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बेली फैट कम करने के असरदार टिप्स

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बेली और थाई फैट को कम करने के लिए आपके लुक को पूरी तरह से खराब कर देते हैं। पेट पर जमा एक्सट्रा फैट टाइप -2 डायबिटीज और दिल की समस्याओं जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। अपने बैली फैट से छुटकारा पाने के लिए, हेल्‍दी डाइट के साथ एक्‍सरसाइज भी बेहद जरूरी है। ज्यादातर लोग वजन कम करने के लिए काफी कोशिश करते हैं, लेकिन फिर भी जिद्दी बैली फैट कम नहीं होता।

सही कार्ब्स लें : वेट लॉस के दौरान एक्सरसाइज करने के लिए आपको एनर्जी की सबसे ज्यादा जरुरत होती है, ऐसे में कार्ब्स आपको एनर्जी देते हैं। लेकिन सही कार्ब्स लेना जरूरी है। शक्कर, पास्ता, ब्रेड से मिलने वाले कार्ब्स से बचें, क्योंकि इनकी वजह से वजन बढ़ सकता है।

मीठा खाने से बचें : शरीर में जगह-जगह पर फैट जमा होने का कारण शुगर का ज्यादा सेवन है। स्टार्च और कार्बोहाइड्रे युक्त चीजो को खाने से इंसुलिन रिलीज होता है। ऐसे में जितनी ज्यादा शक्कर आप खाते हैं, उतना ही शरीर में इंसुलिन रिलीज होता है। इसलिए मीठा खाने से बचें।

कैलोरी पर दें ध्यान :  अगर आप वजन कम करने की योजना बना रही हैं तो आपको अपने खान-पान पर नजर रखनी होगी। आप दिनभर में क्या खा रहे हैं इस पर ध्यान दें। हेल्दी डायट और पोर्शन कंट्रोल पर ध्यान देने से आप अधिक कैलोरी खाने से खुद को बचा सकते हैं।

पानी की मात्रा पर दें ध्यान : चर्बी कम करने के लिए मेटाबॉलिज्म का फास्ट होना जरूरी है। अगर बॉडी सही तरह से हाइड्रेटेड होती है तो मेटाबॉलिज्म फास्ट होता है। पानी से आपका पेट भरा रहता है, यह बार-बार भूख लगने की आदत को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा ये शरीर से एक्सट्रा सोडियम को बाहर निकालने में मदद करता है।  

प्रोटीन करें शामिल : बेली फैट को कम करने के लिए डायट में ज्यादा से ज्यादा प्रोटीन को शामिल करने की सलाह दी जाती है। फैट कम करने के लिए प्रोटीन काफी मददगार होता है।

अभिनेता रणवीर शौरी के पिता के.डी. शौरी का हुआ निधन

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अभिनेता रणवीर शौरी के पिता कृष्ण देव शौरी का शुक्रवार रात, 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। अभिनेता ने शनिवार को ट्विटर पर अपने दिवंगत पिता की एक तस्वीर साझा कर इस बात की जानकारी दी है। अभिनेता ने सोशल मीडिया पर अपने पिता की एक तस्वीर साझा करते हुए, रणवीर ने लिखा, “मेरे प्यारे पिता, कृष्ण देव शौरी, कल रात 92 साल की उम्र में चले गए। उस समय उनके साथ उनके बच्चे और पोते-पोतियां सब थे। वह अपने पीछे अद्भुत यादें और कई प्रशंसक छोड़ गए हैं। मैंने अपनी प्रेरणा और सुरक्षा का सबसे बड़ा स्रोत खो दिया है।"

रणवीर के दोस्तों और इंडस्ट्री के सहयोगियों के साथ-साथ प्रशंसकों ने भी पोस्ट पर अपनी संवेदनाएं भेजीं। कृष्ण देव शौरी, केडी शौरी के नाम से प्रसिद्ध थे। वह एक फिल्म निर्माता भी थे। उन्होंने 1970 और 80 के दशक में जिंदा दिल, बे-रहम, बद और बदनाम जैसी फिल्मों का निर्माण किया था। इसके अलावा, उन्होंने 1988 की फिल्म महा-युद्ध का निर्देशन किया भी था, जिसमें गुलशन ग्रोवर, मुकेश खन्ना, कादर खान और परेश रावल जैसे कलाकार थे। उन्होंने अपनी दो फिल्मों में बतौर जज कैमियो भी किया था।

