नई दिल्ली । हिटमैन रोहित शर्मा की अगुआई वाली टीम इंडिया की नजरें टी20 वर्ल्ड कप पर लग गई हैं। भारतीय टीम अपनी तैयारियों में किसी तरह की कमी नहीं छोड़ना चाहती। टी20 वर्ल्डकप टूर्नामेंट से पहले टीम इंडिया अपनी कमजोरियों और ऑस्ट्रेलिया की कंडीशंस में ढलने के लिए खास तैयारी करने की योजना बनाई है। इसके लिए भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया में पर्थ को अपना बेस बनाने का निर्णय लिया है। बीसीसीआई ने भी इसके लिए हरी झंडी दे दी है। पर्थ को बेस बनाने की सबसे बड़ी वजह वहां के विकेटों में अतिरिक्त उछाल का होना है।
टी20 विश्व कप से पहले भारतीय बल्लेबाज यहां प्रैक्टिस कर उछाल और अतिरिक्त गति से तालमेल बिठा लेना चाहते हैं। ताकि विश्व कप में उन्हें तेज रफ्तार गेंदों को खेलने में कोई दिक्कत न हो। जानकारी के मुताबिक, टीम इंडिया पर्थ में 2 हफ्ते तक अभ्यास करेगी और विश्व कप के वार्म अप मैच से पहले इंट्रा स्क्वॉड मुकाबले खेलेगी। बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने कहा कि भारतीय टीम वर्ल्ड कप के लिए दो या ढाई हफ्ते पहले ऑस्ट्रेलिया पहुंच जाएगी। टीम पर्थ में ट्रेनिंग और प्रैक्टिस करेगी। इतना ही नहीं, वहां कुछ प्रैक्टिस मैच भी खेले जाएंगे।
टीम इंडिया पहले 9 अक्टूबर को ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना होने वाली थी, लेकिन कोच राहुल द्रविड़ ने बीसीसीआई से टीम के लिए अतिरिक्त प्रैक्टिस मैच कराने की व्यवस्था करने का अनुरोध किया था। इसे बीसीसीआई ने स्वीकार करते हुए टीम को कुछ दिन पहले ऑस्ट्रेलिया भेजने का फैसला किया है। बीसीसीआई के एक अधिकारी ने बताया कि हम कुछ टीमों के साथ बातचीत कर रहे हैं, जो आईसीसी द्वारा रखे गए वॉर्म अप मैच के अलावा हमारे साथ प्रैक्टिस मैच खेल सकें।
टीम इंडिया को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 3 टी20 की सीरीज के बाद दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भी इतने ही मैच की टी20 सीरीज खेलनी है। इसका आखिरी मुकाबला 4 अक्टूबर को इंदौर में खेला जाना है। अब भारतीय टीम इस मैच के खत्म होने के बाद 5 अक्टूबर को ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना होगी। पहले टीम की योजना 9 अक्टूबर को ऑस्ट्रेलिया जाने की थी।
ऑस्ट्रेलिया के लिए जल्दी उड़ान भरने के साथ ही भारतीय टीम नेट बॉलर और स्टैंडबाय खिलाड़ियों को लेकर साथ जाएगी। वहीं, आईसीसी द्वारा टीम इंडिया के लिए शेड्यूल किए गए दो वार्म अप मैच न्यूजीलैंड (17 अक्टूबर) और ऑस्ट्रेलिया (18 अक्टूबर) के अलावा बीसीसीआई ऑस्ट्रेलिया में टीम के लिए कम से कम 3 अभ्यास मैच की योजना पर काम कर रही है। भारतीय टीम टी20 विश्व कप में पहला मैच 23 अक्टूबर को पाकिस्तान के खिलाफ खेलेगी।
अब 9 की जगह 5 अक्टूबर को ऑस्ट्रेलिया जाएगी भारतीय टीम, कंडीशनिंग के लिए खेलेगी अभ्यास मैच
