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उज्जैन में है सप्त सागर, कहीं चढ़ाते हैं खीर तो कहीं मालपुआ, जानें क्या है ये परंपरा

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उज्जैन. 11 अक्टूबर, मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) महाकाल लोक (Mahakal Lok) का लोकार्पण करने उज्जैन आ रहे हैं। महाकाल मंदिर के विस्तारीकरण को ही महाकाल लोक का नाम दिया गया है।

इस लोक योजना में लगभग 800 करोड़ रूपए खर्च किए गए हैं। पहले महाकाल मंदिर कुछ हेक्टेयर में था और विस्तारीकरण के बाद ये मंदिर 20 हेक्टेयर में फैल चुका है। उज्जैन को सप्तपुरियों (Sapt Sagar of Ujjain) में से एक कहा जाता है यानी 7 सबसे पवित्र और धार्मिक शहर। उज्जैन में कई धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाता है। आज हम आपको एक ऐसी ही धार्मिक परंपरा के बारे में बता रहे हैं।

उज्जैन में की जाती है सप्तसागरों की परिक्रमा
उज्जैन में अलग-अलग स्थानों पर 7 तालाब हैं, जिन्हें सप्त सागर कहा जाता है। इनका वर्णन स्कंद पुराण आदि कई ग्रंथों में मिलता है। वैसे तो यहां प्रतिदिन पूजा-पाठ की जाती है, लेकिन अधिक मास के दौरान एक ही दिन में 7 सप्तसागरों की परिक्रमा करने की परंपरा है। इस दौरान हर तालाब में कुछ खास चीजें चढ़ाई जाती हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से शुभ फल मिलते हैं जीवन के सभी कष्ट भी दूर होते हैं। आगे जानिए किस तालाब (सागर) में कौन-सी चीज चढ़ाई जाती है.

1. सप्तसागर के अंतर्गत आने वाले पहले सागर का नाम रुद्रसागर है, जो महाकाल मंदिर और हरसिद्धि मंदिर के बीच स्थित है। भक्त यहां नमक, सफेद कपड़े और चांदी के नंदी अर्पित करते हैं।
2. सप्त सागरों में दूसरा है पुष्कर सागर। ये महाकाल मंदिर से कुछ ही दूरी पर नलिया बाखल क्षेत्र में स्थित है। यहां पीले वस्त्र व चने की दाल चढ़ाई जाती है।
3. नई सड़क पर स्थित है क्षीर सागर। यहां साबूदाने की खीर और बर्तन चढ़ाने की परंपरा है।।
4. चौथे सागर का नाम है गोवर्धन। ये निकास चौराहे पर स्थित है। यहां माखन-मिश्री, गेहूं और लाल कपड़े चढ़ाने का विधान है।
5. उज्जैन शहर के लगभग 4 किमी दूर ग्राम उंडासा में है रत्नाकर सागर। यहां पंचरत्न, महिलाओं के शृंगार की सामग्री और महिलाओं के वस्त्र चढ़ाने की परंपरा है।
6. प्राचीन राम जनार्दन के पास स्थित है विष्णु सागर, भक्त यहां पंचपात्र, ग्रंथ, माला आदि चीजें चढ़ाते हैं।
7. इंदिरा नगर के नजदीक स्थित है पुरुषोत्तम सागर, यहां चलनी और मालपुआ अर्पित करते हैं।

अधिक मास में ही क्यों करते हैं सप्तसागरों की परिक्रमा?
अधिक मास 3 साल में एक बार आता है। इसे मल मास भी कहते हैं। धार्मिक दृष्टि से इसका विशेष महत्व है। जब भी अधिक मास होता है तो श्रृद्धालु सप्तसागरों की परिक्रमा जरूर करते हैं, मान्यता है ऐसा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। अधिक मास भगवान विष्णु से संबंधित है, इसलिए इस महीने में किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना होकर मिलता है। यहीं कारण है कि अधिक मास में सप्त सागरों की परिक्रमा की जाती है।