भाजपा और कांग्रेस के बागी भी मैदान में, पार्टी प्रत्याशियों को होगा नुकसान

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बुरहानपुर,  नगर पालिका परिषद नेपानगर के 24 वार्डों में अधिकृत प्रत्याशियों के साथ निर्दलीय मैदान में हैं भाजपा के सात  बागी मैदान में होने से उसे बड़ा झटका लगने की उम्मीद की जा रही है मजे की बात यह है कि सांसद प्रतिनिधि प्रवीण काटकर की पत्नी सरला काटकर वार्ड क्रमांक 21 से निर्दलीय के रूप में मैदान में है जबकि प्रवीण काटकर ने अधिकृत प्रत्याशी के समर्थन में अपना नाम वापस ले लिया है नेपानगर के इस चुनाव में फिर एक बार भाजपा की गुटबाजी खुलकर सामने आती दिखाई दे रही है भाजपा इन बागियों पर चाहे जो कार्यवाही करें परंतु चुनाव मैदान में तो नुकसान उठाना माना जा रहा है टिकट की चाह में 14 बागी मैदान में थे परंतु भाजपा के बड़े नेताओं के मान मुनव्वल के बाद सात बागियों ने अपने नाम वापस ले लिए लेकिन सातअभी बागी के रूप में मैदान में डटे हैं बागियों के रूप में कांग्रेश के भी दो बागी मैदान में हैं उन्हें भी कांग्रेस के बड़े नेताओं ने समझाया लेकिन अपनी जिद पर अडे रहकर अधिकृत प्रत्याशियों को नुकसान पहुंचाएंगे कांग्रेश के मुकाबले भाजपा को इन बागियों से बड़ा नुकसान होगा जहां भाजपा और कांग्रेस के बागी अधिकृत प्रत्याशियों को नुकसान देंगे वही आप पार्टी और बहुजन समाज पार्टी भी इस चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी नेपानगर के इस निकाय चुनाव में जहां अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए भाजपा एड़ी चोटी का जोर लगाएगी वही कांग्रेश नए तेवर के साथ चुनाव मैदान में है वह भी सत्ता हासिल करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी समय कम और प्रचार गति पकड़ रहा है अब ऐसे में इस चुनाव का वोट किस करवट बैठेगा यह कहना अभी जल्दबाजी होगी लेकिन यह तय माना जा रहा है कि कांग्रेश के मुकाबले भाजपा को बागीओं से बड़ा नुकसान होगा।

लौह व्यक्तित्व के भीतर धड़कता एक कवि ह्रदय

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Jayram Shukla

आज 17 सितंबर को देशभर में प्रधानमंत्री नरेंन्‍द्र मोदी का 72वां जन्मदिन मनाया जा रहा है। साधारण परिवार में जन्में नरेंद्र दामोदर दास मोदी का जीवन देशवासियों के लिए एक बड़ा उदाहरण है। प्रधानमंत्री नरेंन्‍द्र मोदी कवि के रूप में भी अपनी पहचान रखते हैं।

संवेदना, कला-संस्कृति व साहित्य प्रेम के संदर्भ में भी नरेन्द्र मोदी अटलविहारी वाजपेई के वैचारिक वंशधर हैं। उनका कवि पक्ष बहुत कम प्रकाश में आया है…जबकि उन्होंने गुजराती में एक से एक भावप्रवण कविताएं रचीं।

गुजराती से हिन्दी में उनकी कई कविताओं का अनुवाद किया है रवि मंथा ने। रवि मोदीजी के निकट सहयोगी रहे हैं। इन कविताओं का एक संग्रह अँग्रेजी में ‘ए जर्नी’ नाम से रूपा पब्लिकेशन ने प्रकाशित किया है।