इस प्रकार बच्चों को संक्रमण से बचायें
बच्चे संक्रमण की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। ऐसे में रोग प्रतिरोधक क्षमता के कमजोर होने पर बीमारियों का असर जल्दी होता है, इसकी मुख्य वजह यह है कि शरीर कमजोर हो जाता है और हम जल्दी-जल्दी बीमार पड़ने लगते हैं।
हालाँकि, कई विशेषज्ञों का यह मानना है कि अधिकतर बच्चो को जुकाम खांसी और बुखार की समस्या मौसम बदलने के कारण होती है, लेकिन अगर आप अपने बच्चे की इम्युनिटी को बढ़ावा दें तो ऐसी संक्रमण वाली बीमारियों से काफी हद तक बचा जा सकता है। ऐसे में बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा देने के लिए निम्न आदतों को अपनाना बहुत जरूरी है, जिनमें निम्न शामिल हैं-
बच्चे को स्तनपान करायें- मां के दूध में रोग प्रतिरोधी सारे गुण मौजूद होते है। माँ का दूध बच्चों के लिए अमृत समान होता है, इतना ही नहीं यह बच्चों में संक्रमण, एलर्जी, दस्त, निमोनिया, दिमागी बुखार, और अचानक शिशु मृत्यु सिंड्रोम के खिलाफ लड़ने के लिए भी मजबूत बनाता है। ऐसे में बच्चे को जन्म लेने के साथ-साथ ही स्तनों से बहने वाले गाढे पतले पीले दूध को कम से कम 2-3 महीने तक जरुर कराएं।
बच्चे को ग्रीन वेजिटेबल खिलाएं- अपने बच्चे को खाने में गाजर, हरी बीन्स, संतरे, स्ट्रॉबेरी जैसे सभी को चीज़ों को शामिल करें, क्योंकि यह विटामिन सी और कैरोटीन युक्त होते हैं। जो आपके बच्चे की इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करता है। ऐसे में बच्चों को अधिक से अधिक फल और सब्जियों को उनके खाने में शामिल करें, ताकि बच्चे को संक्रमण से लड़ने में मदद मिल सके।
बच्चे को भरपूर नींद लेने दें- बच्चों में नींद की कमी होने पर इम्युनिटी तो कमजोर होती ही साथ ही आपका बच्चा बीमारी का अधिक शिकार होने लगता है। जिससे कि नवजात में स्वास्थ्य मुश्किलें बढ़ जाती है। हालाँकि, नवजात बच्चों को एक दिन में 18 घंटे की नींद तो वही छोटे बच्चों को 12 से 13 घंटे की नींद की आवश्यकता पड़ती है। इसके अलावा युवा बच्चे को रोजाना 10 घंटे की नींद लेनी चाहिए।
धूम्रपान के धुएं से बचाएं- आपके घर में कोई सदस्य धूम्रपान करता है तो बच्चों की सेहत का ध्यान रखते हुए उसे छोड़ दें। सिगरेट के धुआं शरीर में कोशिकाओं को मार सकते हैं। इसके अलावा सिगरेट बीड़ी में कई अधिक विषाक्त पदार्थों शामिल होते है जो अतिसंवेदनशील बच्चों के रोग नियंत्रण शक्ति को प्रभावित कर इम्युनिटी को कमजोर करते है।
बच्चों को कम से कम दवा दें- कई बार पेरेंट्स अपने बच्चों को लेकर अधिक सवेंदनशील हो जाते हैं। खासकर जब बच्चे को सर्दी, फ्लू या गले में हल्की खराश होने पर डॉक्टर को एंटीबायोटिक देने को कहते है। अधिकतर एंटीबायोटिक्स केवल बैक्टीरिया की वजह से होने वाली बीमारियों का इलाज करते हैं जबकि बचपन में अधिकतर बिमारियां वायरस के कारण होती हैं।
