पश्चिम बंगाल के विधानसभा अध्यक्ष को अचानक सीने में दर्द, डॉक्टरों की निगरानी में

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कोलकाता| पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष रथिंद्र बोस को शुक्रवार रात सीने में तेज दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल, उनका पूर्वी कोलकाता में ईस्टर्न मेट्रोपॉलिटन बाईपास के पास स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज चल रहा है। ताजा मेडिकल अपडेट के अनुसार, उनकी स्वास्थ्य स्थिति अब लगभग स्थिर बनी हुई है।

डॉक्टरों की देखरेख में चल रहा है इलाज

विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस ने शुक्रवार को विधानसभा परिसर में गांधी जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर आयोजित दो प्रमुख कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था। इसके अलावा उन्होंने दिन भर के अन्य व्यस्त कार्यक्रमों में भी भाग लिया था। उन सभी कार्यक्रमों से घर लौटने के बाद अचानक उन्हें सीने में तेज दर्द महसूस हुआ। परिजनों ने बिना देरी किए उन्हें तुरंत एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनका त्वरित इलाज शुरू किया गया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, समय पर इलाज मिलने से उनकी शारीरिक स्थिति में सुधार हुआ है और वे डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में हैं।

कौन हैं विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस?

पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद मई के महीने में उन्हें सर्वसम्मति से सदन का नया अध्यक्ष चुना गया था। पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट रथिंद्र बोस, उत्तर बंगाल के किसी भी विधानसभा क्षेत्र से सदन के अध्यक्ष बनने वाले पहले विधायक हैं। वे पहली बार चुनकर विधानसभा पहुंचे हैं और लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े रहे हैं। इसके बाद वे सक्रिय राजनीति में आए और 2026 के विधानसभा चुनावों में कूचबिहार दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार अभिजीत भौमिक को 23,000 से अधिक मतों के अंतर से पराजित किया। रथिंद्र बोस के रूप में लंबे अरसे बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा को ऐसा स्पीकर मिला है जो कानूनी पेशे (वकालत) से ताल्लुक नहीं रखते हैं।

अटलांटा दौरा और बंगाली समुदाय के साथ सार्थक चर्चा

हाल ही में रथिंद्र बोस ने अटलांटा का दौरा किया था, जहां उन्होंने वहां बसे प्रवासी बंगाली समुदाय के साथ पश्चिम बंगाल के आर्थिक विकास, भविष्य की संभावनाओं, निवेश के अवसरों और राज्य के शिक्षा क्षेत्र में सुधार जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की थी। इस दौरान उन्होंने सदन में अधिक सार्थक विधायी बहसों को बढ़ावा देने तथा सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के बीच स्वस्थ लोकतांत्रिक संवाद स्थापित करने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने पर भी अपने विचार साझा किए थे।