कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक उलटफेर देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मचे भारी घमासान के बीच बागी गुट ने पार्टी संस्थापक ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटाकर वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष (चेयरपर्सन) नियुक्त कर दिया है। इसके साथ ही बागी गुट के नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने एक नई 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्य समिति (NWC) की भी घोषणा की है। बागियों ने इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुख्य मार्गदर्शक (मेंटोर) की भूमिका निभाने की अपील की है।
सर्वसम्मति से चुनी गई नई राष्ट्रीय कार्य समिति
कोलकाता के एक निजी होटल में आयोजित तृणमूल कांग्रेस के विशेष सत्र के दौरान प्रतिनिधियों के सर्वसम्मत वोट से इस समानांतर सांगठनिक ढांचे को मंजूरी दी गई। नई कमेटी की घोषणा करते हुए विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि पार्टी के संविधान के अनुसार हर तीन साल में राष्ट्रीय कार्य समिति का पुनर्गठन अनिवार्य है, जिसका पालन नहीं हो रहा था। इस संवैधानिक संकट को दूर करने के लिए नियमों के तहत अरूप रॉय को नया चेयरपर्सन चुना गया है। अरूप रॉय के अलावा इस 30 सदस्यीय समिति में वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है, जिसके बाद अब बहुत जल्द जिला अध्यक्षों की नियुक्ति और जिला कमेटियों का गठन भी किया जाएगा। बागी गुट ने इस पूरे फैसले की आधिकारिक जानकारी चुनाव आयोग को देने की बात कही है।
80 में से 58 विधायकों की बड़ी बगावत
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी के भीतर शुरू हुआ यह संकट अब पार्टी के विभाजन के कगार पर पहुंच गया है। विधानसभा में टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से कम से कम 58 विधायकों ने मौजूदा शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ खुली बगावत कर दी है। इसी बागी गुट ने पहले शोभनदेब चट्टोपाध्याय की जगह ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर अपना समर्थन दिया था, जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने भी मान्यता दे दी थी। अब इस गुट ने सीधे तौर पर संगठन पर अपना दावा ठोकते हुए इसे 'असली टीएमसी' करार दिया है। इस विशेष सत्र के दौरान लगे पोस्टरों और बैनरों से ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की तस्वीरें पूरी तरह नदारद रहीं, जबकि महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ टैगोर और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के चित्र प्रमुखता से लगाए गए थे।
अरूप रॉय और सबीना यास्मीन का बयान
पार्टी के शीर्ष पद पर नियुक्त होने के बाद हावड़ा मध्य के वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय ने अपनी नई भूमिका को लेकर केवल इतना कहा कि वे मिलकर पार्टी कार्यकर्ताओं के हित में "काम करेंगे।" वहीं, बागी गुट की वरिष्ठ विधायक सबीना यास्मीन ने फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि यह निर्णय किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे सदन और बैठक में मौजूद सभी प्रतिनिधियों की राय जानने के बाद सर्वसम्मति से लिया गया है। दूसरी तरफ, ममता बनर्जी के वफादार और पार्टी नेताओं ने इस पूरी बैठक को असंवैधानिक और एक "कॉमेडी शो" बताते हुए खारिज कर दिया है और कहा है कि ममता बनर्जी ही पार्टी की सर्वोच्च नेता बनी रहेंगी।









