नई दिल्ली। केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से प्रभावित हजारों किसानों और आदिवासियों का विस्थापन मुद्दा अब राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अपनी जमीन और आजीविका की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे विस्थापितों का समर्थन करते हुए केंद्र और मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी जायज मांगों को लेकर जल सत्याग्रह और भूख हड़ताल कर रहे आदिवासियों के शांतिपूर्ण आंदोलन को पुलिस बल के जरिए कुचला जा रहा है।
राहुल गांधी का आरोप: बिना उचित मुआवजे के छीनी गईं जमीनें
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर प्रभावित आदिवासियों के आंदोलन का एक मार्मिक वीडियो साझा करते हुए कहा कि परियोजना के नाम पर आदिवासियों की पुश्तैनी जमीनें तो छीन ली गईं, लेकिन बदले में उन्हें न तो उचित मुआवजा मिला और न ही सम्मानजनक पुनर्वास की ठोस व्यवस्था की गई। उन्होंने लिखा कि "सत्य और सत्याग्रह, दोनों से मोदी सरकार डरती है।"
"जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों का पहला अधिकार"
कांग्रेस सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि आदिवासी देश के पहले मालिक हैं और जल, जंगल व जमीन पर उनका पुश्तैनी अधिकार है। उन्होंने कहा कि विस्थापितों की मांगें बेहद सीधी और न्यायसंगत हैं—वे केवल सम्मानजनक जीवन और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी इन प्रभावित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है और उन्हें न्याय मिलने तक यह संघर्ष जारी रहेगा।









