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50 लोग एक घायल को लेकर घुस रहे थे, रोका था डाक्टर से भिड़े, विधायक लिखी गाड़ी मिली, एफआइआर दर्ज

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रीवा ।    रीवा शहर के संजय गांधी अस्पताल में डाक्टर के साथ अभद्रता व झूमा झटकी का मामला सामने आया है। बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात्रि एक बजे से तीन बजे के बीच सतना जिले के मैहर से 50 लोग एक घायल को लेकर पहुंचे थे, जिन्होंने इमरजेंसी वार्ड के अंदर जाने की जिद की। जबकि डॉक्टर ने एक मरीज के साथ सिर्फ एक अटेंडर को अंदर आने की इजाजत दी। इसी बात को लेकर घायल के साथ आए लोगों ने डाक्टर से बहसबाजी शुरू कर दी है। तभी अस्पताल के मेडिकल स्टाफ ने घटना की जानकारी डायल 100 को दे दी। बवाल की सूचना के बाद अमहिया व सिविल लाइन थाने का पुलिस बल पहुंच गया। जहां पुलिस अधिकारियों ने विवाद जानने की कोशिश की है। वहीं ड्यूटी डॉक्टर से अज्ञात लोगों के बारे में जानकारी मांगी है। फिलहाल सिविल लाइन थाने में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 353, 332 का अपराध कायम कर लिया है। इधर संजय गांधी अस्पताल की घटना को लेकर दो जिलों में राजनीति शुरू हो गई है।

विधायक लिखी गाड़ी मिली

बताया गया है कि घायल को इलाज के लिए भर्ती कराने एक विधायक की गाड़ी आई हुई थी। अस्पताल में मैहर विधायक नारायण त्रिपाठी के पुत्र विकास त्रिपाठी भी देखने को मिले हैं। डॉक्टर पुत्र के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। चर्चा है कि विधायक के पुत्र दुर्घटना में घायल को भर्ती कराने के लिए रीवा आए हुए थे।

क्या बोली पुलिस

सिविल लाइन थाना प्रभारी निरीक्षक हितेन्द्र नाथ शर्मा ने बताया कि 12 अक्टूबर की देर रात घायक शंकर रजक निवासी सरलानगर थाना मैहर जिला सतना को लेकर कई लोग आए थे। इमरजेंसी वार्ड में तैनात ड्यूटी डॉक्टर आशय द्विवेदी से झूमाझटकी व कहासुनी हुई थी। इस मामले में एसजीएमएच प्रबंधन की शिकायत पर अज्ञात आरोपितों के खिलाफ प्रकरण कायम हो गया है। सीसीटीवी कैमरों की मदद से आरोपित चिहिन्त किए जा रहे हैं।

डाक्टर की जुबानी, घटना की कहानी

डॉ. आशय द्विवेदी ने कहा कि मेरी रात में ड्यूटी इमरजेंसी वार्ड में लगाई गई थी। देर रात एक घायल को लेकर कुछ लोग लेकर आए थे। जो डाक्टर की अनुमति के बगैर इमरजेंसी कक्ष में प्रवेश कर गए। हमने दो लोगों की अनुमति दी है। इसी बात पर बहस शुरू हो गई थी। वे लोग कौन है, हम नहीं जानते है। साथियों का कहना है कि कई लोग शराब पीने के कारण उत्पात मचाया। हमने पुलिस को शिकायत की है।

Allu Arjun और Neeraj Chopra ने एक दूसरे के सिग्नेच स्टेप को किया कॉपी

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स्टाइलिश स्टार अल्लू अर्जुन के फैन्स इन दिनों काफी खुश हैं। एक ओर जहां हाल ही में अल्लू को एंटरटेनमेंट जगत के लिए 'इंडियन ऑफ द ईयर'से सम्मानित किया गया, तो दूसरी ओर अब उनका ओलंपिक चैंपियन गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा संग एक वीडियो वायरल हो रहा है। अल्लू और नीरज के इस वीडियो में दोनों का स्वैग देखने को मिल रहा है, जिसे सोशल मीडिया यूजर्स पसंद कर रहे हैं।दरअसल हाल ही में एक इवेंट में अल्लू को 'इंडियन ऑफ द ईयर'से सम्मानित किया गया। इस इवेंट में अल्लू की मुलाकात नीरज चोपड़ा से भी हुई। इस मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जहां एक ओर अल्लू, नीरज का जैवलिन पोज दे रहे हैं तो वहीं नीरज ने अल्लू की फिल्म पुष्पा का सिग्नेचर पोज दिया। वहीं इसके बाद दोनों साथ में पुष्पा पोज देते दिखते हैं। वीडियो को सोशल मीडिया यूजर्स खूब पसंद कर रहे हैं।

तुमको हमारी उमर लगि जाय..!

