सोनम वांगचुक मामले में कांग्रेस का आरोप, कहा- अधिकारों का हो रहा दमन

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नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करार देते हुए कहा कि सरकार शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को कानून-व्यवस्था की समस्या मानकर उन्हें कुचलने की मानसिकता अपना रही है। कांग्रेस का आरोप है कि मौजूदा शासन दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को अलोकतांत्रिक तरीके से चला रहा है, जहां असहमति की आवाज को दबाया जा रहा है।

लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति सरकार का नजरिया

कांग्रेस ने इस पूरी घटना को संविधान की अवमानना का एक और उदाहरण बताया है। पार्टी का मानना है कि असहमति व्यक्त करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है, लेकिन गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाली दिल्ली पुलिस इसे स्वीकार करने के बजाय दमनकारी नीति अपना रही है। पार्टी के अनुसार, महिला पहलवानों और पूर्व सैनिकों के साथ हुए दुर्व्यवहार के बाद अब वांगचुक के साथ हुई कार्रवाई यह साबित करती है कि यह सरकार जन-आंदोलनों के प्रति कितनी असंवेदनशील हो गई है।

अस्पताल में भर्ती और आंदोलन का संघर्ष

सोनम वांगचुक नीट परीक्षा में हुई कथित धांधलियों और छात्रों की मौतों के विरोध में 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे। अनशन के 21वें दिन स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि पुलिस का कहना है कि यह कदम चिकित्सा सलाह और उच्च न्यायालय के निर्देशों के पालन में उठाया गया है। वहीं, आंदोलन से जुड़े अन्य लोगों ने भी पुलिस पर मारपीट और हिरासत में लेने का आरोप लगाया है, जिससे पूरे मामले में आक्रोश और बढ़ गया है।

छात्रों की मांगों और सरकार की चुप्पी

यह आंदोलन नीट परीक्षा की अनियमितताओं के खिलाफ न्याय की मांग को लेकर चलाया जा रहा है, जिसमें वांगचुक के अलावा कई छात्र संगठन भी शामिल हैं। पिछले तीन हफ्तों से भूख हड़ताल के चलते आंदोलनकारियों का स्वास्थ्य लगातार गिर रहा है, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। कांग्रेस ने इस पूरे मामले में सरकार से जवाबदेही की मांग करते हुए कहा है कि युवाओं की आवाज को अनसुना करना देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।