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तमिलनाडु की सियासत में नई करवट, मुस्लिम लीग के फैसले ने बढ़ाई हलचल

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चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में नए बड़े समीकरण बनने के संकेत मिल रहे हैं। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) की लंबे समय से बेहद भरोसेमंद सहयोगी रही इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने आधिकारिक रूप से डीएमके के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (SPA) से अलग होने का बड़ा फैसला कर लिया है। इस अचानक आए सियासी मोड़ के बाद अब राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा बेहद तेज हो गई है कि क्या डीएमके भविष्य में केंद्र की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा बन सकती है। चेन्नई में आयोजित आईयूएमएल की जनरल काउंसिल की बैठक में पार्टी ने कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए, जिसमें डीएमके गठबंधन से अपना नाता तोड़ने का निर्णय मुख्य था। पार्टी नेतृत्व का साफ कहना है कि राज्य की बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए ही यह कदम उठाया गया है।

टीवीके सरकार को समर्थन बना गठबंधन टूटने की वजह

आईयूएमएल ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद उसने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार को अपना समर्थन दिया था। पार्टी के अनुसार, यह निर्णय किसी निजी राजनीतिक फायदे के लिए नहीं बल्कि राज्य में एक मजबूत राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया था। पार्टी अध्यक्ष केएम खादर मोहिदीन ने माना कि डीएमके गठबंधन के साथ रहते हुए आईयूएमएल को विधानसभा, लोकसभा और स्थानीय निकाय चुनावों में शानदार सफलता मिली थी, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए अब नए और स्वतंत्र राजनीतिक फैसले लेना बेहद आवश्यक हो गया था। बाद में पार्टी विधायक ए.एम. शाहजहां को नई सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री बनाए जाने से भी इन दोनों दलों के बीच दूरियां बढ़ती चली गईं।

कैसे बनी थी टीवीके सरकार और क्या है नया गणित

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर जरूर उभरी थी, लेकिन वह अपने दम पर पूर्ण बहुमत का जादुई आंकड़ा नहीं छू सकी थी। इसके बाद कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम, वीसीके और आईयूएमएल समेत कई अन्य प्रमुख दलों ने आगे आकर समर्थन दिया और राज्य में सरकार गठन का रास्ता साफ किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पहले कांग्रेस का टीवीके के साथ जाना और अब आईयूएमएल का डीएमके गठबंधन से पूरी तरह अलग हो जाना राज्य की विपक्षी राजनीति में एक बहुत बड़े पुनर्गठन और नए मोर्चे के गठन का साफ संकेत है।

क्या एनडीए की ओर बढ़ रही है डीएमके?

आईयूएमएल के गठबंधन से बाहर होने के बाद सबसे ज्यादा सुगबुगाहट डीएमके की संभावित राजनीतिक दिशा को लेकर हो रही है। सियासी सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार संसद में अपने भविष्य के बड़े विधायी एजेंडे और महत्वपूर्ण कानूनों को आगे बढ़ाने के लिए नए सहयोगी दलों का दायरा बढ़ाने पर लगातार विचार कर रही है। इसी कड़ी में डीएमके और एनडीए के बीच संभावित नजदीकियों की अटकलें तेजी से लगाई जा रही हैं। लोकसभा में डीएमके के पास 22 सांसद हैं, ऐसे में यदि पार्टी भविष्य में एनडीए का हिस्सा बनती है तो सत्तारूढ़ गठबंधन की ताकत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की सरकार की रणनीति को भारी मजबूती मिलेगी।

फिलहाल आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

हालांकि, डीएमके के एनडीए में शामिल होने की इन अटकलों को लेकर अभी तक न तो डीएमके के शीर्ष नेतृत्व और न ही भाजपा की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान या पुष्टि सामने आई है। फिलहाल यह पूरी चर्चा केवल राजनीतिक सूत्रों के दावों और कयासों तक ही सीमित है। लेकिन आईयूएमएल के इस बड़े फैसले के बाद इतना तो तय है कि तमिलनाडु की धरती पर आने वाले दिनों में एक नई राजनीतिक पटकथा लिखी जा सकती है।

