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मोदी की तारीफ बनी विवाद की वजह, कांग्रेस नेताओं में जुबानी जंग

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति को लेकर कांग्रेस के भीतर चल रहा अंदरूनी मतभेद अब खुलकर जनता के सामने आ गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता पवन खेड़ा के बीच इस मुद्दे पर तीखी जुबानी तकरार देखने को मिल रही है। पवन खेड़ा द्वारा किए गए एक तीखे कटाक्ष के बाद शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर अपनी स्थिति साफ की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपनी तरफ से ऐसी कोई बात नहीं कही जो प्रधानमंत्री ने न कही हो, बल्कि वे केवल समाचारों में छपी रिपोर्टों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियों का ही हवाला दे रहे थे।

शशि थरूर का तथ्यों के साथ पलटवार

शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जवाब देते हुए शशि थरूर ने कहा कि जो लोग यह मान रहे हैं कि उन्होंने प्रधानमंत्री के मुंह से ऐसे शब्द सुन लिए जो कभी कहे ही नहीं गए, उन्हें जमीनी हकीकत समझनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वे केवल उन रिपोर्टों का उल्लेख कर रहे थे जो मीडिया में बड़े स्तर पर प्रकाशित हुई थीं। अपनी बात को सही साबित करने के लिए थरूर ने एक समाचार वीडियो और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित एक रिपोर्ट भी साझा की। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि वे हमेशा पूरी रिसर्च और पुख्ता तथ्यों के आधार पर ही अपनी बात जनता के सामने रखते हैं और उनके पूरे राजनीतिक जीवन में आज तक उन पर गलत जानकारी देने या तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का कोई आरोप नहीं लगा है।

विवाद की मुख्य वजह और पवन खेड़ा का कटाक्ष

दरअसल, इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब शशि थरूर ने दावा किया था कि हाल ही में हुए जी-7 (G7) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक समुद्री रास्तों की सुरक्षा और नाविकों की हिफाजत का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। थरूर के अनुसार, यह बयान उस घटना के बाद आया था जिसमें ओमान की खाड़ी के पास एक कथित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई थी। इस बयान पर आपत्ति जताते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान थरूर पर निशाना साधा था। उन्होंने मजाकिया और तंजिया लहजे में कहा था कि प्रधानमंत्री के प्रति थरूर की तारीफ अब इस दुनिया की सीमाओं से परे जा चुकी है, और अब तो वे वह सब भी सुन लेते हैं जो प्रधानमंत्री ने असल में कभी कहा ही नहीं।

कांग्रेस के इन दो दिग्गज नेताओं के बीच सार्वजनिक रूप से हुई यह बयानबाजी ऐसे समय में आई है जब पार्टी के अंदर कई रणनीतियों को लेकर पहले से ही खींचतान की खबरें आ रही हैं। थरूर के इस करारे जवाब के बाद अब यह मामला सियासी गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।

राजभवन से झांसी तक योग की गूंज, राज्यपाल और सीएम योगी ने किया अभ्यास

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पूरे हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष योग दिवस को एक विशेष उद्देश्य के साथ 'स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग' की थीम पर आयोजित किया गया है। सुबह से ही राज्य के कोने-कोने में योग कार्यक्रमों की धूम देखने को मिली, जिसमें आम जनता से लेकर बड़े नेताओं तक ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। राजधानी लखनऊ में स्थित राजभवन के लॉन में सुबह 6 बजे एक भव्य सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने खुद शामिल होकर योग किया और लोगों को अच्छी सेहत का संदेश दिया।

झांसी में मुख्यमंत्री ने किया योगाभ्यास

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बार झांसी में आयोजित मुख्य योग कार्यक्रम में शिरकत की और वहां मौजूद जनसैलाब के साथ योगाभ्यास किया। इस खास अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि उनके प्रयासों की बदौलत ही आज भारत की इस महान प्राचीन परंपरा और अनमोल विरासत को वैश्विक स्तर पर एक नई और मजबूत पहचान मिली है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश के सामने एक ऐसा विजन रखा है, जिससे 140 करोड़ भारतीय दुनिया के सामने गर्व से खड़े हो सकते हैं और साथ मिलकर 'विकसित भारत' के सपने को सच कर सकते हैं।

