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‘दोषी साबित हुई तो बेटी को भी सजा मिले’—माता-पिता ने न्याय व्यवस्था पर जताया भरोसा

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पुणे: केतन अग्रवाल मर्डर केस में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। इस दर्दनाक घटना ने जहां पूरे देश को हिलाकर रख दिया है, वहीं अब इस मामले में मुख्य आरोपी सिया गोयल के माता-पिता ने पहली बार मीडिया के सामने आकर अपनी चुप्पी तोड़ी है। अपनी बेटी पर लगे देश को झकझोर देने वाले गंभीर आरोपों के बावजूद, उन्होंने साफ तौर पर कहा कि न्याय सबके लिए बराबर होना चाहिए और जो भी दोषी पाया जाए, उसे सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।

प्रेम प्रसंग में रची गई हत्या की खौफनाक साजिश

पुणे के एक जाने-माने रियल एस्टेट डेवलपर के 22 वर्षीय बेटे केतन अग्रवाल की शादी सिया गोयल से तय हुई थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि सिया का चेतन चौधरी नाम के एक युवक के साथ प्रेम संबंध था और इसी रिश्ते के चलते 18 जून को केतन की बेरहमी से हत्या कर दी गई। आरोप है कि केतन को पहले लोहागढ़ किले ले जाया गया और फिर वहां से लगभग 400 फीट गहरी खाई में धकेल दिया गया। इस खौफनाक वारदात के बाद से ही पूरे राज्य में भारी आक्रोश है और जांच एजेंसियां लगातार सबूत जुटाने में लगी हैं।

"दोषी हो तो बेटी को भी खाई में धकेल दो"

इस घटना के बाद से सिया गोयल का परिवार भी गहरे सदमे में है। तबीयत बिगड़ने के कारण सिया के पिता प्रवीण गोयल को अस्पताल के आईसीयू (ICU) में भर्ती कराना पड़ा है। अस्पताल से ही मीडिया से बात करते हुए सिया की मां पूजा गोयल ने बेहद भावुक होकर कहा, 'इस मामले में जो भी दोषी हो, उसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए। भले ही वह मेरी बेटी ही क्यों न हो, कोई भी उसका पक्ष नहीं लेगा। अगर मेरी बेटी का दोष साबित हो जाता है, तो उसे भी ठीक उसी जगह से नीचे धकेल दिया जाना चाहिए जहां से केतन को घाटी में धकेला गया।'

अंधेरे में था परिवार, चेतन के बारे में नहीं थी जानकारी

सिया के पिता प्रवीण गोयल ने न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि अगर केतन के परिवार को सिया के बर्ताव पर कोई शक था और उन्होंने हालात गंभीर होने से पहले हमें बताया होता, तो शायद हम अपनी बेटी को समझाते और इस अनहोनी को रोका जा सकता था। मुख्य सह-आरोपी चेतन चौधरी के बारे में बताते हुए प्रवीण गोयल ने कहा कि उन्होंने कभी चेतन का चेहरा तक नहीं देखा और न ही कभी सिया के मुंह से उसका नाम सुना था, वह कभी उनके घर नहीं आया था।

वर्षों पुराना पारिवारिक रिश्ता हुआ खत्म

केतन के परिवार को याद करते हुए प्रवीण गोयल भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि दोनों परिवारों के बीच कई सालों से बेहद करीबी और दोस्ताना रिश्ते थे। केतन के पिता देवीचंद अग्रवाल अक्सर उनकी ड्राई फ्रूट की दुकान पर आते थे और वे बहुत ही अच्छे संस्कार वाले इंसान हैं। गोयल ने अफसोस जताते हुए कहा कि इस दुखद घटना की वजह से उन्होंने न सिर्फ एक बहुत अच्छे नौजवान को खो दिया, बल्कि एक अच्छे परिवार से अपना सालों पुराना रिश्ता भी हमेशा के लिए गंवा दिया है। फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस के आरोपियों के खिलाफ तेजी से पुख्ता सबूत इकट्ठा करने में जुटी हुई हैं।

 

