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वैभव सूर्यवंशी के साथी खिलाड़ी को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म, जानें पूरा मामला

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इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2027 के महाकुंभ को शुरू होने में भले ही अभी लंबा वक्त बाकी है, लेकिन इसके आगामी सत्र को लेकर सभी फ्रेंचाइजियों में अंदरूनी रणनीतियों और बड़े बदलावों की सुगबुगाहट अभी से तेज हो गई है। इस फेहरिस्त में सबसे ज्यादा सुर्खियां पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस बटोर रही है, जो अगले सीजन के लिए एक नए सिरे से 'कोर टीम' को तैयार करने की कवायद में जुटी हुई है। मुंबई का प्रबंधन अब पुराने और सीनियर चेहरों के स्थान पर युवा रक्त को तरजीह देने की योजना बना रहा है। इसी सिलसिले में मुंबई इंडियंस ने अन्य फ्रेंचाइजियों के साथ खिलाड़ियों की अदला-बदली (ट्रेड) को लेकर औपचारिक बातचीत का पहला दौर भी शुरू कर दिया है, जिसमें उनका सबसे पहला और बड़ा निशाना राजस्थान रॉयल्स के स्टार ओपनर यशस्वी जायसवाल हैं।

हार्दिक पांड्या को ट्रेड करेगी मुंबई, राजस्थान रॉयल्स ने दिखाई गहरी दिलचस्पी

खेल जगत की मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुंबई इंडियंस के खेमे से आ रही बड़ी खबर के मुताबिक फ्रेंचाइजी अपने मौजूदा कप्तान और स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या को रिलीज या ट्रेड करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। दूसरी तरफ, हार्दिक पांड्या ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वे आगामी सीजन मुंबई इंडियंस के साथ नहीं बिताना चाहते हैं। अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि वे फ्रेंचाइजी के कुछ नीतिगत फैसलों और सीनियर खिलाड़ियों के असहयोगात्मक रवैये से खुश नहीं हैं, जिसके चलते उन्होंने टीम छोड़ने का मन पूरी तरह बना लिया है।

इस स्थिति का फायदा उठाने के लिए मुंबई इंडियंस ने हार्दिक के ट्रेड को लेकर राजस्थान रॉयल्स के प्रबंधन से संपर्क साधा है। राजस्थान रॉयल्स भी एक बेहतरीन ऑलराउंडर और अनुभवी भारतीय खिलाड़ी के रूप में हार्दिक को अपने साथ जोड़ने में गहरी रुचि दिखा रहा है। हालांकि, इस मेगा ट्रेड के बदले में मुंबई इंडियंस ने राजस्थान से उनके सबसे बड़े मैच विनर यशस्वी जायसवाल की मांग कर दी है।

राजस्थान रॉयल्स में क्यों असंतुष्ट दिखे यशस्वी जायसवाल?

यशस्वी जायसवाल के फ्रेंचाइजी छोड़ने की अटकलें आईपीएल के पिछले सत्रों से ही लगाई जा रही हैं। इसके पीछे कुछ रणनीतिक कारण रहे हैं:

  • कप्तानी का विवाद: साल 2025 में जब नियमित कप्तान संजू सैमसन के चोटिल होने पर प्रबंधन ने उनकी गैरमौजूदगी में रियान पराग को कार्यवाहक कप्तान नियुक्त किया था, तब यशस्वी के खेमे में गहरी नाराजगी देखी गई थी।

  • सैमसन के जाने के बाद भी उपेक्षा: साल 2026 में भी टीम रियान पराग की अगुवाई में खेली और केवल पराग की अनुपस्थिति में ही यशस्वी को कप्तानी की जिम्मेदारी सौंपी गई। संजू सैमसन के राजस्थान फ्रेंचाइजी छोड़ने के बाद यशस्वी के पास टीम का सबसे बड़ा मार्गदर्शक बनने का मौका था, लेकिन कप्तानी को लेकर हुए इन फैसलों के बाद अब उनके मुंबई जाने की अटकलें दोबारा सच होती दिख रही हैं।

वैभव सूर्यवंशी और यशस्वी की सुपरहिट जोड़ी टूटने की कगार पर

यदि यशस्वी जायसवाल राजस्थान रॉयल्स का साथ छोड़ते हैं, तो क्रिकेट फैंस को आईपीएल 2026 की सबसे विस्फोटक सलामी जोड़ी का अंत देखना पड़ेगा। पिछले सीजन में यशस्वी और युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी की जोड़ी ने राजस्थान रॉयल्स को कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में बेहद आक्रामक और ऐतिहासिक शुरुआत दिलाई थी।

