नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का शीर्ष नेतृत्व अगले महीने अपने संगठन और सरकार के स्तर पर एक बड़ी और व्यापक समीक्षा बैठक करने जा रहा है। इस उच्च स्तरीय बैठक में पार्टी शासित विभिन्न राज्यों के कामकाज का विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा, जिसमें छत्तीसगढ़ की साय सरकार के कार्यों की भी गहन समीक्षा शामिल है। सूत्रों के अनुसार, यह समीक्षा केवल प्रशासनिक कामकाज तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड, जनहित योजनाओं की जमीनी प्रगति और संगठन व सरकार के बीच आपसी तालमेल जैसे कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर बारीकी से चर्चा होगी। हालांकि, अभी इस बैठक की तारीख तय होना बाकी है।
दो डिप्टी सीएम का फॉर्मूला हो सकता है खत्म
राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा बेहद तेज हो गई है कि भाजपा भविष्य में राज्यों में “दो डिप्टी सीएम” वाले फॉर्मूले को पूरी तरह खत्म कर सकती है। इसका एक बड़ा उदाहरण हाल ही में पश्चिम बंगाल में देखने को मिला, जहां भाजपा सरकार के गठन के दौरान किसी को भी डिप्टी सीएम का पद नहीं दिया गया। माना जा रहा है कि दो-दो डिप्टी सीएम होने से सत्ता के अधिकार और पॉवर का बंटवारा हो जाता है, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। ऐसे में अब पार्टी का पूरा फोकस 'सिंगल पॉवर' (एकल कमान) व्यवस्था पर है। संगठन अब राज्यों में सत्ता के ढांचे को अधिक सरल, स्पष्ट और प्रभावी बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। हालांकि, इस पर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
पांच राज्यों की रिपोर्ट तैयार करवा रहा नेतृत्व
केंद्रीय नेतृत्व छत्तीसगढ़ समेत देश के पांच भाजपा शासित राज्यों की सरकारों की एक विस्तृत गोपनीय रिपोर्ट तैयार करवा रहा है। इस रिपोर्ट के जरिए मुख्य रूप से यह आंका जाएगा कि चुनावी घोषणापत्रों और जनता से किए गए वादों को पूरा करने में सरकारें कितनी सफल रही हैं। इसके साथ ही, सरकारी योजनाओं का जमीनी स्तर पर आम लोगों पर क्या असर हुआ है, जनता के बीच सरकार की छवि कैसी है और संगठन के स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता कितनी मजबूत है, इन सभी पहलुओं को परखा जाएगा।
मंत्रियों के विभागवार कामकाज का आकलन
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस महासमीक्षा बैठक में सभी मंत्रियों के विभागों के प्रदर्शन का अलग-अलग आकलन किया जाएगा। जिन विभागों में सरकारी योजनाओं की रफ्तार धीमी मिलेगी या जनता के बीच किसी तरह का असंतोष देखा जाएगा, वहां आने वाले दिनों में बदलाव की पूरी संभावना है। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व आगामी चुनावों और अपनी दीर्घकालिक राजनीतिक रणनीति को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकारों की कार्यशैली को और ज्यादा असरदार और धारदार बनाना चाहता है।
समीक्षा के बाद बड़े बदलाव के संकेत
दिल्ली में होने वाली इस समीक्षा बैठक और मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड के आधार पर छत्तीसगढ़ की साय कैबिनेट (मंत्रिमंडल) में बड़े फेरबदल के कयास लगाए जा रहे हैं। पिछले कुछ महीनों से राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार और बदलाव की चर्चाएं लगातार गर्म हैं, और मुख्यमंत्री के हर दिल्ली दौरे के बाद इन चर्चाओं को और बल मिलता है। राजनैतिक सूत्रों का दावा है कि जून का महीना छत्तीसगढ़ की राजनीति में कई बड़े उलटफेर लेकर आ सकता है।








