीदें पूरी तरह इस बात पर टिक जाएंगी कि दक्षिण अफ्रीका भी अपने बचे हुए दो मैचों में से कम से कम एक मैच जरूर हारे। ऐसी स्थिति में फैसला नेट रन रेट के तराजू पर होगा, जहां फिलहाल भारत (+2.511) दक्षिण अफ्रीका (-0.546) से काफी मजबूत स्थिति में है।

  • बांग्लादेश से हारे तो पैक होगा बोरिया-बिस्तर: यदि भारतीय टीम 25 जून को होने वाले मुकाबले में बांग्लादेश के हाथों उलटफेर का शिकार हो जाती है, तो उसका विश्व कप का सफर लगभग यहीं समाप्त हो जाएगा। वहीं दोनों मैच हारने की सूरत में भारत आधिकारिक तौर पर टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगा।

अब हर मुकाबला बनेगा 'करो या मरो' का नॉकआउट

ग्रुप-ए में वर्तमान परिस्थितियों को देखें तो डिफेंडिंग चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को अब 23 जून को पाकिस्तान से भिड़ना है, जहां एक जीत उनकी सेमीफाइनल में जगह पक्की कर देगी। इसके बाद 28 जून को ऑस्ट्रेलिया और भारत का आमना-सामना होगा, जो भारत के लिए करो या मरो वाला मैच साबित हो सकता है। दूसरी तरफ दक्षिण अफ्रीका के अगले दो मैच तुलनात्मक रूप से आसान टीमों (नीदरलैंड और बांग्लादेश) के खिलाफ हैं।

भारतीय टीम का अगला मुकाबला 25 जून को मैनचेस्टर में बांग्लादेश से होगा, जबकि आखिरी ग्रुप मैच 28 जून को लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला जाएगा। ग्रुप चरण अब अपने सबसे अंतिम और निर्णायक पड़ाव पर पहुंच चुका है, जिसके चलते भारत के लिए अब हर मैच नॉकआउट की तरह होगा। भारतीय टीम को अब न केवल मैच जीतने होंगे, बल्कि अपनी पुरानी गलतियों को सुधारते हुए खेल के हर विभाग में शत-प्रतिशत प्रदर्शन करना होगा।

गुरुद्वारे में हंगामा, निहंगों ने भक्त को बंधक बनाकर दी धमकी

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देहरादून/रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के चमोली स्थित कर्णप्रयाग में 16 जून को हुए आपसी विवाद के बाद अब रुद्रप्रयाग के नगरासू स्थित गुरुद्वारे में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। शनिवार देर शाम पंजाब से आए हथियारों से लैस छह निहंगों ने हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग पर स्थित इस गुरुद्वारे पर नियंत्रण स्थापित कर लिया और वहां मौजूद दो लोगों को बंधक बना लिया। हालांकि बाद में उन्होंने एक व्यक्ति को छोड़ दिया, लेकिन एक सेवादार को अभी भी बंधक बना रखा है। निहंगों ने परिसर में घुसने वाले को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। हालात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस, प्रशासन और आईटीबीपी की टीमें पिछले 24 घंटों से मौके पर डटी हुई हैं, लेकिन दो दौर की बातचीत विफल होने के बाद गतिरोध अब भी बरकरार है।

प्रशासनिक प्रयास और गुरुद्वारे में बढ़ा गतिरोध

विवाद को शांत करने के लिए प्रशासनिक अधिकारी लगातार प्रयास कर रहे हैं। रविवार सुबह रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी निहंगों से संवाद करने पहुंचे, लेकिन उन्होंने बातचीत करने से साफ इनकार कर दिया। इससे पहले पुलिस कप्तान ने भी दो दौर की वार्ता के जरिए उन्हें समझाने की कोशिश की थी, जो बेअसर रही। आरोप है कि निहंगों ने गुरुद्वारे की छत पर चढ़कर परिसर को अपने नियंत्रण में ले लिया और इस दौरान वहां तैनात सेवादारों के साथ मारपीट व अभद्रता भी की गई। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे इलाके में भारी संख्या में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं।

पंजाब से आए प्रतिनिधिमंडल का हस्तक्षेप और मांग

इस संवेदनशील मामले के तूल पकड़ते ही पंजाब से एक सिख प्रतिनिधिमंडल भी उत्तराखंड पहुंच चुका है। इस प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। हालांकि, प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि इस पूरी घटना में शामिल सिख युवकों के साथ अन्याय हुआ है और स्थानीय प्रशासन द्वारा एकतरफा कार्रवाई की जा रही है। गौरतलब है कि इस पूरे विवाद की शुरुआत 16 जून को हुई थी, जब हेमकुंड साहिब की यात्रा से लौट रहे कुछ निहंगों और स्थानीय व्यापारियों के बीच हिंसक झड़प हो गई थी, जिसके बाद से यह तनाव लगातार बढ़ता चला गया।