2 हजार की शिकायत बनी बड़ी कार्रवाई की वजह, 20 करोड़ का बेटिंग गिरोह बेनकाब

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वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक महिला के साथ हुई महज दो हजार रुपये की साइबर धोखाधड़ी की पड़ताल करते हुए साइबर क्राइम पुलिस ने ऑनलाइन सट्टेबाज़ी (बेटिंग ऐप) के एक बहुत बड़े अंतर्राज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। जांच में सामने आया है कि 'ओम वेबसाइट बुक ऐप' के जरिए अब तक करीब 20 करोड़ रुपये का अवैध वित्तीय लेन-देन (ट्रांजेक्शन) किया जा चुका है। पुलिस ने इस रैकेट को ऑपरेट करने वाले दो मुख्य जालसाजों—दीपक सिंह और प्रवीण सिंह (दोनों निवासी कानपुर नगर)—को वाराणसी के जगतगंज स्थित दासनगर कॉलोनी से दबोच लिया है।

डिजिटल सबूत बरामद, 5 लाख रुपये बैंक खातों में कराए गए फ्रीज

पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने 9 स्मार्टफोन, 12 सक्रिय सिम कार्ड और अन्य संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए हैं। इसके साथ ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगों के बैंक खातों में मौजूद 5 लाख रुपये की राशि को होल्ड (फ्रीज) करवा दिया है। तफ्तीश में खुलासा हुआ है कि ये आरोपी ठगी और सट्टे के पैसों को छिपाने के लिए 'म्यूल बैंक खातों' (दूसरों के नाम पर खुले फर्जी खाते), डिजिटल वॉलेट और थर्ड-पार्टी ऐप्स का इस्तेमाल कर निकाल लेते थे। पूछताछ में गैंग के दो अन्य गुर्गों—दिलावर और प्रवीण उर्फ अक्षय—के नाम भी सामने आए हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है।

प्रतिबिंब पोर्टल की शिकायत से खुला राज, इंस्टाग्राम हैक कर फंसाया था जाल में

एसीपी साइबर क्राइम विदुष सक्सेना ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि 'प्रतिबिंब पोर्टल' पर एक पीड़ित महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी कि किसी ने उसकी इंस्टाग्राम आईडी हैक कर ली और उसके परिचितों से क्यूआर कोड के जरिए 2,000 रुपये ऐंठ लिए। जब पुलिस ने उस ठगी वाले नंबर को सर्विलांस पर लिया, तो कड़ियां जुड़ती चली गईं और पता चला कि यह पैसा 'ओम वेबसाइट ऐप' के सट्टा नेटवर्क में ट्रांसफर हुआ है। यह गिरोह टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर वर्चुअल (विदेशी) नंबरों का इस्तेमाल कर एडमिन पैनल चला रहा था और रोजाना करीब 5 लाख रुपये का अवैध ट्रांजेक्शन कर रहा था।

फर्जी सिम और मर्चेंट क्यूआर कोड का हथकंडा

गिरोह के काम करने का तरीका बेहद शातिर था। सट्टे की रकम जमा कराने और जीतने वालों को 'पे-आउट' (भुगतान) देने के लिए अलग-अलग फर्जी मर्चेंट क्यूआर कोड और बैंक खातों का सहारा लिया जाता था। पकड़े गए मोबाइल फोन्स से पुलिस को बेटिंग पैनल, यूजर आईडी, बैंकिंग स्टेटमेंट्स और ट्रांजेक्शन के स्क्रीनशॉट्स जैसे मजबूत डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। इसके आधार पर पुलिस अब इस नेटवर्क के वित्तीय स्रोतों और इसमें शामिल अन्य सफेदपोशों की कुंडली खंगाल रही है। चार राज्यों में फैले इस नेटवर्क का यह मॉड्यूल वाराणसी में पिछले 3 साल से सक्रिय था और सोशल मीडिया पर बकायदा विज्ञापन चलाकर लोगों को मुनाफे का लालच देता था।