संक्रमण के खतरों से बचाएँ- अपने बच्चे को बीमारियों से बचाने के लिए संक्रमण वाले जीवाणु से हमेशा बचा कर रखें। आप बच्चों को कीटाणुओं से बचाने के लिए बचपन से ही हाथ धोने के बाद ही हाथों को होठों के पास लाने और कुछ खाने के बारे में बताएं। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि परिवार के अन्य सदस्यों को संक्रमित, टूथब्रश आदि के साथ-साथ बच्चों के तौलिया रुमाल और खिलौनों की सफाई हमेशा समय-समय पर करते रहें।
जेरोधा के सीईओ ने कर्मचारियों से कहा- जो फिटनेस लक्ष्य हासिल करेगा उसे मिलेगा बोनस
नई दिल्ली । ऑनलाइन ब्रोकिंग फर्म जेरोधा के सह-संस्थापक और सीईओ नितिन कामथ ने अपनी कंपनी के कर्मचारियों के लिए एक नई पहल की है। उन्होंने अपने कर्मचारियों को फिटनेस के लिए रोजाना गोल्स सेट करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा है कि जो कर्मचारी अपने फिटनेस लक्ष्य को हासिल कर लेगा उसे बोनस के रूप में एक महीने का वेतन दिया जाएगा। उन्होंने अपने कर्मचारियों को फिटनेस को लेकर चैलेंज दिया है। कामथ ने फिटनेस ट्रैकर पर अपने कर्मचारियों को रोजाना एक लक्ष्य निर्धारित करने का चैलेंज दिया है। कामथ ने एक लिंक्डइन पोस्ट में कहा है कि हममें से अधिक लोग वर्क फ्रॉम होम में हैं। बैठने और स्मोकिंग की आदत लगातार बढ़ रही है। इसलिए हम अपनी टीम को एक्टिव करने के लिए कुछ कर रहे हैं। फिटनेस ट्रैकर का इस्तेमाल करने वाले लोगों को देखना दिलचस्प होगा।
कामथ के अनुसार एक महीने की बोनस सैलरी पाने के लिए कर्मचारियों को अपने रोजना फिटनेस लक्ष्य का 90 फीसदी हासिल करना होगा। साथ ही इसमें 10 लाख रुपए का एक लकी ड्रा भी रखा गया है। उन्होंने कहा कि जेरोधा में हमारा नया चैलेंज फिटनेस ट्रैकर्स पर डेली टार्गेट सेट करना है। उन्होंने कहा कि यह एक ऑप्शनल प्रोग्राम है और प्रति दिन कम से कम 350 एक्टिव कैलोरी किसी भी रूप में बर्न होनी चाहिए। कामथ ने एक फिटनेस ऐप का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए अपने पर्सनल अनुभव भी शेयर किए। उन्होंने बताया कि कोरोना के दौरान मेरा वजन बढ़ गया था। मैंने अपने लिए फिटनेस गोल्स बनाए और वजन को कम किया। उन्होंने कहा कि हेल्दी खानपान को लेकर भी कर्मचारियों को जागरूक होना चाहिए।
गेंदबाज पर हावी होने की कला जानते हैं ऋषभ पंत, उन्हें मिलनी चाहिए टीम इंडिया में जगह : गिलक्रिस्ट
दुबई । ऑस्ट्रेलिया के अपने जमाने के दिग्गज विकेटकीपर बल्लेबाज एडम गिलक्रिस्ट का मानना है कि किसी भी गेंदबाज पर हावी होने की अपनी हिम्मत के कारण ऋषभ पंत को आगामी टी20 विश्व कप में भारत की शुरुआती ग्यारह खिलाड़ियों में अवश्य शामिल किया जाना चाहिए। पंत की खासियत है कि वह किसी भी गेंदबाज के दबाव में नहीं आते। पिछले कुछ समय से यह चर्चा का विषय है कि ऋषभ पंत और दिनेश कार्तिक में से किसे अंतिम एकादश में स्थान मिलना चाहिए, इस पर गिलक्रिस्ट ने बाएं हाथ के विकेटकीपर बल्लेबाज पंत का समर्थन किया।