एहतियातन इंटरनेट सेवाएं बंद और सुरक्षा सख्त

माहौल को बिगड़ने से बचाने और अफवाहों पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। रुद्रप्रयाग और श्रीनगर (गढ़वाल) के क्षेत्रों में एहतियातन इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया गया है ताकि सोशल मीडिया के जरिए किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी न फैलाई जा सके। हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग पर कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में सुरक्षा घेरा बेहद कड़ा कर दिया गया है और उच्च अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

मयंक साहू मर्डर केस में बड़ी गिरफ्तारी, मुख्य आरोपी यश सोनी समेत दो दबोचे गए

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सागर। मोतीनगर थाना क्षेत्र के चर्चित मयंक साहू मर्डर केस में कानून व्यवस्था को एक बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस की विशेष टीमों ने कई राज्यों में सघन तलाशी अभियान चलाने के बाद 10-10 हजार रुपये के दो इनामी अपराधियों को धर दबोचा है। गिरफ्तार किए गए बदमाशों में वारदात का मुख्य सूत्रधार यश सोनी और उसका करीबी सहयोगी मनु सोनी शामिल हैं। इस पूरे हत्याकांड में पुलिस अब तक सात आरोपियों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा चुकी है, जबकि उनका एक अन्य साथी ओम अहिरवार अब भी कानून की गिरफ्त से बाहर है।

पुरानी दुश्मनी के कारण सरेआम की थी अंधाधुंध गोलाबारी

पुलिस प्रशासन ने मामले का पटाक्षेप करते हुए बताया कि 21 मई 2026 की रात विवेकानंद वार्ड के मछरयाई इलाके में स्थित गोंड बब्बा चबूतरा के पास पुरानी रंजिश के चलते दो पक्षों में हिंसक झड़प हुई थी। इस दौरान आरोपियों ने शिकायतकर्ता ओम साहू और उनके भाई मयंक साहू के साथ न केवल दुर्व्यवहार किया, बल्कि उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। इस हमले में गंभीर रूप से घायल मयंक साहू ने अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था, वहीं ओम साहू पर चाकू से जानलेवा वार किया गया था। इस खूनी खेल के बाद पुलिस ने हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा कायम किया था।

चार राज्यों में बदले ठिकाने और रेलवे आउटर पर बिछाया गया जाल

वारदात को अंजाम देने के बाद से ही दोनों शातिर अपराधी पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहे थे। वे कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए गुजरात, दिल्ली, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश के इंदौर व कटनी जैसे शहरों में लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे थे। आरोपियों की इस लुका-छिपी को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने उन पर इनाम घोषित किया था। अंततः साइबर सेल की तकनीकी मदद से 19 जून की रात पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी पैसों की व्यवस्था करने सागर आ रहे हैं। इस सटीक सूचना पर बम्हौरी रेंगुवा रेलवे आउटर पर घेराबंदी कर मनु सोनी को दबोच लिया गया, वहीं मुख्य आरोपी यश सोनी को उत्तर प्रदेश के ललितपुर से गिरफ्तार कर वारदात में इस्तेमाल कट्टा बरामद किया गया।

एमडी ड्रग्स की बरामदगी और सोशल मीडिया पर दहशत फैलाने का खेल

पकड़े गए अपराधियों का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड बेहद खूंखार रहा है। आरोपी मनु सोनी के खिलाफ हत्या, डकैती और जानलेवा हमले जैसे करीब 25 गंभीर मुकदमे पहले से दर्ज हैं। गिरफ्तारी के दौरान तलाशी लेने पर उसके पास से 20 ग्राम अवैध एमडी ड्रग्स भी मिली, जिसके कारण उस पर एनडीपीएस एक्ट के तहत एक और केस दर्ज किया गया है। मुख्य आरोपी यश सोनी पर भी 8 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसी बीच, सोशल मीडिया पर चर्चा बटोरने के लिए एक नाबालिग लड़के ने आरोपियों के नाम से किसी अन्य व्यक्ति को जान से मारने की धमकी भरा संदेश फैलाकर शहर में डर का माहौल बनाने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस जांच में यह केवल पब्लिसिटी स्टंट निकला। फिलहाल पुलिस अंतिम फरार आरोपी की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।