नरेन्द्र मोदी का पहला काव्यसंग्रह ‘आँख आ धन्य छे’ नाम से 2007 में प्रकाशित हुआ। सात वर्ष बाद हिन्दी में ‘आँख ये धन्य है’ के नाम से काव्य संग्रह दिल्ली के विकल्प प्रकाशन ने छापा।

गुजराती से हिन्दी में अनुवाद किया अंजना मंधीर ने।

67 कविताओं के इस काव्य संग्रह में श्री मोदी का कवि रूप समग्रता के साथ प्रगट होता है। प्रायः कविताएं काव्य कला की कसौटी में खरी उतरती हैं।

विगत वर्ष मोदीजी के जन्मदिन दिन पर प्रभात प्रकाशन नई दिल्ली ने गुजराती में लिखी उनकी सभी कविताओं का एक महत्वपूर्ण संकलन प्रकाशित किया है।

यहां मोदीजी की दो कविताएं प्रस्तुत कर रहे हैं…

तस्वीर के उसपार

तुम मुझे तस्वीर या पोस्टर में

ढूंढने की व्यर्थ कोशिश मत करो

मैं तो पद्मासन की मुद्रा में बैठा हूँ

अपने आत्मविश्वास में

अपनी वाणी और कर्मक्षेत्र में

तुम मुझे मेरे काम से ही जानो

तुम मुझे मेरी छवि में नहीं

लेकिन पसीने की महक में पाओ

योजना की विस्तार की महक में ठहरो

मेरी आवाज की गूँज से पहचानो

मेरी आँख में तुम्हारा ही प्रतिबिम्ब है।

प्रेम

जल की जंजीर जैसा मेरा ये प्रेम

कभी बाँधने से बँधा नहीं

धूप तो किसी दिन मुट्ठी में आएगी नहीं

बहती पवन को पिंजरा भी रास नहीं

बहुरूपी बादल सा फिरता यह प्रेम कभी स्वीकारने से स्वीकृत हुआ नहीं।

Jairam Shukla Ke Facebook Wall Se

पुरानी बिल्डिंग तोडऩे पर मुफ्त मिलेगा नया फ्लैट

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 -नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने तैयार की री-डेवलपमेंट पॉलिसी
-शहरी क्षेत्रों में 30 से ज्यादा पुराने आवासीय कॉम्पलेक्स को तोड़कर नई इमारत बनाने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा
-आवासीय बिल्डिंग के लिए मौजूदा एफएआर से 0.50 और कमर्शियल बिल्डिंग के लिए 0.75 एफएआर ज्यादा दिया जाएगा
-ग्राउंड कवरेज भी 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत किया जाएगा।

भोपाल, मध्य प्रदेश नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने री-डेवलपमेंट पॉलिसी तैयार कर ली है। इसे अब कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। पॉलिसी को स्वीकृति मिलने पर प्रदेश में लागू किया जाएगा। री-डेवलमेंट पॉलिसी के तहत किसी भी जमीन पर बनी पुरानी या जर्जर बिल्डिंग तोडऩे पर निर्माण में फ्लोर एरिया रेशियो और ग्राउंड कवरेज पर इंसेटिव दिया जाएगा। इसके लिए मास्टर प्लान और भूमि विकास नियमों में बदलाव किया जाएगा। प्रदेश के बढ़े शहरों में हाईराइज बिल्डिंग का चयन बढ़ते जा रहा है। वहीं, पुरानी बिल्डिंग जर्जर हो गई है। री-डेवलमेंट पॉलिसी के तहत लोगों को नया और बढ़ा घर मिलेगा। साथ ही नए निर्माण को पर्यावरण को ध्यान में रखकर बनाया जाएगा।  इसमें शहरी क्षेत्रों में 30 से ज्यादा पुराने आवासीय कॉम्पलेक्स को तोड़कर नई इमारत बनाने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसमें वे इमारतें भी शामिल होंगी जिन्हें नगरीय निकायों ने जर्जर घोषित किया है। सरकार के इस प्रावधान से जिन इलाकों में जमीन की कीमत बहुत ज्यादा बढ़ गई है, वहां लोगों को पुराने फ्लैट के स्थान पर नए फ्लैट मुफ्त या फिर मामूली प्रीमियम पर मिल सकते हैं। गौरतलब है कि अभी सिर्फ सरकारी जमीनों के लिए पुनर्निर्माण के लिए रीडेंसिफिकेशन नीति है। अब निजी या विकास प्राधिकरणों और हाउसिंग बोर्ड द्वारा निर्मित कॉलोनियां भी नई नीति के तहत इस दायरे में आ जाएंगी। इस तरह के प्रावधान महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली आदि राज्यों में है।

