कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सत्ता में हुए बड़े राजनीतिक उलटफेर के बाद अब कोलकाता नगर निगम (KMC) में भी लोकतांत्रिक व्यवस्था को बहाल करने की कवायद तेज हो गई है। राज्य की नवनिर्वाचित भाजपा सरकार की मंशा के अनुरूप इस वर्ष दिसंबर के पहले सप्ताह तक नगर निगम के चुनाव संपन्न करा लिए जाएंगे। हाल ही में पूर्व मेयर फिरहाद हकीम के त्यागपत्र के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेतृत्व वाले इस बोर्ड को भंग कर दिया गया था, जिसके बाद से ही शहर की इस सबसे बड़ी नागरिक संस्था में चुनाव कराने की चर्चाएं जोरों पर थीं।
मुख्यमंत्री का निगम मुख्यालय दौरा और प्रशासनिक गतिरोध पर बयान
बतौर मुख्यमंत्री पहली बार नगर निगम मुख्यालय पहुंचे राज्य के नए मुखिया ने एक कार्यक्रम के दौरान स्पष्ट किया कि वर्तमान में निगम एक प्रशासक की देखरेख में चल रहा है, जिससे एक तरह का प्रशासनिक गतिरोध पैदा हो गया था। उन्होंने बताया कि पूर्व मेयर के हटने के बाद निगम का कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए सरकार ने नया बोर्ड गठित करने हेतु तीन दिनों की मोहलत दी थी। हालांकि, तय समय में नया बोर्ड न बन पाने की स्थिति में सरकार को इसे भंग कर प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति करनी पड़ी। अब सरकार की प्राथमिकता आगामी दिसंबर तक चुनाव कराकर निगम की बागडोर जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को सौंपने की है।
शुभेंदु अधिकारी का रुख और स्वच्छता अभियान की शुरुआत
इस पूरे घटनाक्रम पर वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए साफ किया कि सरकार पिछले दरवाजे से निगम की सत्ता पर काबिज होने की कोई मंशा नहीं रखती। उन्होंने तर्क दिया कि नागरिक सेवाएं आपातकालीन सेवाओं की श्रेणी में आती हैं, और यदि बहुमत रखने वाला दल (TMC) अपना नया नेता चुनने में नाकाम रहा है, तो इसमें सूबे की सरकार की कोई खता नहीं है। यह महत्वपूर्ण घोषणा 'स्वच्छता के स्वागत' अभियान के शुभारंभ के दौरान की गई, जो इस महीने के अंत में रेड रोड पर आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कोलकाता आगमन की तैयारियों के मद्देनजर शुरू किया गया है।
राजनीति से ऊपर उठकर काम करने की सलाह और ऐतिहासिक बदलाव
इस खास कार्यक्रम में दलगत राजनीति से इतर एक अलग नजारा देखने को मिला, जहां मंच पर मुख्यमंत्री के साथ पूर्व मेयर फिरहाद हकीम, टीएमसी सांसद माला रॉय और विधायक संदीपान साहा भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर सभी अधिकारियों और राजनेताओं को नसीहत दी कि नागरिक सेवाओं and विकास कार्यों में राजनीति आड़े नहीं आनी चाहिए; राजनीति सिर्फ चुनाव तक सीमित रहे और बाकी समय जनहित में मिलकर काम हो। गौरतलब है कि मई में आए विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद बंगाल से टीएमसी का 15 साल पुराना शासन समाप्त हो गया है। फिरहाद हकीम के 5 जून के इस्तीफे के बाद फिलहाल आईएएस अधिकारी स्मिता पांडे को निगम का प्रशासक नियुक्त किया गया है और वे आगामी मानसून की तैयारियों को लेकर मुस्तैद हैं।









