ममता बनर्जी के बागी खेमे पर कपिल सिब्बल के बयान से बढ़ी हलचल

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नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में मिली करारी हार के बाद अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) में शुरू हुआ आंतरिक विद्रोह अब अपने सबसे बड़े निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। रविवार, 14 जून 2026 को टीएमसी के 20 बागी लोकसभा सांसदों ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए खुद को एक पंजीकृत क्षेत्रीय दल 'राष्ट्रवादी सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में विलय (Merge) करने की औपचारिक घोषणा कर दी।

इस ऐतिहासिक टूट के तुरंत बाद, बागी गुट ने देश की राजधानी में लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला से उनके आवास पर मुलाकात की और संसद के भीतर अपने लिए अलग बैठने की व्यवस्था (Seating Arrangement) करने की लिखित मांग सौंप दी।

विरोधी ताकतों का नया नंबर गेम और रणनीति

इस बगावत का नेतृत्व कर रहीं वरिष्ठ सांसद डॉ. काकोली घोष दस्तीदार और सुदीप बंदोपाध्याय ने स्पीकर से मुलाकात के बाद साफ किया कि यह कदम पूरी तरह सोच-समझकर और कानूनी अड़चनों से बचने के लिए उठाया गया है:

  • दल-बदल विरोधी कानून से सुरक्षा: लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं। बागी गुट के पास 20 सांसदों का समर्थन होने के कारण उन्होंने दो-तिहाई (2/3) के जादुई आंकड़े को आसानी से पार कर लिया है। ऐसे में तकनीकी रूप से उन पर दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) लागू नहीं होगा और उनकी सांसदी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी।

  • NDA को पूर्ण समर्थन: बागी सांसदों ने संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार को अपना बाहर से पूर्ण समर्थन देने का ऐलान किया है।

रातों-रात बदली देश की संसदीय राजनीति की तस्वीर

इस विलय ने भारतीय संसद के भीतर के समीकरणों को पूरी तरह उलट कर रख दिया है:

  • NDA की ताकत में भारी इजाफा: इन 20 सांसदों के जुड़ने से लोकसभा में भाजपा नीत एनडीए का आंकड़ा 294 से बढ़कर सीधे 314 सीटों पर पहुंच गया है, जिससे केंद्र सरकार बेहद मजबूत स्थिति में आ गई है।

  • NCPI का चौंकाने वाला उदय: कल तक देश के राजनीतिक नक्शे पर गुमनाम रही NCPI (जो 2023 के त्रिपुरा चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत सकी थी) इस विलय के बाद रातों-रात लोकसभा की पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी और एनडीए के भीतर टीडीपी के बाद दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी घटक दल बनकर उभर गई है।

  • पदों का नया ढांचा: बागी खेमे की रणनीति के अनुसार, डॉ. काकोली घोष दस्तीदार को NCPI का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष और लोकसभा में चीफ व्हिप बनाया गया है, जबकि वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय संसद में इस नए ब्लॉक के सदन नेता (Floor Leader) की भूमिका संभालेंगे।

ममता और अभिषेक बनर्जी का पलटवार

इस बड़े राजनीतिक झटके के बाद टीएमसी आलाकमान भी चुप नहीं बैठा है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर इस बागी गुट को 'अवैध' बताते हुए मान्यता न देने और इन सभी को अयोग्य घोषित करने की मांग की है। वहीं, टीएमसी के वरिष्ठ नेता सौगत राय ने इस कदम को हास्यास्पद और 'जनादेश के साथ गद्दारी' करार दिया है।

बागी नेताओं का कहना है कि वर्तमान में कानूनी सुरक्षा के लिए उन्होंने NCPI का रास्ता चुना है, लेकिन आगामी जुलाई में वे कानूनी तौर पर खुद को ही 'असली टीएमसी' घोषित करने के लिए चुनाव आयोग और अदालत का रुख करेंगे। बहरहाल, इस सियासी भूचाल ने ममता बनर्जी के राजनीतिक भविष्य और पश्चिम बंगाल की राजनीति को एक बेहद अनिश्चित और चुनौतीपूर्ण मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है।