नई दिल्ली: प्रसिद्ध पर्यावरण एवं जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में सुरक्षाकर्मियों के साथ तीखी बहस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल फुटेज में वांगचुक अस्पताल परिसर में सुरक्षा अधिकारियों और कर्मचारियों पर अपनी नाराजगी जताते हुए नजर आ रहे हैं। इस पूरी घटना पर आधिकारिक स्पष्टीकरण देते हुए संबंधित अधिकारियों और अस्पताल प्रशासन ने बताया है कि यह स्थिति उस समय उत्पन्न हुई थी जब वांगचुक बिना औपचारिक अदालती आदेश के अस्पताल से निकलकर मेदांता अस्पताल जाने का प्रयास कर रहे थे।
सुरक्षा कर्मियों से बहस के बाद फर्श पर बैठकर जताया विरोध
सोशल मीडिया और यूट्यूब पर साझा किए गए वीडियो में वांगचुक सुरक्षाकर्मियों पर अनशन के दौरान बेवजह परेशान करने का आरोप लगाते दिखाई दे रहे हैं। तीखी नोकझोंक के दौरान उन्होंने अपनी गिरफ्तारी की मांग करते हुए सुरक्षा व्यवस्था को यातना करार दिया। विरोध को चरम पर ले जाते हुए वांगचुक अस्पताल के फर्श पर ही लेट गए और अपने समर्थकों को पूरी घटना की रिकॉर्डिंग करने का निर्देश दिया। इस दौरान उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो भी सुरक्षाकर्मियों के रवैये पर कड़ा रोष व्यक्त करती नजर आईं।
अदालती आदेश की प्रति न मिलने तक रोकने पर अड़ा रहा प्रशासन
प्रशासनिक अधिकारियों और सफदरजंग अस्पताल प्रबंधन ने बयान जारी कर स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो 21 जुलाई का है। उस दिन दिल्ली हाईकोर्ट में वांगचुक को मेदांता अस्पताल स्थानांतरित करने की बात कही गई थी। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वांगचुक मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तत्काल जाने की जिद कर रहे थे, जबकि अस्पताल को अदालत का लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ था। शाम को जैसे ही लिखित आदेश प्राप्त हुआ, उन्हें तत्काल मेदांता अस्पताल के डॉक्टरों की टीम को सौंप दिया गया था।
अस्पताल में कैदियों जैसा व्यवहार किए जाने का लगाया गंभीर आरोप
अनशन समाप्त करने के बाद जारी अपने विस्तृत वक्तव्य में सोनम वांगचुक ने सफदरजंग अस्पताल में बिताए समय को बेहद दुखद बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि 18 जुलाई को अस्पताल लाए जाने के बाद से ही उनके साथ किसी कैदी जैसा व्यवहार किया गया, जहां उन्हें स्वतंत्र रूप से मिलने-जुलने, मोबाइल या लैपटॉप का उपयोग करने की अनुमति नहीं थी। उन्होंने इस स्थिति की तुलना बेहद दर्दनाक व्यवस्था से करते हुए कहा कि अदालत का आदेश होने के बावजूद उन्हें घंटों तक रोके रखा गया।
आलोचनाओं का जवाब और अनशन समाप्त करने की बताई वजह
अपनी नीयत और समझौतों को लेकर उठ रहे सवालों पर वांगचुक ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि 26 दिनों के कठिन अनशन के बाद उन्होंने प्रदर्शनकारियों को कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए सरकार के लिखित आश्वासन के बाद ही अपना आंदोलन समाप्त किया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उन्हें कोई निजी समझौता करना ही होता तो वे दिल्ली की भीषण गर्मी में 26 दिनों तक लगातार भूखे रहकर अपनी जान जोखिम में क्यों डालते।









