बिलासपुर हाई कोर्ट ने नगरपालिका से निगम में ट्रांसफर को बताया अवैध

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बिलासपुर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: नगर पालिका कर्मचारी का नगर निगम में सीधा तबादला अवैध, कोर्ट ने रद्द किया आदेश

बिलासपुर| छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की एकल पीठ ने राज्य सरकार की तबादला नीति पर कड़ी टिप्पणी करते हुए साफ किया है कि नियमों की अनदेखी कर एक संस्था के कर्मचारी को दूसरी अलग प्रशासनिक इकाई में नहीं भेजा जा सकता। जस्टिस पी. पी. साहू की पीठ ने कुम्हारी नगर पालिका से रायपुर नगर निगम में किए गए एक स्थानांतरण को कानून विरुद्ध ठहराते हुए निरस्त कर दिया है।

विवाद की पृष्ठभूमि: तबादला या प्रतिनियुक्ति?

यह कानूनी विवाद कुम्हारी नगर पालिका के मुख्य नगर अधिकारी नेतराम चंद्राकर से जुड़ा है। राज्य सरकार ने 26 दिसंबर 2024 को एक आदेश जारी कर चंद्राकर का तबादला रायपुर नगर निगम में जोन कमिश्नर के पद पर कर दिया था। इस आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता ने अधिवक्ता संदीप दुबे के माध्यम से हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर कर इसे चुनौती दी थी।

अदालत में दी गई प्रमुख कानूनी दलीलें

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दो अलग-अलग अधिनियमों का हवाला देते हुए ठोस तर्क रखे गए:

  • नगर पालिका अधिनियम, 1961 (धारा 86-4): इसके तहत राज्य सरकार के पास केवल एक नगर पालिका से दूसरी नगर पालिका में ही तबादला करने का अधिकार है।

  • नगर निगम अधिनियम, 1956 (धारा 58-5): यह कानून स्पष्ट करता है कि नगर निगम के कर्मचारियों का स्थानांतरण केवल एक निगम से दूसरे निगम में ही किया जा सकता है।

याचिका में दलील दी गई कि यदि सरकार किसी नगर पालिका कर्मचारी की सेवाएं नगर निगम में लेना चाहती है, तो इसका एकमात्र वैधानिक रास्ता 'प्रतिनियुक्ति' (Deputation) है, न कि सीधा 'ट्रांसफर'।

राज्य सरकार के तर्क और कोर्ट की असहमति

सरकार की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि तबादला प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है और कानूनों में ऐसा कोई स्पष्ट प्रतिबंध नहीं है जो इस तरह के ट्रांसफर को रोकता हो। हालांकि, हाई कोर्ट ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने पाया कि जब कानून में स्पष्ट रूप से अलग-अलग प्रावधान दिए गए हैं, तो नियमों के बाहर जाकर की गई कोई भी प्रशासनिक कार्रवाई मान्य नहीं होगी।

हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी: नियमों से ऊपर नहीं प्रशासन

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि:

  1. नगर पालिका और नगर निगम दो भिन्न प्रशासनिक इकाइयां हैं, जिनकी सेवा शर्तें अलग हैं।

  2. किसी भी अधिनियम में यह प्रावधान नहीं है कि नगर पालिका के कर्मचारी का नगर निगम में स्थानांतरण किया जा सकता है।

  3. याचिकाकर्ता की पूर्व में नगर निगम में दी गई सेवाएं 'प्रतिनियुक्ति' के आधार पर थीं, जिसे 'ट्रांसफर' का आधार नहीं बनाया जा सकता।

अंतिम निर्णय और भविष्य के प्रभाव

सभी कानूनी पहलुओं को परखने के बाद हाई कोर्ट ने 26 दिसंबर 2024 के उस आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया, जिसके तहत याचिकाकर्ता का तबादला किया गया था। इस फैसले का दूरगामी असर छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक ढांचे पर पड़ेगा। अब राज्य सरकार को नगरीय निकायों में अधिकारियों की पदस्थापना करते समय कानूनों का बारीकी से पालन करना होगा, अन्यथा उन्हें बार-बार न्यायिक हस्तक्षेप का सामना करना पड़ सकता है।