Maharashtra MLC चुनाव में महायुति को झटका, निर्दलीय ने बदला खेल

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मुंबई: महाराष्ट्र विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव के नतीजों में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन ने एक बार फिर अपना राजनीतिक दबदबा साबित किया है। राज्य की 17 विधान परिषद सीटों पर हुए इस कड़े मुकाबले में भाजपा, शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित पवार गुट) के महायुति गठबंधन ने 16 सीटों पर बंपर जीत दर्ज कर विपक्षी महाविकास अघाड़ी (एमवीए) को करारी शिकस्त दी है। हालांकि, इस शानदार जीत के बीच नासिक स्थानीय प्राधिकारी सीट पर महायुति को एक बड़ा और अप्रत्याशित झटका लगा, जहां भाजपा के एक बागी नेता ने निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरकर सत्तारूढ़ गठबंधन के समीकरण बिगाड़ दिए।

17 में से 16 सीटों पर महायुति का कब्जा

इस द्विवार्षिक चुनाव में कुल 17 सीटों में से छह सीटों पर उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जा चुके थे। बाकी बची 11 सीटों के लिए हुए मतदान के नतीजे सोमवार को जारी किए गए। इन 11 सीटों में से अकेले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 9 सीटों पर अपना परचम लहराया। वहीं, शिवसेना ने परभणी-हिंगोली सीट पर कामयाबी हासिल की। इस तरह कुल 17 में से 16 सीटें महायुति के खाते में गईं, जिससे उच्च सदन (विधान परिषद) में सत्तारूढ़ दल की स्थिति पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और स्पष्ट हो गई है।

नासिक में भाजपा बागी का जलवा, शिवसेना को मात

इस पूरे चुनाव में नासिक सीट का मुकाबला सबसे ज्यादा दिलचस्प और चर्चा का विषय बना रहा। यहां शिवसेना के मौजूदा विधायक और एकनाथ शिंदे गुट के आधिकारिक उम्मीदवार नरेंद्र दराडे को निर्दलीय चुनाव लड़ रहे गोकुल गिट्टे के हाथों करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। गोकुल गिट्टे मूल रूप से भाजपा से जुड़े हुए नेता हैं, लेकिन गठबंधन के तहत यह सीट शिवसेना के खाते में जाने और टिकट न मिलने के कारण उन्होंने बगावत का रास्ता चुना था। गिट्टे की इस जीत ने नासिक संभाग की स्थानीय राजनीति में सबको चौंका दिया है।

होटल पॉलिटिक्स भी नहीं बचा सकी शिंदे की रणनीति

नासिक का यह चुनावी नतीजा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने इस सीट को अपनी साख का सवाल बना लिया था। चुनाव से ठीक पहले महायुति के रणनीतिकारों ने पार्षदों और स्थानीय जनप्रधिनिधियों में किसी भी तरह की सेंधमारी या क्रॉस वोटिंग को रोकने के लिए उन्हें ठाणे के एक आलीशान होटल में ठहराया था। तमाम घेराबंदी और 'होटल पॉलिटिक्स' के बावजूद, नासिक में स्थानीय नेताओं की अंदरूनी खींचतान और भाजपा के बागी उम्मीदवार की मजबूत जमीनी पकड़ के आगे महायुति का सुरक्षा चक्र टूट गया और मुख्यमंत्री शिंदे की पूरी रणनीति फेल साबित हुई।

अनियंत्रित यूनिपोल से बिगड़ेगा शहर का स्वरूप? योजना पर उठे गंभीर सवाल

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जबलपुर। मध्य प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में राजस्व (सरकारी खजाना) बढ़ाने के उद्देश्य से होर्डिंग और यूनिपोल की संख्या में इजाफा करने के नए प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के खिलाफ अब जमीनी स्तर पर तीखा विरोध और असंतोष पनपने लगा है। संस्कारधानी जबलपुर में अनियंत्रित और बेतरतीब ढंग से लगाए जा रहे इन विशाल विज्ञापन पटलों के कारण शहर के भीतर पूर्व में कई भयावह और जानलेवा सड़क हादसे भी हो चुके हैं। इसी गंभीर विषय को लेकर जबलपुर नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के वरिष्ठ पदाधिकारियों डॉ. पी.जी. नाजपांडे, रजत भार्गव, एडवोकेट वेदप्रकाश अधौलिया, सुशीला कनौजिया और गीता पांडे ने नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे को एक औपचारिक लिखित आपत्ति पत्र भेजा है। इस पत्र के जरिए हालिया विभागीय समीक्षा बैठक में जारी किए गए आदेशों को आम नागरिकों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद आत्मघाती और चिंताजनक बताया गया है। संस्था का स्पष्ट मत है कि बिना किसी ठोस और वैज्ञानिक कार्ययोजना के विज्ञापनों का दायरा बढ़ाने से शहरी यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी और रोजमर्रा के सफर में हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।

