मुंगेर:मुंगेर जिले में मुख्यमंत्री के काफिले के गुजरने के दौरान एक ऐसा वाकया देखने को मिला जिसने वहां मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। मुख्यमंत्री के काफिले का हिस्सा रही श्रम संसाधन विभाग की एक आधिकारिक गाड़ी रास्ते में अचानक तकनीकी खराबी के कारण बंद हो गई। वाहन के रुकते ही हड़कंप मच गया और स्थिति को संभालने के लिए वहां मौजूद पुलिस जवानों को तुरंत सड़क पर उतरना पड़ा। जवानों ने गाड़ी को धक्का देकर चालू करने की पुरजोर कोशिश की, लेकिन काफी मशक्कत के बावजूद वह स्टार्ट नहीं हो सकी।
तारापुर के लोना गांव से उद्घाटन समारोह के बाद हरपुर थाने के लिए रवाना हुआ था काफिला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, तारापुर के लोना गांव स्थित मॉडल स्कूल के उद्घाटन कार्यक्रम को संपन्न कराने के बाद मुख्यमंत्री का काफिला नए हरपुर थाने के उद्घाटन के लिए तेजी से रवाना हुआ था। इसी सफर के दौरान संग्रामपुर के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी निलेश कुमार के इस्तेमाल में आने वाली श्रम संसाधन विभाग की गाड़ी अचानक बीच रास्ते में ही बंद पड़ गई। इस अप्रत्याशित तकनीकी बाधा के कारण काफिले की रफ्तार पर कुछ देर के लिए ब्रेक लग गया और मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
ग्रामीण सड़क से मुख्य मार्ग तक जवानों ने गाड़ी को दूर तक लगाया धक्का
वाहन के अचानक खराब हो जाने के बाद पुलिसकर्मियों ने पहले ग्रामीण सड़क पर ही धक्का लगाकर उसे मुख्य तारापुर-हवेली खड़गपुर मार्ग तक पहुंचाया, ताकि गाड़ी का इंजन किसी तरह चालू हो सके। जवानों ने करीब 100 मीटर की लंबी दूरी तक वाहन को धक्का लगाया, लेकिन फिर भी गाड़ी का इंजन स्टार्ट होने का नाम नहीं लिया। इसके बाद लाचार होकर जवान अन्य सुरक्षा वाहनों और बाइकों की मदद से आगे के सफर के लिए रवाना हुए। इस पूरी घटना के दौरान वाहन के अंदर एक व्यक्ति बैठा नजर आया, हालांकि वह संबंधित अधिकारी थे या कोई अन्य, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है, जबकि चालक लगातार बोनट खोलकर तकनीकी खामी सुधारने में जुटा रहा।
वीआईपी मूवमेंट से पहले गाड़ियों की तकनीकी फिटनेस जांच पर उठने लगे सवाल
इस अनोखी घटना के बाद मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों और राहगीरों के बीच यह मुख्य चर्चा का विषय बन गया कि इतने बड़े वीआईपी मूवमेंट और मुख्यमंत्री के काफिले में शामिल होने से पहले गाड़ियों की तकनीकी जांच और फिटनेस टेस्ट क्यों नहीं कराया जाता। हालांकि, इस पूरे मामले पर अब तक श्रम संसाधन विभाग या फिर जिला प्रशासन की तरफ से कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया या बयान सामने नहीं आया है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर इसे लेकर गोपनीयता बरती जा रही है।