लोकसभा में पास होगा परिसीमन बिल? बीजेपी जुटा रही दो-तिहाई बहुमत

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नई दिल्ली: विपक्षी दलों में लगातार हो रही बड़ी राजनीतिक टूट ने केंद्र की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार के हौसलों को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। इस सियासी फेरबदल से सरकार के भीतर यह भरोसा काफी बढ़ गया है कि अगले महीने शुरू होने वाले संसद के मॉनसून सत्र तक वे संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत का जादुई आंकड़ा आसानी से हासिल कर लेंगे। एक मीडिया रिपोर्ट में एक केंद्रीय मंत्री के हवाले से दावा किया गया है कि सरकार को पूरा विश्वास है कि मॉनसून सत्र के आगाज तक महिला आरक्षण को लोकसभा और विधानसभा सीटों के नए परिसीमन से जोड़ने वाले इस बेहद महत्वपूर्ण विधेयक के लिए आवश्यक संख्या बल जुटा लिया जाएगा।

दो बड़े ऐतिहासिक विधेयकों को पास कराने की तैयारी

केंद्र सरकार संसद के आगामी सत्र में दो बेहद अहम संविधान संशोधन विधेयकों को हरी झंडी दिखाने की पूरी तैयारी में है, जिन्हें कानून बनाने के लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत मिलना अनिवार्य है। इसके तहत देश में महिला आरक्षण की व्यवस्था को लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और उनकी सीमाओं को दोबारा तय करने (परिसीमन) की प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही, बीजेपी साल 2029 के आम चुनाव से काफी पहले पूरे देश में 'एक देश, एक चुनाव' यानी लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का कानून बनाना चाहती है। रणनीतिकारों का मानना है कि एक साथ चुनाव होने से पार्टी को राज्य के चुनावों में भी राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और राष्ट्रीय गौरव जैसे बड़े मुद्दों पर सीधे वोट मांगने का फायदा मिलेगा।

जादुई आंकड़े का गणित और विपक्ष में बगावत के संकेत

वर्तमान में 540 की प्रभावी संख्या वाली लोकसभा में किसी भी संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी कम से कम 360 वोटों की आवश्यकता है। फिलहाल लोकसभा में एनडीए की अपनी ताकत 293 सीटों की है। रणनीतिकारों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के 28 में से 20 बागी सांसदों और शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 बागी सांसदों के पाला बदलने की उम्मीद है, जिससे यह आंकड़ा 319 तक पहुंच सकता है। हालांकि यह संख्या अभी भी 360 के लक्ष्य से थोड़ी दूर है, लेकिन शीर्ष नेताओं का दावा है कि वे पूरी तरह आश्वस्त हैं कि 37 सांसदों वाली समाजवादी पार्टी समेत कई अन्य विपक्षी दलों में भी अगले कुछ हफ्तों में बड़ी बगावत देखने को मिल सकती है। सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में विपक्ष के भीतर कुछ ऐसे बड़े राजनीतिक उलटफेर होंगे जो उनकी ताकत को काफी कम कर देंगे।

सीटों के समीकरण बदलने का डर और सरकार का तर्क

दूसरी तरफ, विपक्ष को यह बड़ा डर सता रहा है कि पूरे देश में होने वाला यह नया परिसीमन सत्तारूढ़ दल को एक स्थायी और मजबूत बढ़त दे सकता है। विपक्षी दल इसके लिए असम में हुए परिसीमन का उदाहरण दे रहे हैं, जहां कुछ खास आबादी वाले क्षेत्रों की सीमाओं को इस तरह बदला गया जिससे विपक्ष की पारंपरिक सीटों का पूरा गणित ही बिगड़ गया। लोकसभा में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी सरकार पर राजनीतिक फायदे के लिए विपक्षी नेताओं के निर्वाचन क्षेत्रों को मनमाने ढंग से बदलने का सीधा आरोप लगाया था। हालांकि, सरकार इन आरोपों को सिरे से खारिज करती आई है। सरकार का तर्क है कि साल 1971 की जनगणना के बाद से देश की आबादी में भारी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसके बावजूद लोकसभा की सीटें नहीं बढ़ाई गई हैं, इसलिए देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए यह सुधार अब बेहद जरूरी हो चुका है।

