नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान आज कार्यवाही की शुरुआत से ही भारी हंगामा देखने को मिला, जिसके चलते पीठासीन अधिकारी एनके प्रेमचंद्रन को लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। विपक्षी दलों द्वारा विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर सदन में जोरदार नारेबाजी की गई, जिससे विधायी कामकाज पर असर पड़ता नजर आया।
दलबदल विरोधी कानून और राम मंदिर चढ़ावे पर तकरार
सत्र की शुरुआत में ही कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने दलबदल विरोधी कानून के ढांचे में संशोधन की मांग को लेकर लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने तर्क दिया कि केवल राजनीतिक और अवसरवादी लाभ के लिए होने वाले दल-बदल पर रोक लगनी चाहिए, हालांकि इस दौरान जनप्रतिनिधियों के वैचारिक और रचनात्मक मतभेद जताने के अधिकार का भी पूरा संरक्षण होना चाहिए। इसके अलावा, कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने राम मंदिर के चढ़ावे में कथित वित्तीय हेराफेरी और गबन के मामलों की सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराए जाने की मांग को लेकर कार्य स्थगन नोटिस दिया, जिसमें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भीतर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
प्रमुख दलों के व्हिप और एनसीपी सांसदों की बैठक
सदन के भीतर बढ़ते राजनीतिक संघर्ष और महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा की संभावनाओं को देखते हुए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपने सभी सदस्यों के लिए सख्त रुख अपनाया है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी ने भी अपने लोकसभा एवं राज्यसभा सांसदों के लिए तीन-लाइन का व्हिप जारी कर सदन में उनकी अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसी बीच, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के सभी सांसद आज प्रधानमंत्री नरेंद्र राष्ट्रीय स्तर के कुछ अहम मुद्दों और नीतिगत प्रस्तावों पर चर्चा के लिए मुलाकात करने वाले हैं।
अहम विधेयक और सरकार की रणनीतिक तैयारियां
मानसून सत्र के इस अंतिम चरण में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संभावित संविधान संशोधन विधेयकों के साथ-साथ विदेशी अंशदान विनियमन (FCRA) संशोधन विधेयक को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है। प्रस्तावित एफसीआरए बिल में संगठनों के पंजीकरण व नवीनीकरण से जुड़े कड़े प्रावधान शामिल हैं, जिस पर विपक्ष तीखा विरोध दर्ज करा सकता है। इन तमाम गतिरोधों के बीच गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सदन में आकर विभिन्न मामलों पर सरकार का पक्ष रखने तथा तीखे सवालों के जवाब देने की पूरी संभावना जताई जा रही है।