गिलक्रिस्ट ने कहा ऋषभ पंत साहसी खिलाड़ी है और जिस तरह से वह किसी भी तरह के गेंदबाजी आक्रमण पर हावी हो जाते हैं, उसे देखते हुए मुझे लगता है कि उन्हें भारतीय एकादश में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा वे दोनों (ऋषभ और कार्तिक) साथ में खेल सकते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि ऋषभ पंत को निश्चित तौर पर अंतिम एकादश में होना चाहिए।
भारत ने पंत और कार्तिक दोनों को ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी20 विश्वकप के लिए 15 सदस्यीय टीम में शामिल किया है। पंत हालांकि सबसे छोटे प्रारूप में निरंतर अच्छा प्रदर्शन करने में नाकाम रहे हैं, जो कि अंतिम एकादश का चयन करते समय उनके खिलाफ जा सकता है। पंत ने अब तक 58 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 23.94 की औसत और 126.21 के स्ट्राइक रेट से 934 रन बनाए हैं लेकिन वह इस प्रारूप में टेस्ट क्रिकेट जैसी सफलता हासिल नहीं कर पाए हैं।
दूसरी तरफ कार्तिक ने पिछले कुछ समय से खुद को फिनिशर के रूप में स्थापित किया है, लेकिन पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग की तरह गिलक्रिस्ट का भी मानना है कि इन दोनों विकेटकीपर बल्लेबाजों को अंतिम एकादश में रखा जा सकता है। गिलक्रिस्ट ने कहा अगर उन दोनों को अंतिम एकादश में रखा जाता है तो यह दिलचस्प होगा। मुझे लगता है कि वह ऐसा कर सकते हैं। दिनेश कार्तिक शीर्ष क्रम में भी खेल सकते हैं। उन्हें मध्यक्रम और बाद के ओवरों में भी उपयोग में लाया जा सकता है। उनका खेल वास्तव में बहुत अच्छा है।
मोबाइल का ज्यादा इस्तेमान न करने दें
छोटे बच्चों के अभिभावकों को ये चिंता सताती रही है कि बच्चे मोबाइल के सामने कितना समय बिताते हैं। पहले टीवी अब तकनीक के बढ़ने के साथ कई और स्क्रीन्स बढ़ गई हैं जिसमें मोबाइल स्क्रीन भी शामिल है।
जहां कई सारे माता-पिता इस बात को लेकर परेशान रहते हैं वहीं कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। यूएस टेक कंपनी के लिए काम करने वाली डॉरेथी का दो साल का बच्चा है और उनका कहना है, 'मुझे पता है कि मुझे अपने बच्चे के स्क्रीन टाइम पर पाबंदी रखनी चाहिए।'
हालांकि वह बताती हैं कि जब उन्हें काम करना होता है या उनका बच्चा जब सुबह जल्दी जाग जाता है तो उसे व्यस्त रखने का सबसे अच्छा तरीका फोन ही है। वह अकेली नहीं है।
मीडिया और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वाले बच्चों पर एक रिपोर्ट पेश की। इसके मुताबिक 8 साल और इससे कम उम्र के बच्चे रोजाना घर पर 2 घंटे 19 मिनट स्क्रीन के सामने बिताते हैं। ये आंकड़ा 2011 के लगभग बराबर है लेकिन 2013 से डेढ़ घंटे ज्यादा है। ये सर्वे 2013 में उस वक्त हुआ था जब स्मार्टफोन का इतना चलन नहीं था लेकिन टीवी देखने का क्रेज घट रहा था।
