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रीवा में 10वीं की तिमाही परीक्षा देने जा रही छात्रा के साथ दुष्कर्म, आरोपित गिरफ्तार

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रीवा ।   रीवा जिले में पिछले दिन हुए गैंगरेप के मामले के बाद अब 10वीं कक्षा की छात्रा के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। स्कूल में आयोजित तिमाही की परीक्षा देने जा रही छात्रा के साथ एक युवक ने दुष्कर्म किया। पीड़िता की शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपित के ठिकानों पर दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया है। यह पूरी घटना रीवा जिले के मऊगंज थाना क्षेत्र की है, जहां कक्षा दसवीं में पढ़ने वाली एक छात्रा प्रतिदिन की तरह शुक्रवार को अपने स्कूल जा रही थी। इस दौरान उसके साथ उसकी दो छोटी बहनें भी थीं, जो आगे निकल गई थी। जैसे ही वह एक तालाब के किनारे पहुंची तो वहां मऊगंज के लटियार निवासी आरोपी शिवम केवट नाम का युवक उसे रास्ते में मिल गया। उसने पीड़िता व उसके घर वालों को जान से मारने की धमकी दी और जबरदस्ती उसे अपने साथ सुनसान स्थान में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। इस बीच स्थानीय लोगों की नजर उस पर पड़ गई, जिन्होंने शोर मचाया जिसके बाद पकड़े जाने के डर से आरोपित मौके से फरार हो गया। विद्यालय में तिमाही परीक्षा चल रही थी, जिस पर पीड़िता स्कूल पहुंची और शिक्षकों को घटना की जानकारी दी। इसके बाद स्कूल के शिक्षक उसे घर लेकर आए और स्वजनों को घटना की जानकारी दी। शुक्रवार की देर शाम परिजन उसे लेकर थाने पहुंचे और मामले की शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ प्रकरण पंजीबद्ध कर उसकी तलाश में उसके ठिकानों पर दबिश दी, आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

मोजे में छिपाकर रखे मोबाइल से अपहृत व्यक्ति ने बताई लोकेशन

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बड़नगर ।   ग्वालियर निवासी व्यक्ति का चार बदमाशों ने इंदौर से अपहरण कर लिया था। पैर के मोजे में छिपाकर रखे मोबाइल से वाट्सएप पर मैसेज और लोकेशन भेजकर अपहृत व्यक्ति ने अपने परिचित को अपहरण होने की सूचना दी। परिचित ने इसके बाद पुलिस को खबर दी। पुलिस ने काजीपुरा क्षेत्र में स्थित एक खेत पर बने कमरे से अपहृत व्यक्ति को सकुशल अपहरणकर्ताओं के कब्जे से छुड़ाया और फिरौती मांगने वाले चार आरोपितों को गिरफ्तार किया। सब इंस्पेक्टर सुरेंद्र गरवाल ने बताया कि ग्वालियर निवासी प्रभात पुत्र रमेशचंद्र दुबे हाल मुकाम इंदौर सोलर प्लांट में कार्यरत है। वह इंदौर में ही रहने वाली अपनी बहन के यहां आया था। 5 अक्टूबर बुधवार की रात उसके पूर्व परिचित राजा तोमर ने फोन पर रेडिसन होटल के समीप मिलने का कहा। करीब एक घंटे के बाद बताए स्थान पर दोनों मिले। इस दौरान राजा और उसके तीन दोस्त भी साथ थे। बातचीत के कुछ देर बाद आरोपित प्रभात को जबरदस्ती कार में बैठाकर इधर-उधर घुमाते रहे तथा कुछ समय बाद इन लोगों ने छोड़ने के लिए तीन लाख रुपये की फिरौती मांगी। जब रुपये देने से प्रभात ने मना किया तो चारों ने उसके साथ मारपीट की और इंदौर से बड़नगर ले आए। बड़नगर में आरोपितों ने प्रभात को बंधक बनाकर काजीपुरा के समीप खेत पर बने एक कमरे में बंद कर दिया। उसका मोबाइल फोन भी छीन लिया। प्रभात ने अपना एक मोबाइल तो अपहरणकर्ताओं को दे दिया था, लेकिन दूसरा मोबाइल उसने मोजे में छिपाकर रखा था। अपहरणकर्ताओं के जाने पर उसने अपने मोबाइल से परिचित शिखा मेहरा को वाट्सएप पर मैसेज और लोकेशन भेजकर अपने अपहरण की सूचना दी। इसके बाद शिखा मेहरा ने हंड्रेड डायल पर सूचना दी। तत्पश्चात पुलिस ने लोकेशन के आधार पर बंद कमरे से प्रभात को सुरक्षित छुड़ाया और मौके पर मौजूद राजा और उसके एक साथी सचिन को पुलिस ने गिरफ्त में लिया। वहीं अन्य दो मौके से भाग निकले थे। उन्हें भी पुलिस ने बाद में गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपित राजा पुत्र कृपालसिंह तोमर निवासी काजीपुरा बड़नगर, सचिन पुत्र जगदीश तोमर निवासी इंदौर, बादल पुत्र अखिलेश गांधी निवासी मोरवाल कालोनी बड़नगर और देवेंद्र पुत्र श्यामप्रकाश शर्मा मिर्ची बाजार बड़नगर को गिरफ्तार कर प्रकरण कायम किया है।