'योग से निरोग' अभियान में जुटे दिग्गज

विश्व योग दिवस के मौके पर भारतीय जनता पार्टी पूरे प्रदेश में 'योग से निरोग' का नारा बुलंद कर रही है और हर नागरिक को इस स्वस्थ जीवनशैली से जोड़ने की कोशिश में जुटी है। इसी अभियान के तहत प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने महाराजगंज में पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के साथ योग किया। इसके साथ ही राजनीति के कई अन्य बड़े चेहरों ने भी अलग-अलग जिलों में कमान संभाली, जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह ने हापुड़ में, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रयागराज में, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने लखनऊ में और प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह ने लखनऊ के राजाजीपुरम में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लिया। इस महाभियान में प्रदेश सरकार के मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, मेयर और नगर निकाय के जनप्रतिनिधियों से लेकर बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं तक ने स्थानीय नागरिकों के साथ मिलकर योग को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया।

घर में बेल वृक्ष लगाना आखिर क्यों है इतना मुश्किल, नियमों व दिशाओं से डर जाते हैं शिवभक्त

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बेलवृक्ष को शास्त्रों में अत्यंत पवित्र और शुभ माना गया है. मान्यता है कि घर में बेल का पेड़ लगाने से भगवान शिव और माता लक्ष्मी दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है. फिर भी अधिकतर लोग इसे घर में लगाने से कतराते हैं, क्योंकि दिशाओं, नियमों और परंपराओं को लेकर भ्रम और डर बना रहता है, जिससे शिवभक्त भी निर्णय नहीं ले पाते… 

हिंदू धर्म की पारंपरिक परंपरा में यह माना जाता है कि कुछ विशेष प्रकार के पेड़-पौधे में दिव्य शक्तियां होती हैं. उन्हीं में से एक है भगवान शिव का प्रिय बेल पत्र, जिसे श्रीफल भी कहा जाता है और तेलुगु में इसे मरेदु के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि शिवलिंग पर अगर आप तीन पत्तियों वाला बेलपत्र और एक लोटा जल अर्पित करते हैं तो भगवान शिव आपकी सभी मनोकामनाओं को पूरा करते हैं. यह तो हम सभी जानते हैं कि भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का कितना महत्व है लेकिन क्या आप घर में बेलपत्र का पौधे होने के फायदे जानते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस घर में बेलपत्र का पौधा होता हैं, वहां शिव के साथ माता लक्ष्मी स्वयं निवास करती हैं लेकिन इस पौधे की देखरेख में कई नियमों का पालन किया जाता है. आइए जानते हैं घर में बेल पत्र का पौधा होने के फायदे और किन नियमों का करें पालन…

शास्त्रों के अनुसार, बेल वृक्ष शिव का साक्षात रूप और देवी लक्ष्मी की प्रतिकृति माना जाता है. पुराणों के अनुसार, यह बेल वृक्ष देवी महालक्ष्मी की कठोर तपस्या के फलस्वरूप उत्पन्न हुआ था. देवी भागवतम् में बताया गया है कि इस वृक्ष की जड़ों में देवी गिरिजा, तने में देवी महेश्वरी, शाखाओं में देवी कात्यायनी और पत्तियों में स्वयं मां लक्ष्मी निवास करती हैं. इसलिए, घर में बेलवृक्ष लगाने से घर मंदिर के समान हो जाता है. ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि जिस घर में बेल वृक्ष स्वस्थ रूप से उगता है, वहां नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश बिलकुल नहीं हो सकता.

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में बेल वृक्ष लगाने के लिए कुछ विशेष दिशाएं पहले से निर्धारित हैं. घर के उत्तर-पूर्व, उत्तर या उत्तर-पश्चिम दिशा में इस वृक्ष को लगाना सबसे शुभ माना जाता है. उत्तर-पूर्व कोने में बेल वृक्ष लगाने से परिवार के पैतृक और वास्तु संबंधी दोष पूरी तरह से दूर हो जाते हैं. साथ ही इससे देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और आर्थिक कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है.