इंदौर के नाम ऐतिहासिक उपलब्धि, सामूहिक भ्रामरी प्राणायाम में उमड़ा जनसैलाब

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इंदौर:अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर पूरे इंदौर शहर में योग का एक अद्भुत और उत्साहजनक माहौल देखने को मिला। वैसे तो इस खास दिन पर शहर के कोने-कोने में कार्यक्रम हुए, लेकिन मुख्य शासकीय आयोजन बास्केटबॉल स्टेडियम में संपन्न हुआ। "स्वस्थ जीवन के लिए योग" की विशेष थीम पर आधारित इस कार्यक्रम को जिला प्रशासन, आयुष विभाग, शिक्षा विभाग और नगर निगम ने मिलकर आयोजित किया था। आयोजन के दौरान बारिश की आशंका को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, ताकि लोगों को योगाभ्यास में कोई बाधा न आए। इस भव्य कार्यक्रम में तमाम जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया, जहां देश के प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री के योग संदेश का सीधा प्रसारण भी दिखाया गया।

10 हजार साधकों ने बनाया अनूठा रिकॉर्ड

इस साल इंदौर के गोपुर चौराहा पर 'योग मित्र अभियान' के तहत सबसे शानदार और आकर्षक नजारा देखने को मिला। सुबह 6:00 बजे शुरू हुए इस विशाल कार्यक्रम में करीब 10 हजार से अधिक योग साधकों ने एक साथ सुर में सुर मिलाकर भ्रामरी प्राणायाम किया, जो अपने आप में सामूहिक ऊर्जा और अनुशासन की एक बड़ी मिसाल बन गया। इस विशालकाय आयोजन को सफल बनाने के लिए शहर की 70 से ज्यादा योग संस्थाएं और 150 से अधिक सामाजिक संगठन एक साथ मंच पर आए। अनुभवी योग प्रशिक्षकों के निर्देशन में सभी ने तय प्रोटोकॉल के अनुसार योगाभ्यास किया। इस ऐतिहासिक पल का हिस्सा बनने के लिए केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उइके, नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी विशेष रूप से मौजूद रहे।

जागरूकता के लिए दो दिनी भव्य चित्र प्रदर्शनी

योग दिवस के इस पावन मौके पर इंदौर में केवल योगाभ्यास ही नहीं हुआ, बल्कि लोगों को इसके प्रति जागरूक करने के लिए अन्य गतिविधियां भी आयोजित की गईं। इसी कड़ी में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के केंद्रीय संचार ब्यूरो द्वारा रेसिडेंसी क्षेत्र के सेंट्रल जिमखाना क्लब में दो दिवसीय विशेष चित्र प्रदर्शनी की शुरुआत की गई। इस ज्ञानवर्धक प्रदर्शनी का उद्घाटन इंदौर के सांसद शंकर लालवानी ने किया। प्रदर्शनी में योग के प्राचीन इतिहास, उससे शरीर को होने वाले चमत्कारी फायदों और भारत की पारंपरिक स्वास्थ्य शैली को बेहद खूबसूरती से चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है। स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अनूठे प्रयासों से युवाओं में योग के प्रति आकर्षण और तेजी से बढ़ेगा।

नीट परीक्षा आज, EVM जैसी सुरक्षा में परीक्षा केंद्रों तक पहुंचे प्रश्नपत्र

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भोपाल: आज दोपहर से शुरू हो रही नीट (NEET UG) परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित और निष्पक्ष माहौल में कराने के लिए राजधानी भोपाल में सुरक्षा के बेहद कड़े और पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इस बार परीक्षा के प्रश्नपत्रों को केंद्रों तक पहुंचाने के लिए ठीक वैसी ही मजबूत सुरक्षा व्यवस्था अपनाई गई है जैसी चुनाव में ईवीएम मशीनों के लिए की जाती है। सभी प्रश्नपत्रों को 'स्टॉक रूम' से पूरी गोपनीयता के साथ अलग-अलग परीक्षा केंद्रों के लिए रवाना कर दिया गया है ताकि किसी भी स्तर पर कोई भी गड़बड़ी न हो सके।

