- मेष राशि :- हर्ष, यात्रा, राजसुख, सफलता, हानि, खर्च अधिक होगा, व्यर्थ का विरोध होगा।
- वृष राशि :- विरोध, व्यय, कष्ट, अशांति, कार्यलाभ की स्थिति संतोषप्रद बनी ही रहेगी।
- मिथुन राशि :- व्यापार में क्षति, यात्रा, विवाद, गृहकार्य, राजकार्य, व्यवसाय पर ध्यान दें।
- कर्क राशि :- भूमि व राज-लाभ, वायु विकार का योग है, शरीर कष्ट होगा, ध्यान दें।
- सिंह राशि :- वाहनादि का भय, कष्ट, राजसुख, यात्रा, शिक्षा की स्थिति में विकास होगा।
- कन्या राशि :- व्यय, प्रवास, विरोध, भूमि-लाभ, उद्योग-व्यापार में अड़चने आयेंगी।
- तुला राशि :- कार्यसिद्धी, लाभ, विरोध, प्रगति के साथ कुछ अच्छे कार्य भी होंगे, संतान से प्रसन्नता मिले।
- वृश्चिक राशि :- रोगभय, मातृ-सुख, कष्ट, यात्रा, गृहकार्य व राजकार्य में रुकावट बनेगी।
- धनु राशि :- लाभ, धर्म रुचि, हर्ष, यश, यात्रा कार्य में रुकावट बढ़ेगी, ध्यान दें।
- मकर राशि :- विरोध, व्यापार में हानि, शरीर खर्च, धार्मिक खर्च बढ़ेंगे, कार्य में रुकावट होगी।
- कुंभ राशि :- व्यय, प्रवास लाभ, प्रतिष्ठा, रोग, सामाजिक कार्यों में रुकावट की अनुभूमि होगी।
- मीन राशि :- राजभय, यश, लाभ, मान, चोट-चपेट का भय, मित्रों व पारिवारिक लोगों से परेशानी होगी।
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अवैध रेत उत्खनन पर जिला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, 200 ट्रैक्टर-ट्रॉली रेत जब्त
रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन पर सख्त कार्रवाई के निर्देशों के अनुरूप जशपुर जिले में खनिज विभाग द्वारा लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है। अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन की शिकायतों पर त्वरित संज्ञान लेते हुए विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 200 ट्रैक्टर-ट्रॉली रेत जब्त की है तथा 1 लाख 46 हजार 800 रुपये का अर्थदंड वसूल किया है।
जिला सहायक खनिज अधिकारी ने बताया कि 11 जून 2026 को झारखंड-छत्तीसगढ़ सीमा क्षेत्र स्थित ग्राम पोड़ी के शंख नदी तट का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान लगभग 200 ट्रैक्टर-ट्रॉली (करीब 600 घनमीटर) रेत अवैध रूप से संग्रहित पाई गई। इस पर खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 के तहत प्रकरण दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई की गई।
कार्रवाई के तहत निर्धारित 1 लाख 46 हजार 800 रुपये की अर्थदंड राशि 16 जून 2026 को खनिज मद में जमा कराई गई। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध उत्खनन और परिवहन के विरुद्ध आगे भी इसी प्रकार की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
खनिज विभाग के अनुसार जिले में रेत की वैध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए झारखंड-छत्तीसगढ़ सीमा क्षेत्र के ग्राम पोड़ी एवं ग्राम पुत्रीचौरा में 5-5 हेक्टेयर क्षेत्रफल की रेत खदानें घोषित की गई हैं। इन खदानों के संचालन हेतु निविदा आमंत्रित की जा चुकी है और खदान स्वीकृति की प्रक्रिया प्रगति पर है। इससे क्षेत्र में रेत की वैध आपूर्ति को बढ़ावा मिलेगा तथा अवैध उत्खनन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।
जल जीवन मिशन से बदली भटपल्ली की तस्वीर, हर घर तक पहुंचा शुद्ध पेयजल
रायपुर : केंद्र एवं राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। बीजापुर जिले के भैरमगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सोमनपल्ली के आश्रित गांव भटपल्ली में इस योजना ने ग्रामीणों की वर्षों पुरानी पेयजल समस्या का समाधान कर दिया है। अब गांव के प्रत्येक घर तक नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल पहुंच रहा है, जिससे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है।
जल जीवन मिशन से बदली भटपल्ली की तस्वीर, हर घर तक पहुंचा शुद्ध पेयजल
पूर्व हैंडपंपों पर थी निर्भरता, जो समाप्त हो गई