साइबर पुलिस की 23 दिनों के भीतर दूसरी बड़ी कामयाबी

वाराणसी साइबर पुलिस ने महज 23 दिनों के अंतराल में ऑनलाइन सट्टेबाजी के खिलाफ यह दूसरा सबसे बड़ा एक्शन लिया है। इससे पहले 1 जून को पुलिस ने आईपीएल (IPL) सट्टे के नाम पर करीब 2 लाख लोगों से 700 करोड़ रुपये की महाठगी का पर्दाफाश किया था। उस बड़ी कार्रवाई में बीटेक और मैनेजमेंट डिग्री धारकों सहित 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, जिन्होंने सिर्फ एक महीने में ही जनता के 25 करोड़ रुपये दांव पर लगवा दिए थे।

पशुपालकों के लिए बड़ी खुशखबरी, दो गाय खरीदने पर मिलेगा 80 हजार रुपये का अनुदान

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने और ग्रामीण पशुपालकों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा 'मुख्यमंत्री स्वदेशी गो-संवर्धन योजना' चलाई जा रही है। इस जनकल्याणकारी योजना के अंतर्गत पशुपालकों को दो उन्नत नस्ल की स्वदेशी गायें खरीदने पर सरकार की तरफ से अधिकतम 80 हजार रुपये तक की सब्सिडी (अनुदान) दी जाएगी। इस कदम से न सिर्फ राज्य में दूध की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि पारंपरिक डेयरी व्यवसाय को भी एक नई दिशा मिलेगी।

महिला और पुरुष पशुपालकों को मिलेगा बराबर मौका

मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. डीके पांडे ने योजना की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जिले में कुल 28 पशुपालकों को लाभान्वित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए इस लक्ष्य में 14 महिला और 14 पुरुष पशुपालकों को शामिल किया गया है। योजना के तहत योग्य और इच्छुक लाभार्थियों का अंतिम चयन दुग्ध विकास विभाग द्वारा पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाएगा।

बाहरी राज्यों से लानी होंगी इन उन्नत नस्लों की गायें

योजना के नियमों के मुताबिक, आवेदन करने वाले गोपालकों को दूसरे राज्यों से उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली स्वदेशी नस्ल की गायें खरीदनी होंगी। इनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित नस्लें शामिल हैं:

  • गिर

  • साहीवाल

  • थारपारकर

  • हरियाणा नस्ल

इन गायों को खरीदने में आने वाली कुल लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा सरकार अनुदान के रूप में वहन करेगी।

कैसे करें आवेदन?

मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जो भी पशुपालक या किसान इस योजना का लाभ उठाने के इच्छुक हैं, वे 'नंद बाबा दुग्ध मिशन' के आधिकारिक वेब पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन माध्यम से अपना आवेदन दर्ज करा सकते हैं। आवेदन के साथ जरूरी दस्तावेज और पात्रता संबंधी शर्तें पोर्टल पर उपलब्ध हैं।

वेनेजुएला में भूकंप से तबाही, 235 लोगों की मौत, बचाव अभियान तेज

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कराकस (वेनेजुएला):वेनेजुएला इस समय एक बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है, जहां एक भीषण प्राकृतिक आपदा ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। गुरुवार को आए इस विनाशकारी भूकंप के बाद जानमाल का भारी नुकसान हुआ है, जिसने करीब 28 साल पहले यानी वर्ष 1999 में आए ला गुआइरा (वेनेजुएला) के उस ऐतिहासिक भूस्खलन की यादें ताजा कर दी हैं, जिसे देश की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जाता है। आपदा के इस संकटकाल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवेदनाएं और मदद के हाथ बढ़ने लगे हैं, जिसमें डोमिनिकन गणराज्य की रेस्क्यू टीम सबसे पहले प्रभावित इलाकों में पहुंची है।