तीन परत वाली सुरक्षा और क्यूआर कोड का पहरा

परीक्षा की सुचिता बनाए रखने के लिए प्रश्नपत्रों को तीन परत वाली सुरक्षा सील से बंद विशेष डिब्बों में रखा गया है। इन डिब्बों की सुरक्षा इतनी कड़ी है कि हर परीक्षा केंद्र पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के दो-दो जवान मुस्तैद किए गए हैं। नोडल अधिकारियों की सीधी देखरेख में इन प्रश्नपत्रों को बेहद सुरक्षित स्थानों पर रखा गया है, जिन्हें परीक्षा शुरू होने के ठीक पहले ही खोला जाएगा। पेपर लीक की किसी भी गुंजाइश को पूरी तरह खत्म करने के लिए हर बॉक्स पर एक खास क्यूआर (QR) कोड लगाया गया है, जिससे प्रश्नपत्रों की आवाजाही और उनके वितरण पर पल-पल की लाइव निगरानी रखी जा सके।

भोपाल में 32 केंद्र और ट्रैफिक पुलिस की विशेष तैयारी

भोपाल शहर में इस परीक्षा के लिए कुल 32 केंद्र बनाए गए हैं, जहां दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:15 बजे तक हजारों छात्र अपनी परीक्षा देंगे। परीक्षा के दिन छात्रों को आने-जाने में कोई समस्या न हो, इसके लिए शहर की ट्रैफिक पुलिस ने एक विशेष एडवाइजरी जारी की है। चूंकि शहर में कई जगहों पर मेट्रो का निर्माण कार्य चल रहा है, इसलिए कुछ रास्तों पर जाम या यातायात प्रभावित होने की आशंका है। ट्रैफिक पुलिस ने सभी अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों से अपील की है कि वे परीक्षा केंद्र के लिए घर से पर्याप्त समय पहले निकलें ताकि किसी भी तरह की देरी से बचा जा सके।

परीक्षा केंद्रों के लिए तय किए गए विशेष रूट

छात्रों की सुविधा के लिए ट्रैफिक पुलिस ने कुछ खास केंद्रों के लिए रूट प्लान तैयार किया है। आनंद नगर स्थित परीक्षा केंद्र जाने वाले छात्रों को सलाह दी गई है कि वे चेतक ब्रिज, गोविंदपुरा, भेल और महात्मा गांधी चौराहा वाले रास्ते का इस्तेमाल करें। वहीं, गौतम नगर के केंद्रों पर जाने वाले परीक्षार्थी नादरा बस स्टैंड, अग्रवाल धर्मशाला, छोला गणेश मंदिर और जेपी ब्रिज तिराहा वाले मार्ग से होकर आसानी से अपने केंद्र तक पहुंच सकते हैं।

हेल्पलाइन नंबर और जरूरी अपील

यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए पुलिस ने आम जनता और छात्रों से अपील की है कि वे परीक्षा केंद्रों के आसपास अपने वाहन बिल्कुल पार्क न करें, जिससे जाम की स्थिति पैदा न हो। किसी भी तरह की आपात स्थिति, परेशानी या रास्ते की जानकारी के लिए छात्र पुलिस के हेल्पलाइन नंबर 7049104825 और 7049104640 पर फोन कर सकते हैं। इसके अलावा, व्हाट्सएप नंबर 7587602055 पर भी मैसेज भेजकर तुरंत सहायता प्राप्त की जा सकती है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर देशभर में उत्साह, पीएम मोदी ने किया योगाभ्यास

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कोलकाता: आज देश और दुनिया भर में 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष योग दिवस को एक बेहद खूबसूरत और जरूरी विषय 'स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग' की थीम पर आयोजित किया गया है। इस खास मौके पर देश के मुख्य राष्ट्रीय कार्यक्रम का गवाह बनने का गौरव पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता को मिला। कोलकाता में आयोजित इस भव्य और ऐतिहासिक योग उत्सव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद शिरकत की, जहां उनके साथ करीब 35,000 लोगों ने एक साथ योगाभ्यास कर स्वास्थ्य और एकजुटता का एक बड़ा संदेश दिया।