हालांकि बच्चे अब मोबाइल और दूसरी डिवाइसों की तरफ ज्यादा शिफ्ट हो रहे हैं, ठीक अपने माता-पिता की तरह। सर्वे में ये बात सामने आई कि बच्चे एक दिन में 48 मिनट मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा बच्चे कई वर्चुअल डिवाइस और इंटरनेट टॉयज के संपर्क में भी आ रहे हैं।
कुछ माता-पिता इस बात से चिंतित हैं कि स्क्रीन के सामने इतना वक्त गुजारने से बच्चे एक्सर्साइज और सीखने को इतना वक्त नहीं दे पा रहे लेकिन स्टडजी से ये बात साफ नहीं हो पा रही।
दो साल की बच्ची की मां जेनी बताती हैं, 'मेरे बच्चे किसी सामान्य बच्चे से कम शैतान नहीं हैं क्योंकि हम बहुत कम टीवी देखते हैं। अगर सही समय पर उन्हें स्क्रीन के सामने वक्त बिताने दिया जाए तो कभी-कभी ठीक भी रहता है।
पीडिएट्रिक स्पीच पैथोलॉजिस्ट जेन का कहना है, 'स्क्रीन के सामने जरा भी वक्त न बिताना, ये बिल्कुल अवास्तविक है। इसमें बैलेंस बनाकर रखना चाहिए। वह सलाह देती हैं कि इसके लिए विजिबल शेड्यूल बनाएं ताकि बच्चे इसको सीमित करना समझ सकें।
मारुति सुजुकी की नई एसयूवी ग्रैंड विटारा 26 सितंबर को लॉन्च
नई दिल्ली । आगामी 26 सितंबर को मारुति सुजुकी अपनी नई एसयूवी ग्रैंड विटारा को लॉन्च करने जा रही है। कंपनी नई विटारा को माइल्ड हाइब्रिड पावरट्रेन ऑप्शन के साथ पेश करने वाली है। इसे मारुति के नेक्सा आउटलेट्स के माध्यम से बेचा जाएगा। ग्रैंड विटारा 6 ट्रिम्स में सेल के लिए अवेलेबल होगी। नई ग्रैंड विटारा का इंटीरियर कई सारे फीचर्स जैसे- वायरलेस चार्जर, एंबिऐंट लाइटिंग, इंटीग्रेटेड गूगल टेक्नालाजी, ईएसपी, हिल-होल्ड असिस्ट, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम, ऑल-व्हील डिस्क ब्रेक और 6 एयरबैग्स मिलने वाले हैं। इसके अलावा एक्सटीरियर में फ्रंट ग्रिल, अलाय। व्हील्स और क्रोम ट्रीटमेंट दिया गया है। नई ग्रैंड विटारा को टोयोटा हाइडर के समान प्लेटफार्म पर डेवलेप किया जाएगा। और इसमें 103एचपी, 1.5-लीटर के15सी पेट्रोल माइल्ड-हाइब्रिड इंजन दिया जाएगा। ट्रांसमिशन के लिए इसके इंजन को 5-स्पीड मैनुअल या 6- स्पीड टॉर्क कन्वर्टर ऑटोमैटिक से जोड़ा गया है। इसी के साथ इसमें 4 डब्ल्यूडी का ऑप्शन भी दिया जाएगा।
ग्रैंड विटारा को लेकर कंपनी यह दावा कर रही है कि 27.97केएमपीएल की बेहतर माइलेज प्रदान करती है। मारुति नई विटारा को मिड साइज एसयूवी सेगमेंट में पेश करने जा रही है,जो कि मार्केट मे पहले से मौजूद ह्युंडई क्रेटा, किआ सेल्टोस, वोक्सवैगन ताइगुन, स्कोडा कुशाक और टोयोटा हाइडर को टक्कर देगी। इसके अतिरिक्त, ग्रैंड विटारा में 92एचपी, 3-सिलेंडर, 1.5-लीटर पेट्रोल इंजन भी दिया जा सकता है, जिसे इलेक्ट्रिक मोटर के साथ जोडा जाएगा।