जिला मुख्यालय बीजापुर से लगभग 55 किलोमीटर दूर स्थित भटपल्ली गांव में पहले ग्रामीणों को पेयजल के लिए हैंडपंपों पर निर्भर रहना पड़ता था। गर्मी के दिनों में पानी भरने के लिए लंबी कतारें लगती थीं और कई बार लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता था। महिलाओं और बच्चों को पानी लाने में काफी समय और श्रम लगाना पड़ता था।
जल जीवन मिशन से मिली घर-घर नल कनेक्शन उपलब्ध
जल जीवन मिशन के तहत गांव में 10 केएल क्षमता वाली दो सोलर आधारित जल संरचनाएं स्थापित की गईं। इसके माध्यम से गांव के 34 परिवारों को घर-घर नल कनेक्शन उपलब्ध कराया गया। अब सभी परिवारों को नियमित रूप से शुद्ध पेयजल मिल रहा है और पानी की समस्या लगभग समाप्त हो गई है।
गांव के युवाओं को मिली जिम्मेदारी
योजना के सुचारु संचालन और रखरखाव के लिए गांव से ही एक नल जल मित्र का चयन किया गया है। उसे तकनीकी प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया है, जिससे जल आपूर्ति व्यवस्था का स्थानीय स्तर पर बेहतर संचालन सुनिश्चित हो रहा है।
सामुदायिक भागीदारी से बनी मिसाल
ग्रामसभा के माध्यम से भटपल्ली को शत-प्रतिशत ‘हर घर जल’ गांव के रूप में प्रमाणित किया गया। ग्रामसभा में जल आपूर्ति, रखरखाव और जल संरक्षण पर चर्चा की गई। साथ ही योजना के सतत संचालन के लिए प्रत्येक परिवार द्वारा 40 रुपये प्रतिमाह जलकर देने पर सहमति बनाई गई।
ग्रामीणों ने जताया संतोष
गांव के निवासी बोडाराम कारटम बताते हैं कि पहले पानी के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ती थी। हैंडपंपों पर लंबा इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब घर में ही नल से पर्याप्त मात्रा में शुद्ध पानी मिल रहा है। इससे समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है तथा परिवार की दैनिक जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं।
‘हर घर जल’ लक्ष्य की सफल मिसाल
भटपल्ली गांव की यह उपलब्धि जल जीवन मिशन के ‘हर घर जल’ संकल्प को साकार करने का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह योजना न केवल ग्रामीणों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध करा रही है, बल्कि जल संरक्षण, सामुदायिक सहभागिता और ग्रामीण विकास को भी नई दिशा दे रही है।
गुणवत्ता की निगरानी के मानक मापदंड किए जाए निर्धारित : राज्यपाल पटेल
भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि योजनाओं की मंशा और क्रियान्वयन की व्यवहारिकता में संवेदनशीलता की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का मूल्यांकन मुख्यतः तकनीकी विषय है, इसलिए हितग्राहियों की प्रतिक्रिया पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। निर्माण सामग्री एवं कार्य की गुणवत्ता की निगरानी के मानक मापदंड निर्धारित किए जाए। अधिकारियों द्वारा निगरानी मापदंड के अनुसार नियमित गुणवत्ता परीक्षण करना चाहिए।
राज्यपाल पटेल लोक भवन में बुधवार को आयोजित समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल को बैठक में पीएम-जनमन योजना अंतर्गत 9 विभागों की 11 अधोसंरचनात्मक, 7 हितग्राही मूलक योजनाओं और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत 17 विभागों की 25 योजनाओं की प्रगति की जानकारी दी गई।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि जनजातीय बहुल क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता की पहल पीएम-जनमन योजना और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजनाएं है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य के लिए निर्धारित समय सीमा तक कार्य की रीति-नीति उचित नहीं है। रणनीति, समय सीमा से पहले कार्य पूरा करने की होनी चाहिए। नए कार्यों के क्रियान्वयन में पूर्व अनुभवों और चुनौतियों को दृष्टिगत रखते हुए कार्य योजना तैयार की जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अति पिछड़ी जनजातियों के विकास और उत्थान के प्रयासों को आवश्यकता और बहुलता की प्राथमिकता के साथ क्रियान्वयन की औपचारिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाए।
