इमरान खान को देश छोड़ने के नोटिस पर विवाद, कांग्रेस ने लगाया बदले की कार्रवाई का आरोप

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मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान के भांजे और अभिनेता इमरान खान को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित एक विरोध प्रदर्शन में शामिल होना भारी पड़ गया है। मुंबई पुलिस द्वारा अभिनेता इमरान खान को भारत छोड़ने का आधिकारिक नोटिस जारी किए जाने के बाद से राजनीतिक गलियारों में भूचाल आ गया है। पुलिस ने उन्हें आगामी अट्ठाईस अक्टूबर तक देश छोड़ने का निर्देश दिया है, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।

कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ का तीखा हमला

इस पूरे प्रकरण पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस की लोकसभा सांसद वर्षा गायकवाड़ ने कड़े शब्दों में सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने के बाद इस तरह का नोटिस मिलना स्वाभाविक ही था, क्योंकि मौजूदा व्यवस्था में असहमति की कोई जगह नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अभिनेत्री कंगना रनौत या यामी गौतम खुलकर कुछ भी बोल सकती हैं, लेकिन उन्हें कभी इस तरह का कोई अल्टीमेटम नहीं दिया जाएगा। वर्षा गायकवाड़ ने आरोप लगाया कि यह लगातार देखा जा रहा है कि जो भी व्यक्ति सरकार विरोधी प्रदर्शनों में शामिल होता है या उनके खिलाफ आवाज बुलंद करता है, उसे प्रतिशोध की कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। उन्होंने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि आज संविधान की रक्षा के लिए लड़ने वाले नागरिकों पर झूठे मुकदमे लादे जा रहे हैं, उन्हें देश से निकाला जा रहा है या सलाखों के पीछे डाला जा रहा है, जबकि संविधान का विरोध करने वालों को सत्ता का संरक्षण मिल रहा है।

सपा अध्यक्ष अबू आजमी का बयान

इस मामले में समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष अबू असलम आजमी ने भी कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इस कार्रवाई को पूरी तरह अनुचित बताते हुए कहा कि इमरान खान इसी देश की माटी से जुड़े हैं। भले ही प्रशासनिक दस्तावेजों में उनकी नागरिकता बदली हो, लेकिन उनका आत्मीय लगाव आज भी अपनी मातृभूमि से बना हुआ है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में अनगिनत लोग विदेशों में बस चुके हैं, किंतु वे अपनी जन्मभूमि और पूर्वजों की धरती से गहरा प्रेम करते हैं। आजमी ने कहा कि यदि वह भारत आकर किसी मुद्दे पर अपनी राय रखते हैं, तो इस तरह का कठोर कदम उठाना और उन्हें जबरन देश छोड़ने का फरमान जारी करना सरकार की उस हताशा को दर्शाता है, जिसके जरिए वह अपनी प्रशासनिक विफलताओं को छिपाना चाहती है।

AIMIM नेता वारिस पठान ने उठाए सवाल

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता वारिस पठान ने इस कार्रवाई को पूरी तरह सांप्रदायिक और चुनिंदा बताते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उस विरोध प्रदर्शन में विभिन्न पृष्ठभूमियों और अलग-अलग नामों वाले तमाम लोग शामिल थे, लेकिन चूंकि इस अभिनेता का सरनेम 'खान' है, इसलिए उसे खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पहले आयशा खान को प्रताड़ित किया गया और अब प्रशासन इमरान खान के पीछे हाथ धोकर पड़ गया है।

वारिस पठान ने संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला देते हुए कहा कि देश का संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और विरोध प्रदर्शन करने का मौलिक अधिकार प्रदान करता है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार की नीतियों से असहमति जताने वाले ये युवा आतंकवादी हैं? उन्होंने दो टूक कहा कि यदि उस व्यक्ति का नाम 'इंद्रजीत' होता, तो क्या तब भी शासन-प्रशासन द्वारा इतना बड़ा हंगामा खड़ा किया जाता? पठान ने कहा कि यह कार्रवाई सरकार की अपनी घबराहट और बौखलाहट को उजागर करती है।