बड़ा खुलासा : mRNA वैक्सीन से बढ़ा हृदय रोग का खतरा, हो सकती है मौतें…

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कोरोना की मैसेंजर राइबोज न्यूक्लिक एसिड (mRNA) वैक्सीन को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। हालिया अध्ययन में सामने आया है कि mRNA से हृदय संबंधी मौत का खतरा ज्यादा बढ़ रहा है। फ्लोरिडा के सर्जन जनरल व स्टेट हेल्थ ऑफिसर डॉ. जोसेफ ए. लाडापो ने बताया, खास तौर पर mRNA वैक्सीन से 18 से 39 साल के पुरुषों में हृदय संबंधी मौत का खतरा ज्यादा है।

डॉ. जोसेफ ने ट्वीट किया, आज हम कोविड-19 mRNA वैक्सीन के विश्लेषण के बारे में बता रहे हैं, जिसके बारे में लोगों को जागरूक होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि mRNA वैक्सीन के विश्लेषण में पाया गया कि टीकाकरण के 28 दिनों के भीतर 18-39 वर्ष के पुरुषों में हृदय संबंधी मृत्यु की घटनाओं में 84% की वृद्धि हुई है।

उन्होंने कहा कि मायोकार्डिटिस और पेरिकार्डिटिस जैसी पहले से मौजूद हृदय संबंधी स्थितियों वाले वाले लोगों को वैक्सीन लगवाते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा, किसी भी दवा या टीके की सुरक्षा और उसकी प्रभावकारिता का अध्ययन सार्वजनिक स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण घटक है। mRNA वैक्सीन को लेकर सुरक्षा पर बहुत कम ध्यान दिया गया है और कई लोगों की चिंताओं को खारिज कर दिया गया है।

क्या है एमआरएनए
मैसेंजर आरएनए टेक्नोलॉजी है। इस तरह का आरएनए डीएनए का सीक्वेंस होता है। यह प्रोटीन बनाने के लिए ब्लूप्रिंट है। एमआरएनए वैक्सीन में एमआरएनए स्पाइक प्रोटीन की सीक्वेंस इनफॉर्मेशन ले जाता है। एमआरएनए लिपिड फॉर्म्यूलेशन से कवर होता है। इसी को शरीर में इंजेक्ट किया जाता है। शरीर की कोशिकाओं में यह स्पाइक प्रोटीन बनाता है। स्पाइक प्रोटीन कोरोना से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनाता है।

भारत में कौन सी mRNA वैक्सीन
भारत में पुणे स्थित जेनोवा बायो फार्मास्युटिकल कंपनी की mRNA वैक्सीन GEMCOVAC-19 के आपात इस्तेलाम की मंजूरी दी गई है। एमआरएनए वैक्सीन 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों को लगाई जा सकती है। खास बात यह है कि वैक्सीन 2 से 8 डिग्री सेल्सियस पर स्थिर रहती है। इसकी एक वायल में पांच डोज है, जो इंट्रामस्कुलर इंजेक्शन के जरिये शरीर में लगाई जाती जाएंगी। पहली डोज के 28 दिन के अंतराल के बाद दूसरी डोज लगेगी।