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Jayram Shukla
” पुराणों में ऐसी बहुत सी कथाएं हैं जिनमें महिलाओं को उपदेश दिया गया है कि पति भले कितना भी लंपट हो लेकिन उसे परमेश्वर मानना चाहिए, उसके लिए निर्जला व्रत रखना चाहिए, लेकिन ऐसी एक भी व्रतकथा नहीं जो पति पत्नी के कुशलक्षेम के लिए करे..कभी इसपर विचार किया है?”

ये तो कमाल की बात हुई, पुलिस वालों ने करवाँ चौथ का पानी उतार दिया। चौराहों पर यातायात के बैनर में लिखवाकर –
हेलमेट पहनिए,
सीटबेल्ट बाँधिए..
करवाँ चौथ के भरोसे मत रहिए।
एक भाई ने लिखा कि साल में एक दिन यही तो है जब उम्र को रिचार्ज कराने का मौका मिलता है। पुलिस ने भाई की जीजिविषा को धूलधूसरित कर दिया, करवाँ चौथ के मुकाबले हेलमेट, सीटबेल्ट की बात करके।
मैंने रिपोर्टर से पूछा- अपनी पुलिस क्या वाकई इतनी प्रोग्रेसिव हो गई है..? रिपोर्टर ने बताया नहीं जी, बात ये नहीं है.. बैनर लिखने और लिखवाने वाले दोनों की बीबियाँ करवाँ चौथ से थीं..! प्राब्लम ये थी कि इस साल के करवाँ चौथ का पैकेज उनकी हैसियत से बाहर का था। दोनों ही अपनी बीबियों से यही तर्क देकर कि तुम्हारे उपासने से अपनी उमर बढ़ने वाली नहीं, झगड़ के आए थे। और चौराहों पर बैनर लगाकर अपना फ्रस्टेशन निकाल लिया।
सही बात है- बॉस जिस दिन बीबी से लड़कर आता है उसदिन मताहतों की दिनभर ऐसी-कम-तैसी करता है। स्कूल में मास्साब की आँखें जिस दिन लाल और हाथ में सड़ाका होता था हम बच्चे भी समझने देर नहीं लगाते थे कि आज गुरुआइन दाई ने इनकी अच्छे से लू उतारी होगी।
करवाँ चौथ की पूजा कराकर लौट रहे पंड्डिज्जी से मैंने पूछा- क्या तीज और करवाँ चौथ से वाकई पतियों की उमर बढ़ती है..। अचकचाए पंड्डिज्जी ने जवाब दिया कि पुराणों में तो फुल गारंटी के साथ यही लिखा है बाकी यमराज जानें।
हमारी संस्कृति के सभी कर्मकांड, व्रत और उपवास पुराणों में वर्णित हैं। एक दो को छोड़ प्रायः सभी पुराण दूसरी से दशवीं शताब्दी के बीच लिखे गए हैं। पुराणों के सबसे ज्यादा उपदेश महिलाओं के हिस्से आए हैं।
मार्कडेय पुराण में कथा है कि..एक पतिव्रता अपने कोढ़ी पति को तीर्थयात्रा कराने भ्रमण पर निकलती है। वह बाजार से निकल रही होती है कि उसके कोढ़ी पति का दिल एक वैश्या पर आ जाता है..। वह अपनी फरमाइश पत्नी के समक्ष रखता है। पत्नी पतिव्रता जो ठहरी सो वैश्या से पति को यौनतुष्ट करने की गुजारिश करती है….। यह तो पराकाष्ठा हुई न।
ऐसी बहुत सी कथाएं हैं जिनमें महिलाओं को उपदेश दिया गया है कि पति भले कितना भी लंपट हो लेकिन उसे परमेश्वर मानना चाहिए। इंद्र तो लंपटता का चरम था, लेकिन उसकी पत्नी शची से कभी झगड़ा हुआ हो ऐसा कहीं वर्णित नहीं है।
जाहिर सी बात यह है कि पुरुषों को मौजमस्ती के रास्ते खोले रखने के लिए महिलाओं पर अनुशासन थोपे गए, उन्हें उपदेशों के जरिए सरग-नरक की भूलभुलैया में उलझाए रखा गया।
आप स्त्रियों के आभूषण तो देखिए, सभी के सभी गुलामी के प्रतीक हैं। ऊँट की तरह नाक छेदा, गैय्या की तरह कान, गले में मंगलसूत्र की जंजीर, तो कलाइयों में हथकड़ीनुमा कड़े, पाँव में बेड़ी की भाँति पायल(पहले छड़ा गोडहरा)। एक-एक वस्तु गुलामी के प्रतीक पर उसे आभूषण का नाम देकर ऐसा महिमामंडित किया कि बस इसी गुलामी में उलझी रह गई नारी शक्ति।