राजनीतिक अस्थिरता के बीच राहत कार्यों की चुनौती

प्राकृतिक आपदा के साथ-साथ वेनेजुएला इस समय गंभीर राजनीतिक संकट से भी जूझ रहा है, जिससे समन्वय के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना बेहद जटिल हो गया है। दरअसल, करीब छह महीने पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर एक अप्रत्याशित सैन्य कार्रवाई में तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया था, जो अब अमेरिकी कोर्ट में मुकदमे का सामना कर रहे हैं। इस गिरफ्तारी के बाद जनवरी में पूर्व उपराष्ट्रपति रोड्रिगेज ने कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाला। वर्तमान माहौल और सत्ता के प्रति जनता के एक वर्ग में पूरी तरह स्वीकार्यता न होने के कारण यह स्थिति कार्यवाहक राष्ट्रपति रोड्रिगेज के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।

स्थानीय सहयोग की अपील और वैश्विक एकजुटता

बदलते हालातों और चुनौतियों को देखते हुए कार्यवाहक राष्ट्रपति रोड्रिगेज ने स्थानीय व्यवसायियों से आगे आने और ला गुआइरा जैसे सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में राहत-बचाव कार्यों के लिए जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने की भावुक अपील की है। इस बीच, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वेनेजुएला के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा है कि संकट की इस घड़ी में भारत हरसंभव मदद करने के लिए पूरी तरह तैयार है। वहीं, ओडिशा के पुरी समुद्र तट पर मशहूर सैंड आर्टिस्ट पद्मश्री सुदर्शन पटनायक ने एक खूबसूरत रेत की कलाकृति (सैंड आर्ट) बनाकर वेनेजुएला के भूकंप पीड़ितों के प्रति अपनी और पूरे देश की एकजुटता प्रकट की है।

पेट्रोल-डीजल फिर हो सकते हैं महंगे! वेनेजुएला संकट से बढ़ी चिंता

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काराकास: वेनेजुएला में बीते दिनों एक के बाद एक आए दो विनाशकारी भूकंपों ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण देश में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है और मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इस मानवीय संकट के बीच, वैश्विक ऊर्जा बाजार (ग्लोबल एनर्जी मार्केट) में भी हड़कंप मच गया है। वेनेजुएला दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में गिना जाता है, ऐसे में अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या इस संकट की आंच भारत के आम उपभोक्ताओं की जेब तक पहुँचेगी और पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे?

भारत के लिए क्यों बढ़ गई है वेनेजुएला की अहमियत?

इस संकट का समय भारत के नजरिए से काफी संवेदनशील है। दरअसल, पिछले कुछ महीनों में मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारत ने रणनीतिक रूप से वेनेजुएला से कच्चे तेल का आयात (इम्पोर्ट) काफी बढ़ा दिया था। पेट्रोलियम मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल और मई 2026 में वेनेजुएला भारत के प्रमुख क्रूड सप्लायर्स की सूची में ऊपर आ गया है। जहाँ वित्त वर्ष 2025-26 में वेनेजुएला से हर महीने औसतन 64,000 मीट्रिक टन कच्चा तेल आता था, वहीं अप्रैल-मई 2026 में यह आयात बढ़कर 10 लाख मीट्रिक टन प्रति माह के पार पहुँच चुका है।

क्या तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को पहुँचा है नुकसान?

शुरुआती समीक्षा रिपोर्टों के अनुसार, भारत के लिए एक राहत भरी खबर यह है कि वेनेजुएला का मुख्य ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर इस भीषण भूकंप की मार से काफी हद तक सुरक्षित है। तेल उत्पादन, रिफाइनिंग और निर्यात से जुड़े कामकाज में फिलहाल किसी बड़े व्यवधान या रुकावट की पुष्टि नहीं हुई है। भूकंप का सबसे घातक असर राजधानी काराकास और उसके आस-पास के आवासीय क्षेत्रों, परिवहन नेटवर्क और सार्वजनिक सुविधाओं पर पड़ा है। हालांकि, औद्योगिक क्षेत्रों, बड़ी पाइपलाइनों और एक्सपोर्ट टर्मिनल्स की सुरक्षा की बारीकी से जांच की जा रही है। अगर भविष्य में किसी आंतरिक या ढांचागत नुकसान का पता चलता है, तो ही सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है।