ऐसे होगा री-डिवलपमेंट
नई पॉलिसी के तहत पुरानी बिल्डिंग को तोड़कर बिल्डर नई बिल्डिंग बनाएगा। इसके लिए रहवासी समिति की अनुमति जरूरी होगी। बिल्डर   पुरानी बिल्डिंग से ऊंची इमारत और ज्यादा फ्लैट बनाएगा। जिनको बेचकर निर्माण की लागत निकालेगा और कमर्शियल स्पेश से अपना मुनाफा कमाएगा।  

यह मिलेगी छूट
पॉलिसी के तहत रहवासी बिल्डिंग के लिए 0.50 और कमर्शियल बिल्डिंग के लिए 0.75 ज्यादा एफएआर दिया जाएगा। ग्राउंड कवरेज भी 30 से बढ़ाकर 40 फीसदी किया जाएगा। यानी 10 हजार वर्गफीट के प्लॉट पर 4 हजार वर्गफीट में निर्माण कर सकेगा। नई नीति के तहत किसी भी बहुमंजिला इमारत के रीडेवलपमेंट के लिए सबसे पहले वहां रहने वाले रहवासियों की समिति की अनुमति लेनी होगी। यह समिति अपार्टमेंट एक्ट के तहत गठित होगी। यही समिति बिल्डर से पुरानी इमारत तोडऩे और फिर उसी जगह पर नई इमारत बनाने के लिए अनुबंध करेगी।

क्या है एफएआर
एफएआर का मतलब यह है कि किसी प्लॉट पर सरकार द्वारा तय किया गया कुल निर्मित क्षेत्र। यानी किसी एरिया में 1.25 का एफएआर है तो वहां कुल जमीन के सवा गुना ज्यादा निर्माण कर सकता है। जैसे 10 हजार वर्गफीट के प्लॉट पर 12500 वर्गफीट। अब यदि इस पर 0.50 का अतिरिक्त एफएआर और मिल जाए तो अब कुल निर्माण 1.75 गुना या 17500 वर्गफीट हो सकता है। अभी ग्राउंड कवरेज यानी 30 प्रतिशत है यानी 10000 वर्गफीट के प्लॉट पर सिर्फ 3000 वर्गफीट एरिया में ही निर्माण किया जा सकता है। बाकी 7000 वर्गफीट एरिया खाली छोडऩा होता है। अब यह एरिया भी बढ़कर 4000 वर्गफीट हो जाएगा।

ऐसे मिलेगा रीडेवलपमेंट का फायदा
अभी यदि किसी पुरानी इमारत को तोड़ा जाए और फिर उतना ही नया निर्माण किया जाए तो पूरी लागत रहवासियों पर आती है। जबकि अतिरिक्त निर्माण की छूट मिलने से अब बिल्डर उसी जमीन पर बिल्डिंग की ऊंचाई बढ़ाकर ज्यादा फ्लैट्स बना सकता है। इन्हीं अतिरिक्त फ्लैट्स को बेचकर निर्माण लागत कवर की जा सकती है। साथ ही उसका कुछ हिस्सा कमर्शियल इस्तेमाल में करने से मुनाफा कमाया जा सकता है।