मैत्रेयी, गार्गी, भारती, अरुंधती आदि वैदिक काल की महिलाएं इस तरह की गुलामी से मुक्त थीं। वे अपने समकालीन पुरुषों से हर मामले में मुकाबला करने को समर्थ थीं..चाहे शास्त्र से हो या शस्त्र से। पुराण की कथाओं को पुरोहितों और कथावाचकों ने समय-समय पर अपने हिसाब से ट्विस्ट किया।
श्रुति और स्मृति परंपरा से आई पुराण कथाओं में समयकाल के हिसाब से क्षेपक जुड़ते गए।
डाक्टर राममनोहर लोहिया नारीमुक्ति के प्रबल पक्षधर थे, इसलिए वे पंच कन्याओं में स्त्री का व्यवहारिक आदर्श देखते थे। द्रौपदी उनकी नजर में सबसे महान व सशक्त महिला थी जिसने दिलेरी के साथ पुरुष वर्चस्व की वर्जनाएं तोड़ीं और ठप्पे से पाँच पतियों के साथ निर्वाह किया।
लोहिया कुंती, मंदोदरी, तारा, अहिल्या को भी स्त्री विमर्श के केंद्र पर रखते थे। इसके उलट पुरुषवादी समाज ने ऐसा कथानक रचा कि पत्नी को सती सावित्री या सीता से एक इंच भी कम नहीं होना चाहिए भले ही पति कितना बड़ा पापी या दुष्कर्मी क्यों न हो।
भगवान राम एक पत्नीव्रत की शपथ लेते हैं। तत्कालीन समाज में जब स्त्री को धन समझा जाता था और राजाओं के अंतःपुर में अनगिनत स्त्रियां रहती थीं, ऐसे में एक पत्नीव्रत की शपथ साधारण बात नहीं थी।
राम के आराध्य भगवान शंकर थे जिन्होंने पति और पत्नी के आदर्श को जगत के सामने रखा। शंकर से महान पत्नीव्रता शायद ही सृष्टि में किसी भी धार्मिक मान्यता में कोई हो।
सती माता की लाश को कंधे पर टाँगे एक विक्षिप्त पति समूचे ब्रह्मांड की परिक्रमा करता है। वह भी देवों का देव महादेव, ईश्वरों का ईश्वर परमेश्वर। नौदुर्गा की सभी देवियां माता सती-पार्वती की अंश हैं।
कौन है जो अपनी पत्नी को अपने से भी परमशक्ति के पदपर प्रतिष्ठित करे और स्वयं वीतरागी बना रहे। भवानी-शंकर इसीलिए लोक के सबसे करीब और सर्वव्यापी हैं।
समाजवादी चिंतक जगदीश जोशी पति की उम्र और सलामती के लिए पत्नियों के कठिन व्रत के खिलाफ रहते थे। वे हर तीजा- करवाँ चौथ के अवसर पर विमर्श करते और लेख लिखते थे।
जोशी जी का शाश्वत प्रश्न यही रहता था कि क्या पति भी कभी पत्नी की लंबी उमर के लिए कोई धार्मिक यत्न करता है। यदि पति बेइमान, लंपट और चरित्रहीन है तो उसे समय से पहले ही मर जाना चाहिए, उसकी सलामती के लिए व्रत क्यों..?
और यदि पति सदाचारी है तो उसे पत्नी के व्रत-उपवास में भी बराबर का भागीदार रहना चाहिए, उसे भी पत्नी की लंबी उम्र की कामना वैसे ही करनी चाहिए। जोशी जी लोहिया की लाइन पर सोचते थे..। विचार आचार-व्यवहार में कभी सहजता से नहीं चढ़ते।
अपने सभी त्योहार विचार नहीं बाजार से संचालित हैं। बाजार तय करता है कि नौदुर्गा..दशहरा और गरबा कैसे मने। करवाँ चौथ, छठ और तीजा के मेन्यू भी यही बाजार तय करता है। करोड़ों अरबों का व्यापार इन त्योहारों के मार्फत होता है। टीवी फिल्मों में बालीवुड की गणिकाएं अब सती सावित्री और सीता की भूमिका में रोलमॉडल बनकर प्रस्तुत होती हैं।
आर्थिक मंदी और भविष्य को लेकर हताशा के इस दौर में करवाँ चौथ जैसे पर्व एक साधारण नौकरीपेशा व्यक्ति को थरथरा देते हैं। जिस किसी पुलिसिये ने यह लिखा कि लंबी उमर की गारंटी हेलमेट और सीटबेल्ट हैं न कि करवाँ चौथ, शायद ठीक ही लिखा…भगवान उस पुलिसिए को धरमधुरंधरों के कोप से बचाए रखे, मेरी यही प्रार्थना है।