भारत के पास हैं कई विकल्प, तेल संकट का खतरा बेहद कम

ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि इस आपदा से भारत में तेल का कोई बड़ा संकट पैदा होने की उम्मीद न के बराबर है। इसकी मुख्य वजह यह है कि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों के लिए किसी एक देश पर निर्भर नहीं है, बल्कि वह रूस, इराक, सऊदी अरब, यूएई, अमेरिका और ब्राजील समेत 35 से अधिक देशों से क्रूड ऑयल खरीदता है। इस समय रूस भारत का सबसे बड़ा तेल भागीदार बना हुआ है। यदि वेनेजुएला से तेल की खेप आने में कुछ देरी भी होती है, तो भारतीय तेल कंपनियों के पास पर्याप्त बैकअप इन्वेंट्री (सुरक्षित स्टॉक) मौजूद है और वे दूसरे देशों से भी इसकी भरपाई कर सकती हैं।

आम जनता की जेब पर क्या होगा असर?

भारतीय उपभोक्ताओं के लिए सीधी बात यह है कि इस भूकंप का घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर तुरंत कोई असर नहीं पड़ने वाला है। भारत में ईंधन की खुदरा कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय क्रूड के दामों से तय नहीं होतीं, बल्कि इनमें डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, केंद्र व राज्य सरकारों के टैक्स और घरेलू तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के मार्जिन की बड़ी भूमिका होती है।

विशेषज्ञों का आकलन: हालांकि तुरंत कोई असर नहीं दिखेगा, लेकिन यदि आने वाले हफ्तों में वेनेजुएला के ऑयल फील्ड्स में किसी बड़े गुप्त नुकसान की बात सामने आती है और ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक आसमान पर बनी रहती हैं, तो भविष्य में भारतीय उपभोक्ताओं पर इसका आंशिक बोझ पड़ सकता है।

भाजपा की नई कार्यकारिणी में कई चौंकाने वाले नाम, 27 समीकरण साधने की कोशिश

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लखनऊ: आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने लंबी प्रतीक्षा, अनगिनत अटकलों और लखनऊ से दिल्ली तक कई दौर की मैराथन बैठकों के बाद अपनी नई प्रदेश कार्यकारिणी घोषित कर दी है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी द्वारा घोषित इस 48 सदस्यीय टीम पर प्रभावशाली नेताओं के सामंजस्य, समझौते और अंदरूनी संतुलन की स्पष्ट छाया दिखाई दे रही है। इस नई टीम में पुराने चेहरों के स्थान पर नए लोगों को मौका देकर नयापन लाने की कोशिश की गई है, जिसमें दूसरे दलों से आए नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

कई दिग्गजों की छुट्टी, नीरज सिंह को बड़ी जिम्मेदारी

पार्टी ने आगामी चुनाव में नया नेतृत्व उभारने का संदेश देने के लिए पुरानी टीम के आधे से ज्यादा चेहरों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इस बड़े बदलाव में विधान परिषद सदस्य विजय बहादुर पाठक और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र व नोएडा से विधायक पंकज सिंह जैसे कद्दावर नेताओं को नई टीम में जगह नहीं मिली है। हालांकि, पंकज सिंह की जगह उनके छोटे भाई नीरज सिंह को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है, जो संगठन पर बड़े नेताओं के प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। कुछ पुराने पदाधिकारियों को पदोन्नति देकर कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने का प्रयास भी किया गया है।

कोर वोट बैंक पर फोकस, पर जातीय असंतुलन बरकरार

पार्टी नेतृत्व ने इस टीम के जरिए अपने कोर वोट बैंक—पिछड़ी, अति पिछड़ी और दलित जातियों को भरपूर हिस्सेदारी दी है। अगड़े और पिछड़े वर्ग के बीच संतुलन बनाने की पुरजोर कोशिश की गई है, लेकिन इसके बावजूद जातियों की आबादी के लिहाज से समानुपातिक असंतुलन खुलकर सामने आ गया है। इस कोशिश में कुछ ऐसे विवादित या अप्रत्याशित चेहरों को भी जगह मिल गई है, जो आने वाले दिनों में संगठन के लिए तीखी आलोचना का आधार बन सकते हैं।