राज्यपाल पटेल ने प्रदेश में सिकल सेल उन्मूलन अभियान के तीव्र गति से क्रियान्वयन पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 से पूर्व वर्ष 2026 तक लक्ष्य का पूरा होना अनुमानित है। उन्होंने सभी संबंधितों को इसके लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि 15 वर्ष की आयु तक के सिकल सेल रोगी वाहक के स्वास्थ्य प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे उनका भावी जीवन सुरक्षित हो जाएगा। जरूरी है कि सिकल सेल की दवाओं की उपलब्धता सदैव सुनिश्चित रहे। एलोपैथिक उपचार पद्धति के साथ ही आयुर्वेद औषधियों के उपयोग के संबंध में जन जागरण के प्रयासों की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद की दवाओं के उपयोग से रक्त की उपलब्धता बढ़ने और थकान में कमी के उत्साह जनक प्रारंभिक परिणाम प्राप्त हुए है। राज्यपाल ने बैठक में जनजातीय बहुल क्षेत्रों की तहसीलवार बुनियादी सुविधाओं का मानचित्र तैयार कर प्रभावी निगरानी, जन औषधि केन्द्रों के संचालन में जनजातीय युवाओं की भागीदारी तथा विद्यालयों में छात्राओं, छात्र के पृथक शौचालयों की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर बल दिया।
समीक्षा बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा, जनजातीय प्रकोष्ठ की सदस्य सचिव श्रीमती मीनाक्षी सिंह, प्रकोष्ठ के सदस्य, लोक भवन और जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
जो एक बार मध्यप्रदेश आता है, वह यहीं का होकर रह जाता है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि समय तभी बदलता है, जब संकल्प बड़ा होता है। सभी भारतीयों के लिए यह गर्व का विषय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृढ़ संकल्प और दूरदर्शी नेतृत्व में भारत का समय बदला है। विश्व के कई देशों ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से प्रधानमंत्री मोदी को विभूषित किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने विकसित भारत @2047 और अर्थव्यवस्था को 30 ट्रिलियन डॉलर पहुंचाने का संकल्प लिया है। राज्य सरकार का यह प्रयास होगा कि इसमें से लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर का योगदान मध्यप्रदेश का हो। मध्यप्रदेश, प्रधानमंत्री मोदी के सेवा, सुशासन और जन कल्याण के संकल्पों को पूर्ण करने का निरंतर प्रयास कर रहा है। वर्तमान में मध्यप्रदेश की गिनती देश के सबसे तेजी से प्रगति करने वाले राज्यों में हो रही है। हम विरासत भी और विकास भी के पथ पर लगातार अग्रसर हो रहे है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज वीरांगना रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस है। उन्होंने रानी दुर्गावती का स्मरण करते हुए कहा कि प्रदेशवासी रानी दुर्गावती के बलिदान को सदैव याद रखेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव "विकसित मध्यप्रदेश" विषय पर आयोजित कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल में आयोजित कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। कॉन्क्लेव में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, सूक्ष्म लघु एवं उद्योग मंत्री चैतन्य काश्यप, मुख्य सचिव अनुराग जैन विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कॉन्क्लेव में शामिल उद्योगपतियों से राज्य में मौजूद निवेश संभावनाओं का लाभ उठाने का आह्वान करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश की विशेषता है कि एक बार जो मध्यप्रदेश आता है, यहीं का होकर रह जाता है। कार्यक्रम में उद्योग व्यापार जगत के प्रतिनिधि, निवेशक, बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि तथा नीति निर्माता शामिल हुए।
प्रदेश में पिछले तीन साल से विकास का कारवां लगातार बढ़ रहा है आगे
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में पिछले तीन साल से विकास का कारवां लगातार आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश में नए उद्योग स्थापित करने के लिए पर्याप्त लैंड बैंक है। राज्य सरकार ने उद्योग अनुकूल वातावरण तैयार करने लिए पारदर्शी और उद्योग मित्र नीतियां लागू की हैं। मध्यप्रदेश की इन्हीं विशेषताओं के कारण निवेशक उद्योग लगाने के लिए राज्य में आ रहे हैं। देश के मध्य में स्थित होने के कारण उन्हें कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स का विशेष लाभ भी मिलेगा। प्रदेश सरकार ने चारों दिशाओं में सड़क कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए अधोसंरचना विकास पर विशेष बल दिया है।