अग्निवीर भर्ती रैली: ग्वालियर के युवकों की दौड़ शुरू, सुबह 4 बजे से मैदान पर डटे अभ्यर्थी

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ग्वालियर ।   लंबे समय से सेना भर्ती का इंतजार कर रहे ग्वालियर के युवकों का इंतजार आखिर आज खत्म ही हो गया। सागर के इंदिरा गांधी सागर इंजीनियरिंग कॉलेज में शनिवार को भर्ती शुरू हुई। अभ्यर्थी सुबह 4 बजे से मैदान में डटे थे, इसके बाद इनकी दस्तावेजों की जांच की गई और शारीरिक प्रवीणता परीक्षा के अलग-अलग चरण शुरू हुए। बारिश के चलते शनिवार को भी सुबह नए मैदान की जगह अभ्यर्थियों को सड़क पर दौड़ लगवाई गई। परीक्षा में शामिल होने के बाद जो अभ्यर्थी चयनित नहीं हो पाए उनकी वापसी भी शुरू हो गई है। दरअसल दो साल से सेना की भर्ती नहीं निकली थी। इसके चलते ग्वालियर के युवकों को सेना भर्ती का बेसब्री से इंतजार था। सेना भर्ती में अग्निपथ स्कीम लागू होने के बाद यह अभ्यर्थी अग्निवीर बनने के लिए मैदान में दौड़ेंगे। शुक्रवार से भर्ती रैली शुरू हुई है। जिसके पहले दिन श्योपुर और सागर के अभ्यर्थियों ने परीक्षा में भाग लिया। ग्वालियर और निवाड़ी के अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं। इसमें सिर्फ ग्वालियर के रहने वाले करीब साढ़े पांच हजार युवक शामिल हैं। गुरुवार को ही ग्वालियर के युवक वहां पहुंचना शुरू हो गया था। शुक्रवार रात से वेरिफिकेशन शुरू हो गया। लेकिन बारिश के चलते परीक्षा सुबह ही शुरू हो सकी। इसके चलते अभ्यर्थियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। यहां बता दें कि ग्वालियर के अभ्यर्थियों को सागर तक ले जाने के लिए शासन द्वारा बसों का इंतजाम किया गया था लेकिन बसों का किराया अधिक होने की वजह से अभ्यर्थी बसों से न जाकर ट्रेनों से ही रवाना हुए। जिसके चलते ट्रेनों में जमकर भीड़ रही। स्टेशन और ट्रेनों में हंगामा भी हुआ। अग्निवीर भर्ती को देखते हुए रेलवे सुरक्षा बलों को भी अतिरिक्त इंतजाम करने पड़े। क्योंकि अनियंत्रित युवा हंगामा करते हैं और रेलवे को नुकसान उठाना पड़ता है।

रायसेन में बीमार बछड़े की मौत, लंपी प्रकोप की आशंका

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रायसेन ।  जिले के सांचेत कस्बे में शनिवार को सुबह पशुपालक अशोक साहू के घर पर बछड़ा की मौत हो गई है। ग्रामीणों को आशंका है कि बछड़ा की मौत का कारण लंपी वायरस का प्रकोप है। ग्रामीणों ने कस्बा सांचेत सहित जिले भर में मवेशियों को लंपी वायरस रोधी टीका लगाने की मांग की है। ग्राम के पूर्व जनपद सदस्य जगदीश लोधी का कहना है कि पशुपालक अशोक साहू कुछ दिनों पहले गाय व बछड़ा को अन्य स्थान से लेकर आये हैं। बछड़ा की खाल सूखने व कमजोर होने की बीमारी पिछले तीन-चार दिनों से दिखाई दे रही थी। पशु विभाग के लोगों ने कोई ध्यान नहीं दिया है।

जिले के अन्य ग्रामों में भी पशु बीमार

जिले की उदयपुरा तहसील के देवरी, टिमरावन, सतवास तथा कुछ अन्य ग्रामों में एक दर्जन मवेशियों की त्‍वचा शुष्‍क हो रही है और उमनें कमजोरी के भी लक्षण है। इससे ग्रामीणों को लंपी वायरस का प्रकोप फैलने आशंका सताने लगी है।