ब्राह्मणों और भूमिहारों के प्रतिनिधित्व पर उठे सवाल

नई कार्यकारिणी में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने का दावा तो किया गया है, लेकिन आंकड़ों के लिहाज से यह पूरी तरह संभव नहीं हो पाया है। प्रदेश में करीब 12 से 14 फीसदी आबादी वाले ब्राह्मण समाज को इस बार जनसंख्या के अनुपात में कम प्रतिनिधित्व मिला है। इसके विपरीत, राज्य में महज 1 फीसदी आबादी वाले भूमिहार या त्यागी समाज को ज्यादा तवज्जो दी गई है। घोषित 48 सदस्यीय टीम में अकेले भूमिहार समाज से 4 पदाधिकारी बनाए गए हैं, जिसे लेकर अब संगठन के भीतर और बाहर असंतुलन के सवाल खड़े होने लगे हैं।

भोपाल में बाघ से आमना-सामना, महिला की सूझबूझ से बची दंपती की जान

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भोपाल: राजधानी भोपाल के चंदनपुरा क्षेत्र में शुक्रवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों ने एक टाइगर (बाघ) को बेहद करीब से देखा। सुबह करीब 6:30 से 7:00 बजे के बीच हुई इस घटना में एक दंपती तो बाघ के बिल्कुल आमने-सामने आ गया था। महिला के सूझबूझ दिखाते हुए शोर मचाने पर बाघ झाड़ियों की तरफ भाग गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद सुबह करीब 9:00 बजे वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और इलाके में सर्चिंग अभियान शुरू कर दिया है।

दंपती के करीब पहुंचा बाघ, मचा हड़कंप

मॉर्निंग वॉक पर निकली महिला ने बताया कि वह अपने पति के साथ टहल रही थी, तभी उसके पास से एक जानवर गुजरा। शुरुआत में उसे लगा कि वह कोई कुत्ता है, लेकिन ध्यान से देखने पर पता चला कि वह साक्षात बाघ था। महिला ने तुरंत चिल्लाकर कुछ दूरी पर चल रहे अपने पति को आवाज दी, जिसके बाद बाघ झाड़ियों में ओझल हो गया। इस दौरान वहां मौजूद अन्य लोगों ने भी बाघ को देखा और उसकी दहाड़ सुनी, जिससे लोगों में अफरा-तफरी मच गई। कुछ लोगों ने सुरक्षित दूरी से बाघ का वीडियो भी बनाया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बाद में बाघ चंदनपुरा के ही एक निजी फार्महाउस की बाउंड्री के अंदर चला गया।

सुरक्षा जाली का खुला हिस्सा और बढ़ती इंसानी दखल

वन्यजीव एक्सपर्ट राशिद नूर ने बताया कि इस क्षेत्र में सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी जाली लगाई गई है, लेकिन उसका एक हिस्सा खुला हुआ है। आशंका है कि बाघ उसी खुले रास्ते से रिहायशी इलाके की तरफ आ गया। एक्सपर्ट्स के अनुसार, चंदनपुरा क्षेत्र बाघों के प्राकृतिक कॉरिडोर (रास्ते) के बेहद नजदीक है, जहां लंबे समय से बाघों का मूवमेंट रहा है। लेकिन अब इस इलाके में लगातार हो रहे निर्माण कार्यों, भूमि विकास और लोगों की बढ़ती आवाजाही के कारण बाघों के प्राकृतिक रास्ते प्रभावित हो रहे हैं, जिससे मानव-बाघ संघर्ष का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

इलाके में स्थायी चौकी नहीं, वन विभाग की अपील

विशेषज्ञों ने चिंता जताते हुए कहा है कि इस संवेदनशील इलाके में वन विभाग की कोई स्थायी चौकी नहीं है, जिससे वन्यजीवों की निगरानी प्रभावित होती है। यदि समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है। फिलहाल, वन विभाग की टीम लगातार बाघ की लोकेशन ट्रेस करने और उसे वापस जंगल की ओर खदेड़ने के प्रयास में जुटी हुई है। प्रशासन ने स्थानीय नागरिकों और मॉर्निंग वॉकर्स से अपील की है कि जब तक सर्चिंग ऑपरेशन पूरा नहीं हो जाता, तब तक वे चंदनपुरा और जंगल से लगे इलाकों में जाने से पूरी तरह बचें।