दुनिया के बेहतर भविष्य के लिए योग जरूरी: पीएम मोदी

कोलकाता के इस मुख्य कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि योग आज केवल हमारी व्यक्तिगत जीवन शैली का हिस्सा मात्र नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरी दुनिया के एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य के लिए बेहद जरूरी आवश्यकता बन चुका है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने कोलकाता वासियों की विशेष तारीफ करते हुए कहा कि वे यहां की एक अद्भुत पहल 'स्वच्छता से स्वागत' और 'स्वच्छता के योग' के लिए वहां के नागरिकों की सराहना करते हैं। इस अवसर पर गृह मंत्री अमित शाह से लेकर देश के कई बड़े राजनेताओं ने भी अलग-अलग राज्यों में इस योग उत्सव में अपनी सहभागिता दर्ज कराई।

झांसी के ऐतिहासिक किले से सीएम योगी का संदेश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बार वीरांगना महारानी लक्ष्मी बाई की पावन धरती झांसी में आयोजित योग कार्यक्रम में हिस्सा लिया। ऐतिहासिक किले के प्रांगण में योगाभ्यास करने के बाद उन्होंने पूरे प्रदेश वासियों को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की बधाई दी। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि उनके प्रयासों के कारण ही आज भारत की प्राचीन परंपरा और अनमोल विरासत को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिली है, जिसने 140 करोड़ भारतवासियों को दुनिया के सामने गर्व से सिर उठाकर आगे बढ़ने का हौसला दिया है और साथ ही 'विकसित भारत' की संकल्पना को पूरा करने का एक बेहतरीन विजन प्रस्तुत किया है।

अहमदाबाद से लेकर शिलांग तक योग की धूम

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित सामूहिक कार्यक्रम में शामिल होकर योग किया। वहीं दक्षिण भारत की बात करें तो आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने लब्बीपेट के इंदिरा गांधी स्टेडियम में योग गुरु बाबा रामदेव के सानिध्य में आयोजित योग शिविर में हिस्सा लिया और योग के विभिन्न आसन किए। इसके अलावा, देश के सुदूर उत्तर-पूर्वी राज्य मेघालय की राजधानी शिलांग में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सैनिकों और स्थानीय लोगों के साथ योगाभ्यास किया। इस मौके पर रक्षा मंत्री ने योग के फायदों को रेखांकित करते हुए कहा कि योग हमें शारीरिक और मानसिक दोनों रूपों से पूरी तरह स्वस्थ रखता है और इसे आज जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतनी बड़ी पहचान मिली है, उसका पूरा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी प्रयासों को जाता है।

होर्मुज दोबारा बंद होने की आशंकाओं के बीच भारत के तीन तेल टैंकर सुरक्षित निकले

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होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा बंद होने की आशंकाओं के बीच भारत के तीन बड़े तेल टैंकर सुरक्षित इस समुद्री मार्ग को पार करने में सफल रहे हैं। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल की जंग शुरू होने के बाद से यह पहला मौका है, जब एक ही दिन में इतनी बड़ी संख्या में भारतीय जहाज होर्मुज पार कर भारत रवाना हुए हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय ध्वज वाले टैंकर देश वैभव, देश विभोर और सनमार हेराल्ड शनिवार को सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर गए। इन तीनों जहाजों में कुल 8.6 लाख टन कच्चा तेल लदा है, जो भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाले तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से दुनिया के कई देशों तक पहुंचता है। हाल के दिनों में क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के बाद होर्मुज की नाकेबंदी की वजह से जहाजों की आवाजाही रुक गई थी।
शिपिंग मंत्रालय के मुताबिक अब तक भारत आने वाले कुल 18 जहाज इस मार्ग को सुरक्षित पार कर चुके हैं। इनमें 13 भारतीय ध्वज वाले और 5 विदेशी ध्वज वाले जहाज शामिल हैं। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि सरकार भारतीय समुद्री हितों और नाविकों की सुरक्षा तय करने के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ काम कर रही है। उन्होंने बताया कि इन तीन जहाजों पर कुल 94 भारतीय नाविक तैनात हैं।
शिपिंग मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक देश वैभव 24 जून को गुजरात के वडीनार बंदरगाह पहुंच सकता है। वहीं देश विभोर भी 24 जून को गुजरात के सिक्का पोर्ट पहुंचने वाला है। इन जहाजों के पहुंचने से देश की रिफाइनरियों को कच्चे तेल की आपूर्ति में मजबूती मिलेगी और बाजार में संभावित आपूर्ति संकट की आशंकाएं कम होंगी। हालांकि होर्मुज की तस्वीर अभी भी पूरी तरह राहत भरी नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक भारत आने वाले 31 जहाज अभी भी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। इनमें 16 जहाज उर्वरक (फर्टिलाइजर) लेकर भारत आने वाले हैं। भारत की ओर आने वाले दो और जहाज एसएसएल कावेरी और देश सुरक्षा अभी होर्मुज के आसपास इंतजार कर रहे हैं. सभी की निगाहें अब इनके सुरक्षित पार होने पर टिकी हैं।