अपूर्णता से पूर्णता की ओर 

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मनुष्य का बाह्य जीवन वस्तुत: उसके आंतरिक स्वरूप का प्रतिबिम्ब मात्र होता है। जैसे ड्राइवर मोटर की दिशा में मनचाहा बदलाव कर सकता है। उसी प्रकार, जीवन के बाहरी ढर्रे में भारी और आश्चर्यकारी परिवर्तन हो सकता है। वाल्मीकि और अंगुलिमाल जैसे भयंकर डाकू क्षण भर में परिवर्तित होकर इतिहास प्रसिद्ध संत बन गये। गणिका और आम्रपाली जैसी वीरांगनाओं को सती-साध्वी का प्रात: स्मरणीय स्वरूप ग्रहण करते देर न लगी। वामित्र और भतृहरि जैसे विलासी राजा उच्च कोटि के योगी बन गये। नृशंस अशोक बौद्ध धर्म का महान प्रचारक बना। तुलसीदास की कामुकता का भक्ति भावना में परिणत हो जाना प्रसिद्ध है। ऐसे असंख्य चरित्र इतिहास में पढ़े जा सकते हैं। छोटी श्रेणी में छोटे-मोटे आश्चर्यजनक परिवर्तन नित्य ही देखने को मिल सकते हैं। इससे स्पष्ट है कि जीवन का बाहरी ढर्रा जो चिर प्रयत्न से बना हुआ होता है, विचारों में भावनाओं में परिवर्तन आते ही बदल जाता है। मित्र को शत्रु बनते, शत्रु को मित्र रूप में परिणत होते, दुष्ट को संत बनते, संत को दुष्टता पर उतरते, कंजूस को उदार, उदार को कंजूस, विषयी को तपस्वी, तपस्वी को विषयी बनते देर नहीं लगती। 
आलसी उद्योगी बनते हैं और उद्योगी आलस्यग्रस्त होकर दिन बिताते हैं। दुगरुणियों में सद्गुण बढ़ते और सद्गुणी में दुगरुण उपजते देर नहीं लगती। इसका एकमात्र कारण इतना ही है कि उनकी विचारधारा बदल गई, भावनाओं में परिवर्तन हो गया। संसार का जो भी भला-बुरा स्वरूप हमें दृष्टिगोचर हो रहा है, समाज में जो कुछ भी शुभ-अशुभ दिखाई पड़ रहा है, व्यक्ति के जीवन में जो कुछ उत्कृष्ट-निकृष्ट है, उसका मूल कारण उसकी अंत:स्थिति ही होती है। धनी-निर्धन, रोग-नीरोग, अकाल मृत्यु-दीर्घ जीवन, मूर्ख-विद्वान, घृणित-प्रतिष्ठत और सफल-असफल का बाहरी अंतर देखकर उसके व्यक्तित्व का मूल्यांकन किया जाता है। यह बाहरी भली-बुरी परिस्थितियां मनुष्य के मनोबल, आस्था और अंत:प्रेरणाओं की प्रतीक हैं। भाग्य यदि कभी कुछ करता होगा तो निश्चय ही उसे पहले मनुष्य की मनोरुचि में ही प्रवेश करना पड़ता होगा, जिसकी अंत:गतिविधियां सही दिशा में चलने लगीं हैं। किंतु जिसका मानसिक स्तर चंचलता, अवसाद, अवास, आलस्य, आवेश, दैन्य आदि से दूषित हो रहा है, उसके लिए अच्छी परिस्थितियां और अच्छे साधन उपलब्ध होने पर भी दुर्गति का ही सामना करना पड़ेगा।  
 

राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन (10 अक्टूबर 2022)