हालांकि, ज्योतिषी चेतावनी देते हैं कि घर में बेल का पौधा उगाने वालों को कुछ महत्वपूर्ण नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए. इस वृक्ष की देखभाल पूरी श्रद्धा से करनी चाहिए. इसे नियमित रूप से पानी दें और वृक्ष के आसपास के क्षेत्र को साफ रखें. इस वृक्ष को अपवित्र हाथों से या बीमार होने पर नहीं छूना चाहिए. विशेष रूप से चतुर्दशी तिथि, अष्टमी तिथि, अमावस्या तिथि, पूर्णिमा तिथि और सोमवार को पूजा के लिए बेल के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए. अगर आपको शिव पूजन करना है तो इन तिथियों से एक दिन पहले ही बेलपत्र की पत्तियों तोड़कर स्वच्छ स्थान पर रख दें.

ज्योतिषाचार्यों का मानना ​​है कि घर में बेल का वृक्ष लगाना परिवार के लिए कल्प वृक्ष के समान है. शिव पुराण में बताया गया है कि हर दिन सुबह इस वृक्ष के दर्शन करने से अश्वमेध यज्ञ करने के समान पुण्य प्राप्त होता है. हालांकि, जिनके पास जगह नहीं है, वे इसे गमलों में छोटे पौधे के रूप में भी उगा सकते हैं, इसमें कोई समस्या नहीं है. ऐसा कहा जाता है कि अगर बेल का वृक्ष श्रद्धा और भक्ति से घर में उगाया जाए और नियमित रूप से पूजा की जाए, तो घर भगवान शिव और महालक्ष्मी का स्थायी निवास बन जाता है.

घर में गणेश मूर्ति की स्थापना कहां पर करनी चाहिए? जानें वास्तु के नियम

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विघ्नहर्ता श्री गणेश जी प्रथम पूज्य हैं. उनकी पूजा के बिना कोई कार्य सफल सिद्ध नहीं हो सकता है. हर हिंदू घर के पूजा स्थान या पूजा घर में गणेश जी की एक मूर्ति जरूर रहती है. गणेश जी की पूजा विधि विधान से करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. जीवन के संकट और विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं. कई लोगों के घरों में एक से अधिक गणेश जी की मूर्तियां होती हैं, लेकिन वे सही जगह या सही दिशा में नहीं होती है. आइए जानते हैं कि घर में गणेश मूर्ति कहां रखनी चाहिए? इसके संदर्भ में वास्तु के नियम क्या हैं?
घर में गणेश मूर्ति किस दिशा में रखनी चाहिए?
गणेश जी की मूर्ति को हमेशा घर के ईशान कोण यानि की उत्तर-पूर्व दिशा में रखना चाहिए. उत्तर-पूर्व कोने को देवों का स्थान माना जाता है. इस स्थान पर घर का पूजा स्थान होना चाहिए. गणेश जी की मूर्ति इस तरह से रखें कि पूजा के समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा में हो. यदि उत्तर-पूर्व कोना के अलावा पश्चिम और उत्तर दिशा में भी गणेश मूर्ति रख सकते हैं.
गणेश मूर्ति रखने के वास्तु नियम क्या हैं?
गणेश जी मूर्ति को भूलकर भी घर की दक्षिण दिशा में न रखें. इस दिशा को यमराज और पितरों की दिशा कहा जाता है.
वास्तु के अनुसार गणेश जी या अन्य देवी और देवताओं की मूर्तियों को सीढ़ियों के नीचे नहीं रखना चाहिए. सीढ़ियों के नीचे पूजा स्थान न बनाएं, क्योंकि जब आप सीढ़ियों पर चढ़ेंगे तो भगवान की मूर्तियां पैरों के नीचे आएंगी, जिससे दोष लगेगा.
गणेश जी और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियों को टॉयलेट या बाथरूम की दीवार से सटाकर न रखें या इस स्थान से सटकर पूजा घर नहीं होना चाहिए. इससे घर में वास्तु दोष उत्पन्न होता है.
घर के बेडरूम में भी गणेश जी या किसी अन्य देवी-देवता की मूर्ति नहीं रखनी चाहिए. इससे वैवाहिक जीवन में तनाव हो सकता है.
पूजा घर में हमेशा बायीं ओर मुड़ी हुई सूंड वाले गणेश जी की मूर्ति की स्थापना करते हैं. इस मूर्ति की पूजा में कड़े नियमों का पालन नहीं करना होता है. आप सामान्य विधि से वाममुखी गणेश की पूजा कर सकते हैं.
दायीं ओर मुड़ी सूंड वाली गणेश जी की मूर्ति की पूजा के नियम काफी कठिन होते हैं. इस वज​ह से ऐसी मूर्तियों को मंदिरों में ही स्थापित करते हैं और पूरे विधि विधान से पूजा की जाती है.
घर में सुख-शांति के लिए गणेश जी की सफेद रंग की मूर्ति रखें. वहीं परिवार के तरक्की और समृद्धि के लिए गणेश जी की सिंदूरी रंग की मूर्ति स्थापित करें.
घर में एक से ज्यादा गणेश मूर्ति रखना सही है क्या?
हमेशा घर में गणेश जी की एक या दो मूर्ति ही रखनी चाहिए. तीन तीन मूर्तियों को रखने से वास्तु दोष होता है. यदि दो मूर्तियां रखते हैं, तो उनका मुख आमने-सामने नहीं होना चाहिए.

