हिजाब विवाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला, स्कूल ड्रेस कोड में छूट से इनकार

0
4

प्रयागराज: इलाहाबाद उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) ने शैक्षणिक संस्थानों में निर्धारित यूनिफार्म कोड के साथ हिजाब पहनकर प्रवेश की अनुमति मांगने वाली एक छात्रा की याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि जब तक किसी स्कूल की ड्रेस नीति निष्पक्ष, गैर-भेदभावपूर्ण और अनुशासन स्थापित करने के लिए लागू है, तब तक विद्यार्थियों के लिए निर्धारित यूनिफार्म का पालन करना अनिवार्य रहेगा।

धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं है हिजाब: हाईकोर्ट

न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने विभिन्न उच्च न्यायालयों के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए टिप्पणी की कि कक्षा के भीतर हिजाब पहनना इस्लाम धर्म का ऐसा अनिवार्य हिस्सा नहीं है, जिसके बिना कोई व्यक्ति अपने धर्म से बाहर हो जाए।

अदालत ने कहा कि याचिका में ऐसा कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया जो यह सिद्ध कर सके कि स्कूल ड्रेस के ऊपर हिजाब पहनना एक आवश्यक धार्मिक प्रथा है। पीठ ने यह भी साफ किया कि यदि अतीत में स्कूल ने सौहार्द या ढिलाई के कारण हिजाब की अनुमति दी थी, तो यह छात्रा का कोई स्थायी या कानूनी अधिकार नहीं बन जाता।

याची और स्कूल प्रशासन की दलीलें

प्रयागराज के अतरसुइया स्थित एक विद्यालय में कक्षा 11 में प्रवेश लेने वाली छात्रा ने याचिका में तर्क दिया था कि हिजाब पहनना उसके धार्मिक अधिकार, निजता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अंतर्गत आता है। चूंकि वह कक्षा 6 से 10 तक इसी परिधान में पढ़ी है, इसलिए उसे आगे भी छूट दी जानी चाहिए।

इसके विपरीत, स्कूल प्रशासन और प्रतिवादियों के अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा कि:

  • समानता और एकरूपता: विद्यालय में ड्रेस कोड का मुख्य उद्देश्य सभी विद्यार्थियों के बीच समानता लाना है।

  • मौलिक अधिकारों का हनन नहीं: यूनिफार्म नीति से किसी के धर्म को मानने या उसके प्रचार-प्रसार के मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं होता।

  • अनुशासन का पालन: प्रत्येक विद्यार्थी को संस्थान के तय अनुशासन और नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

समान यूनिफार्म से मजबूत होती है धर्मनिरपेक्षता

हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में रेखांकित किया कि शैक्षणिक संस्थानों में एक समान यूनिफार्म लागू करने का मुख्य लक्ष्य सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक असमानताओं को मिटाकर एक धर्मनिरपेक्ष व अनुशासित माहौल तैयार करना है। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि व्यक्तिगत पसंद के आधार पर ड्रेस कोड में बदलाव की अनुमति दी गई, तो यूनिफार्म लागू करने का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा।