भीलवाड़ा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयानों के बाद देश की सियासत में एक नई बहस छिड़ गई है। भीलवाड़ा में जैन आचार्य पुलक सागर महाराज से मुलाकात के दौरान मोहन भागवत ने यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के प्रस्तावित नियमों पर स्पष्ट किया है कि अभी न तो यह कानून बना है और न ही बनेगा। आचार्य पुलक सागर ने इन प्रावधानों से सामाजिक विभाजन की आशंका जताई थी। दूसरी ओर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुंबई में घोषणा की है कि भाजपा नीत एनडीए की 21 राज्य सरकारें वर्ष 2029 से पहले देश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करेंगी।
यूजीसी और यूसीसी: दो अलग-अलग विषय
राजनीतिक गलियारों में इन दोनों बयानों को संघ-भाजपा खेमे के दो बड़े संदेशों के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूजीसी और यूसीसी दोनों बिल्कुल अलग विषय हैं:
यूजीसी (UGC): यह उच्च शिक्षा के नियमन और शैक्षणिक व्यवस्था से जुड़ा मामला है।
यूसीसी (UCC): यह विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे व्यक्तिगत (पर्सनल) कानूनों में एक समान व्यवस्था लागू करने से संबंधित है।
वर्तमान बहस के मुख्य बिंदु
इन बयानों के सामने आने के बाद देश में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। फिलहाल मुख्य सवाल यह बना हुआ है कि सरकार प्रस्तावित यूजीसी नियमों पर अपना क्या रुख अपनाती है, जबकि देश के कई राज्यों में इसे लेकर चर्चाएं जारी हैं। इसके अलावा, यह भी देखना अहम होगा कि 2029 से पहले यूसीसी को लागू करने के लिए विभिन्न राज्यों में कितनी राजनीतिक और सामाजिक सहमति बन पाती है।









