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प्रधानमंत्री आवास योजना से बदली महेत्तर राम की जिंदगी

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रायपुर : प्रत्येक व्यक्ति के मन में एक सपना रहता है कि उसका खुद का आशियाना हो जिसमें वह सुकून की नींद ले सकें। कोरबा जिले के सीमावर्ती ग्राम काटाद्वारी में रहने वाले लगभग 50 वर्षीय ग्रामीण महेत्तर राम के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना किसी वरदान से कम नहीं साबित हुई है। दोनों पैरों से चल पाने में असमर्थ महेत्तर राम अब अपने परिवार के साथ पक्के घर में सुरक्षित जीवन जी रहे हैं।

    महेत्तर राम ने बताया कि उनकी पत्नी का पहले ही निधन हो चुका है और वे अपने दो बेटों के साथ जीवनयापन कर रहे हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनका कच्चा मकान वर्षों तक पक्का नहीं हो सका। बारिश के मौसम में घर की छत टपकती थी और परिवार को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। ऐसे में हर बरसात उनके लिए चिंता और कठिनाइयों का कारण बन जाती थी।उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत जब उनके नाम आवास स्वीकृत हुआ और किस्त की राशि मिली, तो उन्होंने तुरंत पक्का मकान बनवाने का कार्य शुरू कराया। आज उनका सपना पूरा हो चुका है। अब उनके सिर पर मजबूत छत है और बरसात के दिनों में पानी टपकने या मकान ढहने का डर नहीं रहेगा।

    महेत्तर राम के बेटे अनिल केंवट ने बताया कि उनके पिता बीमारी के बाद दोनों पैरों से चलने-फिरने में असमर्थ हो गए हैं। परिवार की आजीविका चलाने के लिए वे गांव-गांव जाकर मिठाई बेचते हैं। सीमित आय में घर का खर्च चलाना ही मुश्किल था, ऐसे में पक्का मकान बनवाना उनके लिए एक अधूरा सपना बनकर रह गया था।

    अनिल ने भावुक होकर कहा कि उन्हें कभी उम्मीद नहीं थी कि उनका कच्चा घर भी एक दिन पक्के मकान में बदल जाएगा। लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना ने यह सपना साकार कर दिया। अब परिवार को बरसात में पानी टपकने, दीवार गिरने या असुरक्षित घर में रहने की चिंता नहीं रहेगी। आज महेत्तर राम का परिवार अपने नए पक्के घर में सुकून और सम्मान के साथ जीवन जी रहा है।

’कोदो-कुटकी की खेती अपनाएं, पोषण और समृद्धि दोनों पाएं’

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रायपुर :  छत्तीसगढ़ की समृद्ध कृषि परंपरा में कोदो और कुटकी का विशेष महत्व रहा है। सदियों से आदिवासी और ग्रामीण समुदायों के भोजन का अभिन्न हिस्सा रहे ये लघु धान्य आज एक बार फिर किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। बदलती जलवायु परिस्थितियों, पोषण संबंधी चुनौतियों और बेहतर कृषि की आवश्यकता के बीच कोदो-कुटकी जैसी मिलेट फसलें भविष्य की खेती का मजबूत आधार बनकर उभर रही हैं।

    कोदो (पास्पलम स्क्रोबिकुलेटम) और कुटकी (पैनिकम सुमाट्रेंस) ऐसी फसलें हैं जिन्हें कम पानी, कम लागत और सीमित संसाधनों में भी सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है। यही कारण है कि ये छोटे और सीमांत किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का माध्यम बन रही हैं। कम उपजाऊ, पथरीली और ढालू भूमि में भी इनकी खेती संभव है, जहां अन्य फसलें अपेक्षित उत्पादन नहीं दे पातीं। ’ये फसलें प्रायः हर एक प्रकार की भूमि में पैदा की जा सकती है। जिस भूमि में अन्य कोई धान्य फसल उगाना सम्भव नहीं होता वहाँ भी ये फसलें सफलता पूर्वक उगाई जा सकती है। हल्की भूमि में जिसमें पानी का निकास अच्छा हो इनकी खेती के लिए उपयुक्त होती है।’

    आज जब दुनिया स्वास्थ्यवर्धक भोजन की ओर लौट रही है, तब कोदो और कुटकी का महत्व और बढ़ गया है। कोदो में प्रोटीन, कार्बाेहाइड्रेट, आयरन और कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जबकि कुटकी फाइबर, प्रोटीन, फास्फोरस तथा अन्य खनिज तत्वों से भरपूर होती है। विशेषज्ञों के अनुसार इनका नियमित सेवन मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और एनीमिया जैसी समस्याओं के नियंत्रण में सहायक हो सकता है। यही वजह है कि आज इन्हें ‘सुपर फूड’ के रूप में पहचान मिल रही है।

    छत्तीसगढ़ सरकार भी मिलेट फसलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। वर्ष 2026 में कोदो का न्यूनतम समर्थन मूल्य 3,200 रुपये प्रति क्विंटल तथा कुटकी का 3,350 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ इन फसलों की खेती के प्रति उत्साह बढ़ा है। विभागीय जानकारी के अनुसार खरीफ वर्ष 2025 में प्रदेश में कोदो फसल 39.02 हेक्टेयर और कुटकी फसल 38.03 हेक्टेयर रकबे में लगाए गए थे। वैसे विगत खरीफ वर्ष में प्रति हेक्टेयर कोदो की उत्पादन 550 किलोग्राम तथा कुटकी की उत्पादन 675 किलोग्राम दर्ज की गई है। यानी कोदो की उत्पादन 21.46 टन थी, वहीं 25.67 टन कुटकी का उत्पादन हुआ था।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भी किसानों से धान के साथ-साथ कोदो, कुटकी और रागी जैसी फसलों की खेती अपनाने व उत्पादन बढ़ाने की अपील की है।

    कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि उन्नत तकनीकों को अपनाकर कोदो-कुटकी की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। ’मानसून की शुरुआत के साथ जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के प्रथम पखवाड़े तक बुवाई, बीजोपचार, कतार पद्धति, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा समय पर खरपतवार नियंत्रण जैसे उपाय किसानों को बेहतर उत्पादन दिला सकते हैं।’

    बढ़ती बाजार मांग, मिलेट आधारित उत्पादों का विस्तार और सरकारी प्रोत्साहन योजनाएं इन फसलों के व्यावसायिक महत्व को लगातार बढ़ा रही हैं। एक समय केवल ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों तक सीमित रहने वाली कोदो-कुटकी आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बना रही हैं।

    ’पोषण सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आर्थिक उन्नति के लिए कोदो और कुटकी अत्यंत महत्वपूर्ण फसलें हैं।’ आवश्यकता इस बात की है कि किसान आधुनिक तकनीकों के साथ इन पारंपरिक फसलों का उत्पादन बढ़ाएं और उपभोक्ता इन्हें अपने दैनिक भोजन का हिस्सा बनाएं। ’कोदो-कुटकी केवल अनाज नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज, उत्तम कृषि और समृद्ध भविष्य की आधारशिला हैं।’

दुधारू पशुओं की वितरण पद्धति का आधार अति-गरीब को प्राथमिकता हो: राज्यपाल पटेल

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भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना के हितग्राहियों को दुग्ध संग्रहण एवं विपणन की मजबूत व्यवस्था उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाए। उन्होंने कहा कि हितग्राही को उत्पादित दुग्ध का उचित मूल्य दिलाने के लिए परिवहन व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। विभागीय अथवा थर्ड पार्टी समन्वय से आवश्यक वाहनों की उपलब्धता पर विचार किया जाए।

राज्यपाल पटेल बुधवार को लोक भवन में आयोजित पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अधिकारियों से चर्चा कर रहे थे। बैठक में प्रदाय पशुओं के स्वास्थ्य, देखभाल एवं मॉनिटरिंग व्यवस्थाओं, हितग्राहियों को पशुपालन प्रशिक्षण, वनाधिकार पट्टा धारकों को लाभान्वित करने और हितग्राही अंशदान के संबंध जानकारी दी गई।

राज्यपाल पटेल ने कहा है कि मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना अति-गरीब के पोषण और सतत् आजीविका की पहल है। योजना की सफलता के लिए अति-गरीब को प्राथमिकता वितरण पद्धति का आधार होना चाहिए। उन्होंने अति-पिछड़ी जनजातियों बैगा, भारिया और सहरिया के अति-गरीब को प्राथमिकता से लाभान्वित करने के प्रयासों पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आबादी के अनुपात में वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। योजना की जानकारी के लिये अति-पिछड़ी जनजातियों के बीच प्रचार-प्रसार किया जाए। राज्यपाल पटेल ने कहा कि पशु वितरण कार्यक्रम में लाभान्वित महिला हितग्राहियों के माध्यम से पशुपालन व्यवस्थाओं और परिवार की आय में बढ़ोतरी के संबंध में जानकारी प्रदान करने की पहल करें। योजना की उपलब्धियों का वर्षवार चित्रात्मक विवरण संधारित किया जाए।

राज्यपाल पटेल ने गुजरात राज्य में जनजातीय बहुल क्षेत्र में दुग्ध संजीवनी योजना के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पशु प्रदाय योजना के हितग्राहियों को परिवार के बच्चों के लिए दुग्ध की उपलब्धता को सुनिश्चित करने की समझाइश दी जाए। विभाग के द्वारा 2 महिला, 2 पुरुष अधिकारियों को बनासकांठा के डेयरी उद्योग का अध्ययन करने के लिए गुजरात राज्य भेजने के निर्देश दिए हैं।