मुझे दबाव की परिस्थितियों में भी बड़े शॉट खेलने में मदद मिलती : दिनेश कार्तिक
नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम में ‘फिनिशर की भूमिका निभा रहे दिनेश कार्तिक ने कहा कि वह बहुत अधिक अभ्यास नहीं करते लेकिन कुछ विशेष चीजों पर ध्यान देते हैं। कार्तिक ने अनुसार ऐसा करने से उन्हें बेहद दबाव की परिस्थितियों में भी बड़े शॉट खेलने में मदद मिलती है।
कार्तिक से जब तैयारियों के बारे में पूछा गया, तब उन्होंने कहा कि नेट अभ्यास में इस तरह की परिस्थितियां तैयार करने से उन्हें मदद मिलती है। उन्होंने कहा, मैं लंबे समय से इसका अभ्यास कर रहा हूं। मैंने रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए ऐसा किया और अब भारतीय टीम के लिए कर रहा हूं। कार्तिक ने कहा,‘‘मैं इस तरह की परिस्थितियां तैयार करके अभ्यास करता हूं और राहुल द्रविड़ व विक्रम राठौड़ भाई भी इसमें मेरी मदद करते हैं।
कार्तिक ने कहा, मैं बहुत अधिक अभ्यास नहीं करता लेकिन जहां तक संभव हो सके कुछ खास चीजों पर ध्यान देता हूं। मोहाली में पहले मैच में कार्तिक को अक्षर पटेल के बाद बल्लेबाजी के लिए भेजा गया लेकिन दूसरे मैच में उन्हें बाएं हाथ के स्पिन ऑलराउंडर से पहले उतारा गया। कार्तिक ने कहा, यह ऐसा है जिसको हम आजमा रहे हैं। कुछ अवसरों पर कुछ ओवर बचे होते हैं, जिसमें अक्षर स्पिनरों पर हावी होकर खेल सकता है। इसके पीछे तर्क है उस चरण में बाएं हाथ के बल्लेबाज और लेग स्पिनर का अच्छा मुकाबला होगा, इसलिए कुछ अवसरों पर हम यह विकल्प आजमाते हैं।
बच्चे की तुलना न करें
अभिभावक होना जितना सुखद होता है, उतना ही मुश्किल भी। अपने बच्चों को कौन सी बात किस तरह समझाना है, इसको लेकर अकसर आप उलझन में पड़ जाते होंगे। कई बार आप अपने बच्चों को प्यार से समझाते हैं, तो कई बार उन्हें डांट देते हैं। कई बार आप उन्हें अपना ही उदाहरण दोते हैं, लेकिन आपकी बातों का बच्चे पर क्या असर पड़ता है, इसका अंदाजा आप नहीं लगा पाते हैं। इसलिए आपको इन बातों को बच्चों से कहने से बचना चाहिए।
आप बच्चे की तुलना अपने आप से न करें। आप भी जब छोटे थे तो आपमें कई कमियां रही होंगी। उसे अपने बचपन का मजा लेने दें, उसे 'परफेक्ट चाइल्ड' बनाने की जरूरत नहीं है।
अपने फैसले खुद लेने से ही बच्चा आगे बढ़ेगा। अगर उसके फैसले गलत साबित होते हैं, तो उससे वह सीखेगा और आगे सही निर्णय लेगा। गलत फैसला लेने के लिए आपकी डांट उसे डराने और आत्मविश्वास कम करने के अलावा कुछ नहीं कर सकती है।
इस तुलना की कोई जरूरत नहीं है। हर बच्चे का विकास अलग-अगल तरीके से होता है। वे अपने अलग-अलग अनुभवों से सीखते हैं। कहीं ऐसा न हो कि हर बात पर बेवजह की तुलना बच्चों में आपस में मतभेद पैदा कर दें।