राज्य सरकार 10 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों को ला चुकी है धरातल पर
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में भोपाल में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 का आयोजन किया गया, जिसमें अभूतपूर्व निवेश प्राप्त हुआ और एमओयू साइन हुए। यह प्रसन्नता का विषय है कि 10 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों को राज्य सरकार धरातल पर ला चुकी है। मध्यप्रदेश की छवि कृषि प्रधान राज्य के साथ उद्योग मित्र राज्य की भी बनी है। राज्य सरकार ने वर्ष 2025 को उद्योग और रोजगार को समर्पित किया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय युवा प्रतिभाओं ने दुनिया की बड़ी से बड़ी कंपनियों में शीर्ष पदों पर पहुंचकर भारत का मान बढ़ाया है। स्पेस टेक्नोलॉजी में भारतीय वैज्ञानिकों ने नए कीर्तिमान गढ़े हैं। राज्य सरकार ने भी अपनी स्पेस-टेक पॉलिसी लॉन्च की है। मध्यप्रदेश को सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए हम निरंतर प्रयास कर रहे हैं।
नैनो डीएपी एवं यूरिया प्लस के उपयोग से खेती की लागत में आई कमी – किसान साव
रायपुर : आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर किसान अब कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। इसी तरह विकासखंड पिथौरा के ग्राम सलडीह के प्रगतिशील किसान धनेश्वर साव जिन्होंने अपनी धान की फसल में नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया प्लस का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग कर बेहतर परिणाम हासिल किए हैं। साव ने बताया कि उन्होंने बीज उपचार से लेकर पौध उपचार और फसल की वृद्धि अवस्था तक नैनो उर्वरकों का नियमानुसार प्रयोग किया। इसके परिणामस्वरूप धान की फसल अधिक हरी-भरी, स्वस्थ एवं मजबूत विकसित हुई। फसल में रोग एवं कीटों का प्रकोप भी अपेक्षाकृत कम देखने को मिला, जिससे अतिरिक्त कीटनाशकों की आवश्यकता कम हुई और खेती की लागत में कमी आई। उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरकों को अन्य उपयुक्त कीटनाशकों के साथ मिलाकर छिड़काव करने से समय और मजदूरी दोनों की बचत हुई। इससे कृषि कार्य अधिक सुविधाजनक और किफायती बन गया। फसल की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिला, जिससे बेहतर उत्पादन की उम्मीद बढ़ी है।
साव ने धान की बुवाई से पूर्व बीजों का नैनो डीएपी से उपचार किया। इसके लिए प्रति किलोग्राम बीज में 5 एमएल नैनो डीएपी का उपयोग किया गया। वहीं रोपाई से पहले पौधों की जड़ों को नैनो डीएपी घोल में उपचारित किया गया। फसल की 30 से 35 दिन की अवस्था में नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया प्लस का संयुक्त छिड़काव किया गया, जबकि दूसरा छिड़काव फूल आने से पहले पोटरी पानी अवस्था में नैनो यूरिया प्लस से किया गया। इन उपायों से फसल को आवश्यक पोषक तत्व समय पर प्राप्त हुए और पौधों की वृद्धि बेहतर हुई। प्रगतिशील किसान धनेश्वर साव का अनुभव क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नैनो उर्वरकों का संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग न केवल उत्पादन बढ़ाने में सहायक है, बल्कि उर्वरक उपयोग दक्षता में वृद्धि कर खेती की लागत भी कम करता है। अधिकांश कीटनाशकों के साथ इनका मिश्रण संभव है, जिससे श्रम और समय की बचत होती है। हालांकि कॉपर युक्त कीटनाशकों एवं फफूंदनाशकों के साथ इनका उपयोग नहीं करना चाहिए।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से ग्राम गीधा के भगतराम मिल रही बड़ी राहत