वैभव सूर्यवंशी ने भी कई साक्षात्कारों में यह माना था कि क्रीज पर यशस्वी उन्हें लगातार तकनीकी टिप्स देते हैं और मानसिक एकाग्रता बनाए रखने में बड़ी मदद करते हैं। हालांकि, यदि यशस्वी का मुंबई इंडियंस में ट्रांसफर होता है, तो यह उनके व्यक्तिगत करियर के लिए टर्निंग पॉइंट हो सकता है। यशस्वी घरेलू क्रिकेट में रणजी ट्रॉफी मुंबई की टीम से ही खेलते हैं, ऐसे में मुंबई इंडियंस की जर्सी पहनना उनके लिए अपने घर लौटने जैसा होगा।

सूर्यकुमार यादव भी छोड़ सकते हैं मुंबई का साथ, दो टीमों ने दिया कप्तानी का ऑफर

मुंबई इंडियंस अगले सीजन से पहले टीम का पूरी तरह कायाकल्प करने के मूड में है। इस बड़ी रीस्ट्रक्चरिंग प्रक्रिया में न केवल हार्दिक पांड्या, बल्कि टी-20 के धाकड़ बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव को भी बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो आईपीएल की दो बड़ी फ्रेंचाइजियों ने सूर्यकुमार यादव को अपनी टीम में शामिल करने के लिए मुंबई इंडियंस से संपर्क किया है और वे दोनों ही टीमें सूर्या को आगामी सीजन के लिए अपना मुख्य कप्तान नियुक्त करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

नई जनरेशन की टीम बनाने पर मुंबई इंडियंस का पूरा जोर

दिग्गज बल्लेबाज रोहित शर्मा अपने अंतरराष्ट्रीय और आईपीएल करियर के अंतिम पड़ाव पर हैं। ऐसे में यदि हार्दिक पांड्या और सूर्यकुमार यादव जैसे सीनियर खिलाड़ी भी टीम से बाहर हो जाते हैं, तो मुंबई इंडियंस का प्रबंधन पूरी तरह से 'न्यू जनरेशन' यानी युवा पीढ़ी की टीम बनाने पर अपना ध्यान केंद्रित करेगा। इस भविष्यवादी योजना में यशस्वी जायसवाल से बेहतर और प्रतिभाशाली विकल्प भारत में दूसरा कोई नहीं है। अब देखना यह होगा कि क्या मुंबई की टीम यशस्वी को सिर्फ एक बल्लेबाज के तौर पर जोड़ेगी या उन्हें टीम की कप्तानी भी सौंपेगी। बहरहाल, आईपीएल 2027 को लेकर क्रिकेट प्रेमियों का उत्साह अभी से चरम पर पहुंच गया है।

राम मंदिर ट्रस्ट विवाद पर शंकराचार्य का तीखा बयान

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छिंदवाड़ा: द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज के छिंदवाड़ा आगमन पर उनके अनुयायियों और बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान मीडिया और श्रद्धालुओं से चर्चा करते हुए शंकराचार्य ने देश के वर्तमान धार्मिक, प्रशासनिक और सामाजिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने अयोध्या राम मंदिर में सामने आए कथित दान चोरी मामले पर गहरा दुख प्रकट करने के साथ-साथ देश में बढ़ रहे धर्मांतरण के मामलों पर भी चिंता जताई और इसके स्थायी समाधान के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दों को निम्नलिखित तीन मुख्य शीर्षकों के तहत समझा जा सकता है:

राम मंदिर दान चोरी पर दुख और 'सनातन संरक्षण बोर्ड' का सुझाव

शंकराचार्य ने अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा किए गए कथित भ्रष्टाचार और दान राशि के दुरुपयोग को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और पीड़ादायक बताया। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु अपनी गाढ़ी कमाई और अगाध श्रद्धा के साथ मंदिरों में दान करते हैं, इसलिए उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ बिल्कुल नहीं होना चाहिए। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए उन्होंने देश के मंदिरों के संचालन और संरक्षण हेतु एक स्वतंत्र ‘सनातन संरक्षण बोर्ड’ या विशेषज्ञ समिति के गठन की मांग की, ताकि सरकारी नियंत्रण से इतर मंदिरों की व्यवस्था पारदर्शी बनी रहे।

सरकारी अधिकारियों की कार्यशैली और प्रशासनिक समझ पर सवाल

मंदिरों के प्रबंधन पर बात करते हुए उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को सनातन धर्म के विधि-विधान, पूजा-पद्धति, धार्मिक नैतिकता और आध्यात्मिक व्यवस्थाओं की पर्याप्त समझ नहीं होती है। उनका मानना है कि जो व्यक्ति जिस क्षेत्र का विशेषज्ञ होता है, वही उस कार्य को बेहतर ढंग से संभाल सकता है। इसलिए धार्मिक स्थलों का प्रबंधन प्रशासनिक अधिकारियों के बजाय धर्मशास्त्रों के ज्ञाताओं, अनुभवी संतों और विषय के विशेषज्ञों को ही सौंपा जाना चाहिए ताकि व्यवस्थाओं की पवित्रता और मर्यादा बनी रहे।

