यूपी में सियासी हलचल तेज, समय पूर्व चुनाव को लेकर चर्चाएं

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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में समय से पहले विधानसभा चुनाव होने की संभावनाओं के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने सहयोगी दलों के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर जल्द ही बातचीत शुरू करने जा रही है। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व केंद्रीय कैबिनेट के विस्तार और अपनी नई सांगठनिक टीम के गठन के बाद इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा।

इसी सिलसिले में भाजपा की सहयोगी पार्टियों—सुभासपा और निषाद पार्टी—के प्रमुखों ने दिल्ली में भाजपा के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की। उन्होंने राज्य के मौजूदा सियासी हालात पर चर्चा करते हुए सीट बंटवारे की बात जल्द शुरू करने की मांग की। सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर और निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद ने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से मिलकर अपनी बात रखी, जिस पर उन्हें आश्वासन मिला है कि इसी महीने के आखिरी तक सीटों पर चर्चा शुरू हो जाएगी। भाजपा भी चाहती है कि चुनाव की तैयारियां समय रहते पूरी कर ली जाएं।

भाजपा संगठन में बड़े बदलाव और नई टीम की तैयारी

उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी जल्द ही अपनी नई टीम का ऐलान करने वाले हैं। सांगठनिक फेरबदल को लेकर प्रदेश अध्यक्ष और संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह की केंद्रीय नेतृत्व के साथ बैठक हो चुकी है। सूत्रों के अनुसार, छह क्षेत्रीय अध्यक्षों के चयन में गोरखपुर और वाराणसी को लेकर जो पेच फंसा था, उसे अब सुलझा लिया गया है। इस नई टीम में सभी छह क्षेत्रों के अध्यक्ष बदले जा सकते हैं और विभिन्न मोर्चों में नए चेहरों को जगह मिलेगी। इसके अलावा, प्रदेश कार्यकारिणी में भी करीब 50 फीसदी नए चेहरों को शामिल करने की योजना है।

जुलाई तक फाइनल होगा सीटों का गणित और साझा चुनावी रोडमैप

भाजपा चुनाव प्रचार और रणनीतियों को लेकर अपने सहयोगियों के साथ एक साझा रोडमैप तैयार करना चाहती है। पार्टी का लक्ष्य जुलाई महीने तक सीटों के बंटवारे और चुनावी कैंपेन की रणनीति को पूरी तरह फाइनल करने का है। चूंकि वर्तमान में 21 जून तक पार्टी का 'सेवा पखवाड़ा' चल रहा है और इसके साथ ही केंद्रीय मंत्रिमंडल व संगठन में भी बदलाव होने हैं, इसलिए इन सभी प्रक्रियाओं के पूरे होते ही अगले महीने सहयोगी दलों के साथ बैठकों का दौर शुरू हो जाएगा।

रालोद का बड़ा दांव: पश्चिमी यूपी के बाहर संगठन विस्तार की रणनीति

राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) ने भी आगामी चुनावों को देखते हुए उत्तर प्रदेश में अपने संगठन को नए सिरे से खड़ा करना शुरू कर दिया है। हाल ही में रालोद द्वारा प्रदेश कार्यकारिणी को भंग करने का फैसला केवल एक सामान्य बदलाव नहीं है, बल्कि एनडीए गठबंधन में अपना वजन और सियासी ताकत बढ़ाने की एक सोची-समझी रणनीति है।

रालोद नेतृत्व का मानना है कि गठबंधन की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाए रखने के लिए सिर्फ पुरानी विरासत काफी नहीं है, बल्कि जमीन पर मजबूत संगठन का होना भी जरूरी है। पार्टी अब जाट और किसान राजनीति के पारंपरिक दायरे से बाहर निकलकर अवध, बुंदेलखंड और पूर्वांचल जैसे नए इलाकों में अपना आधार मजबूत करना चाहती है। दरअसल, कई जिलों में संगठन की ढीली कार्यप्रणाली और सदस्यता अभियान में लापरवाही को देखते हुए नेतृत्व ने यह कड़ा कदम उठाया है ताकि चुनाव से पहले पूरी पार्टी को एक्टिव किया जा सके।