शुभेंदु अधिकारी के गढ़ में सियासी ड्रामा: ममता खेमे की उम्मीदवार का नाम वापसी और नया मोड़

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नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की महत्वपूर्ण नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले आगामी उपचुनाव को लेकर राज्य की सियासत पूरी तरह गर्मा गई है। आगामी 6 अक्टूबर को होने वाले इस उपचुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के बीच सरगर्मी अपने चरम पर है, जहां कई नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिले हैं।

नंदीग्राम उपचुनाव का राजनीतिक समीकरण

नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के राजनीतिक सफर में विशेष महत्व रखती है। वर्ष 2021 के ऐतिहासिक विधानसभा चुनाव में उन्होंने यहीं से ममता बनर्जी को मात दी थी। इसके बाद 2026 के चुनावों में उन्होंने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी, लेकिन बाद में भवानीपुर सीट अपने पास रखकर नंदीग्राम सीट से इस्तीफा दे दिया था, जिसके चलते अब यहां उपचुनाव कराया जा रहा है। हालांकि, इस बार शुभेंदु अधिकारी खुद मैदान में नहीं हैं, बल्कि भाजपा ने उनके दिवंगत पूर्व निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की माता हसीरानी रथ को अपना उम्मीदवार बनाया है।

उम्मीदवारों के नाम वापसी और नाटकीय गिरफ्तारियां

इस उपचुनाव से पहले राजनीतिक घटनाक्रम में भारी उथल-पुथल देखने को मिली है। ममता बनर्जी खेमे की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अचानक अपना नामांकन वापस ले लिया, जिसके बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया। लेकिन इसके कुछ ही घंटों के भीतर पश्चिम बंगाल पुलिस ने वर्ष 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण आंदोलन से जुड़े एक पुराने हत्या मामले में मिलन प्रधान को गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस और ममता खेमे ने पुलिस की कार्यप्रणाली और समय पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

6 अक्टूबर को मतदान और 9 को आएंगे नतीजे

नंदीग्राम के साथ-साथ रेजीनगर विधानसभा सीट पर भी आगामी 6 अक्टूबर को ही उपचुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे। इस पूरे घटनाक्रम और तीखे राजनीतिक हमलों के बीच दोनों सीटों पर मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है। चुनाव के नतीजे आगामी 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे, जो राज्य के मौजूदा राजनीतिक हालातों पर बड़ा असर डाल सकते हैं।