नियमों को ठेंगा दिखाकर मनमाने ढंग से हो रहा काम, फाइलों में दबी जांच रिपोर्ट

वर्तमान समय में विभिन्न नगरीय निकायों में स्थापित किए जा रहे विज्ञापन पटल 'आउटडोर विज्ञापन मीडिया नियम 2017' की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच द्वारा पूर्व में दर्ज कराई गई गंभीर शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए नगर निगम प्रशासन ने एक विशेष जांच दल का गठन किया था। इस जांच दल ने धरातल पर व्यापक छानबीन और तकनीकी मूल्यांकन करने के बाद 13 जून 2025 को अपनी अंतिम विस्तृत रिपोर्ट उच्चाधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत कर दी थी।

बेहद हैरान करने वाली बात यह है कि इस महत्वपूर्ण जांच रिपोर्ट को आए हुए पूरा 1 वर्ष का लंबा समय बीत चुका है, परंतु जिम्मेदार उच्च पदस्थ अफसरों ने अब तक नियमों का उल्लंघन करने वाले ठेकेदारों और रसूखदारों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की है। इसी प्रशासनिक शिथिलता के कारण शहरों में अवैध और खतरनाक होर्डिंग का यह अवैध कारोबार लगातार फल-फूल रहा है।

इलाहाबाद बैंक चौराहे पर हुए जानलेवा हादसे के बाद भी पुलिस मौन

सड़कों और चौराहों के ठीक मुहाने पर खड़े किए गए भारी-भरकम लोहे के यूनिपोल राहगीरों और वाहन चालकों की जान के लिए सबसे बड़ा काल बनकर उभर रहे हैं। जबलपुर शहर के व्यस्ततम इलाहाबाद बैंक चौराहे के समीप 18 जनवरी 2025 को एक ऐसा ही भीषण हादसा हुआ था, जिसमें एक बेकसूर नागरिक को असमय अपनी जान गंवानी पड़ी थी।

इस दुखद घटना को बीते हुए 1 वर्ष से अधिक की समयावधि निकल चुकी है, लेकिन स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा इस मामले में अब तक संबंधित विज्ञापन एजेंसी या दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) तक दर्ज नहीं की जा सकी है। इस घोर लापरवाही के चलते आज तक हादसे की वैधानिक जवाबदेही तय नहीं हो पाई और न ही पीड़ित परिवार को कोई कानूनी न्याय मिल सका है। उपभोक्ता मंच ने सरकार से पुरजोर मांग की है कि इंसानी जिंदगी की कीमत पर सिर्फ राजस्व बढ़ाने के इस अव्यावहारिक फैसले को जनहित में तत्काल वापस लिया जाए।

रोहित शर्मा के नाम एक और बड़ी उपलब्धि, दिग्गजों की सूची में और ऊपर पहुंचे

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भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान और दिग्गज सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा ने 39 साल की उम्र में भी अपनी आतिशी बल्लेबाजी से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रिकॉर्ड्स की झड़ी लगा दी है। अफगानिस्तान के खिलाफ एम. ए. चिदंबरम स्टेडियम में खेले गए तीसरे और अंतिम एकदिवसीय (वनडे) मुकाबले में भारतीय कप्तान ने एक बार फिर इतिहास के पन्नों में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों से दर्ज करा लिया। मैच में 79 रनों की कप्तानी पारी खेलते हुए उन्होंने न सिर्फ भारत को एकतरफा जीत दिलाई, बल्कि देश के कई महानतम बल्लेबाजों को पीछे छोड़ते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया।

'हिटमैन' के नाम से मशहूर रोहित शर्मा ने महज 69 गेंदों का सामना करते हुए 79 रन कूट डाले, जिसमें नौ शानदार चौके और तीन गगनचुंबी छक्के शामिल रहे। उनकी इस विस्फोटक बल्लेबाजी की बदौलत भारत ने अफगानिस्तान से मिले 219 रनों के लक्ष्य को बेहद बौना साबित कर दिया। टीम इंडिया ने सिर्फ 28.4 ओवरों में ही जीत का परचम लहराकर तीन मैचों की इस श्रृंखला में अफगानिस्तान का 3-0 से सूपड़ा साफ (क्लीन स्वीप) कर दिया।