विभाग ने सैंपल लिए

जिला पशु चिकित्सा विभाग के सहायक संचालक डा. प्रमोद अग्रवाल का कहना है कि अभी कुछ मवेशियों के सैंपल जांच के लिए भोपाल भेजे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। इससे पहले स्थानीय स्तर पर की गई जांच में किसी को लंपी वायरस होना नहीं पाया गया। एहतियात के तौर पर मवेशियों को लंपी वायरस से बचाव के टीके लगाए जा रहे है। शासन से दस हजार टीका मिले हैं, जिनमे से सात हजार मवेशियों को लंपी वायरस रोधी टीका लगा दिए है। कस्बा सांचेत में मृत बछड़ा के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। पशु चिकित्सा टीम को भेजकर जांच कराएंगे। अभी पशुओं में सूखा रोग के लक्षण मिल रहे हैं, जिसका दो-तीन दिन इलाज करने पर ठीक हो जाते हैं। पशु पालकों को ग्रामो में चौकीदारों के माध्यम से सूचना भिजवाई जा रही है कि बीमार मवेशियों का तुरंत उपचार कराएं। जिले में करीब छह लाख पशु हैं। इनमें तीन लाख गोवंशी व शेष भैंस व अन्य हैं।

स्कूल से पहले उफनती नदी ने ली परीक्षा, जान जोखिम में डाल पार की

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रतलाम  ।   दशहरा अवकाश के बाद शुक्रवार से स्कूल भी खुले। रतलाम जिले के नामली के करीब गांव सिखेड़ी के विद्यार्थियों को परीक्षा देने जान जोखिम में डालकर नदी पार कर स्कूल जाना पड़ा। गुरुवार शाम से शुरू हुई वर्षा रात भर गिरने के बाद शुक्रवार सुबह तक जारी रही। रतलाम मुख्यालय से 28 किमी दूर नामली से आगे सिखेड़ी गांव के मार्ग पर गंगायता नदी की पुलिया के ऊपर पानी बह रहा था। यहां हाईस्कूल व हायर सेकंडरी स्कूल नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को नामली जाना पड़ता है। शुक्रवार को परीक्षा देने के लिए विद्यार्थियों ने स्वजन व ग्रामीणों की मदद से उफनती नदी को पार किया। इसका वीडियो भी इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुआ। ग्रामीणों ने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि व अधिकारियों से पुलिया की ऊंचाई बढ़ाने की मांग की है।
 

भारत जोड़ो यात्रा में ढोल की थाप पर थिरके दिग्‍विजय, बोले- आप उतने उम्रदराज, जितना आप खुद को महसूस करते हैं

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भोपाल ।   प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता दिग्‍विजय सिंह हाल ही में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हुए। राहुल गांधी की यह यात्रा इन दिनों कर्नाटक से होकर गुजर रही है। इस यात्रा के दौरान दिग्‍विजय सिंह का अलग ही अंदाज देखने को मिला। वह पदयात्रा करते वक्‍त एक जगह पर कांग्रेस नेताओं के साथ ढोल-मांदल की थाप पर खूब थिरके। इसका वीडियो इंटरनेट मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इस संदर्भ में दिग्‍विजय ने ट्विटर पर प्रतिक्रिया देते हुए खुद को 75 साल का युवक बताया है। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान नृत्‍य के इस वीडियो को साझा करते हुए दिग्विजय ने ट्विटर पर लिखा कि 'आखिर 75 साल का युवक मस्‍ती क्‍यों नहीं कर सकता! कल आपने 75 साल के सिद्धारमैया को राहुल जी के साथ दौड़ते देखा। आप उतने ही उम्रदराज या बुजुर्ग हैं, जितना आप महसूस करते हैं और अगर हमें लगता है कि हम युवा हैं तो क्यों नहीं?'

मौत को आवाज देती सेल्फी: सड़क पार कर रहे बाघ के साथ सेल्फी लेने पहुंचे युवक….