क्या भगवान कृष्ण की बेटी भी थी? पत्नियां भी 16 हजार! जान लें कितने थे बच्चे

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भगवान कृष्ण का जीवन हमेशा से लोगों के लिए आस्था और जिज्ञासा का विषय रहा है. उनके विवाह, परिवार और संतानों से जुड़ी कई बातें धार्मिक ग्रंथों में मिलती हैं. अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि भगवान कृष्ण की कितनी पत्नियां थीं, क्या उनकी बेटी थी और उनके कितने बच्चे थे. इन सभी बातों का वर्णन अलग-अलग धार्मिक कथाओं और मान्यताओं में मिलता है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान कृष्ण की 8 प्रमुख पत्नियां थीं, जिन्हें अष्टभार्या कहा जाता है. इनमें रुक्मिणी, सत्यभामा, जाम्बवती, कालिंदी, मित्रविंदा, नाग्नजिति, भद्रा और लक्ष्मणा का नाम शामिल है. इन रानियों से जुड़ी कई कथाएं पुराणों में बताई गई हैं.
रुक्मिणी को भगवान कृष्ण की प्रमुख पत्नी माना जाता है. धार्मिक कथाओं के अनुसार उनका विवाह कृष्ण से हुआ था और उनके जीवन से जुड़े कई प्रसंगों का वर्णन मिलता है. सत्यभामा और जाम्बवती से जुड़ी कथाएं भी धार्मिक ग्रंथों में प्रसिद्ध हैं.

16 हजार पत्नियों वाली मान्यता क्या है?
धार्मिक कथाओं के अनुसार भगवान कृष्ण ने नरकासुर के बंधन से 16,100 महिलाओं को मुक्त कराया था. मान्यता है कि समाज में सम्मान बनाए रखने के लिए कृष्ण ने उन्हें पत्नी का स्थान दिया. इसी वजह से कई धार्मिक ग्रंथों में कृष्ण की 16,108 पत्नियों का उल्लेख मिलता है. यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पुराणों पर आधारित है. इसके अलग-अलग विवरण अलग परंपराओं में मिल सकते हैं.

क्या भगवान कृष्ण की बेटी भी थी?
भगवान कृष्ण की संतानों में पुत्रों का वर्णन ज्यादा मिलता है, लेकिन कुछ धार्मिक ग्रंथों में उनकी बेटी का भी उल्लेख किया गया है. मान्यता के अनुसार भगवान कृष्ण की पुत्री का नाम चारुमती था. हालांकि उनके बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन कुछ कथाओं में उनका नाम मिलता है.
भगवान कृष्ण के प्रसिद्ध पुत्र कौन थे?
भगवान कृष्ण के सबसे प्रसिद्ध पुत्रों में प्रद्युम्न का नाम लिया जाता है. वे कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र थे. धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रद्युम्न को भगवान कामदेव का स्वरूप भी माना जाता है. इसके अलावा कृष्ण के अन्य पुत्रों का भी अलग-अलग ग्रंथों में वर्णन मिलता है.