राज्यपाल पटेल को प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी उमाकांत उमराव ने बताया कि प्रदेश के किसानों, पशुपालकों को मोबाइल पर ही पशुओं के पोषण संबंधी जानकारी दी जा रही है। साथ ही वैज्ञानिक तरीके से पशुओं को आहार मिले, इसके लिए विभाग द्वारा गोरस मोबाइल ऐप तैयार कराया गया है। यह ऐप पूरी तरह से सरल हिंदी भाषा में विकसित किया है। इसके लिए नेट की भी आवश्यकता नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में ब्रीडर एसोसिएशन का विकास किया जा रहा है। इसमें एक ही नस्ल के 20 से अधिक पशुओं के प्रमाणीकरण के द्वारा उन्नत नस्ल के पशुओं की राज्य में ही आपूर्ति के प्रयास किए गए हैं। उन्होंने बताया कि योजना क्रियान्वयन के लिए 5 वर्षों के प्रावधान और बजट वृद्धि की गई है। प्रति इकाई पशु कीमत को भी बढ़ाया गया है। बीमा की भी व्यवस्थाएं की गई है। कार्य क्षेत्र 12 से बढ़ाकर 24 जिलों में किए जाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। उमरिया जिले के समस्त हितग्राहियों को 2 पशु प्रदान करने की उपलब्धि हासिल की गई है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा योजना अंतर्गत 100 लीटर दुग्ध संकलन क्षेत्रवार दुग्ध सहकारी संस्थाएं बनाई जा रही हैं। इन समितियों के सचिव के रूप में हितग्राहियों को अतिरिक्त आय भी उपलब्ध होगी। उन्होंने प्रदाय पशुओं के स्वास्थ्य देखभाल के संबंध में बताया कि वितरण पश्चात् तीन माह तक पुन: आकलन कर हितग्राहीवार समीक्षा की जा रही है। पशु चिकित्सक द्वारा साप्ताहिक भ्रमण कर आवश्यक उपचार, टीकाकरण एवं डीवर्मिंग कराई जा रही है। नोडल अधिकारी द्वारा आकस्मिक निरीक्षण किया जाता है।

इस अवसर पर जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, जनजातीय प्रकोष्ठ की सदस्य सचिव मीनाक्षी सिंह, प्रकोष्ठ के सदस्य, लोक भवन और पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

सायबर सुरक्षा को जन आंदोलन बनाने की जरूरत, हर नागरिक बने डिजिटली जागरूक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सायबर खतरा एक ऐसा अदृश्य दुश्मन है , जो बिना दस्तक दिए हमारे घरों तक पहुंच रहा है। सायबर खतरों को समझना ही उनसे बचने का सबसे बड़ा रास्ता है। सावधानी ही सुरक्षा है और जानकारी ही बचाव है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट, डीप-फेक, फेक प्रोफाइल, हैकिंग, डेटा ब्रीचिंग, ऑनलाइन फ्रॉड, ओटीपी धोखाधड़ी, ऑनलाइन शॉपिंग ठगी, रैनसमवेयर हमले और फर्जी निवेश लिंक जैसे अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक को सतर्क रहने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की जनता को सायबर सुरक्षा के तीन महत्वपूर्ण सूत्र 'जागरूकता, सावधानी और सहभागिता' के बारे में बताकर कहा कि जो लोग सायबर सुरक्षा की जानकारी रखते हैं, वे दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को रवीन्द्र भवन में आयोजित ‘राज्य व्यापी सायबर जागरूकता अभियान’ के तहत "सेफ क्लिक 2.0'' के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। यह अभियान 24 जून से शुरू होकर 8 जुलाई तक प्रदेश के 10 संभाग, 55 जिलों और 50 हजार से अधिक गांव में एक साथ चलेगा। इस अभियान के तहत सायबर ठगी और अन्य अपराधों से बचने के लिए जागरूक किया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने सायबर जागरूकता अभियान के पोस्टर, स्कूली बच्चों के लिए तैयार की गई सायबर जागरूकता बुकलेट्स तथा अभियान के ऑफिशियल वीडियो का विमोचन किया। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सायबर जागरूकता रथ को झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को तुलसी का पौधा भेंट कर स्वागत किया गया। समापन पर प्रतीक चिन्ह प्रदान किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियान के संचालन के लिए मध्यप्रदेश पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि संकट के समय मध्यप्रदेश पुलिस हमेशा संकटमोचक हनुमान की भूमिका में रहती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वर्ष 2025 में प्रदेश में विभिन्न सायबर जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से 33 लाख से अधिक नागरिकों को जागरूक किया गया। अब अभियान का विस्तार पंचायतों, स्कूलों, बैंकों, बाजारों, धार्मिक स्थलों और सरकारी कार्यालयों तक किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार के 56 विभागों की लगभग 1700 सेवाएं एकीकृत पोर्टल पर उपलब्ध हैं और इनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से सायबर सुरक्षा को जन आंदोलन का रूप देने का आह्वान करते हुए कहा कि वर्तमान दौर में सायबर खतरे अदृश्य रूप में हमारे जीवन में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन और कंप्यूटर के माध्यम से होने वाले सायबर अपराधों से बचाव के लिए सावधानी और जागरूकता ही सबसे प्रभावी हथियार है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सायबर अपराधों के प्रति प्रदेशवासियों को जागरुक करने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस का "सेफ क्लिक 2.0'' सायबर जागरूकता अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस अभियान से प्रदेश के सभी नागरिक जागरूक होंगे। उन्होंने कहा कि सायबर अपराधी एक प्रकार से डिजिटल दौर के राक्षस हैं, जो दबे पाँव लैपटॉप, कम्प्यूटर और मोबाइल के जरिए हमारे साथ सेंधमारी और डकैती करते हैं। आजकल डिजिटल अरेस्ट, डीप फेक, डेटा ब्रीजिंग, ऑनलाइन फ्रॉड, रेनसमवेयर अटैक जैसे अनेक प्रकार के सायबर अपराध संचालित हैं। लेकिन सायबर अपराधों के मामले में सावधानी ही बचाव है। मध्यप्रदेश पुलिस ने देश में पहली बार सायबर डकैती का लाइव पर्दाफाश किया था। इसके लिए मध्यप्रदेश पुलिस बधाई की पात्र है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश पुलिस ने पिछले वर्ष अपने सायबर जागरुकता अभियान के माध्यम से लगभग 33 लाख से अधिक नागरिकों को सतर्क किया था। इस वर्ष 15 दिन तक चलने वाले "सेफ क्लिक 2.0'' अभियान में हर दिन अलग थीम रखी गई है। इस दौरान लोगों को बैंकिंग, महिला सुरक्षा, ग्रामीण इलाकों में जागरुकता के बारे में बताया। यह अभियान बैंकों, बाजारों, स्कूलों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थलों पर संचालित किया जाएगा। इसके लिए लोकरंजन के रुचिकर कार्यक्रम तैयार किए गए हैं। सायबर सुरक्षा को जागरूकता, सावधानी और सहभागिता के माध्यम से प्रभावी बनाया जाएगा। सायबर अपराध हेल्पलाइन 1930 और नेशनल सायबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के बारे में लोगों को बताया जा रहा है। यह नंबर सायबर अपराध के मामले में सबसे पहले पीड़ितों की ढ़ाल बनता है।