इसलिए जरूरी
भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों में बहुमंजिला इमारतों का चलन बढ़ रहा है। अक्सर पुरानी या जर्जर इमारतों को तोडऩे पर विवाद होते रहते हैं। अब नई नीति से रहवासियों को बगैर खर्च के नए फ्लैट मिलेंगे तो आसानी से जर्जर इमारतों को तोड़ा जा सकेगा। नए निर्माण होने से सीवेज लाइन, वाटर सप्लाई लाइन आदि भी नए हो जाएंगे, जिससे मेंटेनेंस खर्च कम होगा। कई पुरानी इमारतों में लिफ्ट और पार्किंग जैसी कई सुविधाएं नहीं है। नए निर्माण में बेहतर लैंडस्केपिंग, पोडियम पार्किंग, लिफ्ट जैसी कई सुविधाएं भी मिल सकेंगी। भोपाल में अंजली कॉम्पलेक्स, शालीमार गार्डन, जनता क्वार्टर्स, सुरेंद्र प्लेस समेत करीब 50 अपार्टमेंट्स में 30 साल से ज्यादा पुराने हैं। इन पर यह नीति लागू होगी।

निर्मला सीतारमण ने कहा – MSME का बकाया 45 दिन के अंदर चुकाएं

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मुंबई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने निजी क्षेत्र की कंपनियों से सूक्ष्म, लघु व मझोले उद्यमों का बकाया 45 दिन में चुकाने को कहा है। यह भी माना कि केंद्र सरकार के विभाग व उपक्रम भी एमएसएमई का बकाया समय पर नहीं दे रहे हैं।सीतारमण ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम में कहा, केंद्र, राज्य सरकारों और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों पर भी एमएसएमई का बकाया है। निजी क्षेत्र और उद्योग को 45 दिन के भीतर भुगतान का संकल्प लेना चाहिए। कंपनी पंजीयक में अकाउंट बुक दाखिल करनी चाहिए।उन्होंने कहा, सरकार इस मुद्दे के समाधान के लिए कदम उठाएगी। सुनिश्चित करेगी कि उसके विभाग व सार्वजनिक उपक्रम छोटे व्यवसायों को 90 दिन में भुगतान करें। ट्रेड्स मंच और समाधान पोर्टल जैसी योजनाएं छोटे व्यवसायों को समय पर भुगतान दिलाने में मददगार हैं।

 

गैरकानूनी रूप से हो रहा जीएम सोयाबीन का आयात

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भोपाल। जीन संवर्धित (जीएम) सोयाबीन के बीजों को देश में अवैध रूप से लाने की कोशिश हो रही है। दि सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (सोपा) ने प्रतिबंधित जीएम सोयाबीन के आयात की शिकायत केंद्रीय कृषि मंत्रालय से की है। सोपा ने न केवल जीएम सोयाबीन के आयात का आरोप लगाया है, बल्कि शिकायत के साथ शिपमेंट और कंटेनर की जानकारी भी भेजी है। सोपा ने आशंका जताई है कि देश में जीएम सोयाबीन को अवैध तरीके से दाखिल करवा दिया गया तो यह कृषि क्षेत्र, किसानों और जैव विविधता के लिए आपदा साबित हो सकती है। सोपा ने शिकायती पत्र के साथ सोयाबीन लादकर भारत आ रहे जहाज की जानकारी भेजी है। मंत्रालय में प्लांट प्रोटेक्शन और क्वारंटाइन विभाग का जिम्मा संभाल रहे संयुक्त सचिव प्रमोद कुमार को लिखित शिकायत की गई है। सोपा के अनुसार, देश में एमवी रूबी नाम के जहाज के जरिये 17 हजार 741 टन जीएम सोयाबीन की खेप मंगवाई जा रही है। यह खेप मुंबई बंदरगाह पहुंच रही है। सोपा ने आयात करने वाली कंपनी का नाम भी केंद्रीय सचिव तक भेजा है। सोपा के अनुसार, जीएम सोयाबीन का आयात पूरी तरह प्रतिबंधित है। देश की कृषि और जैव विविधता के लिए जीएम बीज बड़ा खतरा साबित हो सकते हैं। इसी के चलते सरकार ने जीएम सोयाबीन के आयात को प्रतिबंधित कर रखा है। सोपा के कार्यकारी निदेशक डीएन पाठक के अनुसार, 5 दिसंबर 1989 में जीएम या जैव इंजीनियर्ड बीजों के आयात पर सरकार प्रतिबंध का कानून लागू कर चुकी है। कानून से बचने के लिए आयातक कंपनी ने दस्तावेजों में हेरफेर कर सोयाबीन के मूल देश को भी बदल दिया है।