जालोर का 300 साल पुराना हनुमान मंदिर, अकाल में प्रकट हुई प्रतिमा से बसी आस्था की कहानी

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राजस्थान के जालोर जिले के आलासन गांव में स्थित 300 साल पुराना हनुमान मंदिर आस्था और चमत्कार की अनूठी मिसाल माना जाता है. मान्यता है कि भीषण अकाल के दौरान एक साधु के संकेत पर जाल के पेड़ के नीचे बजरंगबली की प्रतिमा प्रकट हुई, जिसके बाद ग्रामीणों ने पलायन का विचार त्याग दिया. आज 35 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा वाला यह मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा और विश्वास का प्रमुख केंद्र बन चुका है.

जालोर जिले के आलासन गांव में स्थित हनुमान जी का मंदिर लगभग 300 साल पुराना एक ऐतिहासिक और धार्मिक आस्था का केंद्र माना जाता है. यह मंदिर न सिर्फ स्थानीय लोगों की श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि जालोर की सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है. दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं और इसे चमत्कारी स्थल के रूप में भी देखते हैं. यहां हर मंगलवार और शनिवार को विशेष भीड़ रहती है, जब लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं. मंदिर परिसर में भक्तों की आस्था और भक्ति का माहौल हर समय देखने को मिलता है.

मान्यता के अनुसार, लगभग तीन शताब्दी पहले इस क्षेत्र में भीषण अकाल पड़ा था, जिससे हालात इतने बिगड़ गए कि पूरा गांव पलायन करने को मजबूर हो गया था. उस समय पानी और अनाज की भारी कमी के कारण लोगों के सामने जीवन यापन का संकट खड़ा हो गया था. इसी कठिन समय में इस स्थान पर एक ऐसी घटना हुई, जिसने गांव वालों की दिशा ही बदल दी और इस भूमि को आस्था का नया केंद्र बना दिया. यह घटना आज भी ग्रामीणों के बीच श्रद्धा और विश्वास की मिसाल के रूप में सुनाई जाती है.

किंवदंती है कि एक ग्रामीण को ‘जाल’ के पेड़ के नीचे एक साधु ने रोका और वहीं पर बजरंगबली की प्रतिमा के प्राकट्य की बात कही. साधु के इस संकेत को ग्रामीण ने गंभीरता से लिया और इस बात को पूरे गांव में बताया. इस घटना को ग्रामीणों ने ईश्वरीय संकेत माना और उन्होंने पलायन का विचार छोड़कर यहीं बसने का निर्णय लिया. लोगों का मानना है कि यह स्वयं हनुमान जी की कृपा थी, जिसने उन्हें संकट से बाहर निकलने का रास्ता दिखाया.

धीरे-धीरे यह स्थान श्रद्धा और विश्वास का बड़ा केंद्र बन गया. ग्रामीणों ने मिलकर यहां पूजा-अर्चना शुरू की और समय के साथ इस छोटे से स्थल का विकास होता गया. आसपास के गांवों से भी लोग यहां आने लगे, जिससे इसकी प्रसिद्धि बढ़ती चली गई. मंदिर में समय-समय पर धार्मिक आयोजन और भजन-कीर्तन भी होते हैं, जो इसे जीवंत बनाए रखते हैं. यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी समस्याओं के समाधान और मानसिक शांति के लिए प्रार्थना करते हैं.

आज आलासन हनुमान मंदिर एक भव्य स्वरूप में स्थापित है, जहां लगभग 35 फीट ऊंची हनुमान जी की प्रतिमा श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है. मंदिर का वर्तमान स्वरूप वर्षों की आस्था और सामूहिक प्रयासों का परिणाम है. यह मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि लोगों की आस्था, संघर्ष और विश्वास की जीवंत कहानी भी बयां करता है. यहां आने वाला हर व्यक्ति एक अलग ही आध्यात्मिक ऊर्जा और सुकून का अनुभव करता है.