लालच और जल्दबाजी कर सकती है आर्थिक नुकसान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागरिकों को सचेत करते हुए कहा कि अगर आपको कोई अनजान लिंक मिले या डराने धमकाने की कॉल आए तो "रुको, सोचो और फिर एक्शन लो''। लालच और जल्दबाजी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है। पुलिस के अभियान को जन जागरुकता अभियान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने में हम सभी सहभागी बनें। राज्य सरकार ने सायबर अपराध के विरुद्ध मजबूत फ्रेमवर्क तैयार किया है। नागरिकों के डेटा संरक्षण के लिए डिजिटल पर्सनल डेटा एक्ट को भारत सरकार ने लागू किया है। प्रदेश में कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम का गठन किया गया है। राज्य शासन के 56 विभागों की 1700 से अधिक सेवाओं को एक पोर्टल पर उपलब्ध कराया गया है। यह एक प्रशंसनीय पहल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि "सेफ क्लिक 2.0'' अभियान में बैकों, बाजारों, धार्मिक स्थलों सबको जोड़ा गया है। अभियान को शुरू करने का यही सही समय है, क्योंकि हमारी युवा पीढ़ी उच्च शिक्षा के लिए महाविद्यालयों में प्रवेश ले रही है।

जागरुकता ही सायबर क्राइम से बचने का है सुरक्षा कवच : डीजीपी मकवाना

पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा 24 जून से 8 जुलाई तक सेफ क्लिक 2.0 सायबर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज सायबर अपराध केवल एक आर्थिक चुनौती नहीं है, बल्कि यह समाजिक विश्वास और राष्ट्रीय सुरक्षा के भी जुड़ा गंभीर विषय है। पिछले कुछ वर्षों में सायबर अपराधों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और करीब 80 प्रतिशत शिकायतें वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित होती हैं। डिजिटल अरेस्ट, डीपफेक, फर्जी प्रोफाइल, फर्जी सिमकार्ड, म्यूल बैंक अकाउंट, महिला एवं बच्चों के जुड़े अपराधों की संख्या भी बढ़ी है। मध्यप्रदेश पुलिस सायबर अपराध पर काबू पाने की कोशिश कर रही है। हमारा दृष्टिकोण स्पष्ट है- रोकथाम, अनुसंधान और जागरुकता। इसी दिशा में 25 दिसंबर 2025 से प्रदेश में ई-जीरो एफआईआर की शुरुआत की गई है। वर्तमान में 1 लाख रुपए तक की सायबर धोखाधड़ी की ई-जीरो एफआईआर दर्ज कर पीड़ितों को न्याय दिलाया जा रहा है। इसके साथ ही  हेल्पलाइन नम्बर 1930 से पीड़ितों को त्वरित सहायता भी उपलब्ध हो रही है। सायबर धोखाधड़ी से संबंधित राशि को बैंक खाते में रोकने और अकाउंट होल्डर को दिलवाने में प्रयास किए जा रहे हैं। वर्ष 2025 में कुल 135 करोड़ राशि होल्ड कराई गई। पीड़ितों को भी राशि दिलवाई गई। पुलिस सायबर अपराध से जुड़े सिस्टम को चि‍न्हित कर ठोस कार्रवाई कर रही है। म्यूल अकाउंट्स और सायबर स्लेवरी से जुड़े लोगों की पहचान भी की जा रही है।

सायबर अपराध रोकने चलाये जा रहे हैं विशेष अभियान

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा विशेष अभियान "ऑपरेशन फास्ट'', "ऑपरेशन फेस्ट'', "ऑपरेशन मैट्रिक्स'', "ऑपरेशन नयन'' संचालित किए गए। मध्यप्रदेश पुलिस को डीएससीआई अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।

जन जागरूकता सबसे बड़ी शक्ति सायबर अपराध रोकथाम के लिये

सायबर अपराधों की रोकथाम और जन जागरुकता हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। मप्र पुलिस ने करोड़ों लोगों को अपने जागरुकता अभियान से जोड़ा है। पहला "सेफ क्लिक'' अभियान जन जागरुकता का विषय बना था। इससे डिजिटल अरेस्ट पर बहुत हद तक रोक भी लगी थी। उन्होंने कहा कि "सेफ क्लिक 2.0'' अभियान से इन प्रयासों को और ज्यादा गति मिलेगी, इस अभियान का मूल मंत्र है। सावधानी ही बचाव है। पुलिस गांव-गांव तक लोगों को "सेफ क्लिक'' के लिए जागरुक करेगी। जनता को बैंकिंग सुरक्षा, महिला सुरक्षा और नागरिक सुरक्षा जैसे विषयों पर जागरूक करेंगे। इसमें सायबर हेल्पलाइन 1930 का व्यापक प्रचार प्रसार भी शामिल है।

कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सायबर सुरक्षा) ए. साईं मनोहर ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आने वाले 2 सप्ताह में मध्यप्रदेश पुलिस इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए काम करेगी।

कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे सहित सोशल मीडिया इन्फलूएंसर्स भी उपस्थित थे। 

महुआ ने सुनाई मुश्किल दौर की कहानी, कहा- सिर्फ सुवेंदु ने दिया साथ

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कोलकातातृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने एक हालिया साक्षात्कार में पश्चिम बंगाल के सियासी समीकरणों और आपसी रिश्तों पर बेबाकी से अपनी राय साझा की है. उन्होंने कहा कि राजनीति के मैदान में मतभेद होना एक आम बात है, लेकिन इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि नेताओं के आपसी व्यक्तिगत रिश्ते भी खत्म हो जाएं. महुआ ने साझा किया कि उनके और नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के बीच निजी स्तर पर हमेशा एक-दूसरे के प्रति आदर का भाव रहा है.

सुवेंदु के फैसले में थी पारदर्शिता

महुआ मोइत्रा ने कहा कि जब सुवेंदु अधिकारी ने टीएमसी से नाता तोड़कर भाजपा का दामन थामने का निर्णय लिया था, तब उन्होंने अपने इस कदम को छुपाया नहीं था. उन्होंने दल के भीतर रहते हुए किसी तरह की दोहरी राजनीति करने के बजाय स्पष्ट रूप से अपना नया मार्ग चुना. महुआ के अनुसार, किसी भी राजनेता का ऐसा कदम ज्यादा साफ-सुथरा और ईमानदारी से भरा माना जा सकता है.

जब टिकट न मिलने पर रोई थीं महुआ

अपने पुराने राजनीतिक दिनों को याद करते हुए महुआ भावुक हुईं. उन्होंने बताया कि जब उन्होंने शुरुआती दौर में करीमपुर से चुनाव लड़ा था, तब उनके साथ कोई बड़ा नेता नहीं था, लेकिन उस मुश्किल समय में सुवेंदु उनकी जनसभा में शामिल होने आए थे. इसके बाद साल 2014 का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब उन्हें लोकसभा का टिकट मिलते-मिलते रह गया था, तब वे हताशा में पूरी रात रोई थीं. उस कठिन मोड़ पर सुवेंदु ने ढांढस बंधाते हुए कहा था, 'बहन, मैं तुम्हारे साथ खड़ा हूं.' महुआ के मुताबिक, यही वह दौर था जिसने उनके बीच एक मजबूत पारिवारिक और व्यक्तिगत जुड़ाव बनाया.

भीतरघात करने वाले नेताओं पर साधा निशाना

सांसद महुआ मोइत्रा ने उन राजनेताओं को आड़े हाथों लिया जो दल के भीतर मलाई खाते हुए भी असंतोष फैलाते हैं और खुलकर अपना स्टैंड साफ नहीं करते. महुआ ने दोटूक कहा कि यदि किसी जनप्रतिनिधि को अपनी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से कोई शिकायत या वैचारिक समस्या है, तो उसे तुरंत स्पष्ट फैसला लेना चाहिए और मैदान में उतरकर जनता के बीच अपनी ताकत साबित करनी चाहिए.

वैचारिक मतभेद अपनी जगह, व्यक्तिगत सम्मान अपनी जगह

महुआ ने यह भी साफ तौर पर रेखांकित किया कि राजनीतिक मोर्चे पर उनकी और सुवेंदु अधिकारी की विचारधाराएं पूरी तरह विपरीत हैं और दोनों ही बिल्कुल अलग राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व करते हैं. इसके बावजूद, उनका मानना है कि व्यक्तिगत आदर और राजनीतिक जंग को अलग-अलग चश्मे से देखा जाना चाहिए. यही कारण है कि कड़वाहट से भरी राजनीतिक लड़ाइयों के बीच भी वे सुवेंदु अधिकारी के प्रति सम्मान रखना नहीं भूलतीं.

संकट में फंसे युवक को मिला नया जीवन, पुलिस की तत्परता आई काम

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उरई"मुझे माफ कर देना, मैं तुम्हारे लायक नहीं था… तुम्हारे बिना मैं नहीं जी सकता." इंटरनेट मीडिया पर इस तरह का दर्दभरा अलविदा संदेश लिखकर एक युवक ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर लाइव आकर हेयर डाई (जहर) पी ली. गनीमत यह रही कि सोशल मीडिया कंपनी मेटा ने तुरंत हरकत में आते हुए स्थानीय पुलिस को आपातकालीन अलर्ट भेजा, जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने समय रहते छात्र को अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचा ली.