धर्मांतरण और 'लव जिहाद' को रोकने के लिए कड़े कानून की मांग

धर्मांतरण और 'लव जिहाद' जैसे मुद्दों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि किसी भी देश में 'संख्या बल' का बहुत बड़ा महत्व होता है, क्योंकि जिसकी संख्या अधिक होगी, वही देश पर शासन करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि एक सोची-समझी साजिश के तहत देश में इन गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है, जिस पर सरकार और समाज उतना ध्यान नहीं दे रहे हैं जितना जरूरी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इन राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को तत्काल रोकने के लिए कठोरतम कानून बनाकर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए, जबकि संत समाज इस विषय में जनजागरण का कार्य लगातार कर रहा है।

शिवसेना UBT में बगावत: 6 सांसद शिंदे गुट में जाने की तैयारी

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मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बहुत बड़ा उलटफेर होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे उद्धव ठाकरे को तगड़ा झटका लग सकता है। सूबे के कैबिनेट मंत्री और शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। उनके मुताबिक, शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद सोमवार को पाला बदलकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना में शामिल होने जा रहे हैं। अगर यह दावा सच साबित होता है, तो लोकसभा में शिंदे गुट के सांसदों की संख्या सात से सीधे बढ़कर 13 हो जाएगी, जो उद्धव ठाकरे के लिए एक बड़ी राजनीतिक चोट होगी।

प्रताप सरनाईक ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि ये छह सांसद सोमवार दोपहर तीन बजे आधिकारिक तौर पर शिंदे गुट का दामन थाम लेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इन सांसदों ने पहले ही लोकसभा अध्यक्ष को इस संबंध में पत्र सौंप दिया है। सरनाईक ने इस पूरे घटनाक्रम को 'ऑपरेशन टाइगर' का नाम दिया और कहा कि शिवसेना को मजबूत करने का यह अभियान साल के 365 दिन चलता रहता है। उन्होंने तंज कसते हुए संजय राउत का शुक्रिया भी अदा किया और कहा कि बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को मानने वाले नेता अब शिंदे जी के साथ आ रहे हैं।

इन सांसदों के पाला बदलने की है चर्चा

जिन छह सांसदों के शिंदे गुट में जाने की सबसे ज्यादा चर्चा है, उनमें यवतमाल-वाशिम से संजय देशमुख, हिंगोली से नागेश पाटिल अष्टीकर, परभणी से संजय जाधव, शिरडी से भाऊसाहेब वाकचौरे, मुंबई उत्तर-पूर्व से संजय दिना पाटिल और धाराशिव से ओमप्रकाश राजे निंबालकर शामिल हैं। इन अटकलों को हवा तब मिली जब ये सभी सांसद हाल ही में हुई शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक से नदारद रहे थे, जिसके बाद से ही उनके पाला बदलने के कयास लगाए जा रहे थे।

नेताओं की प्रतिक्रिया और उद्धव ठाकरे का अगला कदम

इस पूरे सियासी घमासान पर दोनों तरफ से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। उद्धव गुट के विधायक महेश सावंत ने इस पर बेरुखी दिखाते हुए कहा कि 'जाने वाले चले गए', वहीं शिंदे गुट की एमएलसी डॉ. मनीषा कायंदे ने कहा कि आने वाले नेता बागी नहीं बल्कि सच्चे शिवसैनिक हैं और एकनाथ शिंदे उनका स्वागत कर रहे हैं। दूसरी ओर, इस बड़े संकट को देखते हुए उद्धव ठाकरे ने जमीन पर उतरने का फैसला किया है। वह 27 जून से महाराष्ट्र के उन सभी इलाकों का तूफानी दौरा करेंगे जहां के सांसदों के टूटने की खबर है, ताकि संगठन को बिखरने से बचाया जा सके और कार्यकर्ताओं का हौसला बरकरार रहे।

स्टार्मर ने दिया इस्तीफा, कहा- पार्टी को नहीं है जीत की उम्मीद

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लंदन: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को अपने पद और लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी है। 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर देश को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर अब यह माना जा रहा है कि वे आगामी चुनावों में नेतृत्व के लिए सही व्यक्ति नहीं हैं। पिछले कुछ महीनों से लेबर पार्टी के भीतर उनके नेतृत्व को लेकर असंतोष लगातार बढ़ रहा था, जिसके बाद बढ़ते राजनीतिक दबाव के कारण उन्हें यह बड़ा कदम उठाना पड़ा।

