क्यों कहलाते हैं ‘लिटिल मास्टर’? जानिए सुनील गावस्कर के 5 ऐसे रिकॉर्ड जो आज भी हैं अटूट

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भारतीय क्रिकेट इतिहास में जब भी बेजोड़ तकनीक, असीम धैर्य और महान बल्लेबाजी का जिक्र आता है, तो सबसे पहला नाम पूर्व दिग्गज कप्तान सुनील गावस्कर का उभरता है। बिना हेलमेट पहने वेस्टइंडीज के खूंखार और रफ्तार के सौदागर तेज गेंदबाजों की कहर बरपाती गेंदों का डटकर मुकाबला करने वाले 'लिटिल मास्टर' ने अपने सुनहरे करियर में कई ऐसी मिसालें कायम कीं, जो आज भी रिकॉर्ड बुक की शोभा बढ़ा रही हैं। टेस्ट क्रिकेट में ऐतिहासिक 10 हजार रनों का शिखर छूने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बनने से लेकर अपनी पहली ही टेस्ट सीरीज में रनों का अंबार लगाने वाले गावस्कर के कुछ कीर्तिमान ऐसे हैं, जिन्हें सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली जैसे सर्वकालिक महान खिलाड़ी भी छू नहीं सके हैं।

10 हजार रनों का ऐतिहासिक शिखर और डेब्यू सीरीज का महा-रिकॉर्ड

एक दौर ऐसा था जब टेस्ट क्रिकेट में 10,000 रनों के आंकड़े तक पहुंचना किसी सपने जैसा लगता था, मगर सुनील गावस्कर ने इस असंभव को संभव कर दिखाया। उन्होंने मार्च 1987 में पाकिस्तान के खिलाफ मैच के दौरान इस जादुई आंकड़े को पार कर विश्व क्रिकेट में एक नया इतिहास रचा और दुनिया के पहले ऐसे बल्लेबाज बने। इसके साथ ही, उनका एक और सबसे बड़ा कीर्तिमान साल 1970-71 में वेस्टइंडीज के खिलाफ उनकी पहली टेस्ट सीरीज में बना था। अपने पदार्पण दौरे पर उन्होंने महज चार टेस्ट मैचों में 154.80 की अविश्वसनीय औसत से 774 रन कूट डाले थे, जिसमें एक दोहरा शतक (220 रन), चार शतक और तीन अर्धशतक शामिल थे। किसी भी बल्लेबाज द्वारा अपनी डेब्यू टेस्ट सीरीज में बनाए गए सर्वाधिक रनों का यह विश्व रिकॉर्ड पांच दशक बाद आज भी पूरी तरह अटूट है।

सबसे तेज 5000 रन और स्लिप फील्डिंग में बनाया अनोखा कीर्तिमान

गावस्कर की बल्लेबाजी में निरंतरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह आज भी सबसे तेज गति से 5000 टेस्ट रन बनाने वाले भारतीय बल्लेबाज हैं। रफ्तार के इस मामले में उन्होंने सचिन, द्रविड़ और कोहली जैसे दिग्गजों को भी पीछे छोड़ रखा है, जबकि वैश्विक स्तर पर वह इस सूची में चौथे स्थान पर काबिज हैं। बल्लेबाजी के अलावा गावस्कर मैदान पर एक बेहद चुस्त और भरोसेमंद फील्डर भी थे, खासकर स्लिप पोजिशन पर उनकी पकड़ लाजवाब थी। इसी बेहतरीन फील्डिंग के दम पर वह टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में 100 कैच लपकने वाले भारत के पहले गैर-विकेटकीपर खिलाड़ी बने थे। हालांकि बाद में कई भारतीय फील्डरों ने इस संख्या को पार किया, लेकिन इस मुकाम पर सबसे पहले अपना नाम दर्ज कराने का गौरव हमेशा गावस्कर के पास ही रहेगा।

कंगारुओं और कैरेबियाई गेंदबाजों के खिलाफ शतकों का अद्वितीय दबदबा

70 और 80 के दशक में वेस्टइंडीज की पेस बैटरी (मैल्कम मार्शल, जोएल गार्नर, एंडी रॉबर्ट्स और माइकल होल्डिंग) दुनिया भर के बल्लेबाजों के मन में खौफ पैदा करती थी। उस दौर में बिना किसी आधुनिक सुरक्षा उपकरण या हेलमेट के खेलते हुए सुनील गावस्कर ने कैरेबियाई गेंदबाजों के खिलाफ कुल 13 टेस्ट शतक जड़े। वेस्टइंडीज जैसी खतरनाक टीम के खिलाफ किसी भी बल्लेबाज द्वारा लगाए गए सर्वाधिक शतकों का यह विश्व रिकॉर्ड आज भी कोई खिलाड़ी नहीं लांघ पाया है। अपनी लाजवाब टाइमिंग और क्रीज पर घंटों टिके रहने की अद्भुत क्षमता के कारण ही गावस्कर ने क्रिकेट की दुनिया में वो मुकाम हासिल किया, जिसने भारतीय क्रिकेट को विदेशों में भी जीतना और डटना सिखाया।