राशिफल 21 जून 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा

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  • मेष राशि :- तनाव, उदर रोग, विवाद, लाभ, राजभय, पारिवारिक समस्या उलझनें पैदा करेंगी। 
  • वृष राशि :- शत्रुभय, शुभ मंगल कार्य में विरोध, मामले-मुकदमें में जीत की संभावना बनी रहेगी। 
  • मिथुन राशि :- कुसंगति से हानि, रोगभय, यात्रा व सामाजिक कार्यों में सावधानी अवश्य रखें। 
  • कर्क राशि :- पराक्रम, कार्य सिद्धी, व्यापार लाभ सामान्य हो सकता है, कार्य बन ही जायेंगे। 
  • सिंह राशि :- तनाव, प्रवास से बचें, विरोध चिन्ता, राजकार्य में प्रतिष्ठा मिल सकती है। 
  • कन्या राशि :- भूमि लाभ, स्त्री सुख, हर्ष, प्रगति होगी, स्थिति में सुधार होगा, लाभ की गति बढ़ेगी। 
  • तुला राशि :- प्रगति, वाहन भय, भूमि लाभ, कलह, कुछ अच्छे कार्य भी होंगे, लाभ होगा। 
  • वृश्चिक राशि :- कार्य सिद्धी, विरोध, लाभ से हर्ष होगा, व्यय होगा, व्यापार में सुधार कार्य होगा। 
  • धनु राशि :- यात्रा में हानि, मातृ-पितृ कष्ट, व्यय, उन्नति में कुछ कमी, यात्रा व्यवस्थित होगी। 
  • मकर राशि :- शुभ कार्य होंगे, वाहनादि रोगभय, आर्थिक कार्यों में सुधार होगा ध्यान अवश्य दें। 
  • कुंभ राशि :- अभीष्ट सिद्धी, राजभय, कार्य बाधा दूर होगी, सामाजिक कार्यों से लाभ होगा ध्यान दें। 
  • मीन राशि :- अल्प हानि, रोगभय, सम्पत्ति लाभ, राजकार्य में विलम्ब तथा परेशानी बढ़ेगी। 
     

अमित शाह ने पुराने दौर को याद कर साधा निशाना, कहा- तब धमाके होते थे और सरकार मौन रहती थी

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मुंबई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक व्यापारिक व सामाजिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्ववर्ती कांग्रेस नीत यूपीए (UPA) सरकार की आंतरिक सुरक्षा नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आयोजित इस भव्य समारोह के दौरान शाह ने कहा कि करीब 12 वर्ष पहले जब केंद्र में पूर्ववर्ती गठबंधन की सरकार थी, तब देश के विभिन्न हिस्सों में आए दिन सिलसिलेवार बम धमाके और आतंकवादी घटनाएं होती थीं। परंतु, तत्कालीन नेतृत्व और प्रधानमंत्री इन गंभीर राष्ट्रीय संकटों पर पूरी तरह मौन साधे रहते थे, जिससे देश की सुरक्षा व्यवस्था कमजोर दिखाई देती थी।

उरी और पुलवामा का बदला: सर्जिकल व एयर स्ट्राइक से दिया करारा जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार की रक्षा और रणनीतिक नीतियों को रेखांकित करते हुए अमित शाह ने कहा कि साल 2014 के बाद देश की सुरक्षा नीति में एक युगांतकारी परिवर्तन आया है। उन्होंने जोर देकर कहा:

  • त्वरित सैन्य कार्रवाई: पीएम मोदी के कार्यकाल के दौरान जब भी आतंकवादियों ने उरी, पुलवामा या पहलगाम जैसी जगहों पर भारतीय सीमाओं और जवानों को निशाना बनाने का दुस्साहस किया, तब भारत ने सीमा पार जाकर 'सर्जिकल स्ट्राइक' और 'एयर स्ट्राइक' जैसी ऐतिहासिक सैन्य कार्यवाहियों के जरिए दुश्मनों को उनकी ही भाषा में करारा जवाब दिया।

  • आतंक विरोधी अभियान: इसके साथ ही आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे कड़े कदमों ने देश विरोधी ताकतों के हौसले पूरी तरह पस्त कर दिए हैं।

गोला-बारूद की कमी से मिसाइल युग तक: सशस्त्र बलों का हुआ आधुनिकीकरण

गृह मंत्री ने रक्षा क्षेत्र में देश की आत्मनिर्भरता का जिक्र करते हुए कहा कि मोदी सरकार के तहत भारतीय सशस्त्र बलों (थलसेना, वायुसेना और नौसेना) का व्यापक स्तर पर आधुनिकीकरण किया गया है। उन्होंने कहा, "देश में एक ऐसा दौर भी था जब हमारी सेनाओं के लिए बुनियादी गोलियां और छोटे हथियार तक भारत में नहीं बनते थे और हमें विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन आज मेक इन इंडिया (Make in India) के तहत देश के भीतर ही अत्याधुनिक मिसाइलें, लड़ाकू विमान और भारी सैन्य साजो-सामान तैयार किए जा रहे हैं।"