रायपुर : किसानों की आर्थिक मजबूती और कृषि लागत में सहयोग के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना ग्रामीण क्षेत्रों में खेती-किसानी के लिए महत्वपूर्ण सहारा बन रही है। योजना के तहत लाभ लेकर मुंगेली जिले के मुंगेली विकासखंड के ग्राम गीधा निवासी भगतराम साहू अपनी खेती को और अधिक सुदृढ़ बना रहे हैं। भगतराम ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत प्राप्त होने वाली राशि का उपयोग वे खेती-किसानी के विभिन्न कार्यों में करते हैं। विशेष रूप से खाद, उर्वरक एवं अन्य कृषि आदानों की व्यवस्था करने में यह राशि उनके लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है। इससे खेती की लागत का कुछ हिस्सा आसानी से पूरा हो जाता है और समय पर कृषि कार्य संपादित करने में मदद मिलती है।
भगतराम साहू ने कहा कि पहले खेती के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था करने में कई बार आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से मिलने वाली सहायता राशि कृषि कार्यों को सुचारु रूप से संचालित करने में सहयोग कर रही है। इससे खेती के प्रति उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि यह योजना किसानों को सीधे आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। समय पर मिलने वाली राशि से किसान अपनी कृषि आवश्यकताओं की पूर्ति कर बेहतर उत्पादन की ओर अग्रसर हो रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है। यह योजना खेती को मजबूत बनाने के साथ-साथ किसानों के जीवन में आर्थिक स्थिरता और भरोसा भी प्रदान कर रही है।
राज्यपाल पटेल ने वीरांगना रानी दुर्गावती को दी श्रद्धांजलि
भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर उनको नमन किया। उन्होंने लोकभवन में बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में रानी दुर्गावती के चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की। राज्यपाल पटेल ने रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर दो मिनट का मौन धारण किया। रानी दुर्गावती का पुण्य स्मरण कर नमन किया।
लोकभवन के स्वर्ण जयंती सभागार में आयोजित रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस कार्यक्रम में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, लोकभवन एवं जनजातीय प्रकोष्ठ के सदस्य, अधिकारी गण उपस्थित थे।
अदम्य साहस, अद्वितीय पराक्रम और साहस की मिसाल थीं वीरांगना रानी दुर्गावती : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि रानी दुर्गावती, अदम्य साहस, अद्वितीय पराक्रम और साहस की प्रतिमूर्ति थीं। नारी शक्ति का पराक्रम मां दुर्गावती के व्यक्तित्व में नजर आता है। मुगलों को युद्धों में धूल चटाने वाली ऐसी वीरांगना रानी दुर्गावती का आज 463वां बलिदान दिवस है। रानी दुर्गावती ने गौंडवाना साम्राज्य में 52 गढ़ों पर शासन किया। पति की असमय मृत्यु के बाद 5 साल के बेटे को सिंहासन पर बैठाया और 15 साल तक जनता की सेवा के लिए और क्षेत्र की रक्षा के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया। मध्यप्रदेश की धरती पर लगभग 500 वर्ष पूर्व रानी दुर्गावती का जन्म हुआ, लेकिन आज पूरा देश और प्रदेश उन्हें आदर के साथ स्मरण करता है। हमारा सौभाग्य है कि प्रदेश सरकार के गठन के बाद मंत्रि-परिषद की पहली बैठक जबलपुर में रानी दुर्गावती को समर्पित कर आयोजित की गई थी। इसके बाद दूसरी कैबिनेट बैठक रानी दुर्गावती के गौंडवाना साम्राज्य की राजधानी संग्रामपुर में आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि जबलपुर एयरपोर्ट का नाम वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर रखने के लिए केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर उनकी समाधि स्थल नर्रई नाला जबलपुर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रानी दुर्गावती को समर्पित नवीन संस्थान जबलपुर में 100 करोड़ रूपए की लागत से मदन महल के पास तैयार हो रहा है, जिसका लोकार्पण बहुत जल्द किया जाएगा। इस संस्थान से प्रदेश की भावी पीढ़ी रानी दुर्गावती के गौरवशाली अतीत और कार्यों से परिचित होंगी। जबलपुर में रानी दुर्गावती के नाम पर एक चिड़ियाघर (जू) और वन्य प्राणी