पार्टी के भीतर बढ़ता असंतोष और गिरती लोकप्रियता

कीर स्टार्मर का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब लेबर पार्टी के कई सांसदों और मंत्रियों ने उनकी कार्यशैली पर खुलेआम सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। हाल ही में संपन्न हुए स्थानीय चुनावों में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन और जनता के बीच लगातार गिरती लोकप्रियता ने उन पर पद छोड़ने का भारी दबाव बना दिया था। कई नीतिगत बदलावों (यू-टर्न) और आम जनता के जीवनस्तर में सुधार के वादों को पूरा न कर पाने के कारण उनकी छवि को काफी नुकसान पहुंचा था, जिससे पार्टी के भीतर उनके विरोधी मुखर हो गए।

उपचुनाव में प्रतिद्वंद्वी की जीत और उत्तराधिकारी की रेस

स्टार्मर के लिए मुश्किलें तब और गंभीर हो गईं जब उनके मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी एंडी बर्नहैम ने मेकरफील्ड उपचुनाव में शानदार जीत हासिल कर संसद में वापसी की। इस बड़ी जीत के बाद बर्नहैम के समर्थकों ने स्टार्मर से तुरंत पद छोड़ने की मांग तेज कर दी। हालांकि स्टार्मर ने शुरुआत में किसी भी चुनौती का सामना करने की बात कही थी, लेकिन राजनीतिक वास्तविकताओं को देखते हुए आखिरकार उन्होंने पीछे हटने का फैसला किया। वर्तमान में एंडी बर्नहैम देश के अगले प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के नए नेता बनने की रेस में सबसे आगे चल रहे हैं।

ब्रिटेन की राजनीति में बढ़ता अस्थिरता का दौर

कीर स्टार्मर के इस फैसले के साथ ही ब्रिटेन की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन का एक अभूतपूर्व दौर देखने को मिल रहा है, जिसके तहत देश को पिछले सात वर्षों में छठा प्रधानमंत्री मिलने जा रहा है। पिछले एक दशक में डेविड कैमरन, थेरेसा मे, बोरिस जॉनसन, लिज ट्रस और ऋषि सुनक जैसे कद्दावर नेता भी ब्रेक्जिट विवाद, आर्थिक मंदी, आंतरिक कलह और महामारी के दौर में अपनी नीतियां सफल न होने के कारण अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके थे। स्टार्मर का जाना इसी राजनीतिक अस्थिरता की एक नई कड़ी माना जा रहा है।

Bharatiya Janata Party का बूथ गौरव अभियान, 23 जून से 6 जुलाई तक चलेगा कार्यक्रम

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भोपाल: भारतीय जनता पार्टी ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 की ऐतिहासिक समाप्ति और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में एक राष्ट्रव्यापी महाअभियान चलाने का निर्णय लिया है। केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशानुसार, देश के अन्य हिस्सों के साथ-साथ मध्य प्रदेश में भी 23 जून से 6 जुलाई तक ‘डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी संस्मरण पखवाड़ा’ का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस व्यापक अभियान के सुचारू संचालन और जमीनी स्तर पर इसकी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक उच्च स्तरीय केंद्रीय संचालन टोली का गठन किया गया है, जिसमें मध्य प्रदेश के भाजपा प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह को विशेष रूप से शामिल किया गया है, जो राज्य के सभी बूथ स्तरीय कार्यक्रमों की सीधे मॉनिटरिंग करेंगे।

 

बूथ स्तर पर वैचारिक व्याख्यान और गौरव दिवस का आयोजन

इस अभियान के तहत मध्य प्रदेश के सभी मतदान केंद्रों (बूथों) पर ‘बूथ गौरव दिवस’ मनाया जाएगा, जिसके अंतर्गत विशेष वैचारिक व्याख्यानों का आयोजन होगा। इसके साथ ही, प्रत्येक नगर और शहर के किसी प्रमुख चौराहे, उद्यान अथवा मार्ग का नामकरण डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर करने का निर्णय लिया गया है, जहां उनकी प्रतिमा या चित्र का अनावरण भी किया जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कार्यकर्ताओं और आम जनता को डॉ. मुखर्जी के राष्ट्र निर्माण में योगदान और उनकी कश्मीर नीति से गहराई से अवगत कराना है, जिसमें जनसंपर्क और संगठनात्मक मजबूती पर विशेष जोर रहेगा।

जिला स्तर पर कार्यकर्ता सम्मेलन और धारा 370 पर बौद्धिक सत्र

पखवाड़े के दौरान मंडल और जिला स्तर पर विशेष बौद्धिक सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर से धारा 370 की समाप्ति के ऐतिहासिक सफर पर प्रकाश डाला जाएगा। इसके अलावा, प्रदेश के सभी जिलों में बड़े पैमाने पर कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इन सम्मेलनों में डॉ. मुखर्जी के सामाजिक एवं राजनीतिक योगदान, एक केंद्रीय मंत्री के रूप में उनकी दूरदर्शी कार्यशैली और भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में उनके ऐतिहासिक सफर पर केंद्रित विशेष व्याख्यान दिए जाएंगे, ताकि पार्टी की मूल विचारधारा को पुनर्जीवित किया जा सके।

