IPL 2026: पहले नंबर पर खत्म करने वाली टीम सबसे ज्यादा बनी चैंपियन, GT के आंकड़े RCB पर भारी

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इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2026) का मौजूदा सीजन अब अपने सबसे रोमांचक और अंतिम पड़ाव पर आ चुका है। लीग स्टेज के सभी मुकाबले खत्म होने के बाद प्लेऑफ का मंच पूरी तरह सज चुका है। इस साल गत विजेता रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर पॉइंट्स टेबल में शीर्ष स्थान हासिल किया है, जबकि गुजरात टाइटंस (GT) की टीम दूसरे पायदान पर रही। इनके अलावा सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) ने तीसरे और राजस्थान रॉयल्स (RR) ने चौथे स्थान के साथ नॉकआउट में प्रवेश किया है। हालांकि आरसीबी ने पूरे सीजन में बेहतरीन निरंतरता दिखाई है, लेकिन गुजरात ने भी सही समय पर लय पकड़कर बाकी टीमों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।

क्रिकेट के इस महाकुंभ में फैंस के बीच यह उत्सुकता हमेशा रहती है कि लीग चरण के बाद अंक तालिका की किस पोजीशन वाली टीम ने सबसे ज्यादा बार चमचमाती ट्रॉफी पर कब्जा जमाया है। यदि हम आईपीएल के इतिहास और पुराने रिकॉर्ड्स को खंगालें, तो एक बेहद चौंकाने वाली कहानी सामने आती है, जो इस बार गुजरात टाइटंस के पक्ष में एक बड़ा मनोवैज्ञानिक फायदा दिखा रही है।

नेट रन रेट के फेर में नंबर-1 बनी आरसीबी

लीग स्टेज की समाप्ति पर एक दिलचस्प स्थिति देखने को मिली जब बेंगलुरु, गुजरात और हैदराबाद तीनों ही टीमों के खाते में समान 18-18 अंक थे। लेकिन बेहतर नेट रन रेट (NRR) होने के कारण आरसीबी ने बाजी मारी और शीर्ष स्थान पर कब्जा किया। बेंगलुरु की इस सफलता में विराट कोहली, कप्तान रजत पाटीदार, जितेश शर्मा, क्रुणाल पांड्या और टिम डेविड की बल्लेबाजी के साथ-साथ भुवनेश्वर कुमार और जोश हेजलवुड की धारदार गेंदबाजी का बड़ा योगदान रहा।

2011 में जब बदला गया नॉकआउट का नियम

आईपीएल के शुरुआती तीन सीजन (2008 से 2010) तक पारंपरिक सेमीफाइनल फॉर्मेट लागू था, जिसमें टॉप-4 की टीमें आपस में भिड़ती थीं और एक हार मिलते ही सफर खत्म हो जाता था। इसके बाद साल 2011 में बीसीसीआई ने मौजूदा प्लेऑफ व्यवस्था की शुरुआत की। इस नियम के तहत शीर्ष दो टीमों को फाइनल का टिकट कटाने के दो मौके मिलते हैं (क्वालिफायर-1 और क्वालिफायर-2), जबकि तीसरे और चौथे नंबर की टीमों के लिए हर मैच 'करो या मरो' जैसा होता है।

नंबर-2 का अनोखा संयोग: आंकड़े दे रहे हैं गवाही

आईपीएल इतिहास का सबसे दिलचस्प विश्लेषण यह है कि साल 2011 के बाद से अंक तालिका में दूसरे स्थान (Position 2) पर रहने वाली टीमों ने सबसे ज्यादा 9 बार खिताब अपने नाम किया है। वहीं नंबर-1 पर रहने वाली टीमें सिर्फ 5 बार ही चैंपियन बन सकी हैं।

लीग चरण की रैंकिंग और खिताबी सफलता का अनुपात:

लीग चरण में स्थानकुल खिताब (2011 से)
पहला स्थान5 बार
दूसरा स्थान9 बार
तीसरा स्थान1 बार
चौथा स्थान0 बार

आईपीएल प्लेऑफ का पूरा इतिहास (2011-2026):

सालपहला स्थानदूसरा स्थानतीसरा स्थानचौथा स्थानचैंपियन
2011RCBCSKMIKKRCSK
2012DDKKRMICSKKKR
2013CSKMIRRSRHMI
2014KXIPKKRCSKMIKKR
2015CSKMIRCBRRMI
2016GLRCBSRHKKRSRH
2017MIRPSSRHKKRMI
2018SRHCSKKKRRRCSK
2019MICSKDCSRHMI
2020MIDCSRHRCBMI
2021DCCSKRCBKKRCSK
2022GTRRLSGRCBGT
2023GTCSKLSGMICSK
2024KKRSRHRRRCBKKR
2025KXIPRCBGTMIRCB
2026RCBGTSRHRR?

गुजरात टाइटंस क्यों दिख रही है मजबूत?

यदि गुजरात की टीम क्वालिफायर-1 का मुकाबला जीतने में सफल रहती है, तो उसे फाइनल में अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम की घरेलू परिस्थितियों का जबर्दस्त फायदा मिलेगा। यह मैदान इस सीजन में गुजरात का अभेद्य किला रहा है, जहां उन्होंने 7 में से 5 मैचों में जीत दर्ज की है। मोहम्मद सिराज, कगिसो रबाडा और प्रसिद्ध कृष्णा की तेज गेंदबाजी तिकड़ी विपक्षी बल्लेबाजों पर लगातार दबाव बना रही है, जबकि मध्य ओवरों में राशिद खान और जेसन होल्डर रन गति को रोककर रखते हैं।

बेंगलुरु की नई ताकत: गेंदबाजी आक्रमण

बीते कई सालों तक आरसीबी की कमजोर कड़ी उसकी गेंदबाजी को माना जाता था, लेकिन आईपीएल 2026 में पासा पूरी तरह पलट चुका है। इस सीजन में बेंगलुरु के गेंदबाजों ने पावरप्ले के दौरान सबसे ज्यादा 27 विकेट चटकाए हैं। भुवनेश्वर कुमार इस सूची में सबसे आगे चल रहे हैं। इसके अलावा, बल्लेबाजी में भी विराट कोहली को मिडिल ऑर्डर से पूरा सहयोग मिल रहा है, जो टीम को और अधिक संतुलित बनाता है।

हैदराबाद और राजस्थान के लिए डगर बेहद कठिन

तीसरे स्थान पर मौजूद सनराइजर्स हैदराबाद को अगर फाइनल तक पहुंचना है, तो उन्हें एलिमिनेटर की कठिन बाधा को पार करना होगा। इतिहास में केवल एक बार ऐसा हुआ है जब किसी टीम ने एलिमिनेटर से सफर शुरू कर ट्रॉफी जीती हो, और वह खुद हैदराबाद ही थी जिसने 2016 में यह कारनामा किया था। दूसरी तरफ, चौथे स्थान पर काबिज राजस्थान रॉयल्स के सामने इतिहास बदलने की चुनौती होगी, क्योंकि आज तक इस पायदान की कोई टीम चैंपियन नहीं बनी है। रियान पराग और उनकी टीम इस असंभव को संभव करने के इरादे से मैदान में उतरेगी।

अब देखना यह है कि क्या आईपीएल के पुराने आंकड़े खुद को दोहराते हैं या इस बार प्लेऑफ की जंग में कोई नया इतिहास लिखा जाता है।