महिलाओं के बाद अब युवा होंगे सियासी फोकस में, BJP ने तैयार किया नया प्लान

0
6

नई दिल्ली। पिछले एक दशक से विभिन्न राजनीतिक दलों के एजेंडे में महिलाओं के लिए नकद हस्तांतरण योजनाएं केंद्र बिंदु रही हैं, लेकिन अब राजनीतिक दलों का ध्यान युवा वर्ग यानी 'जेन जी' (Gen Z) पर केंद्रित होता दिख रहा है। दुनिया भर में युवा आंदोलनों के प्रभाव को देखते हुए चौकन्ने हुए सियासी दल अब देश की लगभग एक-चौथाई आबादी को साधने की रणनीति बना रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आगामी चुनावी राज्यों के लिए एक नया वैकल्पिक मॉडल तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिसके तहत महिलाओं के साथ-साथ युवाओं को भी सीधे वित्तीय लाभ, रोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता जैसी योजनाओं से जोड़ा जाएगा।

चुनावी राज्यों में युवा मतदाताओं की बड़ी हिस्सेदारी

चुनावी गणित को देखें तो 18 से 29 वर्ष के आयु वर्ग के मतदाताओं का प्रभाव अत्यधिक महत्वपूर्ण है। प्रमुख चुनावी राज्यों में कुल वोट बैंक में युवाओं की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से भी अधिक है। आंकड़ों के अनुसार, मणिपुर में युवा मतदाता 22 प्रतिशत, पंजाब में 21 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 20 प्रतिशत, उत्तराखंड में 17.5 प्रतिशत और गोवा में 17 प्रतिशत हैं। यही कारण है कि कोई भी प्रमुख दल इस बड़े और निर्णायक वोट बैंक को रिझाने में पीछे नहीं रहना चाहता।

युवाओं को लुभाने के लिए भाजपा का एक्शन प्लान

भाजपा ने अपने राज्य संगठनों को युवाओं के लिए पहले से चल रही योजनाओं का दायरा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत बेरोजगारी भत्ते और अन्य आर्थिक सहायता योजनाओं की राशि में बढ़ोतरी की जाएगी। साथ ही, युवाओं को आसानी से शिक्षा ऋण (एजुकेशन लोन) उपलब्ध कराने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त कोचिंग सुविधाओं की शुरुआत करने की योजना है। इसके अतिरिक्त, चुनावी राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे साल के अंत तक खाली पड़े सभी सरकारी पदों को भरने के लिए युद्धस्तर पर भर्ती अभियानों को अंतिम रूप दें।

पंजाब की 'आप' सरकार की भी बड़ी तैयारियां

युवा वोट बैंक को साधने की इस होड़ में केवल भाजपा ही नहीं, बल्कि अन्य क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दल भी आगे आ रहे हैं। पंजाब की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार युवाओं के लिए नए वित्तीय प्रोत्साहन देने की योजना पर काम कर रही है। इसके तहत राज्य में नए स्टार्टअप शुरू करने वाले युवाओं को बेहद कम ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराने और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति की राशि में बड़ा इजाफा करने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।