शैक्षणिक परिसरों के बाहर छात्र सम्मेलन और सुदृढ़ संगठनात्मक ढांचा

नई पीढ़ी और युवाओं को भाजपा की राष्ट्रवादी विचारधारा से जोड़ने के लिए प्रदेश के प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों के बाहर विशेष छात्र सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। केंद्रीय दिशा-निर्देशों के अनुसार, ये कार्यक्रम पूरी तरह से शैक्षणिक परिसरों के बाहर आयोजित होंगे। इस पूरे अभियान को व्यवस्थित ढंग से क्रियान्वित करने के लिए एक मजबूत संगठनात्मक ढांचा तैयार किया गया है, जिसके तहत प्रदेश स्तर पर एक वरिष्ठ कार्यकर्ता की कमान में 5 सदस्यीय टोली, प्रत्येक जिले में 4 सदस्यीय टोली और मंडल स्तर पर 3 सदस्यीय टोली काम करेगी। अभियान की सफलता के लिए प्रदेश और जिला स्तर पर वर्चुअल व फिजिकल बैठकें आयोजित कर सभी पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों और संगठन महामंत्रियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

ईंधन की कीमतों पर बड़ी अपडेट, पेट्रोलियम मंत्री के बयान के बीच जानें आज के दाम

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नई दिल्ली। देश के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने यह संकेत दिए हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार से रियायती दरों पर खरीदे गए कच्चे तेल की आपूर्ति शुरू होते ही आम जनता को पेट्रोल और डीजल की महंगाई से राहत मिल सकती है। हालांकि, इस प्रक्रिया में अभी कुछ समय लगने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में तेल विपणन कंपनियों के पास ऊंचे दामों पर आयात किए गए क्रूड ऑयल का पुराना स्टॉक मौजूद है। जैसे ही यह स्टॉक समाप्त होगा और कम लागत वाला नया कच्चा तेल रिफाइनरियों तक पहुंचेगा, वैसे ही खुदरा कीमतों में कटौती की राह साफ हो जाएगी। वैश्विक स्तर पर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण खड़े हुए ऊर्जा संकट के बावजूद, भारत में ईंधन की दरें दुनिया के अन्य विकसित देशों की तुलना में काफी हद तक नियंत्रित और स्थिर बनी हुई हैं। उन्होंने बताया कि कीमतों को काबू में रखने के लिए केंद्र सरकार ने नवंबर 2021, मई 2022 और फिर 2026 में उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) को घटाया है, जिसके चलते सरकार ने प्रति लीटर करीब 10 रुपये के वित्तीय घाटे का बोझ खुद वहन किया है। इसी का परिणाम है कि देश में ईंधन की कीमतों में वृद्धि केवल 7.60 रुपये प्रति लीटर तक ही सीमित रह सकी।

प्रमुख महानगरों और राज्यों में ईंधन के मौजूदा दाम

देश के विभिन्न हिस्सों में टैक्स और स्थानीय वैट (VAT) की दरों में अंतर होने के कारण पेट्रोल-डीजल की कीमतें अलग-अलग हैं। वर्तमान में देश के विभिन्न प्रमुख शहरों में तेल की खुदरा दरें इस प्रकार दर्ज की गई हैं: दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। मुंबई में पेट्रोल की कीमत 111.18 रुपये तथा डीजल की कीमत 97.83 रुपये प्रति लीटर है। कोलकाता में उपभोक्ताओं को पेट्रोल 113.47 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर की दर से मिल रहा है। चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये एवं डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। बेंगलुरु में पेट्रोल का भाव 110.93 रुपये और डीजल का भाव 98.80 रुपये प्रति लीटर बना हुआ है। हैदराबाद में पेट्रोल 115.69 रुपये तथा डीजल 103.82 रुपये प्रति लीटर की दर पर बिक रहा है। अगरतला में पेट्रोल की कीमत 105.17 रुपये और डीजल की कीमत 94.05 रुपये प्रति लीटर है। गुवाहाटी में पेट्रोल 105.85 रुपये और डीजल 97.33 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। पटना में पेट्रोल का दाम 113.35 रुपये और डीजल का दाम 99.36 रुपये प्रति लीटर है।

वैश्विक बाजार और स्थानीय करों से तय होती है तेल की कीमत

भारत में घरेलू स्तर पर ईंधन के दाम तय करने की प्रक्रिया पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करती है। इसके अलावा इसमें बेस प्राइस, टैक्स संरचना और डीलरों का लाभांश भी शामिल होता है। तेल कंपनियां वैश्विक क्रूड ऑयल की खरीद लागत में रिफाइनिंग का खर्च, माल ढुलाई का भाड़ा और अपना लाभांश जोड़कर ईंधन का एक आधार मूल्य (बेस प्राइस) निर्धारित करती हैं। इसके बाद इस आधार मूल्य पर केंद्र सरकार द्वारा उत्पाद शुल्क और राज्य सरकारों द्वारा अपने-अपने नियमों के अनुसार मूल्य वर्धित कर (VAT) वसूला जाता है, जो मिलकर अंतिम खुदरा मूल्य का लगभग 50 से 55 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं।