बेशक आपके पास कई जिम्मेदारियां हैं, जिनसे कभी-कभी आप परेशान हो जाते होंगे और अकेला रहना चाहते होंगे लेकिन आपका बच्चा आपकी परेशानियों से बिल्कुल अनजान है। ऐसे में उससे ऐसा कहना उसके मन पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है।ऐसा कहना बच्चे तो क्या किसी बड़े को भी काफी आहत कर सकता है। ऐसे में बच्चों से ऐसा कहना बिल्कुल ठीक नहीं है।
बच्चों को इस प्रकार सिखाएं काम-काज
घर में छोटे बच्चे हो तो घर व्यवस्थित रहेगा, इसकी कल्पना करना भी बेकार है क्योंकि बच्चे घर के सामान को खेल-खेल में बिखेर देते हैं। ऐसे में जरूरी है कि वीकेंड पर बच्चों से ही घर को व्यवस्थित करा लिया जाए, जिससे वे घर का रख-रखाव सीख जाएंगे और घर को व्यवस्थित रखने में आपकी मदद भी कर देंगे।
बच्चों को टास्क दें
कोई भी बच्चा एक दिन में पूरे घर की सफाई करना नहीं सीख सकता। वीकेंड पर बच्चों को छोटी-छोटी चीजें व्यवस्थित करना सिखाएं। इसके लिए उन्हें घर के किसी एक कोने को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी दे सकती हैं। आप उन्हें उनके वॉर्डरोब के सामान को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी दें परन्तु उन्हें यह जरूर बताएं कि पहले सारे कपड़े वॉर्डरोब से बाहर निकालें और फिर उन्हें दोबारा तह कर के वॉर्डरोब में लगाएं। उसके बाद कपड़े वॉर्डरोब में इस तरह रखें कि उन्हें इस्तेमाल करने के लिए निकालना आसान रहेगा।
उनकी काम में मदद करें
यदि आपको लगे कि बच्चा अपना काम ठीक से नहीं कर पा रहा है तो बीच-बीच में उसकी मदद करें तथा काम को सही ढंग से करने का तरीका बताएं। उसे बचाएं कि शर्ट कैसे तह की जाती, मोजों को हमेशा जोड़ा बनाकर रखते हैं ताकि वे खोएं नहीं। यहीं नहीं कपड़े शैल्फ में कैसे रखे जाते हैं यह भी उन्हें करके बताएं। यदि आप उन्हें बुक शैल्फ अरेंज करने का काम दे रही है तो उन्हें बताएं कि बुक शैल्फ में सबसे पहले बड़ी किताबें सैट की जाती हैं, फिर उससे छोटी और सबसे आगे छोटे आकार की किताबें रखी जाती हैं।
म्यूजिक लगाएं
बच्चा काम को एन्जॉय करते हुए सीख पाए, इसलिए उसकी पसंद का म्यूजिक लगा दें। बीच-बीच में छोटा-सा ब्रेक लेकर उसके साथ डांस करें। म्यूजिक के साथ काम करने में उसे मजा भी आएगा और आसानी से काम भी सीख जाएगा।
खेल और ईनाम
नया काम सीखते समय बच्चा बोर न हो, इसलिए उसे खेल-खेल में काम सिखाने की कोशिश करें। आप पांच मिनट का अलार्म लगा दें और कहें कि यदि वह पांच मिनट में पांच जोड़े जूते अल्मारी में रख देगा तो उसे चॉकलेट मिलेगी। यदि बच्चा समय पर अपना टास्क पूरा कर ले तो उसके प्रयास की तारीफ करें और अपना प्रॉमिस भी निभाएं।
सबके सामने तारीफ करें
जब बच्चा अपना काम पूरा कर ले तो उसकी मनपसंद चीज उसे ईनाम में दें या उसकी पसंदीदा डिश बना कर उसे खिलाएं। यही नहीं परिवार के अन्य सदस्यों के सामने भी उसकी तारीफ करें। इससे उसे न केवल अपना टास्क पूरा करने की खुशी मिलेगी, बल्कि आपका प्यार और आपका साथ उसमें नई ऊर्जा का संचार करेगा।















