MVA में सब ठीक नहीं? 23 विधायकों की गैरहाजिरी पर उद्धव ठाकरे नाराज

0
5

मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में अचानक सरगर्मी बढ़ गई है। इस बड़े राजनीतिक उलटफेर के बीच, बुधवार रात मुंबई में महाविकास आघाड़ी (MVA) के प्रमुख नेताओं की एक डिनर मीटिंग हुई, जिसका मकसद गठबंधन में एकजुटता का संदेश देना था। हालांकि, इस महत्वपूर्ण बैठक से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के मुखिया शरद पवार नदारद रहे। इसके बावजूद, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल, एनसीपी (शरद गुट) के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे और सांसद संजय राउत समेत कई दिग्गज नेता इस बैठक में शामिल हुए।

उद्धव ठाकरे ने सहयोगी दलों की एकजुटता पर उठाए सवाल

बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे ने महाविकास आघाड़ी की एकता को लेकर सहयोगियों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि केवल मंच पर साथ होने का दावा कर देना ही काफी नहीं है। सहयोगियों को झकझोरते हुए उद्धव ने पूछा, "हम बार-बार कहते हैं कि हम साथ हैं, लेकिन क्या सच में हम सब एक साथ हैं?" गौरतलब है कि इस गठबंधन में कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव गुट) और एनसीपी (शरद गुट) मुख्य रूप से शामिल हैं।

विपक्ष को मिलकर और मजबूती से लड़ने की दी नसीहत

अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, उद्धव ठाकरे ने बैठक में चिंता जताते हुए कहा कि उन्हें इस बात का अंदेशा हो रहा है कि क्या महाविकास आघाड़ी वाकई विधानसभा और विधान परिषद में जनता की आवाज को एकजुट होकर उठा पा रही है। उन्होंने सहयोगियों को नसीहत दी कि अगर सरकार की नीतियों का मुकाबला करना है, तो विपक्ष को सदन के अंदर और सड़क पर पूरी ताकत व एकजुटता के साथ उतरना होगा।

60 में से केवल 37 विधायकों का पहुँचना बना चर्चा का विषय

महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र के बीच आयोजित की गई इस बेहद खास बैठक में महाविकास आघाड़ी के लिए एक असहज करने वाली स्थिति भी सामने आई। गठबंधन के तीनों दलों के कुल 60 विधायकों में से केवल 37 विधायक ही इस डिनर मीटिंग में पहुंचे। विधायकों की इस कम संख्या ने राजनीतिक गलियारों में एमवीए के भीतर सब कुछ ठीक न होने की चर्चाओं को हवा दे दी है।

सदन में सरकार को घेरने की साझा रणनीति पर हुआ मंथन

तमाम कड़वाहट और सवालों के बीच, बैठक में आगामी विधानसभा कार्यवाही को लेकर एक साझा रणनीति पर मुहर लगाई गई। नेताओं ने फैसला किया कि जनता की समस्याओं और मुद्दों को सदन के पटल पर बेहद आक्रामक ढंग से रखा जाएगा। इसके अलावा, सदन के भीतर और बाहर सभी सहयोगी दल हर मुद्दे पर एक जैसा रुख अपनाएंगे। बैठक में तीनों दलों के बीच जमीनी स्तर पर बेहतर तालमेल और संगठन को मजबूत करने पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

सांसदों के टूटने के बाद पहली बड़ी परीक्षा

उद्धव गुट के छह सांसदों के पाला बदलकर शिंदे गुट में जाने के बाद महाविकास आघाड़ी की यह पहली बड़ी और रणनीतिक बैठक थी। ऐसे नाजुक वक्त पर गठबंधन के सबसे वरिष्ठ नेता शरद पवार का बैठक में न आना और दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे का अपनी ही आघाड़ी की एकता पर सवाल खड़े करना, महाराष्ट्र की सियासत में किसी बड़े बदलाव की तरफ इशारा कर रहा है।