अरविंद के पास मिले 18 कारतूस, पुलिस के मुताबिक पहले से तैयार था पूरा घटनाक्रम

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आजमगढ़। जनपद के अहरौला थाना क्षेत्र अंतर्गत शंभूपुर गांव में घटित बहुचर्चित हत्याकांड मामले में पुलिस प्रशासन द्वारा कई महत्वपूर्ण खुलासे किए गए हैं। पुलिस अधीक्षक के अनुसार, मुठभेड़ के दौरान मुख्य आरोपी अरविंद के पास से लाइसेंसी रिवॉल्वर, एक टॉर्च तथा उसकी जेब से 18 जिंदा कारतूस बरामद हुए थे। आरोपी को अंदेशा था कि कार्रवाई के दौरान विद्युत आपूर्ति काटी जा सकती है।

प्रशासनिक विवरण के अनुसार, आरोपी के भ्राता सुनील के नाम पर वर्ष 2005 में राइफल तथा 2007 में रिवॉल्वर का लाइसेंस निर्गत हुआ था। वर्ष 2019 में भ्राता के देहांत के पश्चात अरविंद ने रिवॉल्वर का लाइसेंस अपने नाम वरासत दर्ज करवा लिया था और इसी असलहे से उसने वारदात को अंजाम दिया।

सघन कमरे में प्रवेश और सुरक्षात्मक रणनीति

पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार ने प्रेसवार्ता में बताया कि सुरक्षा बलों ने एक सीमित स्थान (10 बाई 15 फीट के कमरे) में प्रवेश के लिए विशेष रणनीति बनाई थी। कमरे के भीतर प्रवेश करते ही आरोपी द्वारा ताबड़तोड़ गोलीबारी की गई, जिससे कमरे में रखी अलमारी पर भी कई गोलियों के निशान बने।

मासूम बच्चों को बंधक बनाने और सुरक्षा का प्रयास

पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्राथमिकता कमरे में बंधक बनाए गए तीन छोटे बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने की थी। स्थितियों की संवेदनशीलता को देखते हुए अयोध्या से आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) को भी सूचित किया गया था। कमरे के भीतर 11 माह की बच्ची के रोने की आवाजें आ रही थीं, जो अचानक बंद हो गई, जिससे किसी अनहोनी की आशंका बढ़ गई थी। पुलिस दल किवाड़ तोड़कर भीतर घुसा और स्थिति को नियंत्रित किया।

घटना के पश्चात मुख्य आरोपी पर आपराधिक मामला दर्ज

शंभूपुर गांव में हुए इस आपराधिक घटनाक्रम में पीड़ित पक्ष के हिमांशु मिश्रा की लिखित शिकायत के आधार पर अहरौला थाना पुलिस ने आरोपी अरविंद के विरुद्ध विभिन्न गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई शुरू की।

धार्मिक अनुष्ठान के दौरान विवाद और गोलीबारी

प्राथमिकी के अनुसार, आछेपुर छितौना निवासी हिमांशु मिश्रा अपने पिता अखिलेश मिश्रा (50 वर्ष) तथा महेंद्र प्रसाद पाठक (55 वर्ष) के साथ अरविंद सिंह के आवास पर गायत्री जप अनुष्ठान कराने गए थे। यह धार्मिक कार्यक्रम अरविंद की पत्नी बबिता सिंह (35 वर्ष) द्वारा आयोजित कराया जा रहा था, जिसमें परिवार के सदस्य भी सम्मिलित थे।

विवाद के उपरांत तीन लोगों की दुखद मृत्यु

पीड़ित के अनुसार, 22 सितंबर की सायं अनुष्ठान के दौरान आरोपी अरविंद ने अचानक विरोध करते हुए अभद्रता शुरू कर दी। पत्नी द्वारा समझाने का प्रयास करने पर आरोपी उग्र हो गया और उसने अपने लाइसेंसी असलहे से अंधाधुंध गोलियां चला दीं। गोली लगने से महेंद्र पाठक, अखिलेश मिश्रा और बबिता सिंह की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई, जबकि हिमांशु मिश्रा सीमा रेखा (बाउंड्री वॉल) फांदकर किसी प्रकार अपनी जान बचाने में सफल रहे।