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  • मेष :- व्यवसायिक क्षमता अनुकूल है, किसी तनाव में विवादग्रस्त होने से बचें।
  • वृष :- स्त्री-वर्ग से भोग-ऐश्वर्य की प्राप्ति तथा कार्य संतोषप्रद होगा, ध्यान रखें।
  • मिथुन :- सामाजिक कार्यों में मान-प्रतिष्ठा, प्रभुत्व-वृद्धि, कार्यकुशलता से संतोष होगा।
  • कर्क :- कार्यकुशलता से संतोष एवं नवीन योजना फलप्रद हो, रुके कार्य बन ही जायेंगे।
  • सिंह :- मान-प्रतिष्ठा, प्रभुत्च वृद्धि किन्तु अधिकारियों की उपेक्षा से कार्य हानि अवश्य होगी।
  • कन्या :- दैनिक कार्यों में सुधार, तत्परता से रुके कार्य निपटा लेवें, चिन्तामुक्त होंगे।
  • तुला :- तनाव, अशांति व कष्ट, घटनाग्रस्त होने से बचें, रुके कार्य निपटा लेवें, कार्य बनेंगे।
  • वृश्चिक :- स्त्री-शरीर सुख, मनोबल उत्साहवर्धक होगा, विरोध होगा, ध्यान अवश्य रखें।
  • धनु :- स्वभाव में उद्विघ्नता, क्लेश, मन अशांति से बचें, कार्य अवरोध अवश्य होगा।
  • मकर :- सफलता के साधन जुटायें, मनोबल उत्साहवर्धक होगा, समय का ध्यान अवश्य रखें।
  • कुम्भ :- विशेष कार्य स्थिगित रखें, मानसिक-विभ्रम व उद्विघ्नता से आप अवश्य बचेंगे।
  • मीन :- किसी तनाव व क्लेश से बचें, मानसिक उद्विघ्नता बनेगी, परेशानी होगी, ध्यान दें।
     

मुख्यमंत्री चौहान ने मांडू में किया पौध-रोपण

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भोपाल : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव के साथ धार जिले में मांडू के जहाज़ महल परिसर में बहेड़ा का पौधा लगाया। मुख्यमंत्री चौहान अपने संकल्प के क्रम में प्रतिदिन पौध-रोपण कर रहे हैं। आज लगाया गया बहेड़ा मध्यप्रदेश सहित उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र और पंजाब में होता है। औषधीय गुणों से भरपूर इस वृक्ष के फल और छाल का उपयोग कई रोगों के उपचार में किया जाता है।

बाघ प्रिंट प्राकृतिक रंगों और हाथ की कारीगरी की अद्भुत कला – मुख्यमंत्री चौहान

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भोपाल : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि बाघ प्रिंट की अदभुत कला प्रकृति के बहुत नजदीक है। मांडू प्रवास के दौरान मुझे स्व-सहायता समूह की बहनों की बाघ प्रिंट से जुड़ी गतिविधियों को निकट से देखने-समझने का सौभाग्य मिला है। साथ ही मुझे प्राकृतिक रंगों और हाथ की कारीगरी के जादू से मनमोहक कलाकृति को उकेरती यह कला, प्रयोग कर सीखने को मिली है। स्व-सहायता समूह की बहनों और बाघ प्रिंट से जुड़े सभी कलाकारों को मेरी शुभकामनाएँ।

मुख्यमंत्री चौहान धार जिले के माण्डू में बाघ प्रिंट के कलाकारों की कलाकृति और महिला स्व-सहायता समहों के उत्पाद का अवलोकन कर कलाकारों से चर्चा कर रहे थे। मुख्यमंत्री चौहान एक जिला-एक उत्पाद, दीनदयाल अन्त्योदय योजना, राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन में हुए कार्यों से भी अवगत हुए। उन्होंने माण्डव के ऐतिहासिक महल, स्मारक और पर्यटन-स्थल देखे। मुख्यमंत्री, माण्डू के दो दिवसीय प्रवास पर थे।

मुख्यमंत्री चौहान ने स्व-सहायता समूह की महिला सदस्यों द्वारा जड़ी-बूटियों और प्राकृतिक उत्पादों से निर्मित रंगों से की जा रही बाघ प्रिंटिंग को देखा। मुख्यमंत्री ने बाघ प्रिंट के कार्य को समझा और उसे कपड़े पर उकेरा। मुख्यमंत्री चौहान ने स्व-सहायता समूह की सदस्यों, स्थानीय शिल्पियों के द्वारा किये जा रहे कार्यों, उनके द्वारा निर्मित उत्पाद के संबंध में उनसे संवाद किया और बेहतर प्रगति के लिये तारीफ भी की। जिला पंचायत द्वारा स्व-सहायता समूह के सदस्यों को बाघ प्रिंट के कार्य के लिये प्रशिक्षित किया गया है। बाघ प्रिंट की माँग बढ़ने से कलाकारों की आय बढ़ी है। उत्सव, प्रदर्शनी और एक्सपो आदि से भी बाघ प्रिंट शिल्पियों को प्रोत्साहन मिल रहा है।

