रायपुर: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय कल यानी 5 जून को राजधानी रायपुर के सिविल लाइंस स्थित न्यू सर्किट हाउस में आयोजित होने वाले एक गरिमामय और विशेष समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस भव्य कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री, 'नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना' के तहत शैक्षणिक सत्र 2025-26 की कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की प्राविण्य सूची (टॉप-10) में अपना परचम लहराने वाले पंजीकृत श्रमिक परिवारों के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को विशेष रूप से सम्मानित करेंगे।
श्रम विभाग में पंजीकृत परिवारों के बच्चों को मिलेगा लाभ
यह ऐतिहासिक सम्मान समारोह छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) द्वारा संचालित बोर्ड परीक्षाओं के परीक्षा परिणामों से जुड़ा है। सत्र 2025-26 की 10वीं और 12वीं की परीक्षा में राज्य स्तर पर शीर्ष 10 में जगह बनाने वाले बच्चों को इस योजना का सीधा लाभ दिया जा रहा है। शिक्षा मंडल ने यह पहले ही साफ कर दिया था कि इस योजना की पात्रता केवल उन्हीं होनहारों को मिलेगी, जिनके माता-पिता श्रम विभाग के अंतर्गत पंजीकृत निर्माण श्रमिक हैं। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा मंडल के सचिव ने 15 मई 2026 को डिजिटल हस्ताक्षर युक्त एक आधिकारिक पत्र जारी कर पूरी रूपरेखा तैयार की थी। विभाग द्वारा इन मेधावी बच्चों की अंतिम सूची भी तैयार कर ली गई है। इस कल्याणकारी कदम से गरीब और मजदूर परिवारों में जश्न का माहौल है और श्रमिक संगठनों का कहना है कि इससे बच्चों में आगे बढ़ने की नई ललक पैदा होगी।
प्रोत्साहन राशि और दोपहिया वाहन के लिए मिलेंगे 2-2 लाख रुपये
इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत मेरिट सूची में आने वाले प्रत्येक टॉपर बच्चे को कुल 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का चेक प्रदान किया जाएगा। इस राशि का वर्गीकरण इस प्रकार किया गया है:
1 लाख रुपये नकद: यह राशि मेधावी छात्र-छात्राओं को उनकी उत्कृष्ट सफलता के लिए नकद प्रोत्साहन (स्कॉलरशिप) के रूप में दी जाएगी, ताकि वे अपनी आगे की उच्च शिक्षा निर्बाध रूप से पूरी कर सकें।
1 लाख रुपये वाहन के लिए: शेष 1 लाख रुपये की राशि बच्चों को कॉलेज या आगे की पढ़ाई के लिए आने-जाने की सुविधा हेतु दोपहिया वाहन (स्कूटी या बाइक) खरीदने के लिए अलग से दी जा रही है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय स्वयं अपने हाथों से इन होनहारों को चेक और प्रशस्ति पत्र सौंपकर उनका हौसला बढ़ाएंगे। सरकार के इस प्रयास से आर्थिक तंगी और संसाधनों के अभाव में दबने वाली प्रतिभाओं को पंख मिलेंगे और यह कदम राज्य के अन्य बच्चों के लिए भी एक बड़ा प्रेरणास्रोत साबित होगा।