राज्य स्तरीय योग दिवस कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने किया योग, जबलपुर हुआ गौरवान्वित

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जबलपुर: देश और दुनिया के साथ-साथ आज मध्य प्रदेश के सभी जिलों में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष राज्यस्तरीय मुख्य योग कार्यक्रम का गौरवशाली आयोजन संस्कारधानी जबलपुर के गैरिसन ग्राउंड में किया गया। इस भव्य कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शामिल हुईं, जिन्होंने वहां मौजूद हजारों लोगों के साथ योग के अलग-अलग आसन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास किया।

'योग हजारों सालों की साधना की देन है'

इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि मां नर्मदा की इस पावन धरती पर आकर वे बेहद अभिभूत हैं। उन्होंने योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग ने हमेशा से मानवता को सरल और सहज बनाने का मार्ग दिखाया है और यह हमारी हजारों सालों की प्राचीन साधना की अद्भुत देन है, जो आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमें मानसिक शांति और संतुलन देता है। राष्ट्रपति ने खुशी जताते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया योग को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बना रही है। सरकार इसे जन-जन तक पहुंचाने का सराहनीय प्रयास कर रही है, और देश के प्रत्येक नागरिक को स्वस्थ रहने के लिए योग को अपने दैनिक जीवन में जरूर अपनाना चाहिए।

हजारों लोगों ने एक साथ किया योगाभ्यास

जबलपुर के गैरिसन ग्राउंड में आयोजित इस राज्यस्तरीय कार्यक्रम में करीब 5,000 लोगों ने एक साथ योगाभ्यास किया, जिसमें 31 अलग-अलग स्कूलों के 3,400 स्कूली बच्चे भी शामिल हुए। इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने के लिए मंच पर राज्यपाल मंगू भाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल भी मौजूद रहे और सभी ने मिलकर योग किया। इसके अलावा ग्वालियर के ऐतिहासिक दुर्ग पर 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का शानदार आयोजन किया गया, जहां प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट के साथ जिले के कलेक्टर, एसपी, कमिश्नर और तमाम प्रशासनिक अधिकारियों ने योगाभ्यास में हिस्सा लिया।

रीवा में डिप्टी सीएम का संदेश और इंदौर में बना नया रिकॉर्ड

योग दिवस की यह धूम प्रदेश के अन्य शहरों में भी देखने को मिली। रीवा के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स परिसर में मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने योग किया और लोगों को संदेश दिया कि यदि हमें हमेशा निरोगी और स्वस्थ रहना है, तो सिर्फ एक दिन नहीं बल्कि हर दिन योग करना चाहिए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ में 21 जून को योग दिवस घोषित कराने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों को देश के लिए एक बड़ा गौरव बताया। वहीं दूसरी तरफ, इंदौर शहर ने इस खास मौके पर एक नया विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कर लिया। इंदौर में आयोजित सामूहिक योग कार्यक्रम में हजारों लोगों ने एक साथ 3 मिनट से ज्यादा समय तक भ्रामरी प्राणायाम किया। इस कीर्तिमान को बनाने में 70 से ज्यादा योग संस्थाओं और 150 से अधिक सामाजिक संगठनों ने अपनी भागीदारी निभाई, जहां केंद्रीय राज्यमंत्री दुर्गादास उईके, कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