कश्मीर में शांति, पूर्वोत्तर सुरक्षित और नक्सलवाद हुआ बीते दिनों की बात

देश के आंतरिक सुरक्षा परिदृश्य की समीक्षा करते हुए अमित शाह ने दावा किया कि वर्तमान सरकार की प्रभावी और जीरो-टॉलरेंस (शून्य सहिष्णुता) नीति के कारण सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी नेटवर्क की कमर पूरी तरह तोड़ दी है और वहां अब अमन-चैन का माहौल है। इसके अतिरिक्त, पूर्वोत्तर (नॉर्थ-ईस्ट) के राज्य अब उग्रवाद से मुक्त होकर शांति और विकास की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। वहीं, कभी देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जाने वाला नक्सलवाद अब पूरी तरह इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह गया है।

दिल्ली में मेट्रो गार्ड हत्याकांड: योगा एक्सप्रेस से भाग रहे 8 आरोपी मुजफ्फरनगर में गिरफ्तार

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दिल्ली। दिल्ली के शाहदरा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ने के दौरान हुए मामूली विवाद में मेट्रो रेल के एक सुरक्षा गार्ड की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इस जघन्य वारदात को अंजाम देने के बाद सभी हमलावर 'योगा एक्सप्रेस' में सवार होकर कानून की गिरफ्त से भागने की फिराक में थे। हालांकि, मुजफ्फरनगर रेलवे स्टेशन पर राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने मुस्तैदी दिखाते हुए घेराबंदी की और सभी आठ आरोपियों को दबोच लिया। प्रारंभिक पूछताछ के बाद मुजफ्फरनगर पुलिस ने आरोपियों को दिल्ली पुलिस के सुपुर्द कर दिया है। बताया जा रहा है कि आरोपी इस खूनी खेल के बाद उत्तराखंड के देहरादून या ऋषिकेश के वनांचलों में छिपने की योजना बना रहे थे।

ट्रेन में चढ़ने के विवाद में सुरक्षा गार्ड को मरणासन्न होने तक पीटा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम खेकड़ा के निवासी पंकज धामा (पुत्र राजेंद्र धामा) दिल्ली मेट्रो में बतौर सुरक्षा गार्ड तैनात थे। शुक्रवार की रात अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद वह घर वापस लौटने के लिए शनिवार की सुबह करीब 7 बजे पुरानी दिल्ली के शाहदरा रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। स्टेशन पर ट्रेन के सामान्य डिब्बे में सवार होने के दौरान कुछ स्थानीय युवकों से उनकी कहासुनी और धक्का-मुक्की हो गई।

देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि युवकों ने कानून अपने हाथ में ले लिया और गार्ड पंकज धामा पर लात-घूंसों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। आरोपी उन्हें मरणासन्न हालत में प्लेटफॉर्म पर छोड़कर मौके से फरार हो गए। रेलवे पुलिस ने तुरंत घायल पंकज को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने स्टेशन परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर हमलावरों की पहचान की।

उत्तर प्रदेश रेलवे पुलिस को मिला अलर्ट, मुजफ्फरनगर में हुई घेराबंदी

जांच के दौरान तकनीकी इनपुट से पता चला कि हत्या के सभी आरोपी हरिद्वार-ऋषिकेश जाने वाली योगा एक्सप्रेस में सवार हो चुके हैं। इसके बाद दिल्ली रेलवे पुलिस ने तुरंत उत्तर प्रदेश के सभी अलर्ट स्टेशनों को सूचना भेजी।

मुजफ्फरनगर जीआरपी थाना प्रभारी कुलदीप शर्मा ने बताया कि सूचना मिलते ही योगा एक्सप्रेस में तैनात सुरक्षा एस्कॉर्ट टीम से संपर्क साधा गया। जैसे ही ट्रेन मुजफ्फरनगर स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर आकर रुकी, जीआरपी ने ट्रेन के जनरल कोच को चारों तरफ से घेर लिया और यात्रा कर रहे सभी आठ मुख्य आरोपियों को कस्टडी में ले लिया।