माण्डू के प्राचीन ऐतिहासिक महलों का अवलोकन

मुख्यमंत्री चौहान ने माण्डू में प्राचीन ऐतिहासिक जहाज महल परिसर और हिंडोला महल को देखा। उन्होंने चतुर्भुज राम मंदिर में दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर के अन्य मंदिर में भी दर्शन किए। मुख्यमंत्री ने रेवा कुण्ड में पूजा-अर्चना की। ऐतिहासिक स्थलों पर मौजूद गाइड से बातचीत कर स्थलों के इतिहास के बारे में जानकारी ली। उन्होंने पर्यटकों से भी बात की।

औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन मंत्री राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव, पूर्व मंत्री रंजना बघेल,जन-प्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।
 

बड़ी झील में मिली दो दिन पहले लापता हुए युवक की लाश

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भोपाल। पुराने शहर की श्यामला हिल्स पुलिस ने बड़ी झील से युवक की लाश बरामद की है। बताया गया है की मृतक दो दिन पहले गायब हो गया था, पुलिस को आंशका है की उसने आत्महत्या की है। मर्ग कायम कर पुलिस ने आगे की पड़ताल शुरु कर दी है। पुलिस से मिली जानाकरी के अनुसार जेपी नगर, गौतम नगर में रहने वाला 21 वर्षीय हर्ष अहिरवार पिता संतोष अहिरवार कपड़े की दुकान पर काम करता था। दो दिन पहले वो मोबाइल घर पर ही छोड़कर नारियलखेड़ा मे रहने वाली अपनी बुआ के घर जाने का कहकर गया था, जिसके बाद वापस नही लौटा। काफी देर तक उसके वापस नहीं आने पर जब परिजनो ने बुआ को फोन कर हर्ष के बारे में पूछताछ की तो बुआ ने बताया की हर्ष उनके घर आया ही नहीं है। इसके बाद परिवार वालो ने उसके दोस्तों और रिश्तदारी में खोजबीन की लेकिन उसकी कोई जानकारी नहीं मिलने पर पुलिस को सूचना दी गई। शनिवार सुबह पुलिस को सूचना मिली कि एक युवक का शव तालाब मे पड़ा है। सूचना पाकर पहुचीं पुलिस की शुरुआती छानबीन मे शव की शिनाख्त लापता हर्ष के रुप मे हुई। परिवार वालो ने पुलिस को बताया की बीते करीब दो महीने से हर्ष काफी गुमसुम रह रहा था, ओर कई बार कारण पूछने पर भी उसने कुछ नहीं बताया था। वहीं मृतक के पिता का आरोप है की हर्ष की मोहलले मे रहने वाले एक युवक से करीबी दोस्ती थी, लेकिन डेढ़ महीने पहले उनके बीच किसी बात को लेकर अनबन हो गई थी। ओर सागर ने एक पार्टी में हर्ष को बुलाकर उसके साथ सबके सामने दुर्व्यवहार करते हुए किसी तरह की धमकी दी थी, जिससे वो डिप्रैशन मे रहने लगा था। वहीं पुलिस का कहना है की मृतक के पास से सुसाइड नोट नहीं मिलने से आत्महत्या का कारण साफ नहीं हो सका है। मर्ग कायम कर पीएम के बाद शव परिवार वालो को सौंपते हुए पुलिस ने आगे की छानबीन शुरु कर दी है।

मैक्सिको में अगले दो सालों में 1300 लोगों को नौकरी देगी आईटी दिग्गज एचसीएल

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नई दिल्ली । आईटी क्षेत्र की दिग्गज भारतीय कंपनी एचसीएल अगले दो साल में बड़ी संख्या में लोगों को नौकरियां देने वाली है। कंपनी ने अपने एक बयान में कहा कि वह अगले दो साल में 1300 लोगों को मैक्सिको में जॉब देगी। इतने लोगों की हायरिंग के बाद मैक्सिको में एचसीएल के कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 2,400 हो जाएगी। कंपनी मैक्सिको में अपने कर्मचारियों के बेस को मजबूत करने के प्लान पर काम रही है।
मैक्सिको में अपने कारोबार के 14 साल पूरे होने पर आयोजित एक समारोह में कंपनी ने अपने विस्तार का मॉडल पेश किया है। एचसीएल ने कहा कि नए साल में वह मैक्सिको में अपना छठा टेक्नोलॉजी सेंटर भी खोलेगी। बयान में कहा गया कि कंपनी के हाइब्रिड ऑपरेटिंग मॉडल के अनुरूप सेंटर एक शानदार और मुस्तैद ऑफिस होगा। एचसीएल टेक के कॉर्पोरेट वाइस प्रेसिडेंट (अमेरिका और कार्यकारी स्पॉन्सर, मेक्सिको) अजय बहल ने कहा कि हम भाग्यशाली हैं कि अपने ग्राहकों और पार्टनर्स के साथ मजबूत साझेदारी है। हम मैक्सिको में विस्तार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

मीशो एप से शांपिग करना पड़ा महंगा, सायबर ठग ने लगा दी 34 हजार की चपत

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भोपाल। राजधानी के बैरागढ़ इलाके मे रहने वाले एक व्यक्ति को शांपिग ऐप मीशो से ट्राउजर मंगाना महंगा पड़ गया। इस दौरान अज्ञात सायबर ठग ने उसे अपने जाल मे फंसाते हुए खुद को कोरियर सर्विस वाला बताकर ओटीपी भेजा, उसे क्लिक करते ही फरियादी के एकांउट से 34 हजार की रकम निकल गई। फरियादी ने इसकी शिकायत क्राइम ब्रांच मे की थी। जांच के बाद क्राइम ब्रांच ने केस डायरी थाना पुलिस को भेज दी। पुलिस के अनुसार बैरागढ़ इलाके मे रहने वाले 32 वर्षीय दीपक शर्मा पिता मदनलाल शर्मा ने अपनी शिकायत मे बताया की बीते मार्च माह मे उन्होने ऑनलाइन शापिंग ऐप मीशो से एक ट्राउजर मंगाया था। इसके बाद अज्ञात व्यक्ति ने उससे कोरियर सर्विस वाला बनकर संपर्क किया और पैमैंट करने का कहते हुए उन्हें एक लिंक भेज दी। शातिरो ने उन्हे अपने झांसे में लेकर केवल पांच रूपए ट्रांसफर करने को कहा। दीपक ने जब ऐसा किया तो उनके मोबाइल पर एक ओटीपी आया जिसे आरोपियों ने पूछ लिया। इसके बाद फरियादी के एकाउंट से 34 हजार रूपए निकल गए। पुलिस मोबाइल नंबर के आधार पर अज्ञात आरोपियो की सुरागशी के प्रयास कर रही है।

“श्री महाकाल लोक” : संस्कृति और आध्यात्म का स्वर्णिम संयोजन

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भोपाल : शिव सर्वगत अचल आत्मा है, शिव की आराधना शक्ति की आराधना है। शिव अव्यक्त है, उनके सहस्त्रों रूप है। भारत की विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत को "श्री महाकाल लोक" में जिस सुंदर ढंग से प्रदर्शित किया गया है वह अतुलनीय है। यहाँ शांति और निश्चिन्तता के साकार रूप शिव ही शिव है। "श्री महाकाल लोक" सनातन संस्कृति की पौराणिकता,ऐतिहासिकता और गौरवशाली परम्परा का अद्भुत संगम और अद्वितीय नूतन रूप है। इसे जिस भव्यता और सुंदरता से प्रदर्शित किया गया है, वह चमत्कृत कर देता है।

 दरअसल प्राचीन पुण्य सलिला माँ क्षिप्रा के तट पर बसी प्राचीनतम नगरी उज्जैन का "श्री महाकाल लोक" भगवान शिव के भक्तों के स्वागत के लिए तैयार है। महाकाल मंदिर के नवनिर्मित कॉरिडोर को 108 स्तंभ पर बनाया गया है, 910 मीटर का ये पूरा महाकाल मंदिर इन स्तंभों पर टिका होगा। महाकवि कालिदास के महाकाव्य मेघदूत में महाकाल वन की परिकल्पना को जिस सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया था, सैकड़ों वर्षों के बाद उसे साकार रूप दे दिया गया है। दुनिया भर से उज्जैन आने वाले शिव भक्तों के लिए यह शिव महिमा का सम्पूर्ण अनुभव देने का अनूठा और अद्भुत प्रयास है।  

