लखनऊ: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों में से 8 पर अपने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर दी है। इस सूची में सबसे चौंकाने वाला निर्णय केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को दोबारा राज्यसभा न भेजना रहा है, जिसे राजनीतिक विश्लेषक आगामी चुनावों के मद्देनजर एक बड़े रणनीतिक बदलाव के रूप में देख रहे हैं।
हरदीप सिंह पुरी का पत्ता कटा और पंजाब चुनाव कनेक्शन
संभावित उम्मीदवारों की सूची और सितंबर के अंत तक चले कयासों में हरदीप सिंह पुरी का नाम सबसे आगे चल रहा था, लेकिन अंतिम सूची से उनका नाम बाहर होना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का मुख्य विषय बन गया है। रवनीत सिंह बिट्टू के इस्तीफे के बाद मोदी सरकार में पुरी एकमात्र प्रमुख सिख मंत्री बचे थे। ऐसे में अगले साल पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर बीजेपी इस फैसले के जरिए राज्य में पार्टी संगठन को मजबूत करने और सिख मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ को नए सिरे से साधने की योजना पर काम कर रही है।
बीजेपी की नई चुनावी रणनीति और जातीय समीकरण
उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने इस बार पुराने चेहरों के बजाय सामाजिक, क्षेत्रीय और जातीय संतुलन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। पार्टी द्वारा जारी सूची में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार के नाम शामिल हैं। इन उम्मीदवारों के चयन में ओबीसी, एससी, ब्राह्मण और ठाकुर समुदायों को उचित प्रतिनिधित्व दिया गया है, साथ ही दो महिला उम्मीदवारों को भी सूची में जगह मिली है।