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मध्यप्रदेश बाघों का घर कहा जाता है। यहां के छह टाइगर रिजर्व में 500 से ज्यादा बाघ है। प्रदेश के नेशनल पार्क से बाघों के रोमांचक वीडियो अक्सर सोशल मीडिया में वायरल होते रहते हैं। पर्यटकों में भी बाघों को देखने उनकी फोटोज लेने का एक अलग ही क्रेज देखने को मिलता है, लेकिन हाल ही में पन्ना टाइगर रिजर्व में कुछ युवका सेल्फी और बाघ की फोटो लेने के चक्कर में अपनी जान जोखिम में डालते दिखे।

मध्य प्रदेश से एक वीडियो सामने आया है जिसे देखकर लोगों को गुस्सा आ गया है! मामला ‘पन्ना टाइगर रिजर्व’ के पास पन्ना-छतरपुर मार्ग का है, जहां कुछ युवक अपनी जान जोखिम में डालकर टाइगर के साथ सेल्फी और उसके फोटो खींचते नजर आए। बता दें, यह वीडियो आईएफएस अधिकारी सुशांता नंदा ने शेयर किया। उन्होंने कैप्शन में लिखा- याद रखें कि अगर आप एक बड़े शिकारी (मांसाहारी) को देखते हैं, तो समझ जाइए कि वह चाहता था कि आप उसे देखें। वह नहीं चाहता कि कोई उसका पीछा करे। खतरा महसूस करते ही टाइगर आपको मौत के घाट उतार सकता है। कृपया इस तरह का अजीब व्यवहार ना करें।

Tigar...

इस वीडियो में हम देख सकते हैं कि एक टाइगर जंगल से निकलकर सड़क के दूसरी तरफ जा रहा है। कुछ लड़के बाघ को देख लेते हैं, जिसके बाद वह जेब से मोबाइल निकाल कर टाइगर को कैमरे में फिल्माने लगते हैं। इतना ही नहीं, कुछ तो उसके साथ सेल्फी लेने की भी कोशिश करते हैं। हालांकि, बाघ सभी को इग्नोर करता हुआ चुपचाप जंगल में चला जाता है। लेकिन नौजवानों की यह हरकत सोशल मीडिया यूजर्स को बिलकुल पंसद नहीं आई।

यूजर्स लगातार अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। जैसे एक शख्स ने लिखा कि इन युवओं को सजा दी जानी चाहिए। दूसरे ने लिखा- गजब लोग हैं, शेर के साथ सेल्फी लेना चाहते हैं। वहीं अन्य ने लिखा कि भारत में अधिकतर मौतें मोबाइल फोटोग्राफी के कारण भी हो रही हैं। इसी तरह से तमाम यूजर्स ने इन युवाओं को बेवकूफ और कम अक्ल कह दिया।

पन्ना टाइगर रिजर्व में हैं 70 बाघ
वाइल्ड लाइफ के जानकारों के मुताबिक बाघ इंसानों पर कम ही हमले करता है, लेकिन जब भी वह खुद को असुरक्षित महसूस करता है तो अपने बचाव में हमला बोल देता है। इस तरह युवकों के सेल्फी लेने की होड़ से बाघ आक्रामक होकर उनपर हमला भी कर सकता था। बता दें कि पन्ना टाइगर रिजर्व में करीब 70 बाघ हैं जो कि जंगल के कोर और बफर क्षेत्र के अलावा अक्सर गांव की सीमा और सड़क पार करते देखे जाते हैं।

ये हैं महाकाल मंदिर की 10 खास बातें, जो बहुत कम लोग जानते हैं

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11 अक्टूबर, मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) उज्जैन में बनाए गए महाकाल लोक (Mahakal Lok) का लोकार्पण करेंगे। इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

महाकाल लोक का नाम पहले महाकाल कॉरिडोर था, बाद में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसका नाम बदला। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत महाकाल मंदिर का विस्तार किया जा रहा है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का वर्णन शिवपुराण सहित अन्य कई ग्रंथों में मिलता है। आज हम आपको महाकाल मंदिर से जुड़ी 10 ऐसी बातें बता रहे हैं, जो बहुत कम लोग जानते हैं। आगे जानिए कौन-सी हैं वो 10 बातें.