पकड़े गए सभी आरोपी दिल्ली के निवासी, हत्या का मुकदमा दर्ज

जीआरपी के अनुसार, पकड़े गए आरोपियों की पहचान रोहित (पुत्र कैलाश), सागर (पुत्र पप्पू), हर्षित (पुत्र हरवीर), निशांत (पुत्र महेंद्र), जीवन (पुत्र दिलीप), प्रिंस (पुत्र धर्मेंद्र), आकाश (पुत्र सुरेंद्र) और रोहित (पुत्र राजू) के रूप में हुई है। ये सभी आरोपी दिल्ली के शाहदरा अंतर्गत आने वाली न्यू संजय अमर कॉलोनी, विश्वास नगर के निवासी हैं।

स्थानीय स्तर पर कागजी औपचारिकताएं और पूछताछ पूरी करने के बाद मुजफ्फरनगर पुलिस ने सभी आरोपियों को दिल्ली जीआरपी की स्पेशल टीम के हवाले कर दिया, जो उन्हें अपने साथ दिल्ली ले गई है। इस हत्याकांड के संदर्भ में पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के जीआरपी थाने में आरोपियों के खिलाफ हत्या (मर्डर) की संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

कोलकाता में योग दिवस पर पीएम मोदी करेंगे योगाभ्यास का नेतृत्व

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कोलकाता में 10 लाख लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ योगाभ्यास करेंगे

कोलकाता । कोलकाता में करीब 10 लाख लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ योगाभ्यास करेंगे । पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में रविवार को आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मुख्य कार्यक्रम में नया रिकॉर्ड बन सकता है। कोलकाता में करीब 10 लाख लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ योगाभ्यास करेंगे। आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने यह जानकारी दी। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम के बारे में सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा, "यह पहली बार है जब पश्चिम बंगाल के कोलकाता में यह इवेंट हो रहा है और यहां हमारे प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए बहुत उत्साह है।" उन्होंने कहा कि आज, 20 जून को एक बड़ा कार्निवल हुआ । एक बड़ा ड्रोन शो भी हुआ । वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की कोशिश में लगभग 500 नावें एक साथ आएंगी। आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने यह भी बताया कि रविवार सुबह रधानमंत्री यहां इस इवेंट की अगुवाई करेंगे। इस जगह पर रविवार को 35 हजार लोग इकट्ठा होंगे। वहीं, पूरे कोलकाता में 10 लाख लोग प्रधानमंत्री मोदी के साथ योग करेंगे। पोर्टल पर अब तक 7 लाख लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराए हैं। रात तक यह संख्या 10 लाख के करीब तक पहुंच जाएगी। आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव मोनालिसा दास ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हर साल एक नई जगह पर मनाया जाता है, खासकर इसका मुख्य कार्यक्रम। हर राज्य बढ़-चढ़कर इसे अपने-अपने तरीके से मनाता है। इस साल भी कई नई पहल की गई हैं। जैसा कि आपने देखा होगा, शुक्रवार को कोलकाता में चार जगहों पर 'रन फॉर योग' का आयोजन किया गया था। इसमें 10,000 लोगों, बच्चों, बड़ों और महिलाओं ने हिस्सा लिया और दौड़ लगाई। इसी तरह अन्य जिलों में भी 'रन फॉर योग' का आयोजन हुआ।" संयुक्त सचिव मोनालिसा दास ने बताया कि शनिवार को एक ड्रोन शो का आयोजन हुआ । फिर रविवार को कोलकाता के हर कौने में योग दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर योग गुरु और योग इन्फ्लुएंसर उमंग त्यागी ने कहा, "इस बार प्रधानमंत्री मोदी खुद हमारे साथ योग करेंगे। मुझे गर्व है कि मैं उनके साथ यहां कोलकाता में योग करूंगा। जब आपका नेता आगे बढ़कर ऐसा कुछ करता है, तो यह आपको भी अंदर से वैसा ही करने के लिए प्रेरित करता है।" उन्होंने कहा कि इस बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम 'स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग' बेहद खास है।

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