रींगस में दर्दनाक रात: खाटूश्यामजी से लौट रहे दो श्रद्धालुओं की मौत

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सीकर: राजस्थान के सीकर जिले के रींगस इलाके में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-52 (NH-52) पर गुरुवार की रात हादसों का दौर रहा। हाईवे पर अलग-अलग जगहों पर हुए भीषण हादसों में एक महिला सहित दो लोगों ने अपनी जान गंवा दी, जबकि 13 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पहली दर्दनाक घटना सिंगोद मोड़ के समीप हुई, जहाँ खाटूश्यामजी के दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं की गाड़ी दुर्घटना का शिकार हो गई। इस हादसे में एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई और दो युवतियां घायल हो गईं।

पीछे से आ रही पिकअप ने कार को मारी जोरदार टक्कर

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के लखनऊ का रहने वाला एक श्रद्धालु परिवार निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर बाबा श्याम के दर्शन करने आया था। दर्शन करने के बाद सभी अर्टिगा कार से वापस जयपुर की तरफ लौट रहे थे। इसी दौरान रींगस-जयपुर मार्ग पर पीछे से आ रही एक अनियंत्रित तेज रफ्तार पिकअप ने उनकी कार को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। इस हादसे में कार सवार महिला मंजू तिवारी की घटनास्थल पर ही सांसें थम गईं, जबकि कार में बैठी दो अन्य युवतियां गंभीर रूप से जख्मी हो गईं। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को तुरंत राजकीय उप जिला अस्पताल पहुँचाया गया।

दूध के कंटेनर ने टेंपो को रौंदा, 9 भक्त घायल

रींगस क्षेत्र में ही दूसरा बड़ा हादसा एनएच-52 पर सीएनजी पेट्रोल पंप के ठीक सामने हुआ। यहाँ श्याम भक्तों से खचाखच भरे एक टेंपो को तेज रफ्तार दूध के कंटेनर ने अपनी चपेट में ले लिया। इस टक्कर के कारण टेंपो में सवार 9 श्रद्धालु घायल हो गए। अस्पताल में प्राथमिक इलाज के बाद 6 श्रद्धालुओं की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बड़े मेडिकल सेंटर के लिए रेफर कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि टेंपो में सवार सभी भक्त उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं, जो खाटूश्यामजी के दर्शन के लिए आगे बढ़ रहे थे।

क्रेन चालक ने पेश की इंसानियत की मिसाल

इस हादसे के बीच मौके पर मौजूद रिकवरी क्रेन के ड्राइवर सोहनलाल यादव ने तत्परता दिखाते हुए मानवता की मिसाल पेश की। उन्होंने बिना वक्त गंवाए सभी लहूलुहान घायलों को तुरंत अपनी मदद से अस्पताल पहुँचाया, जिससे कई लोगों की जान बच सकी।

ठिकरिया के पास अज्ञात वाहन की टक्कर से एक और मौत

रींगस के ठिकरिया इलाके के पास एक तीसरी घटना भी सामने आई, जहाँ सड़क पार कर रहे या चल रहे एक अज्ञात श्रद्धालु को किसी तेज रफ्तार वाहन ने कुचल दिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि उस व्यक्ति ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। सूचना मिलने के बाद रींगस थाना पुलिस ने सभी दुर्घटना स्थलों पर पहुँचकर क्षतिग्रस्त वाहनों को क्रेन की मदद से हटवाया और हाईवे पर यातायात व्यवस्था को दोबारा सुचारू किया। फिलहाल पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर सभी मामलों की जांच शुरू कर दी है।

घर से बुलाकर ले गए और उतार दिया मौत के घाट, हत्या से सनसनी

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आरा: भोजपुर जिले के आरा शहर में बेखौफ अपराधियों ने कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए एक सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया है। नगर थाना क्षेत्र के धरहरा पुल के पास अपराधियों ने एक युवक की गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में सन्नाटा और दहशत का माहौल है। वारदात की खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और शव को अपने कब्जे में लेकर मामले की तफ्तीश में जुट गई है।