सिर्फ यहीं होती है भस्म आरती
महाकाल मंदिर में रोज सुबह ज्योतिर्लिंग की भस्म से आरती की जाती है। इसे भस्म आरती कहते हैं। ये भस्म गाय के गोबर से बने कंडों से तैयार की जाती है। कहते हैं कि पहले के समय में भस्म आरती मुर्दे की राख से की जाती थी, लेकिन बाद में इस परंपरा को बदल दिया गया। भस्म आरती को देखने के लिए दूर-दूर से भक्त यहां आते हैं।

एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग
धर्म ग्रंथों में 12 ज्योर्तिर्लिगों के बारे में बताया गया है। ये सभी का विशेष महत्व है। महाकालेश्वर एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग हैं जो दक्षिणमुखी है। चूंकि दक्षिणा दिशा के स्वामी यमराज हैं, इसलिए इस ज्योतिर्लिंग का महत्व बहुत अधिक माना गया है। यमराज यानी काल के स्वामी होने के कारण ही इन्हें महाकाल कहा जाता है।

साल में एक बार खुलता है नागचंद्रेश्वर मंदिर
महाकाल मंदिर तीन हिस्सों में बंटा हुआ है। सबसे नीचे महाकाल मंदिर का गर्भगृह है जहां शिवलिंग स्थापित है। इसके ऊपर ओमकारेश्वर ज्योतिर्लिंग है और सबसे ऊपर है नागचंद्रेश्वर। यहां भगवान शिव-पार्वती की एक अद्भुत प्रतिमा दीवार से चिपकी हुई है। इसके दर्शन साल में सिर्फ एक बार नागपंचमी पर होते हैं। बाकी समय ये मंदिर बंद रहता है।

सावन-भादौ मास में निकलती है सवारी
उज्जैन में सावन-भादौ मास में भगवान महाकाल की सवारी निकाली जाती है। ऐसा माना जाता है भगवान महाकाल अपने भक्तों का हाल-चाल जानने के लिए नगर भ्रमण करते हैं। सावन और भादौ को मिलाकर लगभग 6-7 साल निकाली जाती है। इस दौरान शहर के लोग भी भगवान महाकाल के दर्शन के लिए कई घंटों तक सड़कों पर खड़े रहते हैं।

उज्जैन के राजा हैं महाकाल
उज्जैन के लोग महाकाल को अपना राजा मानते हैं। इसी मान्यता के साथ वे हर शुभ काम से पहले महाकाल को निमंत्रण पत्र देने जाते हैं कि उनके सभी काम बिना किसी मुश्किल के आसान से हो जाएं। शायद ही कोई ऐसा स्थान हो, जहां भगवान को राजा मानकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है।

महाकाल में कई प्रसिद्ध मंदिर
महाकाल मंदिर परिवार के अंदर ही कई प्राचीन मंदिर हैं, जिनके साथ अलग-अलग मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। इनमें जूना महाकाल, बाल हनुमान, कर्कोटक महादेव, सिद्धिविनायक मंदिर, सप्तऋषि मंदिर, नवग्रह मंदिर आदि प्रमुख हैं।

गर्भ गृह में लगा है रुद्र यंत्र
महाकाल मंदिर गर्भ गृह में रुद्र यंत्र स्थापित है। ये यंत्र चांदी से निर्मित है। रुद्र यंत्र को भी साक्षात शिव का ही अवतार माना जाता है। दिवंगत शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने 11 जुलाई 1997 को महाकाल मंदिर के गर्भगृह में रूद्र यंत्र लगवाया था। इस रूद्र यंत्र मे 271 कंडीकाए मंत्र लगे हुए हैं।

महाकाल का भोग एफएसएसएआई द्वारा प्रमाणित
महाकाल मंदिर में मिलने वाले लड्डू प्रसाद को एफएसएसएआई (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया) ने सेफ भोग का प्रमाण पत्र दिया है। प्रदेश में कुछ ही चुनिंदा मंदिरों को ये प्रमाण पत्र मिला है। सेफ भोग प्लेस परियोजना में श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा संचालित निशुल्क अन्नक्षेत्र, लड्डू प्रसाद निर्माण इकाई एवं निकटतम खाद्य प्रतिष्ठानों को सम्मिलित किया गया है।