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दीपावली की रात भूलकर भी न करें ये 4 काम, देवी लक्ष्मी तुरंत चली जाएंगी आपका घर छोड़कर

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उज्जैन. दीपावली हिंदुओं का सबसे बड़ा त्योहार है। इस बार ये पर्व 24 अक्टूबर, सोमवार को मनाया जाएगा। इस पर्व से कई परंपराएं और मान्यताएं जुड़ी हैं। दीपावली (Diwali 2022) की रात बहुत ही खास होती है क्योंकि ऐसा कहा जाता है रात्रि में देवी लक्ष्मी लोगों के घरों में प्रवेश करती हैं और जहां साफ-सफाई दिखाई देती हैं, वहां निवास करती हैं, इसके विपरीत अस्वच्छ घर को छोड़कर तुरंत चली जाती हैं।

दीपावली की रात कुछ काम करने से बचना चाहिए, नहीं तो देवी लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं। आगे जानिए कौन-से हैं वो काम.

1. शराब न पीएं
दीपावली की रात कुछ लोग लक्ष्मी पूजा के बाद शराब पी लेते हैं। ये काम बिल्कुल भी न करें। देवी लक्ष्मी सात्विक घरों में प्रवेश करती हैं यानी वहां जहां किसी तरह का कोई गलत काम दीपावली की रात में नहीं होता। शराब तो वैसे कभी नहीं पीनी चाहिए लेकिन दीपावली का रात तो भूलकर भी शराब को हाथ नहीं लगाना चाहिए।

2. जुआं न खेलें
कुछ लोग दीपावली की रात जुआं खेलते हैं। ऐसा कहा जाता है कि ये एक परंपरा है, लेकिन ये बिल्कुल गलत है। दीपावली और जुएं का कोई संबंध नहीं है। जुआं एक सामाजिक बुराई है, जिससे हमेशा दूर रहना चाहिए। जुएं के कारण ही महाभारत का युद्ध हुआ और इसी वजह से पांडवों को वन में निवास करना पड़ा। दीपावली की रात जुआं भूलकर भी खेलें।

3. मांसाहार न करें
दीपावली सात्विक त्योहार है यानी इस दिन कोई भी ऐसा काम न करें जो तामसिक हो जैसे मांसाहार। हालांकि लगभग लोग दीपावली की रात नॉनवेज खाने से बचते हैं, लेकिन फिर भी कई बार एल्कोहल के साथ लोग दीपावली की रात मांसाहार खाना पसंद करते हैं। ऐसा करने से देवी लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं और ऐसे घर से तुरंत चली जाती हैं।

4. स्त्री संग न करें
दीपावली की रात ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। यानी पत्नी से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। कोशिश करें कि रात में सोएं नहीं और अधिक से अधिक संख्या में देवी लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें। दीपावली की रात स्त्री संग करना ठीक नहीं माना गया। इसलिए ये काम करने से बचना चाहिए।
 

कब है अहोई अष्टमी? जानें शुभ मुहूर्त, पारण का समय और उपाय

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कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है. इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और उज्जवल भविष्य के लिए व्रत रखती हैं.

इस साल अहोई अष्टमी का व्रत 17 अक्टूबर 2022 को रखा जाएगा. इस दिन अहोई माता की पूजा की जाती है. साथ ही महिलाएं इस दिन निर्जल व्रत रखती हैं. अहोई अष्टमी के व्रत को तारे देखकर तोड़ा जाता है. इस साल अहोई अष्टमी के व्रत पर कई शुभ संयोग बनने जा रहे हैं. अहोई अष्टमी के दिन कुछ खास उपाय करने से संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी होती है. आइए जानते हैं अहोई अष्टमी का शुभ मुहूर्त, उपाय और तारों का समय.