शादी से इनकार करने पर डिप्रेशन में था युवक

माधौगढ़ कोतवाली क्षेत्र के कुंवरपुरा गांव के रहने वाले 20 वर्षीय दीपेंद्र गौतम का एक युवती से प्रेम प्रसंग चल रहा था. वह युवती पर विवाह करने का दबाव बना रहा था, लेकिन लड़की ने शादी करने से साफ मना कर दिया. इस बात से दीपेंद्र गहरे सदमे और अवसाद में चला गया था. 21 जून की सुबह उसकी फिर से युवती से फोन पर बहस हुई, जिससे हताश होकर उसने दोपहर को सोशल मीडिया पर अपनी दिल की पीड़ा लिखी और डाई पीते हुए 27 सेकंड का एक वीडियो अपनी प्रोफाइल पर लाइव अपलोड कर दिया.

कमरे में बेहोश मिला छात्र, मेटा मुख्यालय से आया अलर्ट

जैसे ही दीपेंद्र ने यह आत्मघाती वीडियो इंटरनेट पर पोस्ट किया, फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा ने उसकी लोकेशन ट्रैक कर तुरंत माधौगढ़ कोतवाली पुलिस को इसकी सूचना भेजी. अलर्ट मिलते ही कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अभिलाष मिश्रा पुलिस बल के साथ तत्काल दीपेंद्र के घर पहुंचे. कमरे में दीपेंद्र बेसुध हालत में पड़ा हुआ था. पुलिस ने बिना वक्त गंवाए उसे तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में दाखिल कराया.

समय पर मिला इलाज, पुलिस ने की काउंसलिंग

चिकित्सकों की त्वरित कार्रवाई के कारण दीपेंद्र की जान बच गई. पूरी तरह होश में आने के बाद 22 जून को पुलिस ने दीपेंद्र और उसके पिता वीरेंद्र गौतम को पास बिठाकर लंबी काउंसलिंग की. कोतवाली प्रभारी ने युवक को समझाते हुए कहा कि वह अभी आईटीआई का छात्र है और उसे अपने करियर व भविष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. जीवन में सफलता मिलने के बाद परिस्थितियां बदल जाती हैं. पुलिस के समझाने के बाद युवक को उसके परिजनों के साथ सुरक्षित घर भेज दिया गया.

CBI अफसर बनकर ठगों ने बुजुर्ग महिला को बनाया शिकार, 1.58 करोड़ की ठगी

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ग्वालियरशहर में ऑनलाइन धोखाधड़ी की एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है. शातिर साइबर अपराधियों ने एक 69 वर्षीय बुजुर्ग महिला, मीनाक्षी नाखरे को करीब 33 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' (इंटरनेट पर बंधक) रखकर 1.58 करोड़ रुपये की बड़ी रकम ऐंठ ली. मीनाक्षी एक सेवानिवृत्त लैब टेक्नीशियन हैं. जालसाजों ने खुद को दूरसंचार विभाग, दिल्ली पुलिस और सीबीआई का आला अफसर बताकर महिला को डराया और मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे मामले से बरी करने का झांसा देकर मोटी रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा ली. पुलिस तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि ठगी के पैसे शुरुआत में चार करंट बैंक खातों में भेजे गए थे, जहां से बाद में इन्हें 129 अन्य बैंक खातों में फैला दिया गया.

मनी लॉन्ड्रिंग और गिरफ्तारी का दिखाया खौफ

सरदार पाटनकर साहब का बाड़ा क्षेत्र की रहने वाली मीनाक्षी ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि बीते 10 मई को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात कॉल आया था. फोन करने वाले ने खुद को टेलीकॉम डिपार्टमेंट का अधिकारी बताते हुए दावा किया कि उनके नाम पर रजिस्टर्ड एक सिम कार्ड और बैंक अकाउंट का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए हो रहा है. ठग ने कहा कि इस खाते से 6.80 करोड़ रुपये का अवैध हेरफेर हुआ है. इसके तुरंत बाद कॉल को दिल्ली पुलिस के एक कथित अफसर के पास ट्रांसफर कर दिया गया.

अगले चरण में, वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी पहने एक शख्स सामने आया, जिसने खुद का परिचय आईपीएस अधिकारी सुनील कुमार गौतम के रूप में दिया. उसने महिला पर आरोप लगाया कि इस गैरकानूनी लेनदेन के बदले उन्हें 68 लाख रुपये का कमीशन मिला है. इसके बाद अपराधियों ने महिला को जेल जाने से बचने के लिए एक गुप्त जांच (प्रायोरिटी इन्वेस्टिगेशन) में सहयोग करने का दबाव बनाया.

डरा-धमकाकर पार करा दी जीवनभर की पूंजी

इसके बाद खुद को सीबीआई का अधिकारी बताने वाले एक अन्य जालसाज ने कमान संभाली. उसने महिला से कहा कि जांच प्रक्रिया पूरी होने तक उनकी सारी जमा-पूंजी को सरकार के सुरक्षित खातों में ट्रांसफर करना होगा, जो तफ्तीश पूरी होने के बाद लौटा दी जाएगी. डर और झांसे में आकर मीनाक्षी ने बैंक में मौजूद अपनी चार फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) तुड़वा दीं. उन्होंने 33 दिनों के भीतर ठगों के बताए खातों में कुल 1.58 करोड़ रुपये भेज दिए. यह रकम उन्हें हाल ही में अपनी पुश्तैनी जमीन बेचने से मिली थी.