नीट री-एग्जाम आज, 22.79 लाख उम्मीदवारों की परीक्षा पर देशभर की नजर

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नई दिल्ली: देशभर के लाखों मेडिकल उम्मीदवारों के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज नीट (UG) की बड़ी परीक्षा आयोजित की जा रही है। इस महापरीक्षा में देशभर से 22.79 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं शामिल हो रहे हैं। परीक्षा को लेकर छात्रों और अभिभावकों में भारी उत्सुकता देखी जा रही है। इस बड़े दिन पर परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा करके सभी अभ्यर्थियों को अपनी शुभकामनाएं दी हैं। एनटीए ने छात्रों से अपील की है कि वे परीक्षा के दौरान पूरी तरह शांत रहें, खुद पर आत्मविश्वास बनाए रखें और बिना किसी तनाव के अपना सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करें।

परीक्षा के समय में हुआ बड़ा बदलाव

इस साल की परीक्षा में छात्रों की सुविधा के लिए एक बड़ा बदलाव किया गया है। अब तक नीट परीक्षा के लिए छात्रों को कुल 180 मिनट का समय मिलता था, लेकिन इस बार परीक्षा की अवधि को बढ़ाकर 195 मिनट (3 घंटे 15 मिनट) कर दिया गया है। परीक्षा दोपहर 2:00 बजे शुरू होगी और शाम 5:15 बजे तक चलेगी। समय में की गई यह बढ़ोतरी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस अतिरिक्त समय के दौरान परीक्षा कक्ष की जरूरी औपचारिकताएं, अटेंडेंस शीट पर हस्ताक्षर और सुरक्षा जांच जैसी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी, जिससे छात्रों का लिखने का समय बर्बाद नहीं होगा। इसके अलावा दिव्यांग उम्मीदवारों को परीक्षा के लिए अतिरिक्त समय दिया जाएगा, जिससे वे शाम 6:20 बजे तक अपना पेपर पूरा कर सकेंगे।

एंट्री का समय और कड़े सुरक्षा इंतजाम

परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष और सुरक्षित माहौल में कराने के लिए देश भर के केंद्रों पर निगरानी के विशेष और कड़े इंतजाम किए गए हैं। हालांकि परीक्षा दोपहर 2:00 बजे से शुरू होगी, लेकिन छात्रों को केंद्र पर काफी पहले पहुंचना होगा। परीक्षा केंद्रों पर एंट्री सुबह 11:00 बजे से ही शुरू कर दी जाएगी और दोपहर 1:30 बजे केंद्रों के मुख्य गेट पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे। एनटीए ने साफ कर दिया है कि दोपहर 1:30 बजे के बाद किसी भी परिस्थिति में किसी भी छात्र को परीक्षा केंद्र के अंदर जाने की अनुमति नहीं मिलेगी, इसलिए सभी उम्मीदवारों को समय का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है।

मोदी की तारीफ बनी विवाद की वजह, कांग्रेस नेताओं में जुबानी जंग

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति को लेकर कांग्रेस के भीतर चल रहा अंदरूनी मतभेद अब खुलकर जनता के सामने आ गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता पवन खेड़ा के बीच इस मुद्दे पर तीखी जुबानी तकरार देखने को मिल रही है। पवन खेड़ा द्वारा किए गए एक तीखे कटाक्ष के बाद शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर अपनी स्थिति साफ की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपनी तरफ से ऐसी कोई बात नहीं कही जो प्रधानमंत्री ने न कही हो, बल्कि वे केवल समाचारों में छपी रिपोर्टों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियों का ही हवाला दे रहे थे।