डीलर कमीशन और अंतिम खुदरा मूल्य का निर्धारण

पंपों तक ईंधन पहुंचने के बाद इसमें पेट्रोल पंप संचालकों के खर्च और मुनाफे को ध्यान में रखते हुए प्रति लीटर के हिसाब से एक तय डीलर कमीशन जोड़ा जाता है। इन सभी घटकों यानी बेस प्राइस, केंद्रीय कर, राजकीय कर और डीलर कमीशन को आपस में जोड़ने के बाद ही वह अंतिम खुदरा भाव (रिटेल प्राइस) तैयार होता है, जिस पर आम उपभोक्ता पेट्रोल पंपों से तेल खरीदते हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में मामूली बदलाव होने या किसी राज्य द्वारा वैट की दरों में फेरबदल करने पर उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ता है।

दिल्ली-यूपी से साउथ तक बुलेट ट्रेन का जाल, घंटों का सफर मिनटों में

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नई दिल्ली: भारत की पहली हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। देश को अगले साल (2027) के मध्य तक अपनी पहली बुलेट ट्रेन मिल जाएगी, जो मुंबई और अहमदाबाद के बीच दौड़ेगी। इस बीच, केंद्र सरकार ने देश में सात नए बुलेट ट्रेन हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को भी मंजूरी दे दी है। इन नए रूट्स के शुरू होने से कई प्रमुख शहरों के बीच का सफर घंटों के बजाय मिनटों में तय होने लगेगा। रेल मंत्रालय के मुताबिक, इन सभी कॉरिडोर पर ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 350 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।

दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर और उत्तर प्रदेश के प्रस्तावित स्टेशन्स

नए स्वीकृत कॉरिडोर में दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बेहद अहम है। इस रूट के बनने से दिल्ली से लखनऊ का सफर महज 2 घंटे और दिल्ली से वाराणसी का सफर सिर्फ 3 घंटे 15 मिनट में पूरा हो सकेगा। रेल मंत्री के अनुसार, इस कॉरिडोर का लाभ ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के कई प्रमुख शहरों में स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है। इनमें दिल्ली, नोएडा, मथुरा, आगरा, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, अयोध्या, रायबरेली, प्रयागराज और वाराणसी शामिल हैं। हालांकि, स्टेशनों की अंतिम सूची पर आखिरी फैसला बाद में लिया जाएगा।

देश के अन्य प्रमुख रूट्स पर सफर का समय

सात नए हाई-स्पीड कॉरिडोर के चालू होने के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में यात्रा के समय में भारी कटौती होगी। विभिन्न शहरों के बीच का सफर इस प्रकार सिमट जाएगा:

  • मुंबई से अहमदाबाद: 1 घंटे 57 मिनट

  • बेंगलुरु से चेन्नई: 73 मिनट (1 घंटा 13 मिनट)

  • पुणे से हैदराबाद: 2 घंटे 8 मिनट

  • बेंगलुरु से हैदराबाद: 2 घंटे 10 मिनट

  • मुंबई से पुणे: 48 मिनट

  • दिल्ली से सिलीगुड़ी: 6 घंटे

जापान की शिंकान्सेन तकनीक और प्रोजेक्ट का इतिहास

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट भारत की सबसे पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना है, जो 508 किलोमीटर लंबी है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की आधारशिला सितंबर 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने संयुक्त रूप से रखी थी। यह पूरा प्रोजेक्ट जापान की विश्व प्रसिद्ध शिंकान्सेन (Shinkansen) तकनीक और वहां की आर्थिक मदद (लोन) से तैयार किया जा रहा है। हालांकि, शुरुआत में इसे 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन महाराष्ट्र में भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) और विभिन्न सरकारी मंजूरियों में हुई देरी के कारण इसके समय में थोड़ा बदलाव हुआ है, और अब यह अगले साल के मध्य तक पटरी पर उतरने के लिए तैयार है।

अस्पताल में हड़कंप: सिजेरियन के बाद आठ महिलाओं की तबीयत बिगड़ी, दो गंभीर

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जोधपुर। राजस्थान में सिजेरियन ऑपरेशन (प्रसव) के बाद माताओं की सेहत बिगड़ने के लगातार सामने आ रहे मामलों ने चिकित्सा महकमे की नींद उड़ा दी है। कोटा और बीकानेर में हुए हादसों के बाद अब जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में भी ऐसा ही गंभीर वाकया प्रकाश में आया है। यहाँ शनिवार को सिजेरियन डिलीवरी कराने वाली आठ महिलाओं की तबीयत ऑपरेशन के कुछ ही समय बाद एकाएक खराब हो गई, जिससे अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग में अफरा-तफरी मच गई। मरीजों में अत्यधिक कमजोरी, ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) की गंभीर कमी और अन्य शारीरिक जटिलताएं दिखने के बाद डॉक्टरों ने आपातकालीन उपचार शुरू किया। मामले की भयावहता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए ऑपरेशन थिएटर (ओटी) को तुरंत प्रभाव से सील कर दिया है और संक्रमण के संभावित कारणों की तकनीकी पड़ताल शुरू कर दी है।