"श्री महाकाल लोक" आधुनिक व्यवस्थाओं और संसाधनों से भी परिपूर्ण बनाया गया है। इसकी व्यवस्था इतनी उत्कृष्ट है कि भक्तों और पर्यटकों को अभिभूत कर देगी। मंदिरों के साथ ही पूजा सामग्री और हार-फूल की दुकानों को भी विशिष्ट तरीके से लाल पत्थर से बनाया गया है,जिन पर सुंदर नक्काशी की गई है। "श्री महाकाल लोक" के निर्माण से भगवान शिव की जिन कथाओं का महाभारत, वेदों तथा स्कंद पुराण के अवंती खंड में उल्लेख है, उनका जीवंत अनुभव शिव भक्त धर्मनगरी उज्जैन में कर पाएंगे। महाकाल ज्योतिर्लिंग एक मात्र ज्योतिर्लिंग है जो दक्षिणमुखी है। सनातन धर्म में महाकाल के दर्शन जीवन का एक महत्वपूर्ण और आवश्यक भाग माना जाता है, जिससे शांति मिलती है। इसलिए लाखों भक्त नित्य इस देव स्थान पर आते हैं। "श्री महाकाल लोक" के जरिए शिव के सभी स्वरूप एक स्थान पर लाना मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार का ऐसा दुर्लभ कार्य है जिसकी और कोई मिसाल नहीं हो सकती।

शिव मंगल, शुभ और सौभाग्यसूचक देव है, वे सदाशिव है, जो ब्रह्मा से सृष्टि रचवाते है, विष्णु से उसका पालन करवाते है तथा रूद्र से उसका नाश करवाते है। "श्री महाकाल लोक" में शिव, शम्भू, शशिशेखर के सहस्त्रों रूप और उनकी महिमा को सुंदर ढंग से उकेरा गया है। शिवलिंग सार्वभौमिक रूप से सृजन का प्रतीक है और "श्री महाकाल लोक" भारतीय सांस्कृतिक विरासत को साक्षात् प्रतिबिम्बित कर रहा है। यहाँ शिव का मृत्युंजय रूप भी है, जिसकी उपासना से मृत्यु को भी मात दी जा सकती है। यहाँ महादेव भी है जिसकी उपासना से हर ग्रह नियंत्रित रहता है।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान स्वयं शिव भक्त है, वे सावन माह की शाही सवारी में कई वर्षों से शामिल होते रहे है। उनके कार्यकाल में वर्ष 2016 में उज्जैन में ऐतिहासिक सिंहस्थ सम्पन्न हुआ था। व्यवस्थाओं और संसाधनों की दृष्टि से इसे भारत का अब तक का सबसे सफलतम धार्मिक आयोजन माना जाता है। वे उज्जैन को धार्मिक पर्यटन नगरी के रूप में उभारने को लेकर प्रतिबद्ध रहे और इसी के दृष्टिगत सिंहस्थ के ठीक बाद वर्ष 2017 में "श्री महाकाल लोक" की योजना बनी। यह करोड़ों भारतीयों का सौभाग्य है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भी शिव भक्त है और उनके नेतृत्व में देश भर में आध्यात्मिक और धार्मिक स्थानों का निरंतर कायाकल्प हो रहा है। इस प्रकार प्रधानमंत्री की दूरदर्शिता तथा मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की कार्यकुशलता से ही "श्री महाकाल लोक" का सपना साकार हो सका है।