अहोई अष्टमी पर बनने वाले शुभ संयोग

अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजे से लेकर 12 बजकर 47 मिनट तक

अमृत काल -सुबह 02 बजकर 31, अक्टूबर 18 से ,सुबह 04 बजकर 19 मिनट, अक्टूबर 18 तक

सर्वार्थ सिद्धि योग- सुबह 05 बजकर 13 मिनट, अक्टूबर 18 से सुबह 06 बजकर 33 मिनट, अक्टूबर 18 तक

शिव योग- 17 अक्टूबर, प्रात:काल से लेकर शाम 04 बजकर 02 मिनट

अहोई अष्टमी 2022 शुभ मुहूर्त

अष्टमी तिथि का प्रारंभ: 17 अक्टूबर, सोमवार, सुबह 09 बजकर 29 मिनट से
अष्टमी तिथि का समापन: 18 अक्टूबर, मंगलवार, सुबह 11 बजकर 57 मिनट पर
पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 06 बजकर 14 मिनट से शाम 07 बजकर 28 मिनट तक

अहोई अष्टमी 2022 पारण समय

जो माताएं तारों को देखकर पारण करती हैं. वो शाम के समय 6 बजकर 36 मिनट पर पारण कर सकती हैं. वहीं, जो महिलाएं चंद्रमा को देखकर पारण करती हैं वो रात 11 बजकर 24 मिनट के बाद पारण कर सकती हैं.

अहोई अष्टमी के उपाय

अहोई अष्टमी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती को दूध भात का भोग लगाएं. साथ ही इस दिन शाम को पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं.

अहोई अष्टमी के दिन अहोई माता की पूजा करते समय उन्हें सफेद रंग के फूल अर्पित करें.

अहोई अष्टमी के दिन शिवलिंग का दूध से अभिषेक करें और माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करें. इस उपाय को आप अहोई अष्टमी के लेकर भाई दूज तक कर सकते हैं.

अहोई अष्टमी के दिन अहोई माता को सिंदूर अर्पित करें. इस उपाय को करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है.

अहोई अष्टमी के दिन घर में जो खाना बना हो उसमें से एक हिस्सा गाय के लिए रख दें. ऐसा करने से आपके घर में जल्द ही खुशखबरी आएगी.

अगर आपकी कोई संतान नहीं है तो इस दिन चांदी के 9 मोती लें और इन्हें लाल रंग के धागे में पिरोकर अहोई माता को अर्पित करें. ऐसा करने से आपकी मनोकामना जल्द ही पूरी होगी.

अहोई अष्टमी पर माता को श्रृंगार का सामान अर्पित करें. ऐसा करने से संतान को उसके कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है.

श्रद्धा के मुताबिक पूजा

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हरेक व्यक्ति में चाहे वह जैसा भी हो, एक विशेष प्रकार की श्रद्धा पाई जाती है। लेकिन उसके द्वारा अर्जित स्वभाव के अनुसार उनकी श्रद्धा उत्तम (सतोगुणी), राजस (रजोगुणी) अथवा तामसी कहलाती है। अपनी श्रद्धा के अनुसार ही वह कतिपय लोगों से संगति करता है। अब वास्तविक तथ्य तो यह है कि जैसा कि गीता के 15 वें अध्याय में कहा गया है कि प्रत्येक जीव परमेर का अंश है। अतएव वह मूलत: इन समस्त गुणों से परे होता है।  
लेकिन जब वह भगवान के साथ अपने सम्बन्ध को भूल जाता है और बद्ध जीवन में भौतिक प्रकृति के संसर्ग में आता है तो वह विभिन्न प्रकार की प्रकृति के साथ संगति करके अपना स्थान बनाता है। इस प्रकार से प्राप्त कृत्रिम श्रद्धा तथा अस्तित्व मात्र भौतिक होते हैं। भले ही कोई किसी धारणा या देहात्मबोध द्वारा प्रेरित हो लेकिन मूलत: वह निगरुण या दिव्य होता है। अतएव भगवान के साथ अपना सम्बन्ध फिर से प्राप्त करने के लिए उसे भौतिक कल्मष से शुद्ध होना पड़ता है। यही एकमात्र मार्ग है, निर्भय होकर कृष्णभावनामृत में लौटने का।  
श्रद्धा मूलत: सतोगुण से उत्पन्न होती है। मनुष्य की श्रद्धा किसी देवता, किसी कृत्रिम ईश्वर या मनोधर्म में हो सकती है लेकिन प्रबल श्रद्धा सात्त्विक कार्यो से उत्पन्न होती है। किंतु भौतिक बद्धजीवन में कोई भी कार्य शुद्ध नहीं होता। वे मिश्रित होते हैं। वे शुद्ध सात्त्विक नहीं होते। शुद्ध सत्त्व दिव्य होता है। इसमें रहकर मनुष्य भगवान के स्वभाव को समझ सकता है। जब तक श्रद्धा पूर्णतया सात्त्विक नहीं होती, वह प्रकृति के किसी भी गुण से दूषित हो सकती है। ये दूषित गुण हृदय तक फैल जाते हैं।  
अत:  किसी विशेष गुण के सम्पर्क में रहकर हृदय जिस स्थिति में होता है, उसी के अनुसार श्रद्धा होती है। यदि किसी का हृदय सतोगुण में स्थित है तो उसकी श्रद्धा भी सतोगुणी है। यदि हृदय रजोगुण में स्थित है तो उसकी श्रद्धा रजोगुणी और तमोगुण में स्थित है तो उसकी श्रद्धा तमोगुणी होती है। पूजा इसीके आधार पर होती है।  

राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन (14 अक्टूबर 2022)

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मेष :- कार्यकुशलता एवं समृद्धि के योग फलप्रद हों तथा उत्साह से कार्य बनेंगे, धैर्य से कार्य करें।
वृष :- कार्य तत्परता से लाभ होगा एवं इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे, रुके कार्य तत्काल बना लेवे।
मिथुन :- व्यवसायिक क्षमता में वृद्धि, कार्यकुशलता से संतोष, बिगड़े कार्य शनै: शनै: बन जायेंगे।
कर्क :- धन सोच-समझकर व्यय करें अन्यथा हानि की संभावना होगी, मानसिक विभ्रम, भय-क्लेश होगा।
सिंह :- समय अनुकूल नहीं, विशेष कार्य स्थिगित रखें, लेनदेन के मामले में हानि हो सकती है।
कन्या :- मानसिक विभ्रम के कारण किसी विभ्रम में फंस सकते हैं, सतर्कता से कार्य अवश्य करें।
तुला :- भाग्य का सितारा प्रबल हो, बिगड़े कार्य अवश्य बनेंगे, कार्यकुशलता से संतोष होगा।
वृश्चिक :- कार्यकुशलता से संतोष, कार्य योजना फलीभूत होगी, सफलता के साधन अवश्य जुटायें।
धनु :- धन लाभ, सफलता के साधन जुटायें, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, ध्यान अवश्य रखें।
मकर :- आरोप-प्रत्यारोप व क्लेश सम्भव, धन लाभ आशानुकूल, सफलता का हर्ष होगा।
कुम्भ :- इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे, स्त्री शरीर कष्ट, चिन्ता व असमंजस से बचकर चलें।
मीन :- इष्ट मित्र सहायक रहें, दैनिक कार्य में अनुकूलता बनेगी, ध्यान रखकर कार्य करें उत्तम होगा।

बिजली सप्लाई में गड़बड़ी पर सब इंजीनियर सस्पेंड

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भोपाल । भोपाल सीएम शिवराज सिंह चौहान ने आज रीवा जिले की समीक्षा बैठक ली। बिजली सप्लाई को लेकर मिल रहीं शिकायतों पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्शन लेते हुए हनुमना में पदस्थ बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर को सस्पेंड कर कामों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा सीएम ने रीवा जिलें में अन्य सरकारी स्कीम्स की योजनावार समीक्षा की। सीएम हेल्पलाइन में रीवा जिला पंचायत ने अच्छा काम किया है, रीवा विगत 16 माह से नंबर 1 पर है।
सीएम ने अफसरों से पूछा- जितने भी नये आवास स्वीकृत है उनमें मेरा बधाई संदेश गया कि नहीं? सीएम हेल्पलाइन में शिकायत में 696 शिकायत है। अनुचित राशि आदि मांगने की। 14 जीआरएफ को पद से हटाया है। कुछ सचिवों का वेतन भी काटा है। ऐसे बेईमानो को सेवा से पृथक करो। एफआईआर करो, जेल भेजो। करप्शन के मामले में जीरो टोरलेंस की नीति अपनाओ, किसी भी बेईमान को मत छोड़ो। शिवराज सिंह चौहान ने रीवा जिले में मातृ मृत्यु दर शिशु मृत्यु दर में आई कमी को लेकर के प्रशंसा व्यक्त की, रीवा इस काम में प्रदेश में दूसरे नंबर पर है। शहरी- रीवा नगर निगम में 4300 स्वीकृत हुए। 800 मकान अभी अपूर्ण हैं। जिन्हें तीव्र गति से पूरा करें। लोगों के मकान बन जाएं ये हमारी ड्यूटी है। पीएम आवास योजना (ग्रामीण) में 83,928 स्वीकृत हुए इनमें 78551 आवास पूर्ण हुए हैं।
 1500 किसानों ने इंटरेस्ट दिखाया है। इनके प्रशिक्षण की व्यवस्था करें। जनप्रतिनिधि भी 1-2 एकड़ में प्राकृतिक खेती करें ताकि प्रेरणा मिल सके। मैं स्वयं भी कर रहा हूं।
नशा मुक्ति अभियान के तहत 219 प्रकरण बनाए गए हैं। 160 स्थानों से अवैध शराब जब्त की गई है। हुक्का लाउंज को बंद कराया गया है। मुख्यमंत्री जनसेवा योजना में कुल 2 लाख आवेदन आए हैं। 1.93 लाख लोग लाभान्वित हुए हैं।
सीएम ने कहा- मेरे पास जो जानकारी है उसमें अब तक कम परिवारों को घरेलू कनेक्शन मिले है, काम की गति बढ़ाए। 809 गांव में योजना संचालित है। कार्य की गुणवत्ता भी ठीक करें। यदि कोई काम पूरा नहीं किया ठेकेदार ने तो पेमेंट रोके। मुझे पूरा काम परफेक्ट चाहिए। स्श्व जाएं, जितने गांव भी योजना से जुड़े हैं उनका इंस्पेक्शन करें। कलेक्टर प्रति सप्ताह कार्यों की समीक्षा करें।