दो प्रसूताओं की हालत नाजुक, उच्च स्तरीय अस्पताल में किया गया स्थानांतरित

मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित हुई आठ महिलाओं में से दो की शारीरिक स्थिति ज्यादा बिगड़ने के कारण उन्हें तत्काल प्रभाव से मथुरादास माथुर (एमडीएम) अस्पताल स्थानांतरित (रेफर) किया गया है। बाकी बची छह प्रसूताओं की स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है और उनका इलाज पावटा अस्पताल में ही जारी है। गंभीर रूप से बीमार महिलाओं में से एक को प्रसव के बाद अत्यधिक ब्लीडिंग (रक्तस्राव) की शिकायत हुई है, जबकि दूसरी महिला पहले से ही डायबिटीज (मधुमेह) से पीड़ित थी और उसका ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक नीचे गिर गया था। फिलहाल, विशेषज्ञ डॉक्टरों का एक विशेष दल दोनों की सघन निगरानी कर रहा है।

दवाइयों की गुणवत्ता और सर्जरी के उपकरणों की जांच के आदेश

इस घटनाक्रम के बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं। अस्पताल के बंद किए गए ऑपरेशन थिएटर से लेकर सर्जरी के दौरान इस्तेमाल की गई जीवन रक्षक दवाइयों और चिकित्सा सामग्रियों के सैंपल (नमूने) एकत्र कर उन्हें फॉरेंसिक और लैबोरेट्री टेस्टिंग के लिए भेजा गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि वे इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रहे हैं कि यह किसी बैक्टीरियल संक्रमण का नतीजा है, दवाइयों की खराब गुणवत्ता का असर है या फिर कोई अन्य तकनीकी खामी इसके पीछे जिम्मेदार है। वास्तविक कारणों का खुलासा जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।

बीकानेर और कोटा में भी पूर्व में हो चुकी हैं बड़ी अनहोनियां

गौरतलब है कि प्रदेश में प्रसूताओं की जान पर बनने का यह कोई पहला मामला नहीं है। बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में भी सिजेरियन प्रसव के बाद छह महिलाओं की किडनी फेल होने की दर्दनाक बात सामने आई थी, जिनमें से वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रही शारदा नामक महिला ने रविवार को दम तोड़ दिया। वहीं, कुछ समय पहले कोटा के जेके लोन और न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भी एक के बाद एक पांच प्रसूताओं की जान चली गई थी। कोटा मामले की सरकारी रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि महिलाओं को दिए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन में केवल पानी भरा हुआ था, जिसके चलते संक्रमण फैला और मरीजों के मल्टी ऑर्गन फेल्योर (कई अंगों का काम बंद करना) व सेप्टीसीमिया के कारण मौतें हुईं।

‘बेकार हो…’ टिप्पणी से गरमाई सियासत, खड़गे हुए नाराज

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बेंगलुरु: कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। यह मामला उस समय का है जब वे पार्टी के एक विशेष कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे थे। वहां मौजूद कार्यकर्ताओं द्वारा बार-बार की जा रही नारेबाजी से खड़गे इस कदर नाराज हो गए कि उन्होंने मंच से ही उन्हें 'बेकार लोग' (Useless Fellows) तक कह डाला। अनुशासन को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष का यह कड़ा रुख अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

लगातार नारेबाजी से मंच पर ही भड़के कांग्रेस अध्यक्ष

बेंगलुरु में आयोजित 'संकल्प समावेश' कार्यक्रम के दौरान जब मल्लिकार्जुन खड़गे मंच से अपना संबोधन दे रहे थे, तब सामने मौजूद कार्यकर्ताओं की तरफ से लगातार नारेबाजी की जा रही थी। काफी समझाने के बाद भी जब शोर शांत नहीं हुआ, तो खड़गे का पारा चढ़ गया। उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में कार्यकर्ताओं को फटकार लगाते हुए कहा, "तुम लोग बेकार हो। क्या यहाँ इस तरह चिल्लाने से पूरा देश प्रभावित हो जाएगा? शांत होकर बैठो।"

