बिहार की सियासत में बांकीपुर हॉट सीट, बीजेपी बनाम प्रशांत किशोर की जंग

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पटना: बिहार की सियासत का सबसे हॉटस्पॉट बन चुकी पटना की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने जा रहे उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। यह सीट भाजपा के निवर्तमान विधायक और वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे (राज्यसभा सदस्य चुने जाने) के बाद खाली हुई है। इस पारंपरिक गढ़ को बचाने के लिए जहां भाजपा ने अपनी पूरी संगठनात्मक ताकत झोंक दी है, वहीं जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर (पीके) के स्वयं चुनावी मैदान में उतरने से मुकाबला बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय हो गया है।

भाजपा का अभेद्य किला: 24 वार्डों और 422 बूथों पर तगड़ी घेराबंदी

बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र को लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी का सबसे सुरक्षित और अभेद्य किला माना जाता रहा है।

  • ऐतिहासिक दबदबा: साल 2009 के परिसीमन से पहले इसे 'पटना पश्चिम' सीट के नाम से जाना जाता था। इस क्षेत्र में वर्ष 1990 से लगातार भाजपा का ही परचम लहरा रहा है। लालू प्रसाद और राबड़ी देवी के दौर में भी विपक्ष इस शहरी गढ़ में सेंध लगाने में नाकाम रहा था।

  • संगठनात्मक तैयारी: अपनी इस विरासत को अक्षुण्ण रखने के लिए भाजपा ने इस उपचुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। पार्टी ने क्षेत्र के सभी 24 वार्डों और 422 बूथों पर अपने सबसे सक्रिय और कद्दावर कार्यकर्ताओं की फौज उतार दी है, ताकि बूथ स्तर पर किलेबंदी को मजबूत रखा जा सके।

विपक्षी खेमे की नेता भी भाजपा के इस चक्रव्यूह को स्वीकार कर रही हैं। जन सुराज की विनीता मिश्रा साफ कहती हैं:

"भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसका बेहद मजबूत और सक्रिय जमीनी बूथ नेटवर्क है। उनके पास हर बूथ पर समर्पित कार्यकर्ता तैनात हैं, जो हमारी नई पार्टी के लिए इस चुनाव में सबसे बड़ी और कड़ी चुनौती है।"

'पीके' का विजन बनाम भाजपा का रिपोर्ट कार्ड: विनीता मिश्रा का बड़ा दावा

जब विनीता मिश्रा से सवाल किया गया कि भाजपा के इतने मजबूत कैडर के बावजूद प्रशांत किशोर ने अपने चुनावी सफर की शुरुआत (इलेक्टोरल डेब्यू) के लिए इसी कठिन सीट को क्यों चुना? तो उन्होंने बेबाकी से जवाब दिया कि जमीनी माहौल केवल भाजपा के पक्ष में नहीं है।

उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने इस बार जिस उम्मीदवार को मैदान में उतारा है, उसकी तुलना में प्रशांत किशोर कहीं अधिक योग्य, शिक्षित और अनुभवी हैं। विनीता मिश्रा ने कहा:

"प्रशांत किशोर के पास बांकीपुर के संपूर्ण विकास और स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए एक स्पष्ट विजन और ठोस रोडमैप है। इसके विपरीत, भाजपा के पास क्षेत्र के विकास को लेकर कोई नई सोच या खाका नहीं है। हम जनता के बीच जाकर इसी विजन के आधार पर बदलाव की अपील कर रहे हैं।"

प्रतिष्ठा की जंग: साख दांव पर, त्रिकोणीय हुआ मुकाबला

30 जुलाई को होने वाले इस मतदान में मुकाबला पूरी तरह त्रिकोणीय हो चुका है, जहां मुख्य रूप से तीन दल आमने-सामने हैं:

मुख्य उम्मीदवार/दलराजनीतिक स्थिति एवं रणनीति
अभिषेक कुमार (भाजपा)राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की विरासत और पार्टी के मजबूत शहरी पारंपरिक वोट बैंक के भरोसे मैदान में।
प्रशांत किशोर (जन सुराज)जाति-धर्म से ऊपर उठकर विकास और शिक्षा के एजेंडे पर शहरी मतदाताओं और युवाओं को साधने की कोशिश।
रेखा गुप्ता (आरजेडी)महागठबंधन के पारंपरिक मतों और सत्ता विरोधी लहर को भुनाने के प्रयास में सक्रिय।

 

प्रशांत किशोर का खुद चुनावी अखाड़े में उतरना इस बात का संकेत है कि जन सुराज इस चुनाव को केवल एक सीट की जीत-हार के रूप में नहीं, बल्कि बिहार की भावी राजनीति के लिटमस टेस्ट के तौर पर देख रही है। अब देखना यह होगा कि क्या पीके भाजपा के इस 36 साल पुराने गढ़ को ढहा पाते हैं या भाजपा अपने इस सबसे सुरक्षित किले को बचाने में कामयाब रहती है।