हम सभी जानते हैं कि महाकाल दर्शन का बड़ा धार्मिक महत्व है। इसे मोक्ष प्रदान करने वाला स्थल माना जाता है। स्कंदपुराण के अनुसार इसे मंगल ग्रह की उत्पत्ति का स्थान माना जाता है। उज्जैन का इतिहास अनादि काल से माना जाता है और राजनीतिक, आध्यात्मिक और साहित्यिक दृष्टि से भी इसे उत्कृष्ट स्थान माना जाता है। भारत की पौराणिक और धार्मिक महत्व की सात प्रसिद्ध पुरियों या नगरियों में उज्जैन प्रमुख स्थान रखता है बल्कि यहाँ साक्षात दैवीय शक्तियों का आज भी वास है। उज्जयिनी को विशाला, प्रतिकल्पा, कुमुदवती, स्वर्णश्रंगा और अमरावती के नाम से भी जाना जाता है तथा यहाँ स्थित महाकालेश्वर मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। पुराणों, महाभारत और कालिदास जैसे महाकवियों की रचनाओं में इस मंदिर का मनोहर वर्णन मिलता है।

उज्जैन में "श्री महाकाल लोक" के निर्माण का फायदा न केवल शिव भक्तों को मिलेगा बल्कि रोजगार और पर्यटन की दृष्टि से भी यह फलदायी होगा। "श्री महाकाल लोक" में लाखों लोग एक साथ भ्रमण कर सकते हैं और रुकने की दृष्टि से भी इसे सर्व सुविधायुक्त बनाया गया है। अब शिव भक्त यहाँ महाकाल के दर्शन के लिए आएंगे भी और आराम से वे रुक भी सकेंगे। ऐसे में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उज्जैन के पास मंदसौर का प्रसिद्ध पशुपतिनाथ का मंदिर, मांडू और ओंकारेश्वर भी है। अत: मध्य प्रदेश में मालवा का यह सम्पूर्ण क्षेत्र धार्मिक कॉरिडोर के रूप में पहचान बनाने में निश्चित ही सफल होगा। मालवा के क्षेत्र को शांत और मौसम के लिहाज से उत्कृष्ट माना जाता है, अब "श्री महाकाल लोक" की लोकप्रियता और आकर्षण से इस क्षेत्र में नये-नये उद्योग भी बढ़ेंगे। बहरहाल उज्जैन में नवनिर्मित "श्री महाकाल लोक" भारत के धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों के लिए उत्कृष्ट उदाहरण बनने जा रहा है। सांस्कृतिक विरासत,रोजगार और पर्यटन के अदभुत केंद्र के रूप में दुनिया भर में अपना विशिष्ट स्थान बनाने में यह सफल होगा, इसकी स्वर्णिम संभावनाएं है।

जम्मू-कश्मीर पर पाक और जर्मनी की टिप्पणियों पर भारत ने दिया करारा जवाब

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नई दिल्ली| कथित मानवाधिकार उल्लंघन की बात बोलकर पाकिस्तान हर जगह जम्मू-कश्मीर का राग अलापता रहता है। पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने जर्मन विदेश मंत्री एनालेना बारबॉक के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के दौरान फिर से मानवाधिकार उल्लंघन का दावा दोहराया। जिस पर भारत ने पलटवार करते हुए कहा कि, वैश्विक समुदाय के सभी गंभीर और कर्तव्यनिष्ठ सदस्यों की अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद, विशेष रूप से सीमा पार से आतंकवाद को खत्म करने की भूमिका और जिम्मेदारी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने शनिवार को एक बयान में कहा कि जम्मू-कश्मीर दशकों से इसी तरह के और निरंतर आतंकवादी अभियान का गवाह रहा है। बागची ने बयान में कहा, विदेशी नागरिक वहां और भारत के अन्य हिस्सों में भी इससे पीड़ित हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और एफएटीएफ अभी भी 26/11 के भीषण हमलों में शामिल पाकिस्तानी आतंकवादियों के पीछे लगे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि जब राज्य स्वार्थ या उदासीनता के कारण ऐसे खतरों को नहीं पहचानते हैं, तो वे शांति के उद्देश्य को कमजोर करते हैं, उसे बढ़ावा नहीं देते हैं और आतंकवाद के पीड़ितों के साथ गंभीर अन्याय करते हैं।

बागची का यह बयान जर्मन और पाकिस्तानी विदेश मंत्रियों की हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में कश्मीर मुद्दे पर की गई टिप्पणियों पर मीडिया के सवालों के जवाब में आया है।

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