अठावले बोले- दो-तिहाई बहुमत के साथ महिला आरक्षण और परिसीमन बिल का रास्ता साफ

0
6

नई दिल्ली / मुंबई: केंद्र सरकार में सहयोगी और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई-ए) के प्रमुख रामदास अठावले ने आगामी विधायी सत्र को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण बयान दिया है। केंद्रीय मंत्री ने पूरा भरोसा जताया है कि देश की राजनीति की दिशा बदलने वाले दो बेहद महत्वपूर्ण कानून—महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन (डिलिमिटेशन) विधेयक—संसद के इसी मानसून सत्र के दौरान हर हाल में पारित हो जाएंगे। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए याद दिलाया कि संसद के पिछले सत्र में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और समाजवादी पार्टी (सपा) की एकजुटता के चलते ये महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक गिर गए थे, लेकिन इस बार तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है।

बहुमत के नए समीकरणों के सहारे एनडीए

महाराष्ट्र की राजनीति के कद्दावर नेता रामदास अठावले ने बुधवार को मीडिया से रूबरू होते हुए दावा किया कि अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास दोनों सदनों में स्थिति बेहद मजबूत और अनुकूल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी सत्र में महिला आरक्षण विधेयक को दोबारा पटल पर रखा जाएगा, ताकि साल 2029 के लोकसभा चुनावों से ही देश की महिलाओं को उनका विधायी हक (आरक्षण) मिलना सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही उन्होंने परिसीमन की वकालत करते हुए कहा कि देश में हर 30-35 वर्षों में सीटों का पुनर्गठन बेहद जरूरी प्रक्रिया है, इसलिए परिसीमन विधेयक भी समय की मांग है। केंद्रीय मंत्री ने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस सहित तमाम अन्य राजनीतिक दलों से इन दोनों ऐतिहासिक विधेयकों को पारित कराने में राष्ट्रहित में सहयोग देने की भावुक अपील भी की।

विपक्षी खेमे में सेंधमारी और बिखराव का दावा

राजनीतिक रणनीतियों की चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने एक बेहद चौंकाने वाला दावा भी किया। उन्होंने संकेत दिए कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और शिवसेना (यूबीटी) के कुछ असंतुष्ट सांसद इस बार संसद के भीतर सरकार के इन विधेयकों का परोक्ष या अपरोक्ष रूप से समर्थन कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के कांग्रेस नीत गठबंधन से अलग रुख अपनाने की संभावना भी जताई। अठावले ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि इन नए समीकरणों के चलते सरकार के पास दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा आसानी से उपलब्ध हो जाएगा, जिससे इन विधेयकों के पारित होने का रास्ता पूरी तरह साफ है।

पिछले सत्र की नाकामी को धोएगी सरकार

गौरतलब है कि बीती 17 अप्रैल को संसद के विस्तारित सत्र के दौरान मोदी सरकार को उस वक्त एक बड़ा सियासी झटका लगा था, जब विधानसभाओं में साल 2029 से महिला आरक्षण प्रभावी करने और देश में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने (परिसीमन) के उद्देश्य से लाया गया महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में आवश्यक बहुमत न मिलने के कारण गिर गया था। उस ऐतिहासिक मतदान के दौरान सदन में मौजूद कुल 528 सांसदों में से 298 सदस्यों ने विधेयक के पक्ष में और 230 ने इसके विरोध में अपना मत दिया था। संवैधानिक नियमों के तहत दो-तिहाई विशेष बहुमत के लिए सरकार को न्यूनतम 352 वोटों की दरकार थी, जिससे सत्ता पक्ष महज 54 वोट दूर रह गया था। अब सरकार उसी अधूरी कसर को इस मानसून सत्र में पूरा करने के लिए पूरी ताकत झोंकने जा रही है।