बांग्लादेश पर जिनपिंग का बड़ा बयान, तारिक से मुलाकात के बाद भारत पर साधा निशाना

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बीजिंग। दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बांग्लादेश के नवनियुक्त प्रधानमंत्री तारिक रहमान को आश्वस्त किया है कि बीजिंग 'बाहरी ताकतों के हस्तक्षेप को खारिज करने' और अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता व स्वतंत्रता की रक्षा करने में ढाका का पूरी तरह समर्थन करेगा। प्रधानमंत्री तारिक रहमान की राजकीय चीन यात्रा के दौरान आया यह बयान बेहद रणनीतिक माना जा रहा है। यद्यपि इस आधिकारिक वार्ता में सीधे तौर पर किसी भी देश का नाम नहीं लिया गया, परंतु कूटनीतिक गलियारों में इसे स्पष्ट रूप से भारत की ओर एक परोक्ष संकेत के रूप में देखा जा रहा है। ज्ञात हो कि बांग्लादेश के दक्षिणपंथी संगठन और वर्तमान सत्ताधारी दल पूर्ववर्ती शेख हसीना सरकार के समय से ही भारत पर उनके आंतरिक मामलों में अत्यधिक दखल देने का आरोप लगाते रहे हैं। ऐसे में फरवरी 2026 में पदभार ग्रहण करने वाले तारिक रहमान और चीनी राष्ट्रपति के बीच शुक्रवार को हुई यह उच्चस्तरीय मुलाकात ढाका में भारत के पारंपरिक प्रभाव को संतुलित करने की चीन की एक बड़ी कूटनीतिक चाल मानी जा रही है, जिससे इस क्षेत्र में दोनों महाशक्तियों के बीच रस्साकशी और तेज होने के आसार हैं।

अटूट दोस्ताना संबंध और रणनीतिक वार्ता तंत्र पर चीनी प्रतिबद्धता

द्विपक्षीय बैठक के उपरांत चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने विश्वास जताते हुए कहा कि वैश्विक और क्षेत्रीय परिस्थितियां चाहे कितनी भी परिवर्तनशील क्यों न हों, बांग्लादेश के साथ अपने मैत्रीपूर्ण संबंधों को प्रगाढ़ करने की नीति पर चीन हमेशा अडिग रहेगा। उन्होंने चीन को बांग्लादेश का एक अत्यंत विश्वसनीय मित्र, उत्तरदायी पड़ोसी और मजबूत साझेदार के रूप में परिभाषित किया। इस यात्रा के समापन पर जारी किए गए साझा राजनयिक बयान के अनुसार, दोनों राष्ट्र अपने-अपने विदेश मंत्रियों के स्तर पर एक नया रणनीतिक वार्ता तंत्र स्थापित करने तथा भविष्य में '2+2' (विदेश और रक्षा मंत्री स्तर की) वार्ता की संभावनाएं तलाशने पर सहमत हुए हैं। इसके प्रत्युत्तर में बांग्लादेश ने बीजिंग की 'वन-चाइना पॉलिसी' (एक चीन नीति) के प्रति अपना पूर्ण समर्थन दोहराया, जिसके तहत ताइवान को मुख्य भूमि चीन का अभिन्न अंग माना जाता है।

तीस्ता नदी जल प्रबंधन परियोजना में चीन की तकनीकी व वित्तीय भागीदारी

इस महत्वपूर्ण यात्रा का सबसे ठोस और रणनीतिक परिणाम तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और बहाली परियोजना में चीन द्वारा बड़े सहयोग का आधिकारिक वादा है। साझा घोषणापत्र के विधिक विवरण के अनुसार, चीन और बांग्लादेश एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन, हाइड्रोलॉजिकल पूर्वानुमान (बाढ़ की अग्रिम चेतावनी), आपदा न्यूनीकरण, नदी की ड्रेजिंग (गाद सफाई) और संबंधित आधुनिक जल तकनीकों को साझा करने के क्षेत्रों में अपने तकनीकी सहयोग को और अधिक गहरा करेंगे। चीनी पक्ष ने तीस्ता परियोजना के लिए वित्तीय व ढांचागत सहायता प्रदान करने की घोषणा की है, और दोनों देशों के नदी विशेषज्ञों को इस परियोजना के व्यवहार्यता अध्ययन (फीजिबिलिटी स्टडी) तथा संबंधित तकनीकी कार्यों में गति लाने के विशेष निर्देश दिए गए हैं।

त्रिपक्षीय आर्थिक गलियारे का प्रस्ताव और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी का नया रोडमैप

क्षेत्रीय व्यापार और कनेक्टिविटी को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बांग्लादेश, म्यांमार और चीन को आपस में जोड़ने वाले एक विशाल आर्थिक गलियारे (इकोनॉमिक कॉरिडोर) के निर्माण का रणनीतिक प्रस्ताव भी दुनिया के सामने रखा है। बीजिंग द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, चीनी सरकार इस पूरे क्षेत्र में व्यापारिक सुगमता और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 'चीन-म्यांमार-बांग्लादेश इकोनॉमिक कॉरिडोर' के विकास को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस त्रिपक्षीय गलियारे के निर्माण से न केवल चीन की पहुंच बंगाल की खाड़ी के रणनीतिक मुहाने तक और सुगम हो जाएगी, बल्कि यह दक्षिण-पूर्व एशिया के व्यापारिक समीकरणों को भी पूरी तरह बदलने की क्षमता रखता है।