रेस्क्यू सेंटर बन रहा है। इसके साथ ही 35वीं बटालियन मंडला का नाम रानी दुर्गावती के नाम पर रखा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के नायकों की वीरता और समृद्ध विरासत को सही रूप में प्रस्तुत करने के लिए 'विरासत से विकास' अभियान शुरू किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रानी दुर्गावती का शासन काल, गौंड साम्राज्य का स्वर्णिम युग था। रानी दुर्गावती ने किसान कल्याण के लिए उस दौर में बीज संग्रह, फसल चक्रण और जल संचय के महत्वपूर्ण कार्य कराए थे। उनके प्रबंधन के परिणाम स्वरूप अनाज के भंडार भरे हुए थे।
किसानों के कल्याण के लिए ठोस निर्णय ले रही है सरकार
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के कल्याण के लिए संकल्पित है और पूरा वर्ष किसानों को समर्पित करते हुए ठोस निर्णय ले रही है। अब किसान बंधुओं के लिए शून्य ब्याज दर पर 31 मार्च तक कर्ज चुकाने की बाध्यता खत्म कर दी गई है। किसान जिस तारीख को लोन लेंगे, तब से एक वर्ष की समयावधि में कर्ज चुकाया जा सकेगा। राज्य सरकार 880 करोड़ रुपए का भुगतान वित्तीय संस्थाओं को करेगी। राज्य सरकार पर्यटन, उद्योगों और अधोसंरचना विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। शासकीय परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण करने पर सरकार किसानों को अब चार गुना मुआवजा देगी। प्रदेश में संचालित रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना से कोदो-कुटकी पैदा करने वाले किसानों को लाभ मिल रहा है। प्रदेश की लाड़ली बहनों को हर माह जारी हो रहे 1500 रुपए से उनकी आत्मनिर्भरता बढ़ी है। किसानों को प्रधानमंत्री सम्मान निधि का भी लाभ मिल रहा है। रानी दुर्गावती द्वारा किसानों के कल्याण के लिये चलाये गये कार्यक्रमों से प्रेरित होकर प्रदेश सरकार भी निरंतर कृषक हित में कार्य कर रही है। हमारी सरकार के पास किसान कल्याण और कल्याणकारी योजनाओं के लिए धन की कमी नहीं है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय कल्याण के लिए प्रधानमंत्री मोदी लगातार कार्य कर रहे हैं। देश में पहली बार जनजातीय वर्ग द्रौपदी मुर्मु राष्ट्रपति पद को सुशोभित कर रही हैं। राज्य सरकार सबका साथ, सबका विकास और सबका प्रयास के भाव से काम कर रही है। हमारी सरकार जो कहती है, वो करके दिखाती है।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके ने वीरांगना रानी दुर्गावती के संबंध में ओजपूर्ण कविता से अपने उदबोधन की शुरूआत करते हुये ‘’अड़े खड़ी दीवार बने, सदैव से प्रेम की दीवानी, तूफानों से हार न मानी, मरकर हुई अमर रानी, मरकर हुई अमर रानी’’ये पंक्तियों पढ़ी। उन्होंने वीरांगना महारानी रानी दुर्गावती के चरणों को नमन करते हुये कहा कि केंद्र और राज्य सरकार जनजातीय समाज के सम्मान, उत्थान, भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार जल संरक्षण, वन संरक्षण, जनजातीय अंचलों के विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में लगातार काम कर रही है। उन्होंने जनजातीय समाज से अपनी भाषा, बोली, संस्कृति और परंपराओं को सहेजने का आह्वान किया। साथ ही कहा कि रानी दुर्गावती के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि वीरांगना रानी दुर्गावती का नाम लेते ही महाकौशल और मध्यप्रदेश के कण-कण में श्रद्धा का भाव जाग उठता है। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती केवल एक वीर योद्धा नहीं थीं, बल्कि जल प्रबंधन, कृषि व्यवस्था, आत्मसम्मान और मातृभूमि के प्रति समर्पण की अद्भुत प्रतिमूर्ति थीं। उनके द्वारा बनाए गई तालाबों की श्रृंखला, जल संचयन और संसाधनों के उपयोग की उनकी व्यवस्था आज भी बड़े-बड़े जल विशेषज्ञों को चकित करती है। मंत्री सिंह ने कहा कि जबलपुर की धरती के लिए यह गर्व का विषय है कि यह वही भूमि है, जहाँ वीरांगना रानी दुर्गावती का बलिदान हुआ। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से आग्रह किया कि जबलपुर एयरपोर्ट का नाम भी वीरांगना महारानी रानी दुर्गावती के नाम पर किया जाए। यह केवल नामकरण नहीं, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक अस्मिता और गौरव को राष्ट्रीय पहचान देने वाला निर्णय होगा।
