औरैया: उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के एक बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड के मामले में अदालत ने पूर्व एमएलसी और उनके साथियों को उनके अंजाम तक पहुँचा दिया है। इस सनसनीखेज मामले में न्याय सुनिश्चित करने में फोरेंसिक साक्ष्यों—विशेषकर खून से सनी मिट्टी, 24 फोटोग्राफ्स और 4 वीडियो—ने सबसे निर्णायक भूमिका निभाई। चश्मदीद गवाहों, जिनमें वकील मंजुल चौबे के भाई संजय और मृतका सुधा के भाई आशीष के बयान शामिल हैं, के समक्ष रसूखदार आरोपियों के सभी पैंतरे और झूठी गवाहियाँ धरी की धरी रह गईं। वहीं, बचाव पक्ष लगातार यह साबित करने में जुटा रहा कि यह हत्याएं किसी सुनियोजित साजिश के तहत नहीं बल्कि भीड़ के उपद्रव के दौरान हुईं।
क्या था पूरा मामला?
शहर के मोहल्ला नारायणपुर स्थित पंचमुखी मंदिर परिसर की लगभग एक बीघा जमीन पर समाजवादी पार्टी के तत्कालीन विधान परिषद सदस्य कमलेश पाठक और पूर्व ब्लॉक प्रमुख संतोष पाठक सहित 10 लोगों ने जबरन कब्जा करने का प्रयास किया था। मंदिर के पास ही रहने वाले अधिवक्ता मंजुल चौबे ने इस अवैध कब्जे का कड़ा विरोध किया था।
इसी रंजिश के चलते 15 मार्च 2020 को जब मंजुल के पिता शिवकुमार, उनकी चचेरी बहन सुधा और भाई आशीष परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मंदिर में पूजा-अर्चना कर रहे थे, तभी दबंगों ने वहाँ धावा बोलकर सुधा और अधिवक्ता मंजुल चौबे की गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी थी।
फोरेंसिक साक्ष्य: खून से सनी मिट्टी और कपड़े बने आधार
इस दोहरे हत्याकांड की जाँच के दौरान फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से चचेरे भाई-बहन के खून से सनी मिट्टी, उनके खून से सने कपड़े और दोनों की चप्पलों को बतौर अहम सबूत अपने कब्जे में लिया था। इन सभी साक्ष्यों को अलग-अलग पैकेटों में सुरक्षित सील किया गया था। तत्कालीन विवेचक आलोक कुमार दुबे ने इन्हें विधि विज्ञान प्रयोगशाला (Forensic Lab) जाँच के लिए भेजा था।
प्रयोगशाला की जाँच रिपोर्ट में इस बात की वैज्ञानिक पुष्टि हो गई थी कि घटनास्थल से उठाई गई मिट्टी, कपड़ों और चप्पलों पर मिले खून के छींटे मृतका सुधा और मंजुल चौबे के ही हैं। अदालत ने इन अकाट्य वैज्ञानिक साक्ष्यों को अभियोजन पक्ष का सबसे मजबूत आधार माना।
वीडियो और 24 तस्वीरों ने खोली पोल
घटना के दौरान आसपास के लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो और खींची गई तस्वीरें इस केस में सबसे बड़े गवाह साबित हुए:
वीडियो साक्ष्य: कोर्ट में पेश किए गए चार वीडियो में से एक में कुछ युवक पथराव करते नजर आ रहे हैं। इसी अफरातफरी के बीच पहली गोली चलने पर भीड़ इधर-उधर भागती है और ठीक 10 सेकंड के भीतर दूसरी गोली चलती है। इन वीडियो से यह साफ हो गया कि पूर्व एमएलसी पक्ष के लोग ही हथियारों से लैस होकर मंदिर पहुँचे थे, जबकि वहाँ पूजा कर रहे मंजुल और उनके परिवार के पास कोई हथियार नहीं था। दूसरे वीडियो में ताबड़तोड़ फायरिंग और गाली-गलौज के दृश्य कैद हुए थे।
24 फोटोग्राफ्स की गवाही: पुलिस और स्थानीय लोगों द्वारा मौके पर खींची गई 24 तस्वीरों ने आरोपियों के खिलाफ सबूतों का चक्रव्यूह पूरा किया। इनमें पूर्व एमएलसी लिखी कार की आगे-पीछे की तस्वीरें, संतोष की बुलेट बाइक, एक अन्य बाइक की नंबर प्लेट से छेड़छाड़ के साक्ष्य, स्कॉर्पियो, वैगनआर कार, खून से सनी जमीन, हाथ में डंडे लिए उपद्रवी, और चचेरे भाई-बहनों के शवों की आठ फीट की दूरी पर पड़ी स्थिति दर्शाने वाली तस्वीरें शामिल थीं।
दोषियों को उम्रकैद, वादी ने टेका मत्था
मामले की सुनवाई करते हुए एमपी-एमएलए कोर्ट ने कमलेश पाठक सहित सभी 10 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। फैसला आने के बाद वादी आशीष चौबे और उनके चचेरे भाई संजय चौबे सीधे उसी पंचमुखी मंदिर पहुँचे जहाँ इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया गया था। दोनों ने बजरंगबली के चरणों में मत्था टेककर प्रसाद चढ़ाया। इसके बाद मृतक की माता ने भी परिवार के साथ मंदिर पहुँचकर ईश्वर का धन्यवाद किया।
उधर, कानून-व्यवस्था की स्थिति का जायजा लेने और पीड़ित परिवार का हाल जानने के लिए एडीजी अनुपम कुलशेष्ठ सदर कोतवाली पहुँचे। उन्होंने परिवार से मुलाकात कर सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की और प्रभावी पैरवी करने वाली पुलिस व अभियोजन टीम की सराहना करते हुए उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान किए।