नाश्ते के बहाने घर से ले गए थे साथ

मृतक की पहचान नवादा थाना क्षेत्र के श्री टोला (वार्ड संख्या-36) के रहने वाले 28 वर्षीय चंदन यादव के रूप में हुई है। चंदन की पत्नी गीता देवी ने बताया कि गुरुवार की रात कुछ लोग चंदन को नाश्ता करने के बहाने बहला-फुसलाकर अपने साथ घर से बुलाकर ले गए थे। इसके बाद धरहरा मुसहर टोली के पास घात लगाए अपराधियों ने चंदन पर बेहद करीब से ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोली चंदन के पेट के दाहिने हिस्से में लगी, जिससे अत्यधिक खून बह जाने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

साजिश के तहत हत्या का आरोप

इस घटना को लेकर मृतक की पत्नी गीता देवी ने कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि चंदन का पहले भी कुछ स्थानीय लोगों के साथ विवाद चल रहा था। आरोप है कि उन्हीं विरोधियों ने एक सोची-समझी साजिश के तहत चंदन को घर से बाहर बुलाया और उसकी हत्या कर दी।

प्रेम-प्रसंग और पुराना विवाद: दोनों पहलुओं पर जांच तेज

दूसरी ओर, इस हत्याकांड को लेकर इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मामले में प्रेम-प्रसंग का एंगल भी सामने आ रहा है। नगर थाना पुलिस का कहना है कि वे किसी एक नतीजे पर पहुँचने के बजाय हर संभावित पहलू को खंगाल रहे हैं। परिजनों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं और उस आधार पर संदिग्धों की तलाश तेज कर दी गई है।

जल्द ही सलाखों के पीछे होंगे आरोपी

नगर थाना पुलिस ने स्थानीय निवासियों और परिजनों को आश्वासन दिया है कि अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। डिजिटल साक्ष्य और गुप्त सूचनाओं के आधार पर छापेमारी की जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा और इस जघन्य हत्याकांड की असली वजह दुनिया के सामने आ जाएगी।

मुहर्रम जुलूस में मातम, रतलाम में करंट लगने से 3 लोगों की मौत, कई घायल

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रतलाम (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के रतलाम जिले से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है, जहां गुरुवार की रात मोहर्रम के कार्यक्रम के दौरान करंट लगने से एक बड़ा हादसा हो गया। इस दुखद घटना में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 11 अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए इलाज जारी है।

हाईटेंशन लाइन की चपेट में आया ताजिया

यह दर्दनाक हादसा पिपलोदा क्षेत्र के हतनारा गांव का है, जहां मुहर्रम के मौके पर ताजिया का जुलूस निकाला जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, निकाले जा रहे ताजिया की ऊंचाई करीब 20 फीट थी। जुलूस के दौरान रास्ते से गुजर रही बिजली की हाईटेंशन लाइन काफी नीचे थी, जिस पर किसी का ध्यान नहीं गया और ताजिया सीधे तारों से टकरा गया। ताजिया के संपर्क में आते ही पूरी गाड़ी में करंट फैल गया, जिससे वहां चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई।

प्रशासनिक लापरवाही के आरोप, पुलिस जांच में जुटी

अस्पताल के डॉक्टर रविंद्र सोलंकी ने हादसे में तीन लोगों की मौत की पुष्टि की है, जिनकी पहचान रशीद खान, सड्डू हुसैन और अरबाज खान के रूप में हुई है। इस घटना को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। मौके पर मौजूद लोगों का आरोप है कि इतने बड़े आयोजन के दौरान प्रशासन और बिजली विभाग की गंभीर लापरवाही रही, क्योंकि हादसे के वक्त न तो वहां कोई पुलिसकर्मी तैनात था और न ही बिजली कटौती की गई थी। फिलहाल, पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और हाईटेंशन लाइन की ऊंचाई व सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर बारीकी से जांच शुरू कर दी है।

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