नई दिल्ली। केरल और कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों में महत्वपूर्ण सियासी फैसले लेने के बाद, कांग्रेस आलाकमान अब अपने केंद्रीय और प्रांतीय संगठनों में एक बड़े फेरबदल की तैयारी में जुट गया है। आने वाले दिनों में कांग्रेस कार्यसमिति (AICC), राष्ट्रीय कार्यकारिणी, विभिन्न विभागों और कई राज्यों के संगठनात्मक ढांचे में व्यापक स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इस पुनर्गठन का मुख्य उद्देश्य पार्टी को जमीनी स्तर पर और अधिक आक्रामक और मजबूत बनाना है, जिसके लिए पार्टी के भीतर बड़े स्तर पर मंथन का दौर जारी है।
कई राज्यों के प्रभारियों को मिल सकती है नई भूमिका
कांग्रेस के इस आगामी फेरबदल के पीछे राज्यों के कई बड़े नेताओं की बदलती भूमिकाएं हैं। कर्नाटक में प्रदेश अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की स्थिति में, हरियाणा के वर्तमान कांग्रेस प्रभारी बी.के. हरिप्रसाद को राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। इससे पहले महाराष्ट्र के प्रभारी रमेश चेन्निथला भी केरल सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वहीं दूसरी ओर, असम विधानसभा चुनाव में मिली हार की जिम्मेदारी लेते हुए महासचिव भंवर जितेंद्र सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जबकि तमिलनाडु के प्रभारी गिरीश चोडनकर को गोवा प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया जा चुका है। इन समीकरणों के चलते राष्ट्रीय स्तर पर कई अहम पद खाली हुए हैं, जिन्हें भरने के लिए राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ दिग्गज नेताओं को दिल्ली बुलाकर राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं।
साल 2029 के लिए नई और मजबूत टीम बनाने की कवायद
कांग्रेस रणनीतिकारों और शीर्ष नेतृत्व का पूरा ध्यान अब आगामी चुनावी चुनौतियों पर है। अगले दो वर्षों के भीतर देश के कई बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, विशेषकर हिंदी पट्टी के राज्यों को लेकर पार्टी आलाकमान इस बार कोई ढील देने के मूड में नहीं है। पार्टी का मुख्य लक्ष्य साल 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन को नई ऊर्जा, स्पष्ट जवाबदेही और दूरगामी विजन के साथ खड़ा करना है। इसी रणनीति के तहत पिछले काफी समय से देश भर के राज्यों में कांग्रेस के संगठनात्मक प्रदर्शन, स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी तैयारियों की बेहद बारीकी से समीक्षा की जा रही है।
युवा चेहरों, महिलाओं और सामाजिक संतुलन पर विशेष जोर
पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष और शीर्ष नेतृत्व इस बार संगठन में बड़े पैमाने पर युवाओं और महिला नेताओं को आगे लाने का मन बना चुका है। नई टीम के गठन में देश के अलग-अलग हिस्सों के क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, सामाजिक संतुलन और जातीय समीकरणों का विशेष ध्यान रखा जाएगा। पार्टी के भीतर एक ऐसा तालमेल बिठाने की कोशिश की जा रही है, जिसमें वरिष्ठ नेताओं के लंबे राजनीतिक अनुभव और युवा चेहरों के नए जोश व ऊर्जा का बेहतर संतुलन देखने को मिले, ताकि संगठन को चुनावी मोर्चे पर गति दी जा सके।
कई चुनावी राज्यों को जल्द मिलेंगे नए प्रदेश अध्यक्ष
सूत्रों का यह भी कहना है कि जिन राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों को अपने पद पर कार्य करते हुए पांच वर्ष या उससे अधिक का लंबा समय बीत चुका है, वहां नेतृत्व परिवर्तन की तलवार लटक रही है। वर्तमान में कर्नाटक, केरल, राजस्थान और छत्तीसगढ़ सहित कई प्रमुख प्रदेश इकाइयों में नए संगठन प्रमुखों की नियुक्ति को लेकर शीर्ष स्तर पर गहन चर्चा चल रही है। पंजाब में भी आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर 2 जून को एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिसमें राज्य के वर्तमान राजनीतिक हालात और भावी रणनीति पर फैसला होगा। हालांकि, इन सभी संभावित सांगठनिक बदलावों पर अंतिम मुहर कांग्रेस अध्यक्ष और गांधी परिवार की अंतिम मंजूरी के बाद ही लगेगी।