वरिष्ठ विधायक एवं प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि रानी दुर्गावती का बलिदान स्वतंत्रता, संस्कृति, अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा का अमर प्रतीक है। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती ने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि सम्मान के साथ मृत्यु, अपमानजनक जीवन से कहीं श्रेष्ठ होती है। खंडेलवाल ने कहा कि जनजातीय समाज का योगदान भारत के इतिहास में अमूल्य है और रानी दुर्गावती उसी गौरवशाली परंपरा की सबसे उज्ज्वल प्रेरणाओं में से एक हैं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को रानी दुर्गावती के जीवन से यह सीख लेनी चाहिए कि देश की स्वतंत्रता और स्वाभिमान सहज रूप से नहीं मिले, बल्कि इसके लिए अनगिनत वीरों और वीरांगनाओं ने अपना सर्वस्व बलिदान किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश उन महान विभूतियों को सम्मानपूर्वक स्मरण कर रहा है, जिन्होंने भारत की अस्मिता और संस्कृति की रक्षा के लिए संघर्ष किया।
समाधि स्थल पर श्रद्धा सुमन किये अर्पित
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम की शुरूआत में ग्राम नर्रई नाला स्थित वीरांगना महारानी रानी दुर्गावती की समाधि स्थल पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया। शहीद वीर नारायण की प्रतिमा पर भी पुष्पांजलि अर्पित की। साथ ही गौंड समाज के आराध्य देवता बड़ा देव का पूजन-अर्चन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।
इस अवसर पर राज्यसभा सांसद सुमित्रा वाल्मीकि, सांसद आशीष दुबे, महापौर जगत बहादुर सिंह, विधायक अशोक रोहाणी, सुशील तिवारी 'इंदू', नीरज सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी, श्रद्धालू और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
प्रधानमंत्री आवास योजना से बदली महेत्तर राम की जिंदगी
रायपुर : प्रत्येक व्यक्ति के मन में एक सपना रहता है कि उसका खुद का आशियाना हो जिसमें वह सुकून की नींद ले सकें। कोरबा जिले के सीमावर्ती ग्राम काटाद्वारी में रहने वाले लगभग 50 वर्षीय ग्रामीण महेत्तर राम के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना किसी वरदान से कम नहीं साबित हुई है। दोनों पैरों से चल पाने में असमर्थ महेत्तर राम अब अपने परिवार के साथ पक्के घर में सुरक्षित जीवन जी रहे हैं।
महेत्तर राम ने बताया कि उनकी पत्नी का पहले ही निधन हो चुका है और वे अपने दो बेटों के साथ जीवनयापन कर रहे हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनका कच्चा मकान वर्षों तक पक्का नहीं हो सका। बारिश के मौसम में घर की छत टपकती थी और परिवार को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। ऐसे में हर बरसात उनके लिए चिंता और कठिनाइयों का कारण बन जाती थी।उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत जब उनके नाम आवास स्वीकृत हुआ और किस्त की राशि मिली, तो उन्होंने तुरंत पक्का मकान बनवाने का कार्य शुरू कराया। आज उनका सपना पूरा हो चुका है। अब उनके सिर पर मजबूत छत है और बरसात के दिनों में पानी टपकने या मकान ढहने का डर नहीं रहेगा।
महेत्तर राम के बेटे अनिल केंवट ने बताया कि उनके पिता बीमारी के बाद दोनों पैरों से चलने-फिरने में असमर्थ हो गए हैं। परिवार की आजीविका चलाने के लिए वे गांव-गांव जाकर मिठाई बेचते हैं। सीमित आय में घर का खर्च चलाना ही मुश्किल था, ऐसे में पक्का मकान बनवाना उनके लिए एक अधूरा सपना बनकर रह गया था।
अनिल ने भावुक होकर कहा कि उन्हें कभी उम्मीद नहीं थी कि उनका कच्चा घर भी एक दिन पक्के मकान में बदल जाएगा। लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना ने यह सपना साकार कर दिया। अब परिवार को बरसात में पानी टपकने, दीवार गिरने या असुरक्षित घर में रहने की चिंता नहीं रहेगी। आज महेत्तर राम का परिवार अपने नए पक्के घर में सुकून और सम्मान के साथ जीवन जी रहा है।