कोटितीर्थ के जल से होता है अभिषेक
मंदिर परिसर में ही एक कुंड है जिसे कोटितीर्थ कहा जाता है। प्रतिदिन रोज सुबह इसी कुंड के जल से भगवान महाकाल का अभिषेक किया जाता है। कोटि का अर्थ होता है करोड़ यानी इस कुंड में करोड़ों तीर्थों का जल है, ऐसा माना जाता है। ऐसा भी कहते हैं कि भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक के समय हनुमानजी भी इसी कुंड से जल लेकर गए थे।

निर्वाणी अखाड़ा करता है भस्म आरती
महाकाल मंदिर की गादी यानी कुछ प्रमुख अधिकार निर्वाणी अखाड़े के पास है जैसे बाबा महाकाल की भस्म आरती सिर्फ वही संत-साधु कर सकता है जो अखाड़े से संबंधित हो। निर्वाणी अखाड़े का केंद्र हिमाचल प्रदेश के कनखल में है। इस अखाड़े की अन्य शाखाएं प्रयाग, ओंकारेश्वर, काशी, त्र्यंबक, कुरुक्षेत्र, उज्जैन व उदयपुर में है।

इस बार एक साथ मनाई जाएगी छोटी और बड़ी दिवाली, दोनों की पूजा का शुभ मुहूर्त

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इस साल दीपावली 24 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस बार विशेष संयोग है, जब नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली एक साथ मनाई जाएगी।
वैसे तो दीपोत्सव का ये पर्व पूरे पांच दिनों तक चलता है। दिवाली से दो दिन पहले धनतेरस का पर्व मनाया जाता है, उसके बाद छोटी दिवाली और फिर अगले दिन बड़ी दिवाली मनाई जाती है। लेकिन इस बार तीनों ही त्योहारों की तारीखों को लेकर कन्फ्यूजन है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस बार धनतेरस के अलगे ही दिन बड़ी दिवाली पड़ रही है। इस साल धनतेरस 23 अक्टूबर को है। इसके बाद छोटी और बड़ी दिवाली 24 अक्टूबर को। यानी साल 2022 में छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली पर्व एक साथ मनाया जाएगा। इस बार धनतेरस के अगले ही दिन ही बड़ी दिवाली क्यों पड़ रही है? आइए जानते हैं…

धनतेरस 2022
कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 22 अक्टूबर को शाम 6 बजकर 02 मिनट से हो रही है। वहीं इस तिथि का समापन 23 अक्टूबर शाम 6 बजकर 03 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार 23 अक्टूबर को धनतेरस मनाया जाएगा।

छोटी दिवाली 2022
इसके बाद 23 अक्टूबर को ही शाम 6 बजकर 04 मिनट से ही चतुर्दशी तिथि की शुरुआत हो जा रही है, जिसका अगले दिन 24 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 28 मिनट पर समापन होगा। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर 24 अक्टूबर को छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी का पर्व मनाया जाएगा।

दिवाली 2022
फिर 24 अक्टूबर को ही शाम 05 बजकर 28 मिनट से अमावस्या तिथि लग जा रही है, जो 25 अक्टूबर को शाम 04 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। वहीं 25 अक्टूबर को शाम में यानी प्रदोष काल लगने से पहले ही अमावस्या समाप्त हो जा रही है। ऐसे में दिवाली का पर्व इस दिन नहीं मनाया जाएगा, बल्कि 24 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा।

नरक चतुर्दशी 2022 शुभ मुहूर्त
अभ्यंग स्नान मुहूर्त- 24 अक्टूबर को सुबह 05 बजकर 08 मिनट से सुबह 06 बजकर 31 मिनट तक
अवधि – 01 घंटा 23 मिनट

काली चौदस 2022 डेट और मुहूर्त
कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर काली चौदस भी मनाई जाती है। इसमें मध्यरात्रि में मां काली की पूजा की जाती है। काली पूजा रात में होती है ऐसे में 23 अक्टूबर को काली चौदस की पूजा की जाएगी।
काली चौदस मुहूर्त – 23 अक्टूबर 2022, रात 11 बजकर 42 मिनट से 24 अक्टूबर को रात में 12 बजकर 33 मिनट तक।

दिवाली पर लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त
लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त 24 अक्टूबर को शाम 06 बजकर 53 मिनट से रात 08 बजकर 16 मिनट तक

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