अब तेजी से होगा ठंडक का अहसास

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वायुमंडल में उत्तरी हवाओं का असर
हवा के रुख में जारी रहेगा परिवर्तन, अभी तापमान में रहेगी उतार चढ़ाव की रहेगी स्थिति

भोपाल । सर्दी का लोगों को बेसब्री से इंतजार है, लेकिन अब तक बने सिस्टम और बारिश के कारण सर्दी अब तक जोर नहीं पकड़ पाई है। बारिश का दौर थमने के बाद शहरवासियों को सुबह शाम हल्की ठंडक का अहसास होने लगा है। इसका कारण यह है कि बुधवार को हवा का रुख उत्तरी और उत्तरी पश्चिमी रहा। वायुमंडल में जहां 1 से 2 किमी के बीच उत्तरी हवाओं का असर रहा, वहीं दो से तीन किलोमीटर के बीच उत्तर पश्चिमी हवा सक्रिय रही, इसके कारण हल्की ठंडक का अहसास होने लगा है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल हवा का रुख बार-बार बदलता रहेगा। इसलिए तापमान में उतार चढ़ाव की स्थिति बनती रहेगी। शहर में बीते मौसम का मिजाज नरम रहा। सुबह हल्के बादल रहे, इसके बाद धूप खिलती रही। इस दौरान शहर का अधिकतम तापमान 31.3 और न्यूनतम तापमान 21.6 डिग्री रहा, जबकि मंगलवार को अधिकतम तापमान 30.3 और न्यूनतम 21.6 डिग्री दर्ज किया गया था। अधिकतम तापमान में एक डिग्री की बढ़ोतरी हुई है, जबकि न्यूनतम तापमान स्थिर रहा है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि रात के समय हवा का रूख उत्तरी तो दिन में उत्तर पश्चिमी था।
मौसम में बदलाव के चलते सेहत का खास ख्याल रखना जरूरी है। जरा सी लापरवाही सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। बदलते मौसम में इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) कमजोर हो जाता है। ऐसे में सर्दी, जुकाम और बुखार की परेशानी आम बात है। शाम के समय पर्याप्त कपड़े पहन कर ही बाहर निकलना चाहिए। बदलते मौसम में वायरल बुखार के मामले बढ़ते हैं। बड़ों के साथ बच्चे भी वायरल बुखार की चपेट में आ रहे हैं। इसलिए इस मौसम में बच्चों तथा बुजुर्गों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। कभी सर्द और कभी गर्म मौसम होने के कारण सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार, थकान जैसी बीमारियां लोगों को परेशान कर रही है। सबसे पहले बच्चे इनकी चपेट में आते हैं। खान पान पर ध्यान देने की जरूरत है।

1,373 करोड़ से मप्र में बिछेगा सड़कों जाल

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विधानसभा चुनाव से पहले जर्जर सड़कों को होगा निर्माण

