बीजेपी कार्यकर्ताओं को तावड़े की नसीहत, स्वागत के पोस्टर नहीं बूथ मजबूत करने पर दें जोर

0
5

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में ताजपोशी के बाद हाल ही में नेताओं के राजधानी आगमन पर लगे भारी-भरकम होर्डिंग्स और सड़क पर उमड़ी भीड़ से चरमराई यातायात व्यवस्था को लेकर केंद्रीय नेतृत्व ने सख्त रुख अपनाया है। इस घटनाक्रम से सबक लेते हुए 5 और 6 सितंबर को अपने पहले आधिकारिक दौरे पर उत्तर प्रदेश आ रहे पार्टी के नए प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। तावड़े ने स्पष्ट कर दिया है कि उनके लखनऊ आगमन पर न तो सड़कें होर्डिंग्स-पोस्टर से पटनी चाहिए और न ही स्वागत के नाम पर सड़कों पर अव्यवस्थित भीड़ जुटाई जानी चाहिए।

‘सड़क का शक्ति प्रदर्शन नहीं, बूथ की मजबूती होगी पैमाना’ – विनोद तावड़े

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने राज्य संगठन के पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं को अपने स्वागत-सत्कार में चमक-दमक से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है।

  • संगठनात्मक काम प्राथमिकता: तावड़े के इस फैसले से साफ संदेश गया है कि उनके इस प्रवास को किसी राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन या भव्य स्वागत समारोह के मंच के रूप में नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर संगठन की तैयारियों और समीक्षा के अवसर के रूप में लिया जाए।

  • बदलती कार्यशैली का संकेत: सामान्य तौर पर वरिष्ठ नेताओं के आगमन पर कार्यकर्ताओं द्वारा शक्ति प्रदर्शन किया जाता है, जिससे आम जनता को यातायात की समस्याओं से जूझना पड़ता है। तावड़े ने इससे दूरी बनाकर साफ कर दिया है कि अब नेताओं का रिपोर्ट कार्ड सड़कों की भीड़ से नहीं, बल्कि बूथों पर उनकी सक्रियता से तय होगा।

मिशन-2027 की चुनावी प्रयोगशाला बनेगा दो दिवसीय दौरा

विनोद तावड़े के इस कड़े रुख को उत्तर प्रदेश में 2027 के आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

  1. कमजोर क्षेत्रों पर खास नजर: पिछले चुनावों में जिन इलाकों या सीटों पर विपक्षी दलों ने सेंधमारी की थी, वहां संगठन को दोबारा सक्रिय करना और पार्टी की पकड़ मजबूत बनाना भाजपा के सामने बड़ी चुनौती है।

  2. कागजी नहीं, जमीनी हिसाब: अपने प्रवास के दौरान तावड़े प्रदेश पदाधिकारियों, विधायकों और प्रमुख कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे। इस दौरान हर विधानसभा क्षेत्र में पार्टी की वास्तविक ताकत और कमजोरी का लेखा-जोखा कागजों के बजाय जमीनी हकीकत के आधार पर लिया जाएगा।

बूथ समितियों और पन्ना प्रमुखों की जवाबदेही तय होगी

दो दिवसीय बैठकों के दौरान भाजपा की सबसे प्रमुख ताकत 'बूथ प्रबंधन' पर विशेष जोर रहेगा। तावड़े के नेतृत्व में होने वाली समीक्षा बैठकों में बूथ समितियों की सक्रियता, पन्ना स्तर तक कार्यकर्ताओं की कार्यप्रणाली, और संगठन व जनप्रतिनिधियों के बीच आपसी तालमेल की पड़ताल होगी। जिन क्षेत्रों में संगठन कमजोर पाया जाएगा, वहां के जिम्मेदार पदाधिकारियों से सीधे सवाल-जवाब किए जाएंगे और बूथ स्तर पर नई जिम्मेदारियां व लक्ष्य तय किए जाएंगे।