वीरेंद्र सहवाग को पछाड़कर शीर्ष पर पहुंचे रोहित

इस धमाकेदार पारी के दौरान रोहित शर्मा ने पूर्व विस्फोटक ओपनर वीरेंद्र सहवाग के एक बहुत बड़े और ऐतिहासिक रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया। अब रोहित शर्मा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट (तीनों प्रारूपों को मिलाकर) में भारत की ओर से बतौर सलामी बल्लेबाज सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बन गए हैं।

भारत के लिए बतौर ओपनर सर्वाधिक रन बनाने वाले शीर्ष बल्लेबाज:

बल्लेबाजकुल रन (बतौर ओपनर)
रोहित शर्मा16,137
वीरेंद्र सहवाग16,119
सचिन तेंदुलकर15,335
सुनील गावस्कर12,258
शिखर धवन10,867

इस अद्भुत उपलब्धि को हासिल करने के साथ ही रोहित ने भारतीय क्रिकेट के तीन सबसे महान मार्गदर्शक ओपनरों— सहवाग, सचिन तेंदुलकर और सुनील गावस्कर को एक साथ पीछे छोड़ दिया है।

मोहिंदर अमरनाथ का 37 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा

रोहित शर्मा ने इस मैच में अपने नाम एक और बेहद खास रिकॉर्ड दर्ज किया, जो उनकी फिटनेस और निरंतरता को दर्शाता है। 39 वर्ष और 51 दिन की उम्र में अर्धशतकीय पारी खेलकर वह वनडे क्रिकेट के इतिहास में भारत के लिए पचास या उससे अधिक रन बनाने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बन गए हैं।

इससे पहले यह रिकॉर्ड पूर्व दिग्गज मोहिंदर अमरनाथ के नाम दर्ज था, जिन्होंने साल 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ 39 वर्ष और 21 दिन की उम्र में 88 रनों की पारी खेली थी।

यशस्वी जायसवाल का नाबाद शतक, भविष्य की मजबूत झलक

कप्तान रोहित शर्मा के साथ मैदान पर उतरे युवा सनसनी यशस्वी जायसवाल ने भी इस सुनहरे मौके का पूरा फायदा उठाया। उन्होंने श्रीलंकाई और अफगानी गेंदबाजों के खिलाफ अपने हाथ खोलते हुए मात्र 86 गेंदों पर नाबाद 110 रनों की शतकीय पारी खेली।

इन दोनों सलामी बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए 170 रनों की विशाल और मैराथन साझेदारी कर मैच को पूरी तरह से एकतरफा बना दिया। यशस्वी का यह शानदार शतक इस बात का गवाह है कि भारतीय क्रिकेट की अगली पीढ़ी भी बड़े मंचों पर जिम्मेदारी संभालने के लिए पूरी तरह तैयार है।

प्रसिद्ध कृष्णा के 'पंजे' ने तोड़ी अफगानिस्तान की कमर

इससे पहले, टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी अफगानिस्तान की टीम भारतीय तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा की आग उगलती गेंदों के सामने टिक नहीं सकी। कृष्णा ने कातिलाना गेंदबाजी करते हुए अफगानिस्तान के ऊपरी क्रम को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया और महज 36 रन के योग पर मेहमान टीम के चार मुख्य बल्लेबाजों को पवेलियन भेज दिया। उन्होंने मैच में कुल 5 विकेट (पंज) चटकाए।

शुरुआती झटकों के बाद अफगान कप्तान हश्मतुल्लाह शाहिदी ने मोर्चा संभाला और 131 गेंदों में 102 रनों की जुझारू शतकीय पारी खेली। उनका साथ अजमतुल्लाह उमरजई (50 रन) ने दिया, जिसके दम पर अफगानिस्तान की टीम सम्मानजनक 218 रनों के स्कोर तक पहुंचने में सफल रही थी।

क्या रोहित बन चुके हैं भारत के नंबर-1 ओपनर?

रोहित शर्मा की इस हालिया पारी ने एक बार फिर दुनिया को दिखा दिया कि उम्र महज एक संख्या है। 39 की उम्र पार करने के बाद भी वह भारतीय बल्लेबाजी क्रम की मुख्य धुरी बने हुए हैं। क्रिकेट पंडितों के बीच अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या रोहित शर्मा सांख्यिकीय और रणनीतिक रूप से भारत के अब तक के सबसे महान ओपनर बन चुके हैं? वर्तमान आंकड़े तो कम से कम इसी बड़े सच की गवाही दे रहे हैं।

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