व्यक्ति पूजा के खिलाफ सख्त संदेश और नसीहत

अपने संबोधन के दौरान खड़गे ने कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि कांग्रेस संगठन में 'व्यक्ति पूजा' के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने मंच से नसीहत देते हुए कहा कि यह किसी एक व्यक्ति या व्यक्तिगत नेता पर केंद्रित कार्यक्रम नहीं है, बल्कि पूरी कांग्रेस पार्टी का आयोजन है। उन्होंने साफ किया कि सभी लोग यहाँ किसी नेता विशेष की आराधना के लिए नहीं, बल्कि संगठन और पार्टी को मजबूत करने के उद्देश्य से एकत्रित हुए हैं, इसलिए इस तरह का आचरण बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री के समर्थन में नारे और अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी

दरअसल, यह पूरा विवाद पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद के पदभार ग्रहण समारोह के दौरान हुआ। जब खड़गे भाषण दे रहे थे, तभी कुछ अति-उत्साही कार्यकर्ताओं ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के पक्ष में 'DK-DK' के नारे लगाने शुरू कर दिए। विवाद बढ़ता देख खड़गे ने कार्यकर्ताओं को चेतावनी दी कि कार्यक्रम की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग की जा रही है और फुटेज की जांच करने के बाद अनुशासनहीनता करने वालों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, माहौल बिगड़ता देख स्वयं मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला ने तुरंत हस्तक्षेप किया और कार्यकर्ताओं को शांत कराया।

आदित्य ठाकरे का बड़ा हमला: बागी नेता बिकाऊ, वफादारी पर सवाल

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मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने अपनी पार्टी के बागी सांसदों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन पर तीखा हमला बोला है। सोमवार (22 जून) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट साझा करते हुए उन्होंने बागी सांसदों पर विचारधारा के बजाय निजी लालच को प्राथमिकता देने और मतदाताओं के साथ गद्दारी करने का आरोप लगाया। आदित्य ठाकरे ने इन नेताओं को 'बिकाऊ' करार देते हुए कहा कि इन्होंने उन वोटरों के भरोसे का कत्ल किया है, जिन्होंने इन्हें महाविकास अघाड़ी (MVA) और 'इंडिया' गठबंधन के समर्थन से जिताया था।

आदित्य ठाकरे का आरोप— रातों-रात बेची वफादारी

आदित्य ठाकरे ने बागी सांसदों पर जनता के साथ विश्वासघात का आरोप लगाते हुए कहा कि ये सभी नेता कांग्रेस और महाविकास अघाड़ी के कार्यकर्ताओं की मेहनत और वोटों के दम पर संसद पहुंचे थे। जनता ने एनडीए (NDA) के उम्मीदवारों और उनकी नीतियों के खिलाफ जनादेश दिया था, लेकिन इन सांसदों ने अपने निजी स्वार्थ के लिए वफादारी और प्रतिष्ठा को शर्मनाक तरीके से बेच दिया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि चुनाव के वक्त यही नेता गठबंधन के बड़े नेताओं के सामने अपने क्षेत्रों में रैलियां करवाने के लिए हाथ जोड़ रहे थे और आज रातों-रात पाला बदलकर सत्ताधारी खेमे के पाले में जा खड़े हुए हैं।

शिवसेना (यूबीटी) का एक्शन: 24 घंटे का 'कारण बताओ नोटिस'

इस बड़े राजनीतिक संकट के बीच शिवसेना (यूबीटी) ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) अनिल देसाई ने दिल्ली में आयोजित संसदीय दल की बैठक से नदारद रहने वाले सांसदों को 'कारण बताओ नोटिस' जारी कर दिया है। सांसदों को सख्त लहजे में चेतावनी दी गई है कि उन्हें दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराया जा सकता है। सभी अनुपस्थित सांसदों को 24 घंटे के भीतर लिखित में अपना स्पष्टीकरण देने का अल्टीमेटम दिया गया है। पार्टी ने साफ किया है कि यदि निर्धारित समय में जवाब नहीं मिला, तो यह मान लिया जाएगा कि उन्होंने स्वेच्छा से पार्टी छोड़ दी है, जिसके बाद संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत उनकी सदस्यता रद्द करने की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।

'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चा और शिंदे गुट में जाने की अटकलें

यह विवाद तब खुलकर सामने आया जब दिल्ली में बुलाई गई संसदीय दल की महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से केवल 3 सांसद (अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे) ही पहुंचे। जबकि संजय दीना पाटिल, नागेश आष्टीकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, ओमप्रकाश राजेनिंबाल्कर और भाऊसाहेब वाकचौरे समेत 6 सांसद गायब रहे। राज्यसभा सांसद संजय राउत ने भी साफ कर दिया है कि इन बागी सांसदों को अयोग्य घोषित करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।

राजनीतिक गलियारों में इस पूरे घटनाक्रम को 'ऑपरेशन टाइगर' का नाम दिया जा रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि ये सभी 6 सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की तैयारी कर चुके हैं, जिसकी पुष्टि सत्ताधारी खेमे के कुछ नेताओं के बयानों से भी हो रही है।

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