भोपाल । विधानसभा चुनाव 2023 से पहले प्रदेश में जहां गांव से लेकर शहर तक सड़कों का जाल बिछेगा, वहीं मानसून से जर्जर हुई सड़कों का पेंचवर्क भी पूरा किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार ने पूंजीगत व्यय के लिए मप्र को विशेष सहायता योजना में 1373 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की है। इस राशि से 107 सड़कों का निर्माण कराया जाएगा। इनमें से 99 सड़कें जुलाई 2023 तक पूरी हो सकेंगी। केंद्र ने यह राशि मप्र को बिना ब्याज के दी है और इसे 50 साल में वापस करना होगा।
गौरतलब है कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए मुख्यमंत्री द्वारा विधायकों से उनके क्षेत्र की सड़कों के विकास कार्य के प्रस्ताव मांगे थे। मांगे गए प्रस्ताव के आधार पर की गई अनुशंसा में बीना-आगासोद, उमरी से पांडरी मार्ग, लहरोली से ढोचरा मार्ग, निपानिया बैजनाथ से लसूडिय़ा मार्ग, हरनामपुर से भखुरी, रेही से नवाही मार्ग, पोड़ी से अजगुढ़, बिछुआ से मलारा मार्ग, भदभदा से बिलकिसगंज, डेली से मोहनगढ़, गिरवार से घोची मार्ग आदि शामिल है। विधायकों ने करीब 600 सड़कों मुख्य मार्गों का डामरीकरण की अनुशंसा की थी, जिनके कारण संभागीय कार्यालय निर्माण 800 करोड़ में कराए जाने हैं। ऐसे में केंद्र से मिली 1373 करोड़ रूपए की राशि सड़कों के निर्माण को गति देगी।
जिन सड़कों का निर्माण कराया जाएगा, उनमें दो नवीन सड़कों रीवा ब्यौहारी से टेटका मोड़ तक 125 करोड़ रुपए तथा नर्मदापुरम – पिपरिया रोड 70.57 करोड़ की लागत से निर्मित कराया जाएगा। इसके अलावा अपूर्ण कार्यों एलीवेटेड कॉरिडोर इंदौर को 70.50 करोड़, सीहोर इछावर – कोसमी मार्ग 97.50 करोड़, मनावर उमरबन कालीबावड़ी धामनोद 89 करोड़, हथाईखेड़ा डैम से माउंट फोर्स स्कूल रायसेन रोड 83.35 करोड़, नसरुल्लागंज-कोसमी मार्ग 42.34 करोड़, हाई लेवल ब्रिज नर्मदा नदी ओंकारेश्वर 40.25 करोड़, नरसिंहपुर सांकल गोटेगांव मेजर डिस्ट्रिक रोड 40 करोड़, कलियासोत डैम न्यू बायपास रोड 32.31 करोड़, जबलपुर यूनिवर्सिटी से डुमना रोड 30 करोड़, रेलवे ओवर ब्रिज खंडवा अकोला मीटर गेज सेक्शन केन नदी पन्ना- अमानगंज 14.68 16.28 करोड़ आदि की स्वीकृति केंद्र से मिली है। इनके अलावा रतलाम रिंग रोड 17.50 करोड़ , इटारसी-भुसावल 17.35 करोड़, मनावर सेमल्दा 17. 10 करोड़, भोपाल तिराहा रायसेन 17.00 करोड़, सिलवानी – गैरतगंज 15.79 करोड़, हाईलेवल ब्रिज धसान 14.83 करोड़, रतलाम- बाजना रोड 13.25 करोड़,  बिरसी गोंदिया रोड 13.54 करोड़ और सागर- दमोह मार्ग 12.46 करोड़ में निर्माण की स्कीकृति मिली है।
चुनावी वर्ष से पहले सरकार के सामने जर्जर सड़कों का पेंचवर्क बड़ी चुनौती है।  प्रदेश में इस बार हुई रिकॉर्डतोड़ बारिश ने सड़कों की दशा बिगाड़ दी है। मप्र की 76000 किलोमीटर सड़कों में से 9500 किमी इस बार बारिश में खराब हो गईं। ये सड़कें लोक निर्माण विभाग, मप्र सड़क विकास निगम और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की हैं। ऐसा पहली बार है जब मानसूनी बारिश में प्रदेश में इतनी ज्यादा सड़कें खराब हुईं हों। अब तक 4 से 5 हजार किमी सड़कें ही खराब होती रही हैं। 55 हजार किलोमीटर का बड़ा हिस्सा लोक निर्माण विभाग के पास है, जिसमें से सबसे ज्यादा 5500 किलोमीटर से ज्यादा सड़कें पूरी तरह उधड़ चुकी हैं। बाकी खराब सड़कों में 2500 किमी का हिस्सा आरडीसी और एनएचएआई का है। खास बात यह है कि साल भर पहले ही बनी भोपाल से होशंगाबाद जाने वाली सड़क औबेदुल्लागंज से बुदनी के बीच खराब हो गई है। भोपाल में करीब 500 किमी सड़कें खराब हुई हैं। पिछले दो साल में नगर निगम ने सीवेज और पाइप लाइन डालने के लिए 300 किमी से ज्यादा सड़कें खोदीं, लेकिन इनका रेस्टोरेशन ठीक से नहीं किया। इसलिए ये बारिश भारी पड़ गई।  प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों की स्थिति क्या होगी इसका आकलन राजधानी की सड़कों की स्थिति से लगाया जा सकता है। शहर में सड़कों का हाल-बेहाल बना हुआ है। सड़कें जगह-जगह से गड्ढों में तब्दील हो गई है। इसके कारण रहवासियों को मुसीबत झेलना पड़ रही है। इसलिए इनका पेंचवर्क कराना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।

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