दक्षिण अमेरिका की उपज, नाम अफ्रीका का
सोपा के अनुसार, जीएम सोयाबीन को देश में दाखिल करवाने के लिए इस खेप का उद्गम (ओरिजन) भी बदल दिया गया है। आयात के दस्तावेजों पर जानकारी दी गई है कि अफ्रीकी देश मोजाम्बिक से सोयाबीन आयात हो रहा है, जबकि असल में यह सोयाबीन दक्षिण अमेरिकी देशों से लाया जा रहा है। सोपा के कार्यकारी निदेशक डीएन पाठक ने नईदुनिया से बात करते हुए कहा कि अफ्रीकी देशों में सोयाबीन का उत्पादन नाममात्र का होता है। ऐसे में जब अफ्रीका से सोयाबीन आयात होता है तो वह कुछ कंटेनर और 100-200 टन से ज्यादा नहीं होता। ताजा खेप 17 हजार 741 टन का पूरा जहाज सोयाबीन से भरा है, जो अफ्रीका से संभव नहीं है। दक्षिण अमेरिकी देश में जीएम सोयाबीन पैदा होती है। उस क्षेत्र के देश ब्राजील और अर्जेंटीना विश्व के सबसे बड़े सोयाबीन उत्पादक हैं।

टैक्स-ड्यूटी की भी चोरी
सोपा के अनुसार, सिर्फ नान जीएम सोयाबीन के आयात की अनुमति देश में है। दरअसल, अफ्रीकी देशों से व्यापार करार के तहत वहां से सोयाबीन आयात करने पर शून्य प्रतिशत ड्यूटी लागू होती है, लेकिन विश्व के किसी अन्य भाग से सोयाबीन आयात हो तो उस पर 45 प्रतिशत ड्यूटी चुकानी होगी। ऐसे में ताजा मामले में वैसल (जहाज) को अफ्रीका से डायवर्ट करवाकर इस सोयाबीन का ओरिजन बदलने से उसे न केवल नान जीएम घोषित कर दिया गया, बल्कि टैक्स चोरी भी की गई। दरअसल, अफ्रीकी देशों में जीएम सोयाबीन नहीं उगाई जाती।

सोयाबीन की खेप की करें जांच
सोपा के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर डीएन पाठक का कहना है कि जीएम सोयाबीन भारत पहुंची तो देश की कृषि और जैव विविधता के लिए आपदा साबित होगा। किसी तरह के अवांछित खरपतवार, बीज या सूक्ष्म परजीवी देश में दाखिल हो सकते हैं। कभी इसी तरह विदेश से गाजरघास देश में पहुंची थी। हमने शिकायत की है। अब विदेश व्यापार महानिदेशालय के साथ ही एफएसएसएआई और कस्टम की जिम्मेदारी है कि वे सोयाबीन की खेप की जांच करें।

गौतम अदाणी सीमेंट कारोबार सौंपेंगे करण अदाणी को

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नई दिल्ली | सीमेंट के कारोबार में अपने बेटे करण अदाणी को उतारने के अलावा गौतम अदाणी इस बिजनेस में वरिष्ठ प्रोफेशनल्स को भी उतारने का प्लान बना रहे हैं।बता दें कि अदाणी ग्रुप ने अंबुजा सीमेंट्स और एसीसी लिमिटेड के अधिग्रहण को पूरा कर लिया है।गौतम अदाणी ने 10.5 अरब डॉलर में दो दिग्गज कंपनियों का अधिग्रहण कर उसका संचालन अपने बड़े बेटे करण अदाणी को सौंपने का फैसला किया है। ये दोनों कंपनियां सीमेंट निर्माण से जुड़ी हैं। बता दें कि करण अदाणी फिलहाल अदाणी ग्रुप का पोर्ट का कारोबार देखेते हैं। वे अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन के सीईओ हैं।  

मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि सीमेंट के कारोबार में अपने बेटे को उतारने के अलावा गौतम अदाणी इस बिजनेस में वरिष्ठ प्रोफेशनल्स को भी उतारने का प्लान बना रहे हैं।बता दें कि अदाणी ग्रुप ने अंबुजा सीमेंट्स और एसीसी लिमिटेड के अधिग्रहण को पूरा कर लिया है। सीमेंट कारोबार की दो दिग्गज कंपनियों का अधिग्रहण करने के बाद अदाणी ग्रुप सीमेंट निर्माण के मामले में देश की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी होगी। पहले नंबर पर आदित्य बिड़ला ग्रुप की अल्ट्राटेक सीमेंट है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अदाणी ग्रुप इंटीग्रेटेड लॉजिस्टिक्स फर्म बनाने के लिए समूह के बंदगाहों और सीमेंट व्यवसायों के बीच तालमेल बनाने की योजना पर काम कर रहा है और इसके लिए करण अदाणी को अंबुला सीमेंट के गैर-कार्यकारी निदेशक के पद पर नियुक्त किया गया है।

विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट जारी

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देश के फाॅरेन करेंसी असेट में फिर कमी दर्ज की गई है। लगातार छठे हफ्ते में इसमें गिरवट दर्ज की गई है। इसके कारण देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार भी नीचे फिसला है। नौ सितंबर को समाप्त हुए सप्ताह में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 2.23 अरब डॉलर की कमी आई है। इस पहले बीते दो अगस्त 2022 को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार में 7.94 अरब डाॅलर की कमी आई थी। यह कम होकर 553.105 अरब डॉलर रह गया था।आरबीआई की ओर से जारी सूचना के अनुसार नौ सितंबर 2022 को खत्म हुए सप्ताह के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार में 2.234 अरब डॉलर घटकर 550.871 अरब डॉलर रह गया है।  इससे पहले बीते दो सितंबर को यह कम होकर 553.105 अरब डॉलर रह गया था। पांच अगस्त को समाप्त हुए हफ्ते के बाद इसमें लगातार गिरावट दर्ज की गई है। उससे पहले 29 जुलाई को समाप्त हुए हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार 2.4 अरब डॉलर बढ़कर 573.875 अरब डॉलर हो गया था। उसके बाद लगातार चार हफ्तों से इसमें गिरावट जारी है।

प्रधानमंत्री जारी करेंगे नेशनल लॉजिस्टिक पॉलिसी

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नई दिल्ली । पीएम मोदी आज राष्ट्रीय लॉजिस्टिक नीति के तहत एक समग्र कार्ययोजना जारी करेंगे।यह कार्यक्रम नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित होगा।इस कार्यक्रम की अधिक जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि एक लॉजिस्टिक राष्ट्रीय नीति की आवश्यकता महसूस की गई है, क्योंकि भारत में अन्य विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में लॉजिस्टिक लागत अधिक है।पीएमओ ने अपने बयान में कहा कि घरेलू और निर्यात दोनों बाजारों में भारतीय सामानों की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार के लिए भारत में लॉजिस्टिक की लागत को कम करना अनिवार्य है। कम लॉजिस्टिक लागत अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में दक्षता में कटौती में सुधार करती है, मूल्य संवर्धन और उद्यम को प्रोत्साहित भी करती है। साथ ही पीएमओ ने कहा कि सरकार ने 2014 से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग दोनों में सुधार पर काफी जोर दिया है।बता दें कि देशभर में 10 हजार से अधिक उत्पादों के लॉजिस्टिक कारोबार का आकार 160 अरब डॉलर है। इस क्षेत्र में 2.2 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है। केंद्रीय मंत्रालय ने कहा कि इस क्षेत्र की हालत बेहतर होने से अप्रत्यक्ष लॉजिस्टिक लागत में 10 प्रतिशत की कमी आएगी जिससे निर्यात में 5 से 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी।

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