अवैध निर्माण पर चला बुलडोजर, भिलाई में मदरसा जमींदोज कर खाली कराई जमीन

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भिलाई। भिलाई नगर पालिक निगम ने अवैध कब्जों के खिलाफ एक बेहद सख्त कदम उठाते हुए स्मृति नगर चौकी के अंतर्गत आने वाले उल्हासनगर क्षेत्र में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। यहाँ बिना प्रशासनिक अनुमति के अवैध रूप से निर्मित किए जा रहे एक मदरसे को प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया। सोमवार तड़के सुबह लगभग 4 बजे से ही नगर निगम की टीम और स्थानीय पुलिस बल भारी मुस्तैदी के साथ मौके पर तैनात हो गए थे और विवादित भूखंड पर तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू की गई। अचानक हुई इस अप्रत्याशित कार्रवाई से पूरे इलाके में हड़कंप का माहौल देखा गया।

उच्च न्यायालय के कड़े रुख और आदेश के बाद हुआ एक्शन

प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, उल्हासनगर के इस आरक्षित भूखंड पर लंबे समय से अवैध कब्जा करके मदरसे का निर्माण कार्य कराया जा रहा था। इस पर भिलाई नगर पालिक निगम द्वारा संबंधित पक्ष को कई बार नोटिस जारी कर अतिक्रमण हटाने की हिदायत दी गई थी, लेकिन बार-बार चेतावनी मिलने के बावजूद जगह को खाली नहीं किया गया। इसके बाद यह पूरा विवाद माननीय उच्च न्यायालय की चौखट पर पहुंच गया। अदालत में मामले की गहन सुनवाई होने के बाद कोर्ट ने अवैध निर्माण को हटाने के स्पष्ट निर्देश जारी किए, जिसके अनुपालन में जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस बल ने यह संयुक्त कार्रवाई की।

कब्जा मुक्त हुई जमीन पर गरीबों के लिए बनाए जाएंगे आशियाने

नगर निगम के आला अधिकारियों ने बताया कि जिस जमीन को अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराया गया है, वह शासकीय भूमि मूल रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (गरीबों) के लिए किफायती आवास योजना के तहत आरक्षित की गई थी। इस भूखंड पर अवैध कब्जे की वजह से जनहित की यह महत्वपूर्ण आवासीय योजना लंबे समय से अधर में लटकी हुई थी। अब बुलडोजर की कार्रवाई के बाद इस स्थान पर गरीबों के लिए मकान बनाने के काम में तेजी लाई जाएगी। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आज कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के ऐसे कड़े इंतजाम किए गए थे कि घटना स्थल के एक किलोमीटर के दायरे में आम नागरिकों और सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया था।

प्रशासन की अब तक की सबसे बड़ी और शांतिपूर्ण कार्रवाई

अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ की गई इस मुस्तैदी को भिलाई नगर प्रशासन की अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई माना जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारी पिछले काफी समय से इस जमीन को खाली कराने के लिए माननीय न्यायालय के अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे थे और जैसे ही कोर्ट का आदेश प्राप्त हुआ, वैसे ही बिना किसी देरी के इसे अमलीजामा पहनाया गया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी और कड़े प्रशासनिक नियंत्रण के चलते यह पूरी विध्वंस प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गई और बिना किसी बड़े विरोध के पूरी सरकारी जमीन को दोबारा अपने नियंत्रण में ले लिया गया।