एनओसी न मिलने पर हुआ धोखे का अहसास

11 जून को जालसाजों ने महिला से कहा कि जांच पूरी हो चुकी है और 18 जून तक उन्हें क्लीन चिट की एनओसी डाक के जरिए मिल जाएगी. हालांकि, इसी बीच 16 जून को ठगों के सभी संपर्क नंबर अचानक बंद हो गए. तय तारीख तक जब कोई सरकारी कागज नहीं पहुंचा, तो महिला को अनहोनी की आशंका हुई. वह सच्चाई जानने के लिए आरोपियों के बताए दिल्ली वाले पते पर भी गईं, जहां पहुंचकर उन्हें पता चला कि वे एक बड़े फ्रॉड का शिकार हो चुकी हैं. इसके बाद उन्होंने वापस आकर स्थानीय पुलिस स्टेशन में इस मामले की औपचारिक शिकायत दर्ज कराई.

हर्निया ऑपरेशन के बाद महिला की मौत, अस्पताल पर लापरवाही का आरोप

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जिला मुख्यालय। शहर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में हर्निया का ऑपरेशन होने के बाद एक महिला की मौत हो गई, जिसके बाद अस्पताल परिसर में भारी हंगामा खड़ा हो गया। मृतका के परिजनों और ग्रामीणों ने डॉक्टरों पर इलाज में घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए अस्पताल के बाहर जमकर नारेबाजी की और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।

ऑपरेशन के बाद बिगड़ी तबीयत, मौत का आरोप

मिली जानकारी के अनुसार, पनोतिया गाँव की रहने वाली कसनी बाई गुर्जर को हर्निया की बीमारी के चलते इस निजी अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। शाम के वक्त डॉक्टरों ने महिला का ऑपरेशन किया, लेकिन कुछ ही देर बाद अचानक उनकी हालत गंभीर हो गई। पीड़ित परिवार का सीधा आरोप है कि महिला ने देर रात ही अस्पताल में दम तोड़ दिया था, मगर अपनी गलती पर पर्दा डालने के लिए अस्पताल प्रशासन ने आनन-फानन में उन्हें उदयपुर रेफर करने का नाटक किया। जैसे ही महिला की मौत की खबर ग्रामीणों तक पहुँची, बड़ी संख्या में लोग अस्पताल के बाहर जुट गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

हार्ट अटैक की वजह से किया रेफर: डॉक्टर

दूसरी ओर, अस्पताल प्रशासन ने परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अस्पताल के मुख्य चिकित्सक डॉ. अशोक कुलदीप ने अपनी सफाई में कहा कि हर्निया का ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा था। लेकिन ऑपरेशन के तुरंत बाद मरीज को दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ने के शुरुआती लक्षण दिखाई देने लगे। मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए ही उन्हें उच्च स्तरीय इलाज के लिए तुरंत उदयपुर रेफर करने का फैसला लिया गया, जिसकी जानकारी समय रहते परिवार को दे दी गई थी।

परिसर में तनाव, पुलिस बल तैनात

हंगामे और प्रदर्शन के चलते अस्पताल परिसर में माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए डीएसपी नेत्रपाल सिंह भारी पुलिस जाब्ते के साथ तुरंत मौके पर पहुँचे और गुस्साए लोगों को शांत कराया। सुरक्षा के मद्देनजर अस्पताल के अंदर और बाहर अतिरिक्त पुलिस कर्मियों को तैनात कर दिया गया है।

मामले की जांच में जुटी पुलिस

फिलहाल पीड़ित परिवार और अस्पताल प्रबंधन अपनी-अपनी बातों पर अड़े हुए हैं और दोनों पक्ष आमने-सामने हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे दोनों पक्षों से लगातार बातचीत कर रहे हैं और शिकायत के आधार पर मामले की गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार, महिला की मौत की असली वजह क्या थी, इसका साफ-साफ खुलासा विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट और पोस्टमार्टम आने के बाद ही हो सकेगा।

मवेशी बचाने की कोशिश बनी हादसा, नहर में डूबने से एक भाई की गई जान

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बीकानेर। जिले के लूणकरणसर इलाके में बुधवार सुबह एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया। यहाँ कंवरसेन लिफ्ट नहर में गिरी एक भेड़ को बचाने के चक्कर में दो सगे भाई पानी के तेज बहाव में बह गए। इस दर्दनाक घटना में एक भाई की पानी में डूबने से मौत हो गई, जबकि दूसरे भाई को ग्रामीणों ने सूझबूझ दिखाते हुए सुरक्षित बाहर निकाल लिया। यह पूरी घटना उदेसिया गाँव के पास सुबह करीब 11 बजे की बताई जा रही है।

भेड़ को बचाते समय हुआ हादसा

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, खिलेरिया गाँव के रहने वाले भेड़ पालक हाल ही में पंजाब से अपनी भेड़ों का झुंड लेकर वापस लौटे थे। बुधवार सुबह जब वे नहर के किनारे भेड़ों को पानी पिला रहे थे, तभी अचानक एक भेड़ अनियंत्रित होकर गहरे पानी में गिर गई। उसे डूबता देख डूंगरराम (26 वर्ष, पुत्र आसाराम खिलेरी) ने बिना सोचे-समझे नहर में छलांग लगा दी।

भाई को बचाने उतरा दूसरा भाई भी बहा

नहर में पानी का बहाव बेहद तेज था, जिसके कारण डूंगरराम खुद को संभाल नहीं पाया और डूबने लगा। अपने भाई को जिंदगी और मौत से जूझता देख छोटा भाई दौलतराम भी उसे बचाने के लिए नहर में कूद गया। दोनों भाइयों को डूबता देख उनके एक साथी भादरराम (पुत्र फुसाराम खिलेरी) ने भी कोशिश की, लेकिन तेज बहाव के आगे उसकी एक न चली। खुद की जान पर बनती देख भादरराम किसी तरह तैरकर किनारे वापस आया।

राहगीर बना मसीहा, एक की बचाई जान

इसी दौरान उदेसिया के रहने वाले मनीराम नामक युवक वहाँ से अपनी मोटरसाइकिल पर गुजर रहे थे। मौके पर चीख-पुकार सुनकर वे तुरंत रुके और स्थिति को भांपते हुए सीधे नहर में कूद गए। मनीराम ने भारी मशक्कत के बाद दौलतराम को बेहोशी की हालत में पानी से बाहर निकाल लिया। ग्रामीणों ने बिना वक्त गंवाए दौलतराम को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुँचाया, जहाँ उसका इलाज जारी है।

लाउडस्पीकर से बुलाई मदद, गाँव में पसरा सन्नाटा

जब मनीराम को पता चला कि पानी के अंदर एक और युवक (डूंगरराम) फंसा हुआ है, तो उन्होंने फिर से तलाश शुरू की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। इस बीच हादसे की सूचना पुलिस को दी गई। स्थानीय ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए पास के उदेसिया मंदिर के लाउडस्पीकर (भोपू) से घटना का ऐलान करवाया।

घोषणा सुनते ही भारी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय गोताखोर मौके पर जमा हो गए। काफी प्रयासों के बाद गोताखोरों ने डूंगरराम को बाहर निकाला, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर अस्पताल पहुँचाया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस हादसे के बाद से खिलेरिया गाँव में मातम पसरा हुआ है। पुलिस ने मर्ग दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

खेत बेचकर ससुर ने जोड़ी थी पूंजी, दामाद ने दोस्तों संग बिजनेस के लिए चुराई रकम

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बीकानेर: राजस्थान के बीकानेर जिले से रिश्तों को तार-तार करने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहाँ एक दामाद ने अपने ससुर की मेहनत की गाढ़ी कमाई पर ही हाथ साफ कर दिया। ससुर द्वारा खेत बेचने से मिले 22 लाख रुपये की भनक लगते ही दामाद के मन में लालच आ गया। उसने अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर न सिर्फ चोरी का ताना-बाना बुना, बल्कि आधी रात को ससुराल के मकान की दीवार में कुंबल (छेद) कर भीतर दाखिल हुआ और बक्से का ताला तोड़कर नकद रकम लेकर चंपत हो गया।

खेत की बिक्री से मिले थे पैसे, दामाद को लग गई थी भनक

यह पूरा मामला खाजूवाला थाना क्षेत्र के चक 17 बीडी गांव का है। पीड़ित ससुर गिरधारीराम मेघवाल ने 17 जून को थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि 16 जून की रात उनके घर में रखे 22 लाख रुपये चोरी हो गए हैं।

उन्होंने अपनी रिपोर्ट में बताया कि हाल ही में उन्होंने अपनी कृषि भूमि बेची थी, जिससे उन्हें यह मोटी रकम मिली थी और उन्होंने इसे सुरक्षित एक संदूक में ताला लगाकर रखा था। इस बात की जानकारी उनकी बेटी के पति सोहनलाल नायक को मिल गई थी।

दोस्तों ने दिखाए 'बिजनेस' के सपने, नशेड़ी दामाद जाल में फंसा

पुलिस तफ्तीश में सामने आया कि मुख्य आरोपी दामाद सोहनलाल नायक मूल रूप से श्रीगंगानगर का निवासी है और फिलहाल पास के ही एक खेत में मजदूरी करता था। सोहनलाल नशे की लत का शिकार है। जब उसने ससुर के घर में इतनी बड़ी रकम होने की बात अपने दोस्तों—बूटा सिंह और दुलीचंद नायक को बताई, तो उन्होंने सोहनलाल को खुद का नया बिजनेस शुरू करने के हसीन ख्वाब दिखाए। इसके बाद तीनों ने मिलकर इस बड़ी चोरी को अंजाम दे डाला। ससुर को अगले ही दिन अपने दामाद के हाव-भाव देखकर उस पर पक्का शक हो गया था।

पुलिस ने बिछाया जाल; ₹13.35 लाख बरामद, बाकी ₹9 लाख की तलाश

खाजूवाला थाना प्रभारी सुरेंद्र प्रजापत ने बताया कि पीड़ित की शिकायत के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मंगलवार की शाम नामजद दामाद और उसके दोनों साथियों को धर दबोचा। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपियों के पास से चोरी की गई राशि में से 13 लाख 35 हजार रुपये की नकदी बरामद कर ली है।

हालांकि, बचे हुए करीब 9 लाख रुपये अभी तक बरामद नहीं हो सके हैं। पुलिस आरोपियों को रिमांड पर लेकर कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि शेष धनराशि उन्होंने कहाँ छुपा कर रखी है या फिर किन-किन जगहों पर खर्च कर दी है।

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