शशि थरूर का तथ्यों के साथ पलटवार

शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जवाब देते हुए शशि थरूर ने कहा कि जो लोग यह मान रहे हैं कि उन्होंने प्रधानमंत्री के मुंह से ऐसे शब्द सुन लिए जो कभी कहे ही नहीं गए, उन्हें जमीनी हकीकत समझनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वे केवल उन रिपोर्टों का उल्लेख कर रहे थे जो मीडिया में बड़े स्तर पर प्रकाशित हुई थीं। अपनी बात को सही साबित करने के लिए थरूर ने एक समाचार वीडियो और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित एक रिपोर्ट भी साझा की। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि वे हमेशा पूरी रिसर्च और पुख्ता तथ्यों के आधार पर ही अपनी बात जनता के सामने रखते हैं और उनके पूरे राजनीतिक जीवन में आज तक उन पर गलत जानकारी देने या तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का कोई आरोप नहीं लगा है।

विवाद की मुख्य वजह और पवन खेड़ा का कटाक्ष

दरअसल, इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब शशि थरूर ने दावा किया था कि हाल ही में हुए जी-7 (G7) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक समुद्री रास्तों की सुरक्षा और नाविकों की हिफाजत का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। थरूर के अनुसार, यह बयान उस घटना के बाद आया था जिसमें ओमान की खाड़ी के पास एक कथित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई थी। इस बयान पर आपत्ति जताते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान थरूर पर निशाना साधा था। उन्होंने मजाकिया और तंजिया लहजे में कहा था कि प्रधानमंत्री के प्रति थरूर की तारीफ अब इस दुनिया की सीमाओं से परे जा चुकी है, और अब तो वे वह सब भी सुन लेते हैं जो प्रधानमंत्री ने असल में कभी कहा ही नहीं।

कांग्रेस के इन दो दिग्गज नेताओं के बीच सार्वजनिक रूप से हुई यह बयानबाजी ऐसे समय में आई है जब पार्टी के अंदर कई रणनीतियों को लेकर पहले से ही खींचतान की खबरें आ रही हैं। थरूर के इस करारे जवाब के बाद अब यह मामला सियासी गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।

राजभवन से झांसी तक योग की गूंज, राज्यपाल और सीएम योगी ने किया अभ्यास

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पूरे हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष योग दिवस को एक विशेष उद्देश्य के साथ 'स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग' की थीम पर आयोजित किया गया है। सुबह से ही राज्य के कोने-कोने में योग कार्यक्रमों की धूम देखने को मिली, जिसमें आम जनता से लेकर बड़े नेताओं तक ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। राजधानी लखनऊ में स्थित राजभवन के लॉन में सुबह 6 बजे एक भव्य सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने खुद शामिल होकर योग किया और लोगों को अच्छी सेहत का संदेश दिया।

झांसी में मुख्यमंत्री ने किया योगाभ्यास

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बार झांसी में आयोजित मुख्य योग कार्यक्रम में शिरकत की और वहां मौजूद जनसैलाब के साथ योगाभ्यास किया। इस खास अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि उनके प्रयासों की बदौलत ही आज भारत की इस महान प्राचीन परंपरा और अनमोल विरासत को वैश्विक स्तर पर एक नई और मजबूत पहचान मिली है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश के सामने एक ऐसा विजन रखा है, जिससे 140 करोड़ भारतीय दुनिया के सामने गर्व से खड़े हो सकते हैं और साथ मिलकर 'विकसित भारत' के सपने को सच कर सकते हैं।

'योग से निरोग' अभियान में जुटे दिग्गज

विश्व योग दिवस के मौके पर भारतीय जनता पार्टी पूरे प्रदेश में 'योग से निरोग' का नारा बुलंद कर रही है और हर नागरिक को इस स्वस्थ जीवनशैली से जोड़ने की कोशिश में जुटी है। इसी अभियान के तहत प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने महाराजगंज में पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के साथ योग किया। इसके साथ ही राजनीति के कई अन्य बड़े चेहरों ने भी अलग-अलग जिलों में कमान संभाली, जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह ने हापुड़ में, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रयागराज में, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने लखनऊ में और प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह ने लखनऊ के राजाजीपुरम में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लिया। इस महाभियान में प्रदेश सरकार के मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, मेयर और नगर निकाय के जनप्रतिनिधियों से लेकर बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं तक ने स्थानीय नागरिकों